लीलावती और आगर की प्रेम कहानी || Chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha

दोस्तों आज की इस पोस्ट में माध्यम से हम आपको छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्द नदी के प्रेम कहानी के बारे में आज की इस पोस्ट के माध्यम से बताने जा रहे है । ये प्रेम कहानी chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha{छत्तीसगढ़ की किसी एक नदी से सम्बंधित लोक कथा} है जो छत्तीसगढ़ के लीलगर नदी के बारे में लीलगर नदी का उद्भव कैसे हुआ और किस प्रकार से वह लीलावती और आगर के प्रेम कहानी के रूप में पढ़कर के लग इसे आज लीलगर नदी क्यों कहते है इसके बारे में जानने वाले है तो

चलिए बिना किसी देरी के  Chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha को जानते है ।

लीलावती और आगर की प्रेम कहानी ( Chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha)

दीपका पाली रोड में एक गांव हे बांधा खार । बांधा खार गांव मा 200 साल पहले की बात हरे एक जहिं महुहार नाम के गौटिया रहए । गौटिया के सात से बेटा रहिस हे अउ एक थीं बेटी रहिस । लड़की है बहुत ही सुन्दर रहिस , बहुत ही रूपवती रहिस ओकर नाम रहिये लीलावती ।

एक दिन गांव एक जवान यक्ति आइस वो जवान के नाम राहये आगर । वो जवान के संग में यानि की आगर के संग मा एक ठन कुकुर रहए ।

वो जवान ला अर्थात आगर ला गांव के गौटिया है अपन घर में काम करे बार रख लिस । काबर की पहली के जमाना में नौकर लग के काम करे ला पढ़े अउ पहले के जमाना में गौटिया मन है बहुत बड़े आदमी रहए जो गांव भर ले बड़े रहए ।

धीरे धीरे ओहा लीलावती के संपर्क में आइस अउ दुनो झन के प्रेम होंगे , दोनों झन एक दूसर ला प्रेम करे के शुरू कर दिस ।

धीरे धीरे दुनो झन के प्रेम कहानी के पता गौटिया करा चलेगिस तब गौटिया हा दुनो झन के शादी बड़े हसी ख़ुशी के साथ में करा दिस ।

गौटिया तो अपन बेटी के शादी तो करा दिस लेकिन गौटिया के सातो बेटा अउ लीलावती के भाई मन ला अपन बहिनी के शादी मन नई आइस ।

सातो भाई हा अपन ददा ला कथे – ददा तेहै ठीक काम नई करे ?

ता ददा हा कथे – ता कइसे ?

ता ओकर टुरा मन हा कथे – ते हमर बहिनी के शादी आगर के साथ करा देहे ये काम ठीक नई होये हे ।

गौटिया बड़े दयालु किस्म के आदमी रहए |

गौटिया हा कथे – एमे गलत बात का हे दुनो झन के प्रेम करत रहिस हे ता दुनो झन के शादी कर दे हो ।

अइसे कही के गौटिया हा अपन बेटा मन ला समझाइस लेकिन ओकर बेटा मन हा ओकर ददा के कहना ला नई मानिस ।

अउ सबो भाई मन हा मिल के अपन बहिनी के पति आगर ला मरे के प्लान बना डारिश ।

फिर एक दिन मौका पाके गांव के बांध मेर जान सहित मर के उहि मेर ओला गाड़िया दिस ।

कुछ देर बाद जब लीलावती ला आगर हा घर मा नई दिखिस ता ओहा आगर के जोन कुकुर रहए ओला धार के निकल गे ।

फिर कुकुर हा सूघंत सुंघत लीलावती ला ओ जगह में ले गे जंहा आगर ला मार के गाड़िया रहए ।

लीलावती हा मिटटी ला हटा के देखथे ता ओमेर ओकर पति के लाश हा रहे रहए ।

ओहा अपन पति ले लाश ला देख के अब्बड़ रोइस अउ अब्बड़ रोये के बाद में ओहा पास के पानी ला कथे हे जल देवता ला कथे हे जल देवता मेहा यदि अपन पति ला सच्चा मन से पति मानत हाव ता तेहा प्रकट हो जा अउ मोला पानी में बहा के ले जा अपन पति के संग मा ।

फेर का लीलावती के पुकार ला सुन के ओमेर जे जल देवता प्रकट हो गे अउ धरती ले जल के धारा निकलिस , धरती ले जल के अतका पानी निकलिस की ओ पानी हा एक नदिया के रूप ले लिस ।

ये नदी के धार सन मा लीलावती हा अपन पति के संग मा अपन प्राण ला त्याग दिस अउ नदी के धारा ले दुनो झन पानी में बोहागे ।

प्राचीन कल में कहा जथे की लीलागर नदी लीलावती अउ आगर के अटूट प्रेम के दिखाई देथे अउ लीलावती अउ ओकर प्रेमी   आगर के नाम से मिलकर के लीलागर नदी के नाम पढ़े हे । 

ये रही  दोस्तों आप सभी लोगो के एक छोटे से नदी से जुडी हुई हमारी एक छोटी सी लीलावती और आगर की प्रेम कहानी  chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha जो आपको जरूर पसंद आया होगा । यदि यह कहानी chhattisgarh Ki Kisi Ek Nadi Se Sambandhit Lok Katha  पसंद आया हो तो आप इस कहनी को अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में शेयर जरूर कर दीजियेगा । छत्तीसगढ़ की किसी एक नदी से सम्बंधित लोक कथा || 

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