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Chhattisgarh Ke Bare Mein Jankari

छत्तीसगढ़ का निबंध || Chhattisgarh Ke Bare Mein Jankari || हमर छत्तीसगढ़ ||

आप सभी को नहीं पता होगा की छत्तीसगढ़ राज्य कब अस्तित्व में आया और छत्तीसगढ़ में कौन कौन से जिले है , तिने खनिज सम्पदा है , कितने बोलिया , कौन कौन से जनजातीय बोलिया है , यंहा की बोलिया है , कौन कौन से भाषा बोली जाती है , छत्तीसगढ़ में कितनी ग्राम है और उसकी व्यवस्था कितनी है आप नहीं जानते है तो आज की इस पोस्ट के माद्यम से हम आपको पुरे डिटेल्स के साथ में छत्तीसगढ़ के परिचय , छत्तीसगढ़ के बारे में जानकारी देने वाले है ।

परिचय – Chhattisgarh Ke Bare Mein Jankari

धान का कटोरा कहे जाने वाला छत्तीसगढ़ अंचल मध्य प्रदेश पुनर्गठित अधिनियम 2000 के अंतर्गत भारत के ह्रदय प्रदेश मध्य प्रदेश के पृथक को करके 1 नवंबर 2000 को भारतीय संघ का 26 वा राज्य बन गया। नवनिर्मित राज्य का मानचित्र देखने पर यह समुद्री घोड़े हिप्पोकेंपस अथवा सी हॉर्स के समान दिखाई पड़ता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर है प्रारंभ से ही छत्तीसगढ़ की अपनी अलग संस्कृति रही है। यद्यपि इस भूभाग में ऐतिहासिक काल में अनेक उथल पुथल हुए हैं किंतु आज भी इसकी भौगोलिक एवं सांस्कृति विशेषता हमें अपने सामान्य जीवन में दिखाई देने को मिलता है और यही इसका मुख्य आधार बनता है छत्तीसगढ़ राज्य को नए राज्य बनाने का।

छत्तीसगढ़ का नामकरण 

छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई इससे पहले यह मध्य प्रदेश का भाग था। यहां के प्राचीन शिलालेख और ताम्रपत्र ओं में वर्णित जानकारी के आधार पर अविभाजित मध्य प्रदेश के दक्षिण पूर्व भाग को छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता था।
शिलालेखों, ताम्रपत्र एवं प्राचीन धर्म ग्रंथों में इस नाम का पहले कभी छत्तीसगढ़ के नाम को उल्लेखित नहीं किया गया है।
फिर भी छत्तीसगढ़ के भूभाग के प्राचीनतम नामो एवं मतों को निम्न शीर्षक में उल्लेखित किया गया है।
पहला नामकरण मत   
दक्षिण कौशल का प्राचीन नाम दक्षिण कौशल ही था। वाल्मीकि कृत रामायण में उत्तर कौशल और दक्षिण कौशल का उल्लेख है। संभवत उत्तर कौशल सरयू नदी के तट पर स्थित था जबकि दक्षिण कोशल विद्यांचल पर्वत माला के दक्षिण में विस्तार के लिए हुए थी। कहा जाता है कि राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या इसी दक्षिण कौशल की राजकुमारी थी। और इसी आधार पर प्राप्त अभिलेखों और प्रस्तुतियों में इस भूभाग के लिए दक्षिण कोसल नाम प्रयुक्त हुआ था।

दूसरा नामकरण मत  – Chhattisgarh Ke Bare Mein
रतनपुर शाखा के कलचुरी शासक जा जले देव के रतनपुर अभिलेख में दक्षिण कौशल का नाम अंकित है।
तीसरा नामकरण मत  – Chhattisgarh Ke Bare Mein
कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम में कौशल और उत्तर कौशल का उल्लेख हुआ है इससे यह स्पष्ट होता है कि कालिदास के युग में भी भारत में अवध को उत्तर को सर और वर्तमान छत्तीसगढ़ को दक्षिण कौशल कहा जाता था।
चौथा नामकरण मत  – Chhattisgarh Ke Bare Mein
गुप्तकालीन इलाहाबाद प्रयाग प्रशस्ति में हरी सेन द्वारा लिखा गया प्रशस्ति में कौशल शब्द का उल्लेख है।
पांचवा नामकरण मत  -Chhattisgarh Ke Bare Mein
महाकौशल प्राचीन पुरातत्व वेदा अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपने पुरातत्विक रिपोर्टर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में छत्तीसगढ़ के लिए महाकौशल शब्द का प्रयोग किया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्राप्त ताम्रपत्र अभिलेखों मुद्राओं तब धार्मिक ग्रंथों mai कहीं भी छत्तीसगढ़ का नाम महाकौशल का प्रयोग नहीं हुआ है।
छठवां नामकरण मत –  About Chhattisgarh In Hindi
राय बहादुर हीरालाल ने छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम चेदिसगढ उल्लेखित किया है उनका यह विचार है कि छत्तीसगढ़ में यदि वंशीय राजाओं का राज्य था।
लेकिन छत्तीसगढ़ के लिए आज तक छत्तीसगढ़ शब्द का नाम का प्रयोग कब कहां और कैसे लाया गया इस संबंध में प्रमाणिक जानकारी का अभाव।

