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Best हरेली तिहार के छत्तीसगढ़ी कथा – छत्तीसगढ़ी कहानी

हरेली तिहार ला छत्तीसगढ़ के मनखे मन है बड़े जोश के साथ में ये तिहार ला मानते अउ हरेली तिहार ला छत्तीसगढ़ के पहली तिहार घलो कहा जाथे । ऐसो हरेली के तिहार है अवइया हे । छत्तीसगढ़ के पहली तिहार छत्तीसगढ़िया मन हा जोश के साथ में मानते अउ हरेली त्यहार ले ही छत्तीसगढ़ के तिहार के शुरुआत घलो हो जाथे ।

एकरे सेती ले छत्तीसगढ़ के जम्मो किसान मन है अपन खेत , गरु गाय , नगर बैला अउ अपन खेती खेती खर के पूजा करथे । लइका मन हा यही तिहार मा बांस के गेड़ी बना के गेड़ी चढ़थे अउ बेटी माई मन ह झूला झूले बर जाथे ।

हरेली तिहार काबर मानते एकर ले जुड़े बहुत सन कथा हे लेकिन हरीली के त्यहार के असली कथा ला बहुत आदमी ह जानत होही । हरेली तिहार मनाय के एक ठन जुन्ना कहानी हे । ता चलो कहानी ला सुरु करथन :-

हरेली तिहार के छत्तीसगढ़ी कथा – छत्तीसगढ़ी कहानी

एक ठन नगर मा एक बढ़ प्रतिष्ठित राजा रथे । अउ राजा के एक जहां बहु रथे तेहै बढ़ रथे खडबी । ओला रंग रंग के चीज खाय के बढ़ लालच ।

एक घाव के बात हरे राजा के हलवाई ह राजा बर एक ले बढ़ के एक मिठाई पेठा बनाये रथे । मिठाई ह जोरदार बने रथे ।

ओकर खुसबू ला सुन के ओखर बहु के मुँह में आ जाते पानी । अब ओहा चुप्पे राजा के कुरिया मा घुसर जथे । अउ सबो बने मिठाई ला उठा धौर्रा खा लेथे ।

कुछ देर में राजा ह अपन कुरिया मा आथे ता का देखथे – राजा देखथे की मिठाई मन ह सब गायब हे । ये देख के तुरते राजा ह महल के सबो झन ला बलाथे ।

अउ राजा ह कथे – मोर कुरिया के मिठाई पीठा ला कोन ह खाय हे ?

एमा राजा के बहु ह हड़बड़ा जथे – अउ कथे – ापमं के कुरिया मा एक बढ़ मोठे के हैवे हे यही ह खाय हे । मेहा अपन आँखि ले देखे हो ।

येला सुन के राजा ह अउ कुछ नै कहाय – अउ सब ला ओमेर ले जाय बेर कही देते ।

थोरकन देर बाद राजा ह अपन मंत्री ला कथे – हमर कुरिया मा जतका मुसवा हे ओला धर के नगर के बाहिर मा फेक दो ।

जब ये बात ह मुसवा ला पता चलथे – की ओखर ऊपर ओखर बहु ह चोरी के इल्जाम लागए हे । ता मुसवा ह राजा के बहु ले बदला ले बर ठान लेथे ।

थोड़ दिन बाद में राजा के पोड़सी महल में सागा आथे । राजा ह ओ सागा ला एक ठान कुरिया मा ठहरा देथे । अउ ओ सागा बर खाय पिय अउ सुथे के व्यवस्था तको उहि कुरिया मा कर देथे ।

मुसवा ला घलो पता चल जथे की महल में एक झन आये हे सगा । अब मुसवा ह राजा के बहु के लुगरा अउ लुहरी का ओ सगा के कुरिया में ले जा के मढ़ा देथे ।

कोन्हो ला कुछु नै पता चल पाय .

फेर 2 , 3 दिन बाद सगा ह अपन नगर निकल जथे । ता सगा कुरिया के साफ सफाई करैया ह लुगरा ला धर के राजा करा आथे अउ कथे – राजा जी मोला लगते ये लुगरा ह अपमान के बहु के हरे ।

राजा ह कथे – ये टोला कान्हा ले मिल गे

एमा नौकर ह कथे – यह सगा के कुरिया में रिहिस हे .

राजा ह ये बात ला सुन के बढ़ गुस्सा हो जथे अउ तुरते अपन मानमर्यादा , प्रतिस्ठा ला बचाय बर । अपन बहु ला बलाथे अउ महल ले बाहिर खेद देथे ।

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अउ कथे तोर बर ये महल में कोई जगह नै हे .

