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(बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )

बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ | Ringani Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ की पावन माटी में संत महात्मओं ने जन्म लिया । इसी धरा में महान मानवतावादी सामाजिक आंदोलन एवं सामाजिक क्रांति के जनक , सतनाम पंथ के संस्थापक संत गुरु घासीदास जी ने जन्म लिया । बाबा घासीदास जी ने मानवता , समानता , प्रेम, भाई-चारे, विश्व बंधुत्व, विश्व कल्याण , सद्‌भावना , समरसता और सत्य अहिंसा का संदेश मानव कल्याण के लिए दिया था । इस पथ पर चलकर और सत्य का अनुसरण कर सभी मानव अपने परिवार में ही रहकर मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं ।

मंदिर , मस्जिद , गिरजाघर जाने की जरुरत नहीं है । स्वयं को जानों, आत्मा ईश्वर है, अपने शरीर को मंदिर के समान स्वच्छ , सुन्दर रखो । शरीर को सुख मिलेगा तो आत्मा प्रसन्न होगी यही बाबाजी के उपदेशों का सार है ।

बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़

बाबा घासीदास की जी जन्म

छत्तीसगढ़ को संतों महात्माओं का जन्म स्थली माना जाता है। यहां की पावन भूमि में अनेक संत महात्माओं ने इस पावन भूमि पर जन्म लिया। ठीक इसी प्रकार से सन 18 वीं शताब्दी में छत्तीसगढ़ में धर्म सुधार के रूप में सतनाम धर्म के प्रवर्तक गुरु सद्गुरु बाबा घासीदास की जी का जन्म हुआ। उनका जन्म 18 दिसंबर सन 1756 ईसवी को जिला रायपुर तहसील बलौदाबाजार , ग्राम गिरोदपुरी में हुआ (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh ) ।

गुरु घासीदास जी बचपन से ही कुशाग्र, चिंतनशील एकांत प्रिया और धार्मिक स्वभाव तथा सत्संग में रुचि रखने वाले थे। वे खेल खेल में बच्चों को शिक्षा देते थे वह कठिन से कठिन समस्याओं का हल आसानी के साथ निकालकर विपरीत परिस्थितियों से उबार लेते थे ।

गुरु घासीदास जी के पिता का नाम पवित्र दसा सम्पन्न कृषक थे । पवित्रदास से मेदिनीदास , दुकालुदास , सगुनदास , महंगुदास और उनसे घासीदास 5 पुत्र थे ।

बाबाजी की पीढ़ी 1746 से १८५० तक मानी गई है । घासीदास जी का विवाह सिरपुर निवासी संपन्न कृषक अंजोरीदास की पुत्री सफुरा से बचपन में ही हो गया था । जिसके बाद में मृत्यु हो गई थी जिन्हे गुरु घांसी दास ने पुनः ज्ञान प्राप्ति के बाद में जीवित किया था । उनके जीवित किय हुए स्थान को आज सुफ्रा मठ के नाम से जाना जाता है ।

सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु घासीदास एक महामानव थे । जिनमें मानवता प्रेम , दया , क्षमा , करुणा , समता , समाजिक समरसता भरी पड़ी थी । वे सभी को समान समझते थे । प्रकृति झरनों में जीवन का रुप दिखते है ।


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गुरु घासीदास सन्देश 

गुरु घासीदास ने अपने सतनाम ज्ञान प्राप्ति के बाद सतनाम समाज के लोगो को और अन्य समाज के लोगो को उन्होंने कुछ सन्देश दिया जो इस प्रकार से है :-

  1.  सत्य ही ईश्वर है सत्य ही मानव का आभूषण है ।
  2. मांसहार पाप है ।
  3.  सभी जीव समान हैं ।
  4. पशु बलि जीव हत्या है ।
  5. मादक पदार्थ का सेवन मत करों .
  6. मूर्ति पूजा बंद करो इससे जड ता आती है।
  7. गायों को हल से न जोतो ।
  8. दोपहर में हल चलाना अथवा भोजन ले जाना बंद करो
  9.  निराकर सतनाम साहेब का जप करो ।
  10. पर नारी को माता जानों ।
  11. सतनाम जाप करने से मोक्ष प्राप्त होगा ।
  12. सूर्य के समक्ष सुबह शाम सतनाम के जाप करने से मन पवित्र होगा , इत्यादि ।

