घरेलू हिंसा अधिनियम

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  • Post last modified:November 4, 2022

घरेलू हिंसा अधिनियम

जैसे कि हम सभी को पता है कि आए दिन समाज में स्त्री महिलाओं के प्रति जाति पर होने वाले अत्याचारों के वाक्य न्यूज़ पत्रों समाचारों मैं लेकर रोज नए-नए मामले देखने , पढ़ने, सुनने आदि को मिलते हैं। इनमें से सबसे ज्यादा मामला आता है घर में घरेलू हिंसा अधिनियम जो कि एक बेहद ही गंभीर मामला है जो लॉकडाउन में खास तौर पर सबसे ज्यादा इसी तरह के मामले देखने को मिले हैं

इस बात की आश्चर्य है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के मामलों के बारे में भारत की ही नहीं बल्कि विश्व की कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें इस बात पर जरा सा भी खबर नहीं है उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में ठीक तरीके से पता नहीं होने के कारण वह अपने आप की बचा नहीं कर पाते हैं साथ ही साथ वे अपने आपको बार-बार प्रताड़ित करते रहते हैं। तो आइए इन महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने जो घरेलू हिंसा अधिनियम लागू किया है उन्हें जानते हैं :-

घरेलू हिंसा अधिनियम कानून क्या है?

घरेलू हिंसा अधिनियम का निर्माण सन 2005 में किया गया किंतु इसका लागू 26 अक्टूबर 2006 से इसे संपूर्ण भारत में लागू किया गया। घरेलू हिंसा अधिनियम कानून का मुख्य उद्देश्य परिवार के भीतर किसी भी प्रकार की हिंसा की शिकार महिलाओं को संविधान के तहत प्राप्त अधिकारों को अधिक प्रभावशाली और महिलाओं को संरक्षण प्रदान करना है।

महिलाओं को संरक्षण प्रदान करने के लिए सरकार ने घरेलू हिंसा की चार श्रेणियां बनाई हैं जिनका उल्लेख नीचे दिया जा रहा है

शारीरिक हिंसा – घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शारीरिक हिंसा के रूप में किसी महिला या 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ यदि मारपीट, धक्का देना, हाथ या फिर फिर से मारना, किसी वस्तु से मारपीट या कोई भी ऐसा तरीका जिससे किसी महिला अथवा 18 साल की बच्ची के साथ पारीक तकलीफ दे ऐसे हिंसा को शारीरिक हिंसा कहा जाता है।

लैंगिक हिंसा
घरेलू हिंसा अधिनियम की इस श्रेणी में महिलाओं को अश्लील साहित्य या अश्लील तस्वीरों को देखने के लिए बाध्य करना या विवश करना, बलात्कार करना, दुर्व्यवहार करना आदि आते हैं जिससे महिला का मर्यादा आहत हो ।

आर्थिक हिंसा
घरेलू हिंसा अधिनियम की हिंसा में आर्थिक हिंसा के तहत बच्चों की पढ़ाई, खाना कपड़ा और सेहत के लिए धन उपलब्ध ना कराना, किसी भी महिलाओं को रोजगार चलाने से रोकना, महिला द्वारा कमाए जा रहे पैसे का हिसाब उसकी मर्जी के खिलाफ लेना, जैसे बातें आर्थिक हिंसा में शामिल की गई हैं।

मौखिक और भावनात्मक हिंसा
घरेलू हिंसा के इस तहत यह कैटेगरी सबसे ज्यादा फैली हुई हैं कई बार अपराध रह रही महिलाओं को अंदाजा भी नहीं होता है और तीनों में से उसका आत्मसम्मान खत्म हो जाते हैं इसके तहत किसी भी वजह से उसे अपमानित करना, ताने मारना , नीचा दिखाना, उसके चरित्र पर दोषारोपण लगाना,  सादी मर्जी के खिलाफ करना,  जैसी बातें आरती मौखिक हिंसा और भावनात्मक हिंसा के रूप में आते हैं।

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