बहु ला कुछु समझ में नै आए – की राजा ह ओला काबर बाहिर निकल देईस ।

जंगल कोठी बहु ह एक झोपडी बना के रहे के चालू कर देथे । थोर दिन बाद में  बहु ला पता चलथे के मुसवा के कारण ही ओकर चरित्र करके राजा ह ओला अपन महल ले निकालिस हे ।

अब बहु ह ठान लेथे की अब तो  मुसवा ला मार के रहु । मुसवा ला मारे के भाव ओकर ऊपर अत्तिक हावी हो गे की ओहा जोन भी जानवर ला घर के देख लेतिस ओहा ओहिस करा मर जतिस ।

बहु ह मन में गुने की महल में जेक ओ मुसवा ला ख़तम कर दिहि . फेर महल के कड़ा पहरा दारी मा ओहा ये काम ला करेच नै पाए . मात्र ओहा अंधियारी अमावस के रात के दिन बस ओहा महल के बिच में जा पाए । काबर की अँधिआय में ओला कोन्हो देख नई पाए ।

फेर राजका के बहु ला मुसवा दिखबेच्च नई करे ओकर बदल में जो भी जानवर ओकर आघू मा आ जाये ओइसने ओहा भसम हो जाए ।

नगर में थोर थोर करके दुरसा जानवर मन के संख्या मन ह कम होय के धर लिस । गागर में अफवा हो जथे की कोन्हो टोनही ह परेतिन हरे जोन हमर जानवर मन ला नजर दीठ लगात हे । तेकरे पाए क सबो मुसवा अउ दूसर जानवर मन ह ख़त्म हो जात हे ।

अब तोर दिन बाद में श्रावण मास के अमावस्या ह आ जथे । राजा के बहु ह  रात के समय महल कोती निकल जथे । अब जैसी ही ओहा लमहल में kusarthe . ओला मुसवा ह दिख जथे । 

राजा के बहु के क्रोध के अंगरा ह अत्तिक बरत रथे की मुसवा ओला जैसे दिखथे । तुरते हो जथे स्वाहा ।

मुसवा के मारे में बाद मr राजा के बहु ला शांति मिलथे  अउ ओहा महल ले चले जथे ।

फेर ये दृस्य ला एक झन पहरे दर ह देख लथे । दूसर दिन पूरा नगर मा hanka पार देथे . की कोन्हो मनखे मन ह अपन पोसवा जानवर मन ला खुटा में बांध अउ अपन अपन घर में ोिला के राखु नई ते जंगलके परेतिन ह आ के ओमान ला भसम कर देहि . 

अब थोर दिन बाद में राजा ह शिकार करे बर जंगल कोती जात रथे । अतकेच मा ओकर बहु ओला दिख जथे ।

रजा के पहरेदार मन ह कथे ये तो उहि परेतिन हर जो नगर के पोसवा गरु गाय मन ला फसम करथे ।

राजा ह फेर अपन बहु ऊपर मा भड़क जथे ।

ओखर बाद में ोखार बहु का रजा अला सबो बात ला बता देथे की ओकर ऊपर झूठ मुहत के लबरी मुसवा ह लगाए रिहिस हे । अब बहु ह राजा ला कथे – अब मेहा ये जंगल में रही के बढ़ अकन कास्ट पीड़ा झेल ले हाव , अब मोर किसम किसम के खाय के लालच का घलो ख़तम हो गे हे ।

अपमान ह मोला अब अब्बड़ पीड़ा मत दो अउ मोला आप लौ .

राजा ह अपन बहु के बात ला सुन के मने मन बढ़ पछताथे  , अब ओहा ओकर बात ला मान  जथे । अउ वाला अपन महल ले जय बर राजी हो जथे .

फेर राजा के पहरि ह ओला परेतिन कहिके नगर में गोहार पार दे रथे  ।

अउ राजा ह एक ठान ऊपर करथे -पहरेदार ला कथे – jen परेतिन ह नगर के गरु गाय ला नजर ढीठ लगात रिहिस हे ते ह matra सावन के महीना में आ सकथे . ता ओकर ले पोसवा गरु गाय मन ला बचाय बर हर श्रावण मास के भोले नाथ के बढ़ धूमधाम पूजा अर्चना करहु . अउ अपन घर के मोहाटी ला गोबर में लिफ़ के छनि में लिम के डारा ला खोच लुहू .

ओ दिन ले नगर वासी मन ह ओइसनेच करथे । ताकि नगर के टोनही मन ह हमर जानवर मन ला हानि झन पहुचाये ।

अब मुसवा के मारे के बाद में राजा के बहु के क्रोध ह शांत हो जा रथे । अब कोन्हो पोसवा जानवर मन ह ओकर देखे ले नई मरे ।

संगी हो यही दिन ले हर अमावस्या के दिन किसान भाई मन ह । अपन गरु गाय ला दवाई खवाथे , अउ घर ला चारो कोती लिफ़ के  निम् के डारा ला खोच देथे । की ओला कोन्हो मसान , परेतिन ओला नजर ढीठ झन लगाए ।

संगी हो ये तो हो गे कहानी के बात फेर रीती रिवाज के पाछू वैगयानिक कारन तको रथे – ता एकर पाछू वैज्ञानिक कारन ये हरे की गरु गाय ला दवाई खवाना , नीम के डारा ला खोचना , अउ घर ला लिपे से बरसात में वाइरस , बैटीरिया के संक्रमण ह ख़तम हो जथे जेकर ले पोसवा जानवर नाब ह सुरक्षित रथे ।

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