सतगुरु घासीदास जी के दिव्य संदेश सुनने एवं देखने के लिए हजारों की संखया में भक्त जन , (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh ) में एकत्र होने लगते थे । बाबाजी को देखकर भक्त भाव विभोर हो जाते जय जयकर की आवाज से आकाश गूंजने लगता , जंगल के पशु पक्षी कलरव करके स्वागत करते जन समूह को बाबाजी स्वागत के बाद संबोधित करते और दिव्य सतनाम संदेश देते जय सतनाम के मंत्रों और सतनाम के जयघोष से आकाश गूंज उठता ।

गिरौदपुरी धाम के दर्शनीय स्थल

गिरौदपुरी धाम में प्रतिवर्ष फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष में पंचमी , सष्ठी, सप्तमी को तीन दिवसीय का विशाल मेला लगता है। जहां दूर-दूर पर सतनाम धर्म के अनुयाई लगभग 3 दिन के अवसर में 12 से 15 लाख की संख्या में यहां इकट्ठा होते हैं और वे अपने मनोकामना पूर्ण करने के लिए बाबा जी से प्रार्थना करते हैं। वैसे तो साल भर प्रतिदिन हजारों की संख्या में यहां समाज के लोग और अन्य दर्शनार्थी लोग बाबा जी के दर्शन और उनके आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं।

सतनाम धर्म के अनुयायियों के लिए गिरौदपुरी गांव अब गिरौदपुरी धाम (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh ) के रूप में प्रसिद्ध है हो चुका है।

1. गुरु गद्दी – यह गिरोधपुरी गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर एक पहाड़ी पर स्थित है । इसी स्थान पर औरा ,धौरा वृक्ष के बाबा जी ने यहां आकर के कठोर तपस्या के बाद सतनाम ज्ञान की प्राप्ति हुई थी इसलिए इसे तपोभूमि भी कहा जाता है जिस स्थान में बैठकर के वे ज्ञान प्राप्त किये थे उन्हें गुरु गद्दी कहते है। यहां श्रद्धालुगण गुरु घासीदास जी का मनोकामना पूर्ण करने तथा कष्ट निवारण के लिए यहां प्रार्थना करते हुए उनसे आशीर्वाद मांगते हैं।

2. चरण कुंड – मुख्य गुरु गद्दी तपोभूमि से लगभग दक्षिण दिशा में थोड़ी ही दूर पर एक पहाड़ी से नीचे एक कुंड है जिसे चरण कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि जब गुरु घासीदास जी को तपस्या के बाद सतनाम ज्ञान की प्राप्ति होगी तो उन्होंने यही आ कर के अपने चरण धोए थे इस कारण से इसे चरण कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि इस चरण कुंड के पवित्र जल को पीने से हर प्रकार के कष्ट व्याधि, बाधा ,  रोग और संकट से मुक्ति मिलती हैं।

3. अमृत कुंड – चरण कुंड से लगभग 100 मीटर के आगे के दूरी पर अमृत कुंड स्थित है। कहा जाता है कि गुरु घासीदास जी जीव जंतु और जंगली जानवरों के संकट के निवारण के लिए अपने अलौकिक शक्ति से यहां अमृत जल प्रकट किया था जिसके कारण से इसे आज भी लोग अमृत कुंड के नाम से पुकारते हैं जानते हैं। इसका पवित्र अमृत जल यदि संग्रहित कर के रखे तो यह कई सालों तक खराब नहीं होता और इसके पीने से कई रोगों से छुटकारा प्राप्त होता है।

4. नया जैतखाम- नया जैतखाम छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा निर्मित की गई 54 करोड़ की लागत से बनाई गई सफेद रंग का विशाल जैतखाम है जो लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। यह विश्व का सबसे बड़ा सतनामी जैतखाम है। जिसकी ऊंचाई 77 मीटर अर्थात 283 फीट है जो भारत दिल्ली के कुतुब मीनार से 7 मीटर अधिक पहुंचा है।

