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गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan

गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan

रुड़ पुराण की अध्याय 3 – 4 में याम यातना के बारे में बताया गया है । आज की पोस्ट के माध्यम से गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन (Garud Puran Ka Swarg Varnan) के बारे में इस पोस्ट में जानने वाले है ।

गरुड़ पुराण के इस अधयाय में चित्र गुप्त के द्वारा श्रवणो से प्राणियों के सुबह और अशुभ कर्मो के बारे में पूछना और श्रवणो द्वारा वह सब धर्मराज को बताना और धर्मराज के द्वारा कैसे दंड का निर्धारण किया जाता है इसके बारे में इस पोस्ट के माध्यम से गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन के बारे में जान्ने वाले है तो चलिए बिना किसी देरी केGarud Puran Ka Swarg Varnan को जानते है :-

गरुड़ पुराण क्या है ? 

गरुड़ पुराण में भगवन विष्णु का गरुड़ के द्वारा मनुष्य के जन्म और मरण के बाद स्वर्ग की प्राप्ति और नर्क की प्राप्ति के लिए जो जो प्रयास करना चाहिए , या फिर किस प्रकार से हमें स्वर्ग और नर्क प्राप्त होता है , नर्क जाने के बाद में क्या क्या यातनाये दिया जाता है , जन्म कसिए होता है ? अर्थात मनुष्य के साडी कर्मो के करनी किस कारण से मिलता है इसके बारे में भगवन विष्णु के द्वारा गरुड़ को जीवन मरण की बाते को बतलाना ही इस पुराण में है जिसके कारण गरुड़ जी का भगवन विष्णु से प्रश्न करना ही गरुड़ पुराण कहलाता है ।

 

गरुड़ पुराण के नर्क मिलने का कारण और याम यातना सजाये

इस यातना में भगवन विष्णु और गरुड़ के संवाद के साथ में शुरू होता है –

गरुड़ कहते है – हे केसव मनुष्य कैसे मृत्यु के बाद में यमलोक में जाकर के अपने कर्म का भोग भोगता है ? यह मुझे बतलाइये ।

भगवान कहते है – हे विनता के पुत्र गरुड़ मै शुरू से अंत तक स्वर्ग में नर्क और स्वर्ग में क्या क्या होता है इसको मात्र सुनकर के तुम्हारे रोंगटे खड़े हो जायेंगे ।

हे कस्यप नंदन बहुबली भीति पुर के आगे 44 योजित में फैला हुआ धर्मराज यमराज का विशालपुर है । हाहाकार से परिपूर्ण उस पुर ( विशालपुर को ) देखर के पापी रोने लगता है । और उसके रोने को सुनकर के यमपुर में रहने वाले रामराज के लोग द्वारपाल के पास जाकर उस पापी के विषय में बताते है । 

धर्मराज के द्वार तक हमेशा धर्मध्वज नाम के द्वारपाल होते है जो चित्रगुप के पास में जाकर के उस प्राणी के शुभ और अशुभ कर्म को बतलाता है ।

उसके बाद में चित्रगुप्त भी धर्मराज से निवेदन करते है ।

धर्मराज को प्रत्येक प्राणी के कुंडली पता होते है फिर भी वह चित्तगुप्त को उस प्राणियों के पाप के बारे में पूछते है । और सब जानने वाले चित्रगुप्त भी श्रवणो से पूछते है । श्रवण ब्रम्हा के पुत्र है ।

वह स्वर्ग , पृथ्वी , तथा पाताल लोक में घूमने वाले , सुर से सुनकर के जान लेने वाले है , उनके नेत्र अति सूक्ष्म है की वह दूर से दूर तक की छोटी से छोटी , सूक्ष्म से सूक्ष्म देख लेने वाले है । उनकी श्रावणी नाम की अलग अलग पत्निया है । उसी प्रकार के स्वरूप वाली है ारतात वह श्रवण के सामान ही है । वह स्त्रियों के बारे में सभी के बारे में जानने वाली है ।

