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छत्तीसगढ़ी कहानी

Top – 2 छत्तीसगढ़ी कहानी

संगवारी हो आप ला झारा झारा जोहर हे हमर ब्लोग के पोस्ट में । संगवारी हो आप मन बार एक ठन अउ लेकर के आ गए हाव मेहा अपन छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ी कहानी {chhattisgarh ki kahani,}  ला आप मन के पास में . संगवारी हो पुरातन काल ले चालत आत हे हमर कहानी सुने के परम्परा हा लेकिन वर्तमान समय में ये कहानी सुने के बेरा हा अब मोबाइल अउ इंटेरनेट हा ले गे ।

अब डोकरी दे अउ डोकरा बाबा के मुँह ले अब कोन्हो सुघ्घर आसान कहानी {cg story} सुने ला नई मिले अउ यही परम्परा हा अब धीरे धीरे ख़तम होत जाट हे अउ हमर संस्कृति ला आगे बढ़ाये के मौका नई मिल पात हे ता संगवारी हो उन्ही कहानी ला आप मन हा अब इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे अब पद सकत हो अउ अपन लइका मन ला सुना सकत हो । चलो संगवारी हो छत्तीसगढ़ी कहानी ला आप मन पड़ो अउ कहानी के आनंद लेव ।

मेकरा अउ चांटी- छत्तीसगढ़ी कहानी

शहर में एक ठन रथे घर जिन्हा एक ठन पहिदे रथे एक ठन मेकरा । अब वो मेकरा हा किरा मकोरा ला पदोय बर कमचिल के पाटा मा जाला बनाये बर शुरू करते . ताकि ओकर खाये पिए के इंतजाम हो सके .

अतकिच मा एक ठन मासी हा भिनभिनात ओकर करा आथे अउ कहिथे – ते जउन मेर जाला बनात हस ओ पाटा ला तो घर मालिक हा येति ऊटी करत रथे । एमे जाला बुनबे ता कोन्हो मतलब नई होही अउ तोर मेहनत हा बेकार हो जाहि .

मेकरा ला मासी के बात हा फब जाथे अब ओहा जाला ला बुने बर ओहा खिड़की में चले जथे ।

खिड़की करा मेकरा हा जाला बुने बर लग जथे अउ आधा जाला ला बन तको डर रथे ।

अतका मा एक ठन छिपकली तीर मा आथे अउ कथे ते ये काबर जाला बुनत हस । ये खिड़की हा तो हरदम बंद रहिथे अउ ये मेरा कोन्हो किरा मकोरा तघो नई आवे अउ तेहा बेकार के मेहनत झन कर ।

अब मेकरा हा आधा मेहनत तो कर डरे रथे फेर छिपकली के बात हा ओला बने लगथे । छिपकली ले बात ला मान के मेकरा हा ओ मेर ले घलो चल देथे ।


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अब तो मेकरा के पेट मा भूख के मारे आगि बरत रथे । बोलत हे कोन मेर जाला बनाये ताकि ओला जल्दी से खाना मिल जाये ।

मेकरा ला एक थम ठेरा तीर हस दीखते अउ ओमेर जाके जाला बनाये के काम चालू कर देथे । अब एक ठन मुछहरा काक्रोच मेकरा के तीर में आथे अउ आ के कथे ते काबर अतीक मेहनत करात हस , ये पठरा मा तोर जाला मा कुछु नई फसही । काबर की एमे कोनो किरा मकोरा आबेच नई करे । 

अब तो मेकरा के जी हा कलबला जाथे अउ बुनते अब कौन मेर जाला बनाये जाये  . मेकरा हा दिन भर बढ़ मेहनत तघो कर रथे फेर बिना खाये-पिए  मासी , छिपकली , मुछहरा काक्रोच के बात ला मान के उदास होक एक थान कोंटा मा बैठ जथे । 

अतकेच मा मेकरा ला एकठन चांटी दीखते । वो चांटी हा अपन ले 4 गुना भारी वाले शक्कर के दाना ला उठाये अपन बिल कोती  घूसरत रथे ।

निराश मेकरा हा चांटी ला कथे तुहीमन हा बने हो जी कम से कम खाये पिए बर कुछु तो मिल जथे । मेहा तो आज दिनभर रगड़ के कमाए हो लेकिन दिनभर में मोर हाथ में कुछु नई लगिस ।

चांटी हा मेकरा के उदाशी ला देख के कथे – का होंगे जी ते निराश काबर होत हस , तोर निराश होय के काय कारण हे ?

मेकरा हा अपन दिनभर के किस्सा ला चांटी करा फरिहा देते . मेकरा के बात ला सुन के चांटी हा हसते ।

चांटी के हसई ला देख के मेकरा हा कथे ले अब ताहू हा हास् ले जी तहु हा लेले maza . 

