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2022 की Top 5 बढ़िया अच्छी कहानी || सुंदर-सुंदर कहानियां

हर कहानिया जिंदगी के बारे में कुछ न कुछ कहती है और हमें जिंदगी के पहलुओं के बारे में जो किसी के साथ घटित हो चुकी है उनके बारे में कुछ न कुछ बाय KARTI जिन्हे उन कहानियो को अपने समझते है और उन कहानियो को पढ़ने के बाद में उन्हें अपनी जिंदगी में लाने की KOSHISH करते है . आज हम कुछ ऐसी ही कहानियो को आपके PASS में लेकर के आये है जो आपको कुछ नया और UNIK विचार के साथ आपको एक नै विचार का संचार करेगी .

2022 की अच्छी KAHANIYO KE LIST   

1 . ये कहानी उनके लिए जो विश्वास कम करते है || अच्छी कहानी

ये Achi Kahaniya एक बूढ़े आदमी की है जो रोज शहर के गलियों , मुहल्लों और कालोनियों में जाकर के सायकिल में कोयले बेचने का काम करते थे । रोज सायकिल में शुबह निकलते और दोपहर को बेचकर के घर चले जाते । और यदि किसी दिन थोड़े बहुत कोयले बचते थे उनको जुग्गी में रहने वाले गरीब लोगो को दे आते । वह स्वं तो गरीब था लेकिन दुसरो को मदद करने पर उन्हें मन से बहुत शुकुन मिलता था ।

अच्छी कहानी
अच्छी कहानी

बूढ़े आदमी ज्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं था तो अपने पैसो को पाई-पाई के कमाई के पैसे को शहर में  पास के साथ दुकानदार के पास विस्वास से रखते थे । यदि किसी भी प्रकार के सामान लेना हो तो उसी पैसे में से सामान ले के आ जाते थे । बड़े दयालु किसम के दुकानदार सेठ ।

बूढ़े व्यक्ति को न कोई घर वाले मिलने आते थे, न ही कोई खबर लेने के लिए उनके पासआते । हमेशा अकेला रहते , खाना भी स्वं बनाते थे , सारे काम को करते थे ।

जब गांव में रहते थे तो उनके बेटे ने उन्हें झगडे करके,  बूढ़े हो कुछ काम नहीं इस कारण से शहर में अपने बेटे , घर परिवार से दूर शहर में कोयले बेचकर के पेट पालते थे । लेकिन उन्हें पूरा विश्वास था की उनका बेटा उन्हें पूछते हुए जरूर आएंगे और उन्हें घर लेके जायेंगे ।

एक दिन की बात है बूढ़ा आदमी शुबह निकलकर के दोपहर को कोयले बेचकर के , थके हारे , सायकिल को रेंगाते हुए पैदल हाफ्ते हुए आ रहे थे । और पैसे को लेकर के दुकानदार सेठ के गली में जाने वाले ही थे ।

अचानक से पीछे से आवाज सुनाई देता है – बापू ।

बूढ़ा आदमी पीछे सायकिल को खड़ा करके पीछे देखने की कोशिश करता है अचानक से उनके पैरो को कोई पकड़ा है ऐसा महशुश हुआ । बूढ़ा आदमी के थोड़ा कमजोर था तो सिर निचा करके देखता है लेकिन सूरज की  तेज रोशनी और धुंधले पन के कारण कुछ दिखाई नहीं देता है । गमछे से आँखों को फिर से पोछता है फिर देखता है ।

कहता है – कौन हो ?

आवाज सुनाई देता है – मैं आपका बेटा , पहचाना नहीं आपने मुझे ?

( इतने में पैर पकडे हुए व्यक्ति के आँखों से आंसू निकलने लगता है । )

जब आंसू में बून्द उनके पैरो में लगती है तब वह पूरी साफ दृस्टि से देखता है की उसके सामने उनके बेटे उनके पैर को पकड़ के रो रहे थे ।

बूढ़ा आदमी सहजकर के नाराज भाव से पैर को खींचकर के पीछे कर लेता है और उनसे बात भी नहीं करता है और आगे बढ़ने लगता है । ( मानो जैसे उसने उसे पहचान नहीं रहा हो । )

उसका बेटा चुप रहकर के मात्र उसके तरफ देख रहा था । ( इसे देखकर उसके आंसू और थोड़े ज्यादा निकलने लगता है )

बूढ़ा आदमी जब सायकिल लेकर के आगे बढ़ता है तो आगे जाकर के सायकिल के सामने खड़े होकर के रोने लगता है । जैसे-जैसे आगे बढ़ता उसका बेटा हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता और रोने लगता और बूढ़ा आदमी बिना कुछ बोले आगे बढ़ जाता ।

ऐसा दो-तीन बार करने के बाद में बूढ़ा आदमी जोर से गुस्से में पूछता है – क्यों रो रहे हो ?