6. चरण चिन्ह – चरण चिन्ह गुरु बाबा जी के दोनों पैरों का चिन्ह है। यह पैरों का चिन्ह एक चट्टान पर ऐसे बना है जैसे कि मानो किसी के पैर की छाप गिली मिट्टी पर बनी होती है वह साक्षात अभी भी नजर आता है।

7. बाघ पंजा स्थल – कहां जाता है कि बाबाजी का परीक्षा लेने के लिए सतगुरु साहेब बाबाजी के सामने बाघ के रूप में आए थे और उसी के पदचिन्ह पंजा के निशान एक चट्टान पर बना हुआ है जिसे बाघ पंजा स्थल कहा जाता है।

8. पंच कुंडी – यह गिरौदपुरी तपोभूमि से लगभग 6 किलोमीटर के दूरी पर पंच कुंडी स्थित है। यहां पर पांच अलग-अलग कुंड बने हैं जिनमें श्रद्धालु इस कुंड के पानी का पान करते हैं अर्थात उस पानी को ग्रहण करते हैं।

8. छाता पहाड़ – तपोभूमि से तपोभूमि से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर एक जंगल के बीच बहुत बड़ी शीला है । कहां जाता है कि इसी छाता पहाड़ के नीचे जगत गुरु बाबा गुरु घासीदास द्वारा तब और साधना किया गया था।

9. जन्मभूमि – यह बलोदा बाजार तहसील (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )के गिरोधपुरी नामक ग्राम में गिरोधपुरी बस्ती में गुरु घासीदास का जन्म स्थल है जिसे लोग जन्मभूमि के नाम से इसे पुकारते हैं ।

10. सपुरामट एवं तालाब – गिरौदपुरी से करीब 200 गज की दूरी पर पूर्व दिशा में एक छोटा सा तालाब स्थित है जिसके किनारे में ही सुखराम मठ स्थित है, कहा जाता है कि जब गुरु घासी जी को ज्ञान की प्राप्ति हुई उसके बाद में वह घर वापस आए तब उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी जिसके बाद उन्होंने अपने अलौकिक शक्ति के द्वारा सतनाम सत्यनाम कह कर के अपने मृत पत्नी को अमृत पिला करके पुनः जीवित किया था और उसी की स्मृति याद में इस स्थान को सुफरामठ के नाम से आज भी लोग इन्हें पुकारते हैं।

11. बछिया जीवनदान स्थल
गिरोधपुरी बस्ती से ही लगा हुआ है कहा जाता है कि जब वह ज्ञान की प्राप्ति करके गिरौदपुरी में वापस आया था तो अपनी पत्नी के दुख और अपने पत्नी को पुनः जीवित करने के लिए वह जिद में अड़ा था और लोगों के कहने पर कि वह मरा हुआ व्यक्ति कभी वापस नहीं होता तो इसको दिखाने के लिए उन्होंने एक मरे हुए बछिया को जीवित करके दिखलाया।
और इसी ke स्मृति में बछिया नव स्मारक बनाया गया है।

12. बहेरा डोली
गिरौदपुरी (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )गांव पहुंचने से पहले 1 किलोमीटर की दूरी पर नहरपार ( एक बड़ा तलाब) से पश्चिम दिशा की ओर एक किलोमीटर की दूरी पर एक बहरा डोली अर्थात एक बड़ा खेत है । इसी खेत पर गुरु घासीदास जी ने निगम में बैल और गरियार बैल हलचल आए थे तथा

इसी क्षेत्र में 5 कट्ठा धान की बुवाई करके अच्छी फसल उप जाई जाए थी। इस खेत में पहले “चटिया-मटिया” नामक बीमारी फसल में हो जाती थी जिसके बाद में इस असाध्य बीमारी को उन्होंने खेत से खत्म कर दिया इस कारण से इस क्षेत्र को बहेरा डोली या मटिया डोली के नाम से भी जाना जाता है।


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सतनाम धर्म के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थल