चांटी हा कथे मित्र तोर संघारा आज तोर सन होहे वइसनेच मोरो संघरा हो गए रिहिस हे । जब मेहा अपन ले दुगुना भार वाले दाना ला अबक-तबक उठा के लेगत रेहेव तब मासी , छिपकली , मुछहरा काक्रोच मन हा मोर ऊपर बढ़ हसिस हे । का कहय ये नानकुन चांटी हा अपन ले दो गुना भार ला उठावत नई हे तभो ले ओला लेगे के फालतू मेहनत करत हे । 

फेर मेहा ओकर मन के बात में ध्यान नई देव आज तेहा देख ले मेहा अपन ले चार गुना वजन ला उठा के लेगत हो ।

चांटी के बात ला सुन के मेकरा ला अपन गलती मा बढ़ पछतवा होथे ।


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संगी हो ये छत्तीसगढ़ी कहानी/किस्सा/{chhattisgarh ki kahani} हा हमरो साथ में भी घटित होथे जब हमन हा कोन्हो कठिन काम ला करे के चालू करथन ता आसपास पड़ोस के  देखइया मन भारी टोकते की ते काबर फालतू के मेहनत करत हास् ये काम हा तोर बस के बात नोहे । अउ आखिर मा अंत में आके ओ काम ला अधेड़ में छोड़ देथन या फिर ओ काम ला करबैच नई करण । असलियत तो ये हरे की कोन्हो भी काम असंभव नई हरे हो सकते ओहा कठिन हो फेर यदि ओला पूरा मन से सकारात्मक होक करे जाए इना ककरो बात में ध्यान दे ता ओ मेहनत हा कभू बेकार नई जावे .

2 . असली मालिक – छत्तीसगढ़ी कहानी

 छत्तीसगढ़ी कहानी
छत्तीसगढ़ी कहानी

तइहा के बेरा के बात आये महात्मा बुद्धा हा अपन चेला मन के साथ बैठे रथे अउ बुद्धा हा अपन चेला मन ला ज्ञान के उपदेश देवत रथे  . अतकेच में एक झन मनखे हां अपन गैया ला जोर से खिचत निकलते . 

बुद्ध जी हा येला देख के अपन चेला मन ले एकठन प्रश्न करथे की तुहर विचार मा कोन हा काकर ले बँधाये हे .

बुद्ध के शिष्य मन हा उत्तर देथे – ये तो स्पस्ट दिखई देत हे  की गैया हा ओ मनखे के डोरी ले बँधाये हे ।

बुद्धा जी हा मुस्काथे अउ फेर पूछथे – अच्छा ये बताओ कौन हा काकर मालिक हरे .

शिष्य मन हा खिलखिलाते अउ कथे ओ मनखे ही तो गैया के मालिक हरे , गैया तो एक ठन पशु हरे ऊहा मनखे के मालिक तो नई हो सके ।

एमा बुद्ध जी हा अंत में एकठन अउ प्रश्न पूछथे – की बताओ की अगर डोरी ला तोड़ दी जाहि ता का होही ।

ता शिष्य मन हा कथे – तब तो वो गैया हा भाग जाहि ।

एमा बुद्ध जी हा कथे अउ फेर ओ मनखे के का होही – चेला मन हा तुरते कथे स्पस्ट हे गुरूजी ओ मनखे हा घलो गैया के पाछू-पाछू भगहि ।

अब जिसने ये चेला मन हा ये उत्तर ला देथे ओ मन ला सब समझ में आ जथे की सही मा कौन हा काकर ले बँधाये हे , अउ कौन काकर मालिक हरे ।

संगी हो ये छत्तीसगढ़ी कहानी/कथा {chhattisgarh ki kahani} हा हमर सुख सुविधा के साधन बार बाद अच्छा कथाक्सा हरे वर्तमान समय में हामान हा सोचथन कार , मोटर सायकिल , कंप्यूटर , मोबाइल अउ ओइसने बहुत से सुख सुविधा वाले जिनिस के मालिक हमन हरण । फेर असल में ये सबो जिनिस से हमन ला का लाभ होते ओतकेच नुकशान तगो हे । हमन हा ये सबो जिनिस के त्तिक आदि हो चुके हन की एकर बिना हमर काम हा नई बन पाए । फेर सच्चाई तो यही हरे फेर ये सब्बो जिनिस के अनुसन्धान होय के पहली हमन हा जियत रहेन स्वस्थ अउ खुशहाल रहें । फेर आज भी हमन हा जियत हन स्वस्थ अउ खुशहाली के कोन्हो गारंटी नई हे ।

एक ठन बात अउ अपमन के जिंदगी में शुश हे लीकन शांति नई हे ता ये समझ लो की आपमन हा सुविधा ला सुख समझे के गलती करत हो ।


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