बेटा अपने बापू को रोते हुए पूरी बात बताते हुए कहता है – बापू आपकी नाती का तबियत बहुत ही ज्यादा ख़राब है उसे इसी शहर के बड़े हॉस्पिटल में भर्ती कराये है । आज चार दिर हो गए है यंहा आये । दो दिन बाद उसका आपरेशन होना है । मैंने अपने बहु के सभी गहने , जेवरात को बेचकर के , कुछ सामानों को बेचकर के 4 लाख ही इकट्ठा हो पाया है । डाक्टर के खर्च 5.5 लाख रूपये बता रहे है । मैं आपके  पता पूछते हुए थक्क चूका था । तब जाके आप मुझे आज मिले हो ।

बूढ़ा आदमी ये सब बातो को सुनकर भाउक सा हो जाता है और उनके भी आँखों से आंसू निकलने लगता है । बेटे से हॉस्पिटल का नाम , पता पूछकर के उसे जाने के लिए कहता है ।

हड़बड़ी में साइकिल में चढ़कर के जोर-जोर से पैडल मारते हुए ये सोचकर की मेरे नाती के लिए कैसे भी करके पैसे इकट्ठा करूँगा । ये सोचकर के हाफ्ते हुए दुकानदार सेठ के पास जाता है ।

बीच रास्ते में जाने के बाद में दुकानदार सेठ के घर पास बहुत सारे लोग उसके घर के पास में इकट्ठा हुए थे  । लोगो से पूछने पर दुकानदार सेठ के स्वर्गवास होने की खबर आते है । इस खबर को सुनकर के बूढ़ा आदमी सन्न हो जाता है उसके पैरो से जमीं खिसक जाती है । और गहरी सोच में डूब जाता है ।

ये सोचते हुए की उनका जमा किया हुआ पैसा मिलेगा की नहीं , उनके बेटे मुझे पैसे देंगे की नहीं , मेरे पैसे पुरे मिलेंगे की नहीं , , यदि मेरा पैसा मुझे वापस नहीं मिला तो मेरे पोती का इलाज नहीं हो पायेगा , मैं किसके पास जाउगा , मेरे तो किसी से पहचान नहीं है , मैं तो सिर्फ सेठ को ही पहचानता था । ऐसे सोचते हुए अपने झोपटी तक चले जाते है ।

रात जो करवटें बदल-बदलकर के तरह-तरह के बातें उनके मन में चलने लगे थे ।

दुकानदार के अंतिम संस्कार के बाद वाले दिन शुबह होते ही उनके घर में चले जाते है । पहले तो उन्हें बहुत शंका था उन्हें उनके पैसे मिलेंगे की नहीं । उसे लगने लगा था की उनका पैसा तो डूब जायेगा । अंदर से शर्मिंदा महशुश करते घर के अंदर चले जाते है ।

उसे थोड़े देर बैठने के बाद में उनके बड़े बेटे के पास अपने पैसे के बारे में पूरी जानकारी देता है । बड़ा लड़का भी अपने पिता जी की तरह ही संस्कारी , दयालु और सेवाभाव वाले स्वाभाव के थे । उन्होंने उनके पैसो को पुरे ईमानदारी के साथ में वापस लौटता है उसे छोटे से दान के रूप में कुछ रूपये भी देता है ।

बूढ़ा आदमी बहुत ही खुश होकर के उनके बड़े बेटे को आशीर्वाद देकर के पैसो को पकड़कर के सायकिल से हॉस्पिटल चले जाते है । पैसो को देकर के अपने पोती को देखने के लिए रुकजाते है ।

सफल आपरेशन होने के बाद में अपने पोती को आशीर्वाद देकर के वापस लौट रहे थे तब उनके बेटे और बहु उनके पैरो में जाकर के रोने लगता है और क्षमा मांगने लगता है और अपनी गलती का अहसास करते हुए अपने बापू/पिता जी को घर जाता है और हसी खुशी के साथ में रहने लगता है ।

 Mortal  Of  The  Story ये छोटी सी कहने हमें कुछ बातें सिखाती है । पहला ये की हमें अपने से बुजुर्ग व्यक्ति को कभी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि परिवार में एक बड़े बुजुर्ग आदमी , सही सलाह देने वाले होने चाहिए जो आपके साथ हमेशा सच्चे साथी और मार्गदर्शक के रूप में काम करते है ।

दूसरा सिख ये है की हमेशा दुसरो के विस्वास को कभी नहीं तोडना चाहिए और हमेशा पूरी लगन मेहनत और लगन के साथ काम करना चाहिए ।