यदि मनुष्य छिपकर के और बिना छुपे को भी कुछ करता है उसे श्रावण एवं श्रावनियो सुनकर के उसे चित्रगुप्त को बतलाते है । यर श्रवण और श्रेणियाँ धर्मराज के गुप्तचर है जो मनुष्य के सुख , दुःख , वाचिक सभी कर्मो को जानते है ।

मनुष्य और देवताओ के ये दोनों श्रवण और श्रवणीय दोनों अधिकारी है वे सत्यवादी है उनके पास में ऐसे कई शक्तिया है जो मनुस्यो को उनके कर्मो को बतलाते है ।

व्रत हो , दान हो , और सत्यवचन से मनुष्य प्रसन्न करता है उसके प्रति वे शौम्य तथा मोक्ष को देने वाले हो जाते है । वे सत्यवादी श्रवण पापियों के पाप कर्म को जानकर के यमराज को जैसे कर्म किये है वैसे बता देने के कारन से पापियों के लिए दुखदाई हो जाते है । सूर्य चन्द्रमा , आकाश , जल , ह्रदय , यम , दिन रात दोनों सन्धाय और धर्म ये मनुष्य के सरे कर्मो को जानते है । ये श्रवण धर्म राज हो , चित्रगुप्त हो , श्रवण , मनुष्य आदि के सरीर में स्थित सभी पाप और पुण्यो को देखता है ।

इसलिए पापियों के पाप के बारे में जानकारी प्राप्त कर के यम उनको बुलाकर के उनको अपना बुलाकर डरावनी रूप को दिखाते है ।

जब वे पापियों डरावनी और भयंकर रूप में एक हाथ में दंड लिए हुए , भैसे के ऊपर में चढ़ा हुआ , लम्बी लम्बी भुजाये है , छाती चौड़ा है बालो घुंगराले है , उनकी आवाज इतनी भयंकर है जैसे अकास में उठती बिजली के सामान आवाज है , 32 भुजाओ वाले , बावली के सामान गोल नेत्र वाले , बड़ी बड़ी दाढ़ी के कारण , बहयनकर मुख वाले और लाल लाल आँखों वाले , लम्बी मूंछ वाले है । मृत्यु और ज्वर आदि से से जुड़े होने के कारण चित्रगुप भी डरावने है ।

सभी दूत पापियों को डराने के लिए गरजते रहते है । चित्रगुप्त को देखकर के पापी रोने लगता है , हाहाकार करने लगता है । दान न करने वाला वह पापी आत्मा वंहा कांपता है , बार बार जोर जोर से रोता है लेकिन उसकी विलाप को सुनकर के चित्रगुप्त उन पापियों पाप कर्मो को देखकर के चित्रगुप्त कहते है – अरे पापियों , आकर से दुसितो ने क्यों पाप कमाया है , काम से , क्रोध के माध्यम से , तथा पापियों के साथ में रहकर के पाप जो तुमने किया है वह दुःख देने वाला है ।

चित्रगुप कहते है – हे मूर्खो तुमने ऐसा पाप कर्म किया ही क्यों ? पूर्व के जन्मो में तुमने जिस प्रकार से अतयंत ख़ुशी के साथ में पाप कर्मो को किया है उसी प्रकार से खुसी के साथ में तुम्हे यातना भी भोगना पढ़ेगा और अब यमलोक में आकर के तुम यातना से क्यों डर रहे हो ? , तुम सभी पापियों ने जो बहोत से पापा किये है वे पाप ही दुःख के और यातना के कारण है । इसमें हम लोक कारण नहीं है ।

चित्रगुप्त आगे कहते है – जो मुर्ख है , जो धनवान है , जो पापी है , सबल हो , चाहे निर्बल हो , चाहे गरीब , चाहे आमिर हो यमराज को सभी से उनके कर्मो के हिसाब से सामान व्यव्हार करने वाले माने गए है ।

चित्रगुप्त के बातो को सुनकर के बिना कुछ कहे बैठ जाते है ।

धर्म राज भी चोर की तरह चुपचाप बैठे हुए उन पापियों को को देखकर के उनके पापो के लेखा जोखा करने के लिए , उसे उचित सजा देने के लिए कहते है ।

