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Gauraiya Chidiya Ki Kahani || Goriya Chidiya Ki Kahani

5+ Gauraiya Chidiya Ki Kahani | Goriya Chidiya Ki Kahani

हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का हमारे आर्टिकल gauraiya chidiya ki kahani || गौरैया चिड़िया की कहानी में आज की इस पोस्ट में हम आपको गौरैया चिड़िया की बहुत ही सुन्दर सुन्दर कहानियो को बताने वाले है ।

दोस्तों जैसा की आप सभी को पता है की गौरैया चिड़िया (gauraiya chidiya ki kahani) एक घर में पाया जाने वाली पवित्र चिड़िया मन गया है जो घर में पढ़े चावल के दाने , गेंहू के दानो को खाकर के घरो में ही अपने बच्चे देती है ।

टॉप 5 गौरैया चिड़िया की कहानी के लिस्ट 

ये छोटे आकर के होते है और घरो में इसकी चहचाहट सुनाई देता है । तो चलए दोस्तों बिना किसी देरी के goriya chidiya ki kahani ( गौरैया चिड़िया की कहानी को शुरू करते है ।

1 . गुस्से में समुद्र को सूखा दिया ( goriya chidiya ki kahani)

बहुत समय की बात है समुद्र किनारे एक चिड़िया घोंसला बनाकर के समुद्र के किनारे में रहते थे । वहां उस गौरैया चिड़िया ने समुद्र के किनारे में अपने घोंसले में अंडे दिए थे। सुबह होते ही गया अपने अंडों को छोड़कर दाना जुड़ने के लिए बाहर निकल कर गई ।

शाम को दाना चुगने के बाद जब गौरैया वापस आई तो उसने देखा कि उसके अंडे वहां पर नहीं है, वह अपने अंडे को ना पाकर घबरा गई उसने आसपास देखा उसे कोई दिखाई नहीं दिया। उसने समुद्र से पूछा हे समुद्र मैंने यहां पर दो अंडे रखे थे क्या तुमने देखें?

समुद्र ने हंसते हुए बोला- तेरे अंडो का मुझे क्या ?

समुद्र के हंसने से गौरैया अंदाजा हो गया कि उसके अंडे समुद्र में ही चुराए हैं। वह समुद्र से बोली थी तुम्हारे यहां कोई और नहीं है तो इसलिए मेरे अंडों को कहीं छुपाया है। तुम्हें पता है कि मेरे अंडे कहां है? तुमने ही मेरे अंडे को चुराया होगा मुझे मेरे अंडे वापस करो?

गौरैया ही इस बात को सुनकर के समुद्र को हंसी आई और वह अहंकार होकर बोला मुझे नहीं पता कि तुम्हारे अंडे कहां है? ढूंढ सकती हो तो अपने अंडे को ढूंढ लो

समुद्र की इस बात को सुनकर गौरैया गुस्सा गई और मुझसे मैं बोली मेरे अंडे वापस करो नहीं तो मैं समुद्र के पूरा पानी को सुखा दूंगी।

गौरैया की इस गुस्से भरी बात को सुनकर समुद्र को और हंसी आ गई और वह खिलखिला कर हंसने लगा ।

गौरैया गुस्से में लाल होकर समुद्र एक टक देखने लगी , समुद्र की लहरें आती और चली जाती परंतु गौरैया उस समुद्र की लहरों को टक लगाके देखते ही रही ।

गौरैया गुस्से में लाल होकर फिर समुद्र को बोली समुद्र तुम ऐसे नहीं मानोगे। अब मैं तुम्हारा सारा समुद्र का पानी सुखा करके ही दम लूंगी ऐसा कह कर गौरैया अपनी छोटी सी चोंच से पानी लाकर किनारे में डालती इस तरह से ऐसे करते करते उन्हें सुबह से शाम हो गई ।

जब शाम ढलने लगी तब बहुत सारे पक्षी उन्हें देखने के लिए आई और गौरैया को देखकर कहां कि आज तुम दाना चुगने के लिए क्यों नहीं आई?