2 . रास्ते जरूर बदले लेकिन मंज़िल एक होने चाहिए || अच्छी कहानी

ये सुंदर-सुंदर कहानियां, है एक लड़की है । लड़की बचपन से ही पढने में कमजोर थी । घर शहर में था लेकिन पारिवारिक इस्थिति थोड़े से ठीक थे । खाने और पेट पालकर के थोड़े बहुत पैसो के बचत के साथ तीन समय के खाने लिए कमा लेते थे ।

बचपन से ही पढ़ने-लिखने में कमजोर थी । घर में माँ-पिता जी पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन अपने बेटी को पढ़ना चाहते थे । जैसे तैसे करके सरकारी स्कूल से 10 वी तक पढाई कर ली आगे की पढाई 10 ने कम  मार्क्स होने के कारण (ART) कला सब्जेक्ट लेकर के 11 वी की पढाई शुरू करती है ।

हस्ते खेलते हुए 11 वी की भी परीक्षा को उत्तीर्ण कर लेती है ।12 वी की बारी आयी क्योंकि 12 वी बोर्ड की परीक्षा होती है । 12 में जैसे-तैसे करके पहली बार में असफल हो जाती है । घर वाले पहली बार है फेल हुई करके कुछ नहीं बोलती है और प्रोत्शाहन देते हुए उसे दोबारा पढ़ने के लिए कहती है।, दूसरी बार भी एग्जाम दिलाई उसमे भी फेल । इसके बाद उनके माता-पिता उन्हें बहुत ज्यादा डाटने के बाद में , तीसरी बार उसे फिर से पड़ने के लिए भेजती है ।

अच्छी कहानी
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उस समय सिर्फ पुस्तक ही रहता था कॉम्पिटिशन बहुत कम रहता था , गाइड , प्रतियोगी नोट्स नहीं होते थे । पुस्तक से सभी प्रश्नो के उत्तर ढूंढ़कर के , नोट्स बना के पढाई होते थे और उसी नोट्स को पढ़कर के पेपर दिलाने जाते थे ।

तीसरी बार बड़ी शर्मिंदा के साथ में स्कूल जाती थी लेकिन उसके टीचर और परिवार वाले समय-समय में #मोटीवेट करते रहते थे और घर में आकर के खूब मेहनत करती इसके बाद एग्जाम के रिजल्ट में 70% मार्क्स के साथ में FRIST डिवीज़न में पास होती है । के 2 बार फेल होने से ज्यादा उसके इस बार के नम्बरो से परिवार वाले , घर वाले बहुत खुश थे ।

12 वी तक तो पढ़ाई कर ली लेकिन उसके बाद आगे क्या करना है कोई अता-पता नहीं था । एक दिन ऐसे ही रेडियो में किसी RJ की  आवाज सुनकर के उसके बाद RJ बनने जिद करने लगी । RJ बनने के लिए पढ़ाई मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिस्म की पढ़ाई करने के लिए अपने शहर से दूर दिल्ली आ गई । दिल्ली में पार्ट टाइम जॉब करते हुए जैसे-तैसे गुजरा करते हुई मास कम्युनिकेशन को पूरा करके अपने शहर वापस आती है ।

शहर में एक मिडिया में रिपोर्टर का काम शुरू करती है ।  एक दिन किसी परिचय वाले ने रेडियो वेकन्सी के बारे में बताता है । इंटरव्यू के लिए जाती है । इक मिनट की ऑडियो रेकार्ड होने के बाद खुश होकर के घर चली आती । दूसरे दिन उसके माँ-पिता जी की आवाज सुनंने के लिए शुबह से शाम तक रेडिओ को लेकर बैठे रहे लेकिन आवाज नहीं आयी ।

2 सालो तक जॉब करने के बाद में घर वाले को लगने लगा था उनकी बेटी की आवाज को नहीं सुन पायेगी , बेटी कभी RJ नहीं बन पायेगी REDIO में काम नहीं कर पायेगी ।  बेटी की भी उम्र हो चली है जैसे-तैसे करके की हाथ पीले करके अपने आप को मुक्त करना चाहते थे लेकिन बेटी की काम की लगन और RJ बनने के जिद को देखकर कुछ नहीं कहते है लेकि एक न एक दिन बेटी को घर से बिदाई  भी तो करना है था ये सोचकर के आस में लगे रहते थे ।

ऐसे ही एक दिन दूसरी बार इंटरव्यू के लिए जाती है । इंटरव्यू देने के लिए बैठती है उनको नाम, पता , एक्सप्रिएंस सभी चीज पूछने के बाद में उसे कागज में लिखा हुआ स्क्रिप्ट देता है । स्क्रिप्ट को पढ़ने के लिए कहती है । थोड़ी डरी , सहमी हुई दबी आवाज में पड़ती है क्योंकि कोई भी नया जगह जाने के बाद में दर लगने लगता है ।

