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Chhattisgarhi Lokgeet

Top 10 Chhattisgarhi Lokgeet || छत्तीसगढ़ी लोकगीत || cg lokgeet

छत्तीसगढ़ व्यापक रूप से गांव , कस्बो का राज्य रहा है । यंहा की संस्कृति को लोक संस्कृति के रूप में देखना अधिक सार्थक है । छत्तीसगढ़ की संस्कृति लोक संस्कृति है जो जनजातियों में अपनी पृथक पहचान के साथ छत्तीसगढ़ के Chhattisgarhi Lokgeet के रूप में दिखाई देते है । इसके आचार विचार , रीतिरिवाज , पर्वोत्तसव , मूल्य और मान्यतय , जीवन शैली , भाषा कथाये और लोककथाएं , लोक नृत्य , लोकगगीत,  लोक माटी , लोकचारण , लोक साहित्य , लोक शिल्प लोक चित्तकला , का एक विराट संसार Chhattisgarhi Lokgeet  में देखने को मिलता है जिसके कारण से cg lokgeet का एक अपना विशेष पहचान बनाये हुए है ।

भले ही विकाश की दृस्टि में छत्तीसगढ़ पहलेना गिना जाए , किन्तु संस्कृति (cg lokgeet) के रूप में यह अचल और संपन्न रहा है । इनके लोक गीतों में (छत्तीसगढ़ी लोकगीत) में दया , छमा , ममता , सरलता , आद्रता यंहा के प्राचीन लोकगीतो से लेकर के आधुनिक Chhattisgarhi Lokgeet में दिखाई देता है । जंहा उनकी संस्कृति का प्रश्न है , वंही यह आज भी अपनी छत्तीसगढ़ी लोकगीत लो बनाये रखा है ।

यंहा के अधिकांश निवासी प्रकृति पर निर्भर रहते है जिसके कारण से Chhattisgarhi Lokgeet में यंहा के प्रभाव , छाप , मोहर , छलक साथ में दिखाई देते है । परंतु सच तो यह है की श्रम और ईमान से बढ़कर के इनका कोई देवता नहीं है परन्तु तेजी के साथ परिवातीति होते हुए आर्थिक , राजनैतिक और सामाजिक परिवर्तन के कारण से यंहा के छत्तीसगढ़ी लोकगीत में इनका प्रभाव देखे देता है । तो चलिए बिना किसी देरी के जानते है Chhattisgarhi Lokgeet लिखे हुए लोक गीतों को जिसे पढ़कर के आपके दिल खुश हो जायेगा ।

Chhattisgarhi Lokgeet लिखा हुआ 

1 . हमर छत्तीसगढ़ – डंडा गीत ( Chhattisgarhi Lokgeet)

जोर दे जोरन जोरे वो
जोरन जोड़े दाई जोरन जोरे वो
जोरन जोड़े दाई जोरन जोरे वो

नवा झपली मा जोरन जोरे वो

हल्दी ला जोरे अउ पटवा ला जोरे

ये दाई वो
नवा झपली में जोरन जोरे न

दर्पण ला जोरे अउ टिकली ला जोरे
ये जोरन जोरे दाई जोरन जोरे वो
नवा झपली मा जोरन जोरे वो ना

फीता ला जोरे अउ फुंदरा ला जोरे
ये जोरन जोरे दाई जोरन जोरे वो
नवा झपली मा जोरन जोरे वो ना ।।


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2 . फुलवा भाजी -डंडा नृत्य (Chhattisgarhi Lokgeet)

फुलवा भाजी लाल , फुलवा भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल

जंहा अंजी भरे मुंदरी भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल

जंहा नारी बने ककनी भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल

जंहा बाहता भरे बाहता भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल

वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल
वह रे नन्दलाल सुरता रखे फुलवा भाजी लाल ।।।

Chhattisgarhi Lokgeet
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3 . दिनों दिन बड़े परिवार (Chhattisgarhi Lokgeet)

दिनों दिनों कबर संगी बाड़े परिवार
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार

बड़े तुरा है घिरलत हे अउ हाबले टेटकू तुरा आगे
घेरि बेरी के लइका होवई मा सबो खून भगागे

पितर मान के काबर मोला धरथे बुखार
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार

एक समय के बासी खवइया कइसे पुरे पावत हे
घर घर के खँजेरी मंजीरा सामान
बेतल गाना गावत हे

सेबल सुबिस्ता हे नियोजन परिवार
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार

परिवार छोटे में सुख हे संगी
कहना ला तै मान

दो तीन लइका बने हे अपन मन मा ठानो
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार

सुधरो तुमन पहली संगी बढ़िया हे संसार
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार

छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार
छोटे बड़े लइका मन है पारत हे गोहार ।।


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4 . मोर मन ला मिलके – मया (cg lokgeet)

मोरो मन ला मिलाके मोला अपन बनाके
गुईया रे मोर मैना

मोला बही तै बना के मोला आघू तै फ़साके
गुईया रे मोर मैना , गुईया रे मोर मैना

ये आती जाती रद्दा मा मोला मारे ताना
मारे मोला दीवाना

का मोरे मुड़ में डाले बना डरे दीवाना रे
बना डरे दीवाना रे

तेहा मोर सपना में आ के मोर नींद ला उतार के
मोहि डारे मन ला , गुईया रे मोर मन ला ।