चिड़ियों की इस बात पर गौरैया कि गुस्सा के सामने ना हो सका और वह कुछ ना बोली। वह अपने कार्य में लगी रही ।  चोंच से पानी लाकर किनारे में रखने लगी इस हरकत को देखकर सभी पक्षियों ने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन गौरैया पक्षी उनकी एक न सुनी ।

और गुस्से गुस्से में गौरैया बोली की मैंने यह प्रण लिया है कि मैं समुद्र के पानी को अट डूंगी जिससे कि मेरे अंडे मुझे वापस मिल जाए।

गौरैया की जोश भरी और प्रण की बात को सुनकर सभी आए हुए पशु पक्षी उनकी तरफ देखने लगे और सब को उसकी इस कार्य को करते हुए चिंतन करने लगे । तब आए हुए सभी पक्षियों आपस में चिंतन करके इस बात को पक्षियों के राजा राजा गरुड़ देव के पास में इस बात को लेकर पहुंच गए और गरुड़ देव के पास में पहुंचने के बाद कहां कि महाराज यह एक छोटी सी पक्षी गौरैया अपनी जिद पर अड़ी हुई है और एक विशाल समुद्र के पानी को सुखाने का प्रयास कर रही है।

अन्य पक्षियों की बात को सुनकर गरुड़ देव समुद्र के तट में पहुंचे और समुद्र के तट में पहुंचकर गौरैया से गरुड़ देव ने कहा की हे गौरैया हम तुम्हारी मदद करना चाहते हैं मेरी चोंच तुम्हारी चोंच से बड़े हैं तो तो क्या हम तुम्हारी मदद कर सकते हैं ?

गरुड़ की बात को सुनकर गौरैया की गुस्सा और बढ़ गई और गुस्से में गरुड़ गरुड़ से कहा यह मेरा काम है यह काम मुझे करने दो मुझे किसी और की मदद नहीं चाहिए?

गौरैया की गुस्से भरी बात को सुनकर गरुड़ देव समझ गए कि गौरैया अपने अंडे को लेकर बहुत चिंतित है । तब गरुड़ देव श्री हरि विष्णु के पास में इस समाचार को लेकर के गए और उनसे मदद की गुहार लगाई और विनती की और कहां कि प्रभु आप ही इस जगत की रचयिता है इस सृष्टि के रचयिता है तो आप ही इस छोटे से पक्षी की मदद कर सकते हैं ।

भगवान विष्णु ने देखा कि वह अपने छोटे से चोंच मैं समुद्र के पानी को चोंच में उठाती और समुद्र के दूर ले जाकर छोड़ चुके और वह इस काम को लगातार निरंतर करते ही जा रही थी। गौरैया की इस दृढ़ निश्चय को देखकर भगवान विष्णु ने समुद्र से पीछे हटने को कहा और उसे उनके अंडे वापस करने के लिए कहा ।

भगवान विष्णु की आज्ञा को मानकर समुद्र अपने लहरों को धीरे-धीरे करके पीछे करने लगे और पीछे करते-करते समुद्र की पानी आधा हो गई और उसके बाद में समुद्र के अंदर गौरैया ने अपने दोनों को बाहर निकाला और अंडों को देखकर बहुत खुश हो गई और खुशी-खुशी उसने कहा कि देखो मैंने यह कर दिखाया ।

कहानी किस सीख – दोस्तों गौरैया की (goriya chidiya ki kahani) छोटी सी कहानी हमें बहुत कुछ सिखा जाती है हमें कहानी सिखाती है कि कोई भी कार्य जिंदगी में छोटा या फिर बड़ा कोई नहीं होता यदि हम अपने दृढ़ शक्ति और दृढ़ निश्चय से यदि कोई भी कार्य प्रारंभ करते हैं तो वह ईश्वर की कृपा से वह काम पूरा हो जाता है । चाहे वह काम कितना भी बड़ा क्यों ना हो ।

2 . गौरैया फुर्र ((goriya chidiya ki kahani))

जंगल में पेड़ के नीचे सियार रहता था और उसी पेड़ के ऊपर में गौरैया चिड़िया अपने घोसले बनाकर के रहते थे । उस पेड़ की शाखा में गौरैया चिड़िया की छोटे-छोटे बच्चे भी थे ।

उस पेड़ के नीचे से यार जैसे ही सुबह होती थी वैसे ही वह घूमने के लिए जंगल की ओर निकल जाता था  और वह शाम को अपने भोजन की तलाश पूरा करके वापस उसी पेड़ के नीचे आ जाता था । शाम के समय जब वह वापस आता तब वह गौरैया से हमेशा पूछता था कि वह कैसा दिख रहा है?