स्क्रिप्ट को पढ़ने के बाद में सामने बैठे हुए व्यक्ति ये कहते हुए  रिजेक्ट कर देती है तुम RJ नहीं बन सकती , तुम्हारा आवाज RJ के सामान नहीं है , तुम कभी भी रेडिओ में काम नहीं कर सकती ।

ये सब सुनके के अंदर जोश पैदा हो गया , जो सीधे दिल को जा लगी और इसको जवाब देने के कोशिश करता है लेकिन चुपचाप सुनकर आ ही रही थी की पीछे से आवाज सुनाई देता है कंहा कंहा से आ जाते है RJ बनने के लिए । 

पहले से के अंदर दिल को उनके कहे हुए बात दिल को चुभ रही थी , उसके बाद ये शब्द उनको और ज्यादा चुभने लगी , सीधे दिल में जा घुसी , पहले से उनके मन में आग जल रही थी उनकी ये बाटे उनके दिल में लगी आग को और भड़का उठी , ज्वाला के प्रतिरोध में अपने आप रोक न सकी अब तो उन्हें और #मोटिव मिल गया उनके द्वारा कही गई बातें RJ बनने के लिए । अपने मन को शांत बातो की अग्नि से चुभकर वंहा से निकलकर आ जाती है ।

वंहा से आकर के पुरे जोश के साथ में घर में JOB के साथ में TV के पीछे आने वाले शब्दों को ज्यादा पढ़ने लगी थी । जॉब के बाद घर में टीवी के साथ में रूम में बंद करके लगातार RJ बनने की प्रैक्टिस करने लगती थी ।

दो-तीन सफ्ताह होने के बाद में आस-पास के लोग जब घर से आवाज बहार सुनाई देती थी लोग उसे पागल कहने लगी थी । घर ऐसा था की यदि कोई जोर से टीवी की आवाज बड़ा जाये तो पडोसी के घर में सुनाई देती थी । इस बीच में कई बार डिमोटिवेट भी हुई लेकिन उसके माता पिता ने उसे फिर से #मोटीवेट करके , प्रेरित करते रहे ।

लगातार 5-6 महीने पूरी लग्न , सिद्दत के साथ प्रैक्टिस करने के बाद में एक दिन मिडिया के JOB करते समय उसके किसी दोस्त ने उन्हें किसी RJ की इंटरव्यू के बारे में बताती है । जॉब करते हुए वंहा पर पहुँचती है ।

वंहा पर कुछ , महिलाय इंटरव्यू के लिए बैठी थी ।  एक दो घंटे तक सभी महिला इंटरव्यू दिला के चली गई लेकिन उसे इंटरव्यू के अंदर बुलाई नहीं गई । लड़की ये देखकर अंदर जाने की कोशिश करती है लेकिन उस समय वह बिन बुलाय मेहमान की तरह गई हुई थी । अंदर जाने नहीं देती है बहार ही उसे रोक लेती है । सभी डॉक्युमेंट दिखने , प्राथना और जिद करने के बाद में इंटरव्यू दिलाती है ।

ये आखरी समय था RJ के इंटरव्यू का जो लड़की के लगातर मेनहत का फल इसी इंटरव्यू में दिखना था । इंटरव्यू के दो दिन बाद रिजल्ट आता है उस रिजल्ट में लड़की के उतने दिनों के मेहनत , उनके RJ बनने के पागलपन सच हो जाता है और लड़की बड़े से REDIO स्टेशन में RJ में अपनी आवाज को लोगो तक पहुँचता है । इसके बाद परिवार वाले , उनके माता-पिता का सपना भी पूरा हो गया ।

 INSPIRATION OF THE STORY –  जिंदगी की बहुत बड़ी बात सीखा जाती है । पहली सिख – की अपनी बेटी को कभी भी काम नहीं समझना चाहिए उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने , कुछ करने का एक मौका जरूर देना चाहिए । इस सुंदर-सुंदर कहानियां, में लड़की के माता पिता उसके लगन को , मेहनत को देखकर के उसे पूरा सहयोग देता है । लड़कियों को भी चाहिए की उनके माता पिता द्वारा दिए गए छूट का सही उपयोग , सही संगती में करे । अपने माता पिता के सपने , उनके मेहनत को , उनके सम्मान को कभी गिरने न दे , उसे शर्मिंदा महशुश न होने दे ।

दूसरी सिख – जिंदगी में सफल होने के लिए हमें रस्ते जरूर बदलने चाहिए लेकिन मंजिल एक होना चाहिए ।