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छत्तीसगढ़ को नामकरण से सम्बंधित प्रयास –

विभिन्न प्रमाणों के आधार पर छत्तीसगढ़ के नामकरण को सिद्ध करने का प्रयास निम्न माध्यमों से किया गया है

साहित्य में – छत्तीसगढ़ का नाम सर्वप्रथम प्रयोग खैरागढ़ के राजा लक्ष्मी निधि राय के काल में उसके दरबारी कवि दलराव ने सन 1984 में किया ।
कवि दल राव  राम की कुछ पंक्तियां
लक्ष्मी निधि राय सुनो चित्र दे , गढ़ छत्तीस में न गढ़ैया रही।
यह पंक्ति जिस काल में लिखा गया था वह सल्तनत काल था और ऐसा माना जाता है कि इस भाग को छत्तीसगढ़ नाम से जाना जाता था।
रतनपुर के कवि गोपाल चंद्र मिश्र द्वारा रचित खूब तमाशा पुस्तक में सन 1686 मैं छत्तीसगढ़ नाम का उल्लेख हुआ था।
रेवाराम के द्वारा 1896 मैं रचित ग्रंथ विक्रम विलास में छत्तीसगढ़ शब्द का प्रयोग किया है –
तिनमे दक्षिण कोशल देसा , जहां हरि औतु केसरी बेसा , ताहु मध्यम छत्तीसगढ़ पावन, पुण्यभूमि सुर मुनिमन भावन।।

शिलालेख में –इसके अलावा छत्तीसगढ़ में प्राप्त सर्वप्रथम शिलालेख का उल्लेख दंतेवाड़ा में आज से 300 वर्ष पहले से भी ज्यादा समय का मिलता है। जिसमें इतिहास विद डॉक्टर रविंद्र नाथ मिश्र ने दंतेवाड़ा के शिलालेख का विवरण करते हुए बताया है कि 31 मार्च 1 1702 को लिखे गए इस शिलालेख को बस्तर क्षेत्र के तल राजा राजगुरु और मैथिली पंडित भगवान मिश्रण लिखा था ।
300 वर्ष पुराना शिलालेख आज भी दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी मंदिर के गर्भ ग्रह मैं बने विशाल कक्ष की दीवार में लगा हुआ है।

एलेग्जेंडर कनिघम के सहयोगी बेलकर ने छत्तीसगढ़ के सर्वेक्षण का कार्य किया था उन्होंने छत्तीसगढ़ नामकरण के संबंध में उनका कहना है कि राजा जरासंध के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में 36 कर्म करो के परिवार इस राज्य में आकर के बस गए और इन्हीं परिवार अलग अलग होकर 36 अलग-अलग अलग अलग राज्य की स्थापना की जिसे छत्तीसगढ़ कहां गया जो बाद में विकसित होकर के छत्तीसगढ़ कहे जाने लगा।
गढ़ो के आधार पर – कलचुरी शासन काल के समय छत्तीसगढ़ में रतनपुर शाखा के 18 गए थे और रायपुर शाखा के 18 गढ़ थी इस प्रकार यहां कुल टोटल 36 गढ़ थे और ऐसी मान्यता है कि इन्हीं गुणों के कारण वर्तमान छत्तीसगढ़ प्रदेश छत्तीसगढ़ का लाया।
स्वतंत्रता के पश्चात भारत देश की विभिन्न रियासतों के साथ इस प्रांत की कुल 14 रियासतों का 1 जनवरी 1948 को भारतीय संघ में विलय हुआ जिनमें सी रियासत बस्तर कांकेर राजनांदगांव खैरागढ़ कवर्धा सारंगढ़ रायगढ़ जशपुर उदयपुर सरगुजा कोरिया जबांग कार आदि 14 रियासतें थे।
मुगल काल मराठा काल में यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ इसलिए कहा जाने लगा क्योंकि क्षेत्र के कलचुरी वंश की रतनपुर साका और रायपुर शाखा अट्ठारह अट्ठारह गढ़ थी।