1 . भंडारपुर – तेलासीपुर धाम।
यह रायपुर बलौदा बाजार मार्ग पर खरोरा नामक स्थान से कुछ आगे की दूरी पर स्थित है। कहां जाता है कि गुरु घासीदास जी गिरौदपुरी धाम से होकर के भंडारपुरी धाम चले गए थे। तेलासीपुर धाम में देखने योग्य गुरु परिवार का भव्य महल और भव्य मंदिर प्रमुख दर्शनीय स्थल स्थित है।

2. चेट्टूवा पूरी
कहा जाता है कि गुरु घासीदास के बड़े पुत्र अमर दास जी अपने पिता की भांति ज्ञानी ध्यानी तपस्वी साधक और सत्संगी थे जिन्हें आज जेठवा पुरी धाम के नाम से लोग जानते हैं। जिन की समाधि मंदिर रायपुर में शिवनाथ नदी के किनारे स्थित है। जो एक सतनामी दर्शनीय एवं पवित्र स्थल है जो छत्तीसगढ़ की माटी को पवित्र करता है और लोगों को उनकी मनोकामना की पूर्ति करता है।

कैसे पहुंचे (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )

(बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )
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वायु मार्ग से – यदि कोई गिरौदपुरी धाम के दर्शन या पर्यटन के रूप में देश और विदेश से घूमने के लिए छत्तीसगढ़ गिरौदपुरी धाम आना चाहते हैं तो वह वायु मार्ग से रायपुर निकटतम माना हवाई अड्डा से आ सकते हैं जहां मुंबई कोलकाता दिल्ली हैदराबाद बेंगलुरु विशाखापट्टनम चेन्नई एवं नागपुर वायु मार्ग से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।
यहां आने के बाद आप को बस के माध्यम से या टैक्सी के माध्यम से रोड से होते हुए आप बलोदा बाजार तहसील तक आ सकते हैं उसके बाद आप गिरौदपुरी धाम के दर्शन कर सकते हैं।

रेल मार्ग से – यदि आप रेल मार्ग से बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ आना चाहते हैं तो आप देश के किसी भी कोने में हो आप हावड़ा मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर रायपुर और बिलासपुर के निकट स्थित रेलवे जंक्शन में आप रुक सकते हैं उसके बाद आप गिरौदपुरी धाम के लिए बस ए टैक्सी की सहायता से यहां पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग – यदि आप सड़क मार्ग से या आपके पास प्राइवेट गाड़ी है तो आप रायपुर से 135 किलोमीटर की दूरी पर यह ग्राम स्थित है । रायपुर से होते हुए बलौदाबाजार और कसडोल मैं पहुंचेंगे और वहां से होते हुए आप Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh के साथ में पहुंच सकते हैं।

यदि आप बिलासपुर से शिवरीनारायण होते हुए यहां आना चाहते हैं तो इसकी दूरी मात्र 80 किलोमीटर है। जहां से पहले आप रेल मार्ग में आएंगे उसके बाद आप बस या टैक्सी की सहायता से सड़क मार्ग से आ सकते हैं।

यदि आपके पास में कोई प्राइवेट कार नहीं है तो आप घबराइए मत यदि आप बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ पहुंचना चाहते हैं तो यहां वर्ष भर बस चलती है जिसके माध्यम से आप गुरु घासीदास जी के पावन धाम गिरौदपुरी धाम में पहुंच सकते हैं।


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आवास की व्यवस्था 

यदि आप सोच रहे होंगे कि यहां रहने खाने की व्यवस्था नहीं होगी तो बिल्कुल ऐसा बात नहीं है यदि आप छत्तीसगढ़ में टूरिस्ट या पर्यटक के रूप में यहां आते हैं तो आपको छत्तीसगढ़ में 2 स्टार 3 स्टार और फाइव स्टार तक के होटल आपको मिल जाएगा जहां सर्व सुविधा युक्त भोजन देसी भोजन विदेशी भोजन आपको अपने मनपसंद भोजन यहां उपलब्ध हो जाएंगे साथ ही साथ विश्राम करने के लिए आपको इन होटलों में कम दामों में अच्छा से अच्छा होटल भी यहां उपलब्ध हो जाएगा। तो बिना जीजा के कि आप (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh )सकते हैं।