आघू ले मै हासे नई हो तेहि हा हसाये हस
तेहि हा हसाये हस

ये माया जाल मा पगली मोला तै फसाये हस
मोला तै फसाये हस

तै मोर पारा मा आके देखे अटपटाके
गुईया रे मोर मैना

गांव भर में तुरी वो तेहि हस जहुंरिया
जियत ले मै झोडव नहीं खावा ले तै किरिया वो

तेहा पान ला खवाके , मोला माया मा फ़साके
गुईया रे मोर मैना , गुईया रे मोर मन ला

मोरो मन ला मिलाके मोला अपन बनाके
गुईया रे मोर मैना , गुईया रे मोर मन ला

गुईया रे मोर मन ला , गुईया रे मोर मन ला ।।


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5 . कांटा गड़गे – माया लोक गीत ( छत्तीसगढ़ी लोकगीत )

बोइर तरी कांटा गड़गे रे गोड़ मा ना बोइर तरी
बोइर तरी कांटा गड़गे रे गोड़ मा ना बोइर तरी

बही का देबे वो कांटा के
बोइर तरी

थारी भर रुपया नाप लेबे मन के
नई मने मन हो गोरी तोरे नाम के

बने नई भावे गोरी वो तोर कांटा के
बोइर तरी कांटा गड़गे रे गोड़ मा ना बोइर तरी

बाड़े पीड़ित ला पीरा मा हरे रे
दोस्ती के गोड़ ले गोटनी निकाल रे

हेर दुहु कांटा ला पिरित में रे संगवारी
बोइर तरी

हेर देबे कांटा ला पिरित में रे संगवारी
बोइर तरी कांटा गड़गे रे गोड़ मा ना बोइर तरी


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6 . खेती किसानी – किसान गीत (Chhattisgarhi Lokgeet)

चलो रे भैया करबो खेती किसानी के काम
चला रे भैया हिम्मत ले करबो खेती किसानी के काम
खेती किसानी के काम भैया खेती किसानी के काम

बारिश के महीना रे घिरे घिरे पानी
परहा लगाबो गए करले किसानी

खेती मा बोले तै धान गा
चला रे भैया हिम्मत ले करबो खेती किसानी के काम

नागर बैला धर के जाबो रे भैया
खेती मा पार होही सबके नैया

अरे खेती ला करबो महान गा
चला रे भैया हिम्मत ले करबो खेती किसानी के काम

खेती किसानी के काम रे भैया
खेती ला करबो महान रे भैया

चला चला भैया हिम्मत ले करबो खेती किसानी के काम
चला रे भैया हिम्मत ले करबो खेती किसानी के काम ।।


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7 . सिर के गगरिया  – कान्हा गीत (cg lokgeet)

मोरे सिर के गगरिया ला फोड़ डरे कान्हा रे
बदला लेहु कचरिया मा

मई बदला लेहु कचेरी मा
मई बदला लेहु कचेरी मा

नटखट सावरिया तै मोला फसाए
मीठी मीठी बातो में मोला रिझाये

भरे बंसी के धुन मा मोला जीत डरे ना
मोरे सिर के गगरिया ला फोड़ डरे कान्हा रे
बदला लेहु मई कचरिया मा

रोके गगरिया मारे तिरछी नजरिया
फोड़े डारे मोरे सिर के गगरिया

गगरी के पानी निसार दिए न
मोरे सिर के गगरिया ला फोड़ डरे कान्हा रे
बदला लेहु मई कचरिया मा

मुरली के तान मा सब ला मोहे तै
सांवली सूरत में तै सब ला फसा हस

अरे मन के तै चैना भुलाई दिए न कान्हा रे
मोरे सिर के गगरिया ला फोड़ डरे कान्हा रे
बदला लेहु कचरिया मा

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8 . वरसिवनी के बाजार – बाजार हाट लोक गीत (छत्तीसगढ़ी लोक गीत लिखा हुआ)

चलो जी मिलकर जाबो हाट बाजार रे संगी
किस्म किस्म के लेबो तरकारी लेबो मजेदार

वारासिवनी के बाजार मोर संगी
लेन चलो जाबो तरकारी

बढे बढे आलू भाटा टमाटर
भाटा टमाटर गा , भाटा टमाटर

गोफी करेला अउ शिमला कलिंदर
शिमला कलिंदर गा , शिमला कलिंदर

मिर्ची ला लेबो हम करारी मोर संगी
वारासिवनी के बाजार मोर संगी
लेन चलो जाबो तरकारी

मसूर प्याज लेबो हरी हरी धनिया
मेथी अउ प्याज लबो हरी हरी धनिया

सेहत बनाबो करारी मोर संगी
लेन चलो जाबो तरकारी जी

वारासिवनी के बाजार मोर संगी
लेन चलो जाबो तरकारी

लेन चलो जाबो तरकारी जी
लेन चलो जाबो तरकारी जी
लेन चलो जाबो तरकारी जी ।।

 

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