छत्तीसगढ़ की स्थापना –

सन1861 में मध्य प्रांत के गठन पर छत्तीसगढ़ को सम्मिलित किया गया जिसका मुख्यालय नागपुर था। इसके बाद 1 नवंबर 1956 में पुनर्गठित मध्य प्रांत के बाद यह मध्य प्रदेश का पूर्वांचल भाग बना और ठीक 44 वर्ष के पश्चात 1 नवंबर सन 2000 को मध्य प्रदेश से पृथक होकर के देश का 26 वा राज्य बन गया।

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक सीमाएं- 

इस राज्य की भौगोलिक सीमाएं 17°46′ से 24°5′ उत्तर 28 तक तथा 80°15′ से 84°24′ पूर्वी देशांतर के मध्य फैला हुआ है जिसकी अक्षांश की लंबाई 700 किलोमीटर और देशांतर की लंबाई 335 किलोमीटर है। छत्तीसगढ़ से होकर कर्क रेखा 231/2°उत्तरी अक्षांश तथा भारतीय मानक समय 821/2° पूर्वी देशांतर रेखाएं गुजरती हैं जो कि छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक दूसरे को काटती है।
छत्तीसगढ़ के उत्तर एवं दक्षिण तम बिंदुओं के बीच की दूरी 360 किलोमीटर एवं पूर्व से पश्चिम बिंदु की दूरी 140 किलोमीटर है छत्तीसगढ़ का कुल क्षेत्रफल 135192 वर्ग किलोमीटर है जो मध्य प्रदेश का 30.48 प्रतिशत एवं भारत का 4.10%है ।
छत्तीसगढ़ राज्य मध्य प्रदेश के दक्षिण पूर्व में स्थित है इस कारण से इसे मध्य प्रदेश का पूर्वांचल भी कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ के सीमा भारत के साथ राज्यों से घिरी हुई हैं उत्तर में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सीधी जिले, उत्तर पूर्व में झारखंड, मध्य एवं दक्षिण पूर्व में उड़ीसा, दक्षिण में आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना, दक्षिण पश्चिम में महाराष्ट्र, मध्य पश्चिमी मध्य प्रदेश के मंडला बालाघाट जिले, पश्चिमोत्तर में मध्य प्रदेश के शहडोल डिंडोरी जिला 7 राज्यों से गिरा हुआ है।

छत्तीसगढ़ बंगाल की खाड़ी से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिसकी समुद्र से औसतन ऊंचाई 5 मीटर है छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश व हरियाणा के समान पूर्ण रूप से ना किसी समुद्र को और ना ही किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा को स्पर्श करती है।

छत्तीसगढ़ के भूभाग – 

छत्तीसगढ़ प्रदेश ढक्कन के पठार का भाग है। छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सा बघेलखंड के पठार , छत्तीसगढ़ के दक्षिण पूर्वी हिस्सा उच्चतम पहाड़ी क्षेत्र है, छत्तीसगढ़ के दक्षिण पूर्वी हिस्सा पाठ प्रदेश है, छत्तीसगढ़ के मध्य भाग में मैदानी है जहां महानदी का बेसिन है, छत्तीसगढ़ का दक्षिणी हिस्सा दंडकारण्य का पठार है।

छत्तीसगढ़ के उत्तर पूर्वी सीमा पर छोटा नागपुर का पठार, उत्तर में बघेलखंड के पठार पश्चिम में मध्य भारत का पठार ( सतपुड़ा मैकल श्रेणी, सतपुड़ा मैकल श्रेणी के पूर्वी हिस्से को छोड़कर के पश्चिमी हिस्सा उतरी राजनांदगांव कवर्धा बिलासपुर जिले में है।) दक्षिण में प्रायद्वीप पठार तथा पूर्व में महानदी का मैदान फैला हुआ है।

छत्तीसगढ़ के सबसे अधिकतम पाठ प्रदेश मे शामरी पाठ गौर लाटा (1225 मी।) , मैनपाट (1152 मी।) शेष बघेलखंड के पठार में देवगढ़ चोटी (1027 मी. ) , माइकल श्रेणी बंदर गढ़ छोटी (1176 मी।) बस्तर के पठार में बैलाडीला (1200 मीटर) आदि छत्तीसगढ़ की अधिकतम पाठक प्रदेश है।छत्तीसगढ़ का मैदान (200 मीटर) की ऊंचाई का क्षेत्र है।