3 . भगवान पर विश्वास कैसे होना चाहिए ? || अच्छी कहानी

ये #story है एक साधु महराज की है । जो भगवान पर बहुत ही ज्यादा विश्वास करते थे । भगवान का बहुत बड़ा भक्त था । साधु महराज लम्बे समय से सोच रहे थे काशी जाये । काशी में जाकर के गंगा की दर्शन , भगवान के मदिरो का दर्शन करे लेकिन जा नहीं पा रहे थे । वे भगवान के बहुत बड़ा भक्त था ।

और वे हमेशा कहता था यदि कोई काम नहीं हो रहा हो तो प्रतीक्षा जरूर करे । भगवान हमारे अधूरे काम को जरूर एक दिन पूरा करेगा , एक दिन जरूर पूरा होगा । उनकी इसी उपदेश ने उन्हें गुरु बना दिया था ।   

एक दिन उन्हें समय मिल गया और मन बनाकर साधु महराज अपने चार आज्ञाकारी शिष्यों के साथ में कांशी के दर्शन के लिए पैदल निकल गए । कुछ पैसे , कुछ सामान , और अपने कपडे , खाने के कुछ सामान के साथ में अपने शिष्यों के साथ में चले गए ।

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उठते-बैठते रात में कंही विश्राम करते हुए 3 दिन में अपने शिष्यों के साथ में कांशी पहुंचे ।

जब वे कांशी पहुंचे तो शाम होने वाला था । उनके कुछ समय बाद घने काले बदल उमड़ गए । मानों स्वागत कर रहे हो । शाम को जब गंगा घाट में गंगा के दर्शन के लिए पहुंचे कुछ देर बाद देखते ही देखते बारिश होने लगी । साधु महराज गंगा घाट से वापस नहीं आ सके इतनी ज्यादा बारिश होने लगी ।

बारिश गिरते-गिरते रात के 10 बजे तक गिरते रहे जब बारिश कम हुई तो साधु महराज चार शिष्यों के साथ रात में सामने के घर के पास आकर के रुक गए । उस समय रात के 10 बज चुके थे । 

दूर से पैदल यात्रा करके आने से साधु महराज और उनके शिष्यों के हाथ-पैर , शरीर में थकान होने लगा था और ऊपर से बारिश उसके थकान को और बढ़ा दिया था। साधु महराज अपने शिष्यों के साथ में उस घर के सामने विश्राम करने के रुक गए । रात में जब उनके शिष्यों को और साधु महराज को भूख लगने लगी ।

साधु महराज पैसे निकालने के लिए अपने पोटली को खोलते है तो उमसे मात्रा 8 रूपये था ।  8 रुपयों से पांच लोगो का भूख नहीं मिटाया जा सकता था । रात के11 बजे का समय था कोई दुकान भी खुला नहीं था ।

लेकिन कैसे भी करके साधु महराज आश्वाशन देते है की कोई न कोई उनकी मदद जरूर करेगा , ऊपर वाले ने के यंहा देर है अंधेर नहीं ऊपर वाले के दुआ से हम यंहा गंगा के दर्शन करने के लिए आये है , ऊपर वाले हमारे आज के लिए कुछ न कुछ जरूर करेगा । “

साधु महराज के शिष्य बड़े आज्ञा कारी थे गुरु महराज के बातो को कभी न नहीं कहे थे और रात में पानी को पीकर के भगवान के नाम लेकर सो गए थे ।

रात के 11.30 बजने वाले थे साधु महराज के दो शिष्यों को नींद में थे और दो शिष्यों को नींद नहीं आ रहे थे । उनमे से एक शिष्य को बहुत ज्यादा भूख लगने लगी , उसको भूख से रहा नहीं गया वे साधु महराज के पास गए और कहने लगा – आपने तो कहा था कोई न कोई तो हमारा मदद जरूर करेगा लेकिन रात का इतना समय हो गया अभी तक कोई मदद के लिए नहीं आये , और हमें भूख के कारण नींद भी नहीं आ रहे है ।

साधु महराज फिर समझाते हुए कहते है की – हो सकता है की आज की भगवान की यही इच्छा है की उन्हें आज इस पानी को पीकर ही रात गुजारनी पड़े , और यही आज के लिए हो ।”

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  साधु महराज के शिष्य बड़े ही आज्ञाकारी थे वो साधु महराज के बातो को सुनकर , भगवान का नाम लेकर के सो गए । 