इसके बाद में वे निर्दयी दूत उन पापियों को पीटते हुए कहते है – हे पापी , पापकहोर और अत्याचार के सहगमी अत्यंत भयंकर नरक में चलो तुम । यम के आज्ञाकारी दूत प्रचंड और चंडक नाम के दूत उसे उसके दोनों हाथ को बांध कर के नरक की और ले जाते है । नरक में जलती हुई आग के सामान दिखने वाला एक विशाल वृक्ष है जो पांच योजन में फैला हुआ है तथा एक योजन ऊँचा था ।

और उस वृक्ष में पापियों के सर को निचे करके साक्लो से बांधकर के वे दूत पीटते है और वे जलते हुए रोते है । वंहा उनका कोई रक्षक नहीं होता । उसी साल्मलि वृक्ष में भूख और प्यास में पीड़ित और यमदुतो के द्वारा पिटे जाते हुए अनेक पापी लटके रहते है और दोनों हाथ को जोड़कर के यमदुतो से क्षमा करने की प्राथना लगाने लगते है ।

बार बार उन पापियों को लोहे की लाठिया , भालो से , बर्छियों से , गदाओ से के द्वारा उनके दूत पीटते है । मार खाने के बाद में जब पापी बेहोश हो जाते है तब यमदूत कहते है – अरे दुराचारियो , पापियों तुम लोगो ने पाप क्यों किया ? आसानी से मिलने वाली दान को कभी क्यों नहीं किया ? तुम लोगो ने आधा भोजन किसी को दान भी नहीं दिया और न ही किसी पशु ,

न ही किसी पक्षियों को दान दिया है , अतिथियों को न तो नमस्कार किया और न ही पितरो का पिंडदान किया , न ही चित्रगुप के मन्त्र का ध्यान किया यदि तुमने ये सब किया होता तो तुम्हे कभी यातना नहीं होती , न कभी तुन्हे पीटा जाता । इस लिए तुम्हे बहुत ज्यादा पीटा जा रहा है ।

पीटते पीटते पापी उस सामली वृक्ष के निचे गिर जाते है और वृक्ष के पत्तो से पापियों के सरीर ओट पट जाते है । निचे गिरे उन पापियों को कुत्ते खाते है , रोते हुए उन पापियों के मुख में यमदूत धूल भर देते है तथा कुछ पापियों को बांधकर के पाशो से पीटते है , कुछ पापी को लकड़ी की तरह आरी में 2 टुकड़ा किये जाते है , कुछ को कुल्हाड़ी से काट दिए जाते है । कुछ पापियों को गड्डे में आधा गाड़कर के सर को बानो से निशाना लगाया जाता है । कुछ को गन्ने की तरह पर जाता है ।

कुछ पापियों को अंगारो में ढक दिया जाता है , कुछ पापियों को घी के खौलते हुए कढ़ाई में , कुछ को हाथी के आगे फेक दिया जाता है , किसी के हाथ और पेअर को बांधकर के आधा लटकाया जाता है , किसी को कुय में फेका जाता है । कसी की प्रर्वतो से गिराया जाता है , कुछ पापियों को गिद्ध के समुख डाल दिए जाते है कुछ को उनके कर्ज में सरीर के मांस को नोचकर के उनके ऋण को पूरा किया जाता है ,

इतने तपिस करने के बाद में यमदूत उसे खींचकर के तामिस्र आदि में घोर नरक में फेक देते है । उस वृक्ष ने निचे में खोर नरक है जिसका वर्णन वाणी से नहीं किया जाता है ।

इसके बाद में तामिस्र नर्क ने लगातार पाप भोगंने के बाद में फिर में पाप के भाग काटने के बाद में मृत्युलोक में भेज दिया जाता है , मृत्युलोक में ने जन्म के रूप में दूसरे जन्म होता है ।

गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan

स्वर्ग जिसे देवताओ का निवास स्थान माना गया है जो बुरे कर्म करते है उन्हें नरक में ले जाकर के बहुत ही बुरे तरीके से दण्डित किया जाता है जबकि जबकि अच्छे कर्म करने वाले मनुस्यो को स्वर्ग लोक में सभी तरह के सुख सुविधाओं को दिया जाता है । भगवन विष्णु बताते है की जिन आत्माओ को स्वर्ग में स्थान मिलता है उन्हें स्वयं यमराज स्वर्ग के द्वार तक छोड़ने के लिए आते है । जंहा अपसाये उनका स्वागत करती है ।