गौरैया चिड़िया जवाब देती- की राजा के समान, बाबू के समान और कैसा?

गौरैया चिड़िया रोज इसी प्रकार से झूठ बोल कर के सियार का उत्तर देते थी ताकि यार उनकी बच्चों को ना खा जाए ।

गौरैया की झूठी जवाब को सुनकर सियार अपने आप हो राजा के समान मानने लगता था और जंगल में बड़ी स्वतंत्रता और शान के साथ घूमता रहता था ।

ऐसे करते करते समय बीत गया और देखते ही देखते गौरैया चिड़िया की बच्ची उड़ने लायक हो गए।

1 दिन की बात है सियार शाम के समय जब वापस आया तो ठीक उसी अंदाज में गौरैया चिड़िया को पूछा मैं कैसा दिखता हूं ?

गौरैया ने तुरंत ही पलटवार करते हुए जवाब दिया – आकुड़ जैसा, पाकुड़ जैसा , सियार का मुख होता है ऐसा ।

गौरैया चिड़िया की इस बात को सुनकर सियार गुस्सा आ गया और गुस्से मे आ गया। गौरैया चिड़िया की इस बात पर यार को बिल्कुल भी भरोसा नहीं हुआ कि वह उनके बारे में ऐसा कुछ बोलेगी।

गौरैया चिड़िया की बात उसे बहुत बुरा लगा और मुझसे गुस्से में गौरैया चिड़िया को मारने के लिए उस पेड़ पर चढ़ गया ।

सियार को गुस्से में आग बबूला आते हुए देखकर गौरैया और उसके बच्चे फुर्र से उड़ गए।

सियार गुस्से में पेड़ से गिरा और लुढ़क कर जोर जोर से  कहराने लगा । कहराते कहराते सियार को गौरैया की सारी खेल समझ में आ चुका था उस दिन से उसके बाद में उसने ठान लिया कि वह अब किसी पर भी यकीन नहीं करेगा ।

3 . हाथी और गौरैया (Gauraiya Chidiya Ki Kahani)

किसी पेड़ पर एक गौरैया अपने पति के साथ रहती थी। वह अपने घोंसले में अंडे से चूजे निकालने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी ।

1 दिन की बात है गौरैया अपने अंडों को से रही थी और उसका पति भी रोज की तरह खाने का इंतजाम करने के लिए बाहर गया हुआ था तभी वहां एक गुस्सैल हाथी आया। और आसपास के पेड़ पौधों को रोते हुए उन्हें तोड़फोड़ करने लगा उसी तोड़फोड़ के दौरान गोरिया के पेड़ तक भी पहुंच गया और वह उसने भीड़ को गिराने के लिए जोर-जोर से पेड़ फूल खिलाया लेकिन पेड़ भील ना सका और हाथी को हिला कर गिरा नहीं पाया और ऐसे करते हुए वहां से आगे चला गया

लेकिन उसके हिलाने से गौरैया चिड़िया का घोंसला टूट कर नीचे आ गिरा और उसके सारे अंडे वही छूट गए।

गौरैया अपनी सारी अंडों को फूटे देख कर बहुत दुखी हुए और जोर जोर से रोने लगी थी तभी उसका पति भी वापस आ गया वह भी बेचारा यह देख कर बहुत दुखी हो गया।

गौरैया चिड़िया के पति को अपने अंडों की फूटने पर बहुत ज्यादा गुस्सा हुआ और वह हाथी से बदला लेने और उसे सबक सिखाने का फैसला किया ।