  कुछ मिनट बाद में में सामने वाले घर का दरवाजा खुलता है ।। दरवाजे से एक महिला निकलती है और साधु महराज को आवाज लगाते हुई कहती है – आज हमारे घर में सत्य नारायण जी पूरा हुई है । हमारे परिवार में परम्परा है की कोई भी पूजा के बाद साधु महराज को पहले भोजन कराने का परम्परा है । बारिश के कारण किसी भी साधु महराज के दर्शन नहीं हुआ है तो आप हमारे घर थड़ा सा भोजन जरूर करे ।

साधु महराज को और ज्यादा भगवान पर और ज्यादा विश्वास हो गया । साधु महराज अपने शिष्यों के साथ में भगवान का नाम लेते हुए उनके घर भोजन ग्रहण करते है ।   

 MORTAL OF THE STORY   ये छोटी सी सुंदर-सुंदर कहानियां जिंदगी की बड़ी बात सीखा जाती है । की दोस्तों हमें अपने आप पर पूरा विश्वास होना चाहिए । यदि किसी भी काम पूरा न हो रहा हो तो तो कुछ समय रुककर , उस काम को ठाड़े से समय देकर के अच्छे से और करने की कोशिश करने चाहिए ,

हमें कोशिश करने से कभी कमी नहीं करना चाहिए और एक बात की इस दुनिया में जितने भी लोग हुए वे कोशिश के से ही आगे बड़े है । तो दोस्तों हमें आप में बहुत ही ज्यादा भरोषा और विश्वाश होना चाहिए किसी भी काम को करने के लिए ।

4 . कीमत पैसो की नहीं कीमत विश्वास की होती है ।। अच्छी कहानी

दोस्तों आज हम आपको एक सच्ची घटना की सुंदर-सुंदर कहानियां बताने वाले है । आइये जानते है इस hindi storyको ।

ये #Achi Kahaniya है गरीब परिवार के आदमी की है जो आँध्रप्रदेश के एक जिले में ( काकीनाडा बीच ) के आसपास रहते थे । घर में अपनी पत्नी और अपनी दो बेटियों के साथ में रहते थे । परिवार छोटा था । ये व्यक्ति परिवार को चलाने के लिए समुद्र तट (काकीनाडा बीच ) में मुगफली बेचने का काम करते थे । मूंगफली बेचकर ही अपने परिवार का , अपना पेट , रोजी-रोटी चलाते थे । ये उनका डेली का काम था । रोज समुद्र तट में जाके लोगो को मूंगफली बेचते थे । उन्ही से अपना पेट पालते थे ।  

नयी कहानी/सच्ची कहानी/अच्छी कहानियाँ
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एक दिन की बात है वह व्यक्ति रोज की तरह मूंगफली बेचने के लिए समुद्र के किनारे आये हुए थे । उस दिन उनके पास में एक व्यक्ति आता है । उनके साथ में उनके दो बच्चे भी थे ।

एक बेटा और बेटी के साथ में मुगफली खरीदने के लिए आये इस व्यक्ति के पास आये । उन्होंने उस मुगफली खरीदने वाले व्यक्ति से 10 रूपये के मूंगफली ख़रीदता है । जब वह पैसे देने के लिए अपने हाथ को जेब में डालता है तो उसके जेब खाली थे । वह अपना पर्स घर में भूल गया था । उन्हें बड़ा अफसोस हुआ की उनके पास देने के लिए पैसे नहीं थे ।

उस मूंगफली बेचने वाले ने उसकी परेशानी को समझते हुए उसे 10 रूपये के मूंगफली दे दिया । ये सोचकर की आज नहीं तो कल विश्वास के साथ पैसे लौटा देंगे । उनके बच्चे और वे उनके पिता मुगफली खाके चले गए । उनके बच्चो ने उनका फोटो खींच लिया ताकि उस व्यक्ति की पहचान कर सके और उसे उसके 10 रूपये को लौटा सके ।

उस मूंगफली बेचने वाले को नहीं पता था की वे जो उन्हें 10 रूपये के मुगफली दिए थे वे अमेरिका के रहने वाले थे जो भारत घूमने के लिए आये थे । कुछ समय बाद में उनके परिवार वाले अमेरिका में शिफ्ट हो गए । उस व्यक्ति को याद था की उन्हें 10 रूपये मुगफली के लौटने है ।

एक साल नहीं , दो साल नहीं , पुरे 10 साल बाद जब उनके परिवार वाले इंडिया आये तो उन्होंने उस मुगफली वाले के 10 रूपये उन्हें याद था । उनके बेटी और बेटे ने मिलकर के वे उस मूंगफली बेचने वाले को ढूंढ़ने के लिए समुद्र के किनारे गए लेकिन उन्हें वह नहीं मिला । तो उन्होंने आस-पास के लोगो को पूछा , उनके फोटो दिखाए तो उन्हें उस मूंगफली बेचने वाले के बारे में कुछ भी नहीं पता था ।