इसके आलावा जो दुसरो के बारे में भला सोचते है ऐसे लोगो को भी स्वर्ग की प्राप्ति होती है और जीवन भर परोपकार करते है उन्हें मृत्यु के बाद में उन्हें बिना किसी संदेह के स्वर्ग मिलता है । साथ जी हो तालाब , कुय , प्याऊ आदि का निर्माण करते है उन्हें भी मृत्यु के बाद में सम्मान के साथ में स्थान दिया जाता है । 

गरुड़ पुराण में आगे विष्णु जी बतलाते है जो मनुष्य स्त्रियों का सम्मान करता है , कन्याओ को बोझ नहीं बल्कि देवी के रूप मानकर के उसकी पूजा करता है आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाता है जबकि प्रकृति के द्वारा निश्चित समय में मृत्यु को पूरा करता है उसे भी मृत्यु के बाद में स्वर्ग की प्राप्ति होती है ।

इसके आलावा गरुड़ पुराण में बताया गया की जो मनुष्य धर्म का पालन करता है , ऋषि मुनियो का आदर करता है और वेद पुराण का अध्यन करता है उन्हें भी मृत्यु के बाद में स्वर्ग लोग की प्राप्ति होती है ।

गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है की मनुस्यो को जीवित रहते दिन हिनो पर दया करना चाहिए जिससे उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद में यही पुण्य कर्म उसे स्वर्ग दिलाता है ।

इसके लावा गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है जब वह भोजन करे तो भोजन के पहले उन्हें किसी को पहले भोजन कराना चाहिए या फिर जब कोई दी हिन् , मांगने वाला व्यक्ति उसके द्वार में , या पानी मांगने के लिय आये तो उसे अवश्य खाना खिलाये और प्यासे को पानी जरूर पिलाये इससे मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan
गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan

साथ ही गरुड़ पुराण में भगवन ने विष्णु ने यह भी बताया है की यदि कोई मनुष्य अपनी आय का चार तिहाई में से एक तिहाई धन दान या ब्राम्हण साधु संतो को दान करता है वह मृत्यु के बाद में बिना किसी रूकावट के स्वर्ग में पहुँचता है और जो जीवन भर गीता का पाठ करता है , धर्म कर्म पूजा पता , भगवत , भजन जुड़े रहता है उसे स्वर्ग में जगह मिलता है ।

इसके लावा जो मनुष्य अपने गुरुजनो , अपने माता पिता का पुरे मन लगाकर के सेवा करता है उन्हें उसे भी स्वर्ग में स्थन प्राप्त होता यही । इसिलिय तो कहा गया है की माता पिता और गुरुजनो के चरणों में ही स्वर्ग है ।

गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है जो मनुष्य मृत्युलोक में जैसा भी कर्म करता है उसे उसी अनुसार मृत्यु के बाद में दंड मिलता है या दिया जाता है ।

इस प्रकार से दोस्तों गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg Varnan का वर्णन किया गई है और हमें इसी प्रकार के कुछ कर्म करने के बाद में सीधे स्वर्ग लोक में जगह की प्राप्ति होती है । इसलिए दोस्तों पाप के रस्ते को छोड़कर के पुण्य के रास्ते में चलना चाहिए ताकि आपका भी भला हो सके और दुसरो का भी भला किया जा सके ।

बोल विष्णुपुराण कथा की जय ।। बोल गरुड़ पुराण कथा की जय  || Garud Puran Ka Swarg Varnan। बोल विष्णुभगवान की जय ।।

उम्मीद करते है दोस्तों यह हमरी छोटी सी कोशिश रही है प्रयास करने की गरुड़ पुराण का स्वर्ग वर्णन || Garud Puran Ka Swarg वर्णन का आपको पसंसद आता है तो इस लेख को अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में शेयर जरूर करियेगा । धन्यवाद । साधुवाद । गरुड़ पुराण स्वर्ग जाने का रास्ता

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