वे हाथी से बदला लेने के लिए अपने दोस्त कठफोड़वा के पास पहुंचे और उनसे सारी बात बदलाई । भी हाथी से बदला लेने के लिए अपने दोस्त कठफोड़वा की मदद चाहते थे और उस कठफोड़वा के दो अन्य दोस्तों थे एक था मधुमक्खी और दूसरा था मेंढक । इन तीनों दोस्तों ने मिलकर हाथी से बदला लेने के लिए योजना बनाई ।

तब योजना के तहत सबसे पहले मधुमक्खी ने काम शुरू किया उसने हाथी के कान में गाना गुनगुनाना शुरू किया हाथी को मधुमक्खी की संगीत में मजा आने लगा और जब हाथी संगीत में डूबा हुआ था तो कठफोड़वा ने अगले चरण पर अपना कारनामा शुरू कर दिया।

उसने हाथी की दोनों आंखें फोड़ दी । जिससे हाथी दर्द से करने लगा उसके बाद अंत में मेंढक अपनी पलटन के साथ एक दल बनाकर के हाथी के पास गया और सब मिलकर उसके कान के पास में दलदल में टरटराने लगे। मेंढक की आवाज को सुनकर हाथी को लगा कि पास में ही कोई तलाब है वह उठ कर आवाज की दिशा में आगे बढ़ा और आगे बढ़ते ही दलदल में जा करके फस गया। । इस तरह इस तरह से हाथी धीरे-धीरे दलदल में फंसता गया था गया और अंत में उसके दलदल में फंस कर मृत्यु हो गई ।

इस कहानी (Gauraiya Chidiya Ki Kahani ) की शिक्षा – दोस्तों एक छोटी सी कहानी (Goriya Chidiya Ki Kahani) हाथी और गौरैया की कहानी (गौरैया चिड़िया की कहानी ) से हमें सीख मिलती है यदि कमजोर से कमजोर लोग भी एकजुट होकर काम करे तो बड़ा से भी बड़ा कार्य को पूरा किया जा सकता है बड़े से बड़े शत्रु को भी पराजित किया जा सकता है ।

4 . गौरैया और बंदर की कहानी (Gauraiya Chidiya Ki Kahani )

एक बार की बात है एक जंगल के किसी घने पेड़ पर एक गौरैया का जोड़ा घुटने बनाकर रहता था वह उस पर अपना घोंसला बनाकर गुजर बसर करते थे। दोनों बड़े हंसी खुशी के साथ अपना जीवन बिता रहे थे सर्दियों का मौसम, इस बार बहुत ही कड़ाके की थी जिससे कड़ाके के साथ ठंड पड़ने लगी।

ठंड से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे ठिठुरते पहुंचे। जोरदार तेज ठंडी हवाओं से सभी बंदर कहां पर है थे और बहुत ही और बहुत ही परेशान थे। 

पेड़ के नीचे बैठने के बाद वह आपस में बात करने लगे कि काश कहीं से आग सेकने को मिल जाए तो ठंड दूर हो जाती । उसी बीच एक बंदर की नजर पास पड़ी सूखी पत्तियों पर पड़ी उसने दूसरे बंदरों से कहा – ” चलो इन सूखी पत्तियों को इकट्ठा करके जलाते हैं।”

उन बंधुओं ने पत्तियों को एकत्रित करना शुरू किया और उन्हें चलाने का उपाय करने लगे।

यह सब पेड़ पर बैठ गया देख रही थी . यह सब देख कर उससे, रहा नहीं गया और बंदरों से बोल पड़ी ? तुम लोग कौन हो ? , देखने में तुम आदमियों की तरह लग रहे हो, तुम्हारे हाथ पैर भी है तुम अपना भर घर बनाकर क्यों नहीं रहती ?