FAQ बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़

1 . गुरु घासीदास बाबा के कितने पुत्र थे ?
गुरु घासीदास बाबा के चार पुत्र और एक पुत्री हुई , पुत्र अमरदास , बालकदास , आगरदास , अड गडिया दास , पुत्री सुभद्रा बाई थी आदि थे ।

2 . गुरु घासीदास का जन्म कहां हुआ था ?
गुरु घासीदास का जन्म अगहन पुर्णिमा दिन सोमवार १८ दिसम्बर १७५६ ई को एक कृषक परिवार में ग्राम गिरोदपुरी जिला रायपुर तहसील बलौदाबाजार में हुआ था ।

3 . गुरु घासीदास के लिए छत्तीसगढ़ में कौन सा स्थान प्रसिद्ध है ? 
गुरु घासीदास के लिए छत्तीसगढ़ में (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh ) स्थान प्रसिद्ध है।

4 . गुरु घासीदास की मृत्यु कैसे हुई ? 
गुरु घासीदास की मृत्यु समाधि में सन 1850 लिन हो गए थे जिससे उनकी मृत्यु हो गई ।

5 .  गुरु घासीदास के वंशज ?
गुरु घासीदास के वंशज उनके पंच पुत्र अमरदास , बालकदास , आगरदास , अड गडिया दास हुए उसके इसके बाद बालकदास सतनाम को आगे बढ़ाया बालक दस की हत्या हो जाने के बाद में सतनाम को  गुरु अगमदास ने आगे बढ़ाया उसके बाद में  मिनीमाता ने सतनाम पंथ को समाज में आगे बढ़ाया और इसकी स्वर्गवास  ११ अगस्त १९७२ को हुई । माता की मृत्यु के उपरांत समाज नेतृत्वहीन हो गया समाज में शून्यता आ गई, समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक सांस्कृतिक अवमूल्यन हो गया । समाज को इस अवमूल्यन से बचना चाहिये तभी समाज बच पायेगा ।

6 . गिरौदपुरी जैतखाम की ऊंचाई
गिरौदपुरी जैतखाम की ऊंचाई जिसकी ऊंचाई 77 मीटर अर्थात 283 फीट है जो भारत दिल्ली के कुतुब मीनार से 7 मीटर अधिक पहुंचा है।

7 . बिलासपुर से गिरौदपुरी की दूरी
बिलासपुर से शिवरीनारायण होते हुए यहां आना चाहते हैं तो इसकी दूरी मात्र 80 किलोमीटर है

8 . सतनाम पंथ में किसकी पूजा होती है ?
सतनाम पंथ में गुरु घासी की पूजा अर्चना की जाती है साथ में उनके पंथ में जैतखाम की भी पूजा की जाती है ।

9 . छत्तीसगढ़ में सतनामी की जनसंख्या
गुरु घासीदास जी ने सतनाम का गांव -गांव भ्रमण कर उपदेश दिये समग्र सामाजिक आंदोलन चलाये । उनके सामाजिक आंदोलन से जन जागृति और जन चेतना का विकास हुआ इससे जन समूह जुड़ते गये । गुरु घासीदास जी एवं पुत्र अमरदास जी तेलासी गांव में सतनाम संदेश सन्‌ १८४२ ई में दिये थे । गांव के सभी जाति के लोग तेली , साहू , राऊत , अहीर लोधी , कुर्मी लोहार , सोनार , बैगा एवं अन्य जाति के लोग सतनाम धर्म स्वीकार कर सतनामी बन गये । पूरा गांव सतनाम मय हो गया ।

इसके बाद बाबाजी की ख्याति सम्पूर्ण (बाबा गुरु घासीदास मंदिर रिंगनी छत्तीसगढ़ || Baba Guru Ghasidas Mandir Ringani Chhattisgarh) छत्तीसगढ , महाराष्ट्र , उडीसा, बिहार , आसाम, पं बंगाल में फैल गई इनके अनुयायियों की संख्या करोडों में हो गयी और छत्तीसगढ़ में सतनामी की जनसंख्या में लाखो में  है  ।

10 .  सतनामी कौन से धर्म में आते हैं
सतनामी समाज अनुसूचित जाति (SC) में आते है सतनाम धर्म में आते है ।

 

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