छत्तीसगढ़ के भू संरचना – 

भू रचना की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के कई भागों में विभाजित किया जा सकता है
उत्तरी भाग बघेलखंड का पठार गोडवाना शैल समूह तथा प्रीकैंब्रियन ग्रेनाइट का बना है।
छत्तीसगढ़ का मैदान कडप्पा शैल समूह से कटकर बना है।
छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य धारवाड़ शैल और प्रीकैंब्रियन ग्रेनाइट का बना है।

इनमें से बघेलखंड का पठार अत्यधिक कटा फटा है जिससे नदियों ने पठानों को नीचे घाटियां तथा मैदान बना दिया है । छत्तीसगढ़ का मध्य भाग मैदानी भाग है तथा दंडकारण्य वाला भाग उचे नीचे पठार से युक्त है।

छत्तीसगढ़ का ‌ उत्तरी हिस्सा गंगा अपवाह तंत्र के अंतर्गत सोन नदी के बेसिन का भाग है।
छत्तीसगढ़ का मध्य भाग महानदी के बेसिन का हिस्सा है जो पूर्वी सीमा पर उड़ीसा से हो सकरी घाटी से गुजरती है और हीराकुंड बांध में समा जाती हैं।
छत्तीसगढ़ दंडकारण्य निचला भाग इंद्रावती तथा गोदावरी में जाता है।
छत्तीसगढ़ भारत का भाग होने के कारण यहां की जलवायु मानसूनी हैं छत्तीसगढ़ में महाद्वीपीय प्रभाव देखने को मिलती है। छत्तीसगढ़ के मध्य भाग में मई माह में chhattisgarh temperature 35 डिग्री के ऊपर रहता हैं।
उत्तरी हिस्सा और दक्षिणी हिस्सा में chhattisgarh temperature सामान्य रहता है। chhattisgarh temperature में दिसंबर महीना में संपूर्ण देश में तापमान अधिक रहता है।
छत्तीसगढ़ में वर्षा का वितरण भी असमान है छत्तीसगढ़ राज्य में सबसे अधिक वर्षा सन 2013 में 1292 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है ।

 छत्तीसगढ़ के मिट्टी- 

छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से लाल और पीली मिट्टी प्राप्त होती है जो कडप्पा धारवाड़ और गोड़वाना चट्टानों से उत्पन्न ना हुए हैं छत्तीसगढ़ मैं दोमट मिट्टी अपेक्षाकृत कम उर्वरक है। छत्तीसगढ़ में लेटराइट भाटा अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है जबकि काली मिट्टी कहीं-कहीं पाई जाती है।

छत्तीसगढ़ राज्य की खेती – 

छत्तीसगढ़ राज्य की लगभग 80% जनसंख्या कृषि पर आधारित है और उन्हीं से जुड़े हुए उद्योग धंधे पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि भूमि अलग-अलग है। छत्तीसगढ़ में कृषि योग्य भूमि 137 . 89 लाख हेक्टेयर है जिनमें से कुल बोया गया क्षेत्र सन 2014-15 के अंतर्गत 572 8000 है तथा शुद्ध बोया गया क्षेत्र 4681 हजार हेक्टेयर है।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1328 लाख हेक्टेयर में सिंचाई से निर्मित हुआ था जो कूल बोया गया क्षेत्र का है क्षेत्र का 23% हिस्सा थी ।
सन 2000 15 तकिया 19 पॉइंट 200000 हेक्टेयर हो गई इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात कुल 6.01 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता की वृद्धि हुई है।
वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ राज्य में सिंचाई का प्रतिशत 31% है।

छत्तीसगढ़ की फसल – 

छत्तीसगढ़ राज्य में प्रमुख फसल चावल का किया जाता है इसके अलावा चना, गेहूं, ज्वार, गन्ना आदि का खेती राज्य के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज संपदा – 

छत्तीसगढ़ राज्य में खनिज संपदा की दृष्टि से छत्तीसगढ़ राज्य के धनी राज्य है छत्तीसगढ़ में लगभग 27 प्रकार के खनिज प्राप्त होते हैं जो गोड़वाना और धारवाड़ शैल समूह में मिलते हैं।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का आधार कोयला है जीते उद्योगों को ऊर्जा मिलती हैं इसके अलावा यहां लोहा, खनिज, बॉक्साइट, टीन , डोलोमाइट, हीरा, चुना आदि भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
यहां कोयला की अधिक मात्रा होने के कारण खुद का विद्युत के लिए स्थापित किए हैं जिसका केंद्र कोरबा है कुल विद्युत उत्पादन 2424 पॉइंट 70 मेगावाट थी।