गौरैया की इस बात को सुनकर ठंड से कांप रहे बंदर चिड़िया और बोले, , तुम अपना काम करो , हमारे काम में पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है , इतना कहने के बाद वह फिर आज चलाने के बारे में एक दूसरे से पूछने लगे और सोचने लगे और अलग-अलग तरीके अपनाने लगे ।

इतने में बंदर की नजर एक जुगनू पर पड़ी । देखो ऊपर हवा में चिंगारी है इसे पकड़ कर आग जलाते हैं । यह सुनकर के सारे के सारे बंदर उसे पकड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगे।

यह देख चिड़िया फिर बोल पड़ी – ” यह जुगनू है आग नहीं चलेगी” । तुम लोग दो पत्थरों को खींचकर आग जला सकते हो ।

गौरैया चिड़िया की बात को सुनकर बंदरों ने नजरअंदाज कर दिया और अनसुना सा कर दिया और फिर कई कोशिश करने के बाद में अंत में उस जुगनू को पकड़ ही लिया और फिर उसे आग जलाने की कोशिश करने लगे, पर वह इस काम में कामयाब नहीं हो सके और अंत में जुगनू उनके हाथों से उड़ गए।

जुगनू के बाद बंदर काफी निराश और उदास हो गए इतने में गौरैया चिड़िया उन बंदरों को उदास और निराश देखकर फिर बोल उठी – आप लोग मेरी बात मानिए पत्थर रगड़ कर आप आग को जला सकते हैं।

इतने में पहले से गुस्सा हुए एक बंदर से गौरैया चिड़िया की बात सही ना गई और वह गुस्से गुस्से में ही पेड़ पर चढ़कर गोरिया के घोसले को तोड़ दिया।

यह देख कर कि बंदर उसके घोसले को तोड़ मरोड़ दिया है तो वह बहुत दुखी हो गया और डर कर रोने लगी इसके बाद वह उस पेड़ से उड़ करके रोते हुए कहीं और चली गई ।

कहानी की सीख – दोस्तों इस छोटी सी कहानी (Goriya Chidiya Ki Kahani) (गौरैया चिड़िया की कहानी) गौरैया और बंदर की कहानी (Gauraiya Chidiya Ki Kahani ) से हमें सीख मिलती है कि जरूरी नहीं है कि हर किसी को ज्ञान और उपदेश उसी व्यक्ति को दिया जाए , उपदेश उसी को दिया जाए जो समझदार हो और उन बातों को वह समझता हो । बेवकूफ को सलाह देने से खुद का ही बुरा हो सकता है ।

5 . किसान और गौरैया (Gauraiya Chidiya Ki Kahani )

Gauraiya Chidiya Ki Kahani || Goriya Chidiya Ki Kahani
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एक किसान था और एक गौरैया थी । किसान अपने खेत में धान की फसल गया उगाया था इस बार उसकी खेत की फसल बहुत ही अच्छा था और अन्य सालों से बहुत ही ज्यादा था । चारों तरफ हरा भरा था देखते ही देखते ही धान की फसल पूरी हो गई।

किसान अपने खेत में दिन-प्रतिदिन अपने खेत को निहारने के लिए जाया करते थे जब फसल तैयार हुआ तब वह देखा कि उनके जो धान फसल की बालियां धीरे-धीरे कम होती जा रही है । यह देख कर के किसान बहुत चिंतित हो गया और सोचने लगा कि ऐसा शैतानी का काम कौन कर सकता है ।

किसान ने चिंतित होकर एक उपाय सोचा और सारे खेत में उसने गोंद से बालियों में लगा दिया और एक जगह जाकर के छुपकर देखने लगा।

कुछ देर बाद गौरैया चिड़िया और अन्य चिड़िया भी जब धान की बालियों से धान खाने के लिए उन्हें खोलने के लिए आया और जैसे ही व धान के बालियों में बैठा उनके दोनों पैर धान के बालियों में चिपक गया । धान की बालों में चिपकने के बाद गौरैया चिड़िया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ।

यह देख गौरैया चिड़िया और चिड़िया फंसे हुए हैं आया और उस चिड़िया को कहां – कि तुम ही हो जो रोज यहां आ कर के मेरे धान की बालियों को खा कर के उन्हें नीचे तोड़कर गिरा देती हो मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा मैं तुम्हें मार डालूंगा।