उन्होंने वंहा के विधायक की मदद से उनकी फोटो की सहारे ढूंढ़ना शुरू किया . काफी लबे समय मस्सकत के बाद में उनकी पहचान हो पाई । जब वह विधायक के साथ में उनके घर में पंहुचा तो उन्होंने देखा की उनका सब कुछ बदल गया है । उसके घर में दो बेटिया थी माँ था लेकिन घर में परिवार का पालन-पोषण करने वाले कोई नहीं थे ।

उनके कुछ साल पहले ही स्वर्गवास हो गयी थी । उनके गुजरने के बाद में उनकी घर का खर्च उनकी माँ ही चला रही थी । ये सब सुनके उन विदेशी परिवार को बड़ा दुःख हुआ ।

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विदेशी परिवार वालो ने उस व्यक्ति के विश्वास को रखते हुए उसे 10 रूपये की जगह पर 25 हजार रूपये उसकी पत्नी को दिए और अपनी विश्वास , ईमानदारी को बनाये रखा । उनकी पत्नी को ये सब पता नहीं था वह बहुत ही अचंभित थे । उन्हें कुछ नहीं पता था की उनके साथ क्या हो गया है ।

 inspirational of the story  दोस्तों ये छोटी सी सुंदर-सुंदर कहानियां हमें जिंदगी की बहुत बड़ी से बड़ी बात को सीखा जाती है । पहला सिख हमें किसी भी गरीब व्यक्ति के ईमानदारी और विश्वास से बढ़कर के कोई चीज नहीं होता ।

भले वह एक समय के रोटी कम खाये लेकिन दूसरे व्यक्ति को कभी भूखा घर से जाने नहीं देता है । कपड़ो से किसी भी व्यक्ति को जज नहीं किया जा सकता इसलिए दोस्तों हमें किसी भी गरीब व्यक्ति के विश्वास और भरोषा को कभी भी नहीं तोडना चाहिए ।

दूसरी सिख यह मिलती है की जिंदगी में हमेशा ईमानदारी के साथ में काम करते रहना चाहिए । जैसा की इस #कहानी में हुआ मूंगफली बेचने वाले के पैसे को बड़े ईमानदारी के साथ में लौटाया भले ही देर हुआ लेकिन कभी उस गरीब परिवार के लिए अंधेर होने नहीं दिया । दोतो भगवन के घर में देर जरूर है लेकिन उनके घर में अंदर नहीं इसलिए ईमानदारी के साथ में काम करते जाइये ।

5 . जब हिम्मत टूटे तो इस कहानी को याद रखना ।। अच्छी कहानी

ये सुंदर-सुंदर कहानियां है एक राजा की है । राजा बड़े ही दान वीर , श्रद्धावान राजा था । जनता उनसे बहुत खुश थे किसी भी प्रकार के शिकायत को बिलकुल सही फैसले लेते थे । अपने मित्र राज्यों से बहुत बढ़िया सम्बन्ध था ।

अनपे मित्र राज्य में आते-जाते , रहते , खाते-पीते साथ ने किसी भी प्रकार की जरुरत होते हो राजा अपने से जितना हो सकते थे उतना करते थे । उसके पडोसी राजा भी उनके लिए जो भी बन पड़ते सोना चाँदी , जेवरात आदि आय दिन कुछ न कुछ भेजते ही रहते थे ।

एक दिन राजा के महल में विदेशी यात्रा के दौरान राजा के पास आता है और खुश दिन तक राजा के महल में रहता है । राजा विदेशी के सेवा करने में किसी प्रकार की कमी नहीं करते । एक मेहमान के सामान विदेशी यात्री की सेवा करता है । वापस जाते समय राजा की मेहमान नवाजी से बहुत ही ज्यादा खुश होकर राजा को एक बहुमूल्य पत्थर देता है ।

नयी कहानी/सच्ची कहानी/अच्छी कहानियाँ
नयी कहानी/सच्ची कहानी/अच्छी कहानियाँ

राजा को ये पत्थर सुन्दर था तो राजा को ये पत्थर पसंद आ जाता है । राजा में मंत्री को आदेश दिया की इस पत्थर से खूबसूरत मूर्ति बनाई जाय इस मूर्ति को कुलदेवी की मंदिर में रखा जाय ।

मंत्री राजा का आदेश पाकर एक मूर्तिकार के पास जाता है ।

मंत्री मूर्तिकार से कहता है इस कीमती बहुमूल्य पत्थर का अच्छे से अच्छा मूर्ति बनाओ । मंत्री कहता राजा का आदेश है इसे कम से कम समय में इस कीमती पत्थर से मूर्ति बनाकर दे दो । इसके बदले तुम्हे मु माँगा दाम देंगे इसके साथ में 100 सोने के मुहरे भी दिया जायेगा ।    ( मंत्री -मूर्तिकार को एक निश्चित समय 20 दिन का देता है और वंहा से वापस आ जाता है ।