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक संस्थान – 

छत्तीसगढ़ में संसाधन की विकास धीमा था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहां औद्योगिक विकास हो रही हैं जिनमें लोहा इस्पात सीमेंट लकड़ी उद्योग है। यहां निजी क्षेत्र एवं केंद्रीय क्षेत्र के औद्योगिक संस्थान कार्य कर रहे हैं। केंद्रीय उपक्रमों में एनएमडीसी बैलाडीला, सेल भिलाई, एनटीपीसी एवं बाल को कोरबा कोल इंडिया बिलासपुर आदि केंद्रीय उपक्रमों का भाग है।

छत्तीसगढ़ में परिवहन – 

छत्तीसगढ़ में परिवहन उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र एवं दंडकारण्य क्षेत्र दंडकारण्य क्षेत्र में बस्तर क्षेत्र परिवहन के दृष्टिकोण से पिछड़ा हुआ है जबकि केंद्रीय छत्तीसगढ़ परिवहन के दृष्टिकोण से विकसित हुआ है जहां ब्रिटिश काल से रेल परिवहन की स्थापना है।

छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक संभाग – 

छत्तीसगढ़ में कुल 5 प्रशासनिक संभाग है जिनमें बस्तर, रायपुर, दुर्ग, सरगुजा, बिलासपुर तथा कुल 32 नए जिले हैं।
छत्तीसगढ़ के 32 जिलों में मई 1998 में मध्य प्रदेश जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद छत्तीसगढ़ में नए 9 जिले बनाए गए।
सन 2007 में 2 नए जिले बीजापुर और नारायणपुर को बनाया गया।
1 जनवरी 2012 को 9 नए जिले सुकमा, कोंडागांव , बलोदा बाजार, गरियाबंद, बेमेतरा ,बालोद, मुंगेली सूरजपुर, बलरामपुर 9 नए जिले बनाए गए .
2021 को गोरेल्ला-प्रेंड्री-मरवाही , मोहला-मानपुर , सक्ती , सारंगढ़-बिलाईगढ़ , मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर को पांच नया जिला बनाया गया ।
आर्थिक समीक्षा 2015-16 के अनुसार प्रदेश में कुल 149 तहसील, 186 विकासखंड, 168 नगर, कुल 20199 गांव छत्तीसगढ़ में है।छत्तीसगढ़ प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं में कुल 10971 ग्राम पंचायत है, छत्तीसगढ़ में लोकसभा में 11 सीट, जिनमें 4 सीट अनुसूचित जनजाति (कांकेर ,जगदलपुर, रायगढ़, सरगुजा), 2 अनुसूचित जाति (बिलासपुर, सारंगढ़), 5 सामान्य वर्ग ( महासमुंद, रायपुर ,दुर्ग ,राजनांदगांव ,जांजगीर)
प्रदेश विधानसभा इन 90 सीटों में से 34 अनुसूचित जनजाति, 10 अनुसूचित जाति, 40 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं।

Chhattisgarh Ke Bare Mein Jankari
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chhattisgarh population-  

छत्तीसगढ़ राज्य की 2011 के जनगणना के अनुसार chhattisgarh population 255 45 198 है जो भारत का 2% जनसंख्या का हिस्सा है।
chhattisgarh population में पुरुषों की जनसंख्या 2011 के अनुसार 1 28 32 895 पुरुष जनसंख्या है तथा स्त्री जनसंख्या 127 12 303 स्त्री जनसंख्या है। chhattisgarh population घनत्व 189 प्रति वर्ग किलोमीटर है।
छत्तीसगढ़ में लिंगानुपात 991 प्रति हजार पुरुषों पर महिलाएं तथा जनसंख्या वृद्धि दर 22.6% रही है।

छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षणिक के शिक्षा – 

छत्तीसगढ़ राज्य शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ प्रदेश है यहां के कुल साक्षरता दर 70.3% है । जिनमें महिला साक्षरता 60 .2 प्रतिशत तथा पुरुष साक्षरता 80.3% है।
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक साक्षर वाला जिला दुर्ग जिला ( 82.56% )है और सबसे कम पढ़ा लिखा हुआ जिला बीजापुर 40.86% है।छत्तीसगढ़ साक्षरता की दृष्टि से देश में 17वें क्रम में है।
छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक लिंगानुपात 1033 कोंडागांव में जबकि रायपुर जिले में सबसे कम 963 है ।

ये रही दोस्तों हमारी छोटा सा प्रयास जो आपके समक्ष ये कर के छत्तीसगढ़ का सॉर्ट समरी है जो का से काम सब्दो में लिखने का प्रयास किया हु यदि आपको हमारी यह लेख अच्छी लगती है तो आप इसे अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में share कर दीजिये । 

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