मूर्तिकार मंत्री के बातो को सुनकर बहुत ही ज्यादा खुश हो जाता है । मन ही मन सोचने लगता है राजा मुझे इतने मुहरे देंगे । लगातार मन रे बाटे रिपीट होते चले जा रहे थे ।

मूर्तिकार कीमती पत्थर को लेकर अपने सामने के साथ पथ्थर को तरासने लगता है । जैसे ही तोड़ने के लिए औजार मारता है । औजार जोर से उछलकर उड़ जाता है ।

कारीगर दूसरी बार पत्थर में औजार मारता है दोबारा औजार उछलकर उड़ जाता है । मूर्तिकार मूर्ति को फिर से रूप देने के लिए पत्थर में औजार मारता तीसरी बार भी पत्थर से औजार उछलकर दूर चला जाता है । ऐसे करते करते 50 से 60 बार लगातार पत्थर ने औजार मारता है तो औजार पत्थर से उछलकर दूर जा रहा था । 50 – 60 बार लगातार कोशिश करने के बाद भी पत्थर में थोड़े भी खरोच नहीं आये थे ।

मूर्तिकार बहुत ज्यादा परेशान हो जाता है , थक जाता है और सोचने लगता है क्या करु इस पत्थर का अभी तक 50 से 60 बार कोशिश करने के बाद भी कुछ खरोच भी नहीं आयी है । ये सोचकर मूर्तिकार ( शिल्पकार ) मंत्री के पास जाता है और सारी बातो को मंत्री को बताता है । और कहता है इस कीमती पत्थर की मूर्ति नहीं बन सकती ।

मंत्री को कैसे भी करके इस पत्थर से मूर्ति बनानी था ये राजा का आदेश था । इसके बाद राजा किसी दूसरे साधारण से मूर्तिकार के पास जाता है और अपनी बातो को सही सही बताता है । उनको भी कहता है यदि तुम इस पत्थर से खूबसूरत मूर्ति बना लोगे तो तुम्हे भी मुँह माँगा दाम किया जाएगा साथ में 100 सोने के मुहर भी दिया जायेगा ये राजा का आदेश है । उसे भी 10 दिन का समय देता है ।

ये सुनकर दूसरा मूर्तिकार मूर्ति को मूर्त रूप देने की कोशिश करता है । पहली बार जब पत्थर में जोर से औजार मारता है तो औजार दूर जा  उदक कर गिरता है । दूसरे बार भी कोशिश करता है फिर भी औजार दूर जाके उदककर गिर जाता है । लगातार शुबह से शाम तक कोशिश करने के बाद में थोड़ा-थोड़ा पत्थर में निशान बनने लगता है ।

नयी कहानी/सच्ची कहानी/अच्छी कहानियाँ
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दूसरे दिन भी मूर्तिकार शुबह से शाम तक पत्थर को मूर्त रूप देने की कोशिश करता । इस बार पत्थर में बहुत ज्यादा मेहनत के बाद में पत्थर में पहले से अधिक गड्डे बने थे ।

तीसरा दिन भी कोशिश करने के बाद पत्थर को मूर्ति देते शाम हो जाता है और पत्थर में इस दिन भी थोड़ा सा प्रयास करके नया रूप दिया ।

ऐसे लगातार 8 दिनों तक प्रयास करते करते शुबह से शाम तक बहुत कठिन परिश्रम के बाद में 2 दिन समय से पहले पत्थर को तराशकर एक बहुत ही बढ़िया , खुबशुरत , शानदार मूर्ति में बदल देता है ।

9 वे दिन मूर्तिकार मत्री को खबर भेजता है । 10 वे दिन मंत्री आता है मु माँगा दाम और 100 सोने के सिक्के देके चला जाता है ।

 Mortal  Of  The Story  – ये सुंदर-सुंदर कहानियां हमें सिखाती है की कई बार हम बहुत मेहनत करने के बाद भी मंजिल के आकर के फिर भी काम को अधूरा छोड़के ये सोचकर की अब तक नहीं हुआ तो आगे भी नहीं होगा । ये शायद मेरे लिए है ही नहीं जिसे मै कर रहा हु । या सोचने लगते है की ये मेरे किश्मत में ही नहीं है , और मुझसे होगा ही ये सोचते है लेकिन असल में क्या होता है । इस काम को एक बार और कोशिश करने के बाद में वही काम में सफलता मिल जाता है । इस कारण से किसी भी काम को बीच में न रोके जब तक की सफलता हासिल न हो जाये ।


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