किसान की बात को सुनकर गौरैया चिड़िया डर गई और किसान से कहने लगा किसान भाई मुझे छोड़ दो अबकी बार मैं ऐसा नहीं करूंगा मुझे क्षमा करो मुझे जाने दो मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं आदि आदि विनती करने लगा ।

लेकिन किसान चिड़िया की एक ना सुनी और उसने चिड़िया को निकालकर अपने गमछे में लपेटकर बांध लिया और घर की ओर निकल पड़ा।

किसान चिड़िया को पकड़कर चला रहा था और गौरैया चिड़िया चला जा रहा था ।

उसी रस्ते में लोग घास काट रहे थे उनको देखकर गौरैया चिरई उनसे छुड़ाने का आग्रह करने लगी, विनती करने लगी । और विनती करते हुए गौरैया चिड़िया गाना गाने लगती है

की ” घास के कटैया भैया ,
गंगा रे जमुना मोर खोतवा
मोर बहचवा रोवत होही कुनूक कुनूक ”

घास काटने वालों ने देखा कि एक किसान एक चिड़िया को पकड़ कर जा रही है और वह चिड़िया रो रही है। घास काटने वाले को गौरैया चिड़िया पर दया आ गई और वह किसान को बोले की छोड़ दो भैया इस छोटी सी चिड़िया को । देखो इतना रो रही है?

किसान उस घास काटने वाली की एक ना सुनी और वह आगे बढ़ता चला गया। और चिड़िया रोती चली जाती थी

जो भी उस रास्ते में आने जाने वाले चिड़िया को दिख जाती उसे दया की भीख मांगती ।

किसान आगे बढ़ता जा रहा था ठीक वैसे ही गौरैया चिड़िया को रास्ते में हल चलाने वाला किसान मिल गया उसने उसे भी दोनों हाथ को जोड़कर विनती की कि कैसे भी करके उन्हें छुड़ा दे ।

” हलवा के चलैया  मोर भैया
गंगा रे जमुना मोर खोतवा
मोर बहचवा रोवत होही कुनूक कुनूक ”

चिड़िया की गाना को सुनकर उस हल चलाने वाले ने उस किसान को कहा कि भैया इस चिड़िया को तुम छोड़ दो क्यों ले जाते हो दया करो इस चिड़िया पर। अपने बच्चों के पास जाने दो देखो यह रो रही है ।

किसान ने उनकी भी एक ना सुनी और थोड़ा सा आगे बढ़ने लगा । जैसे ही किसान आगे बढ़ने लगा वैसे ही उस हल चलाने वाले किसान ने उस पंछी पकड़े हुए किसान को कहा कि चलो भाई मुझे भूख लगी है मैं सतवा खाने के लिए जा रहा हूं चलो तुम भी मेरे साथ बैठ कर सतवा खा लो उसके बाद घर चले जाना ।

हल चलाने वाले किसान की बात को सुनकर उस पक्षी पकड़े हुए किसान ने हल चलाने वाले किसान की बात मान ली और लालच के मारे उनके मुंह में पानी आ गया और थोड़ा विश्राम कर लेते हैं और तुम इतना जींद कर ही रहे हो तो तुम्हारे साथ बैठ कर सतवा खा हि लेते है ।

किसान जैसे ही हाथ धोकर हाथ पोछने के लिए गमछे को ढीला करता है वैसे ही गौरैया चिड़िया उस किसान के गमछे से उड़कर आकाश में चला जाता है । किसान देखता ही रह जाता है ।

दोस्तों यह रही हमारी top 5 + गौरैया चिड़िया की कहानी ((Gauraiya Chidiya Ki Kahani )जो आपको बहुत ही पसंद आया होगा दोस्तों इन पांचों कहानियों (Goriya Chidiya Ki Kahani) से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है जो हमारे जिंदगी में कहीं ना कहीं काम जरूरत है मुसीबत पड़ने पर हर एक कहानी हमें याद आती है और किस प्रकार से हमें उस मुसीबत से निकलना है इन्हीं छोटे-छोटे कहानियों (Goriya Chidiya Ki Kahani) के माध्यम से हमें प्रेरणा मिलती है।

दोस्तों यदि आपको हमारी लिखी हुई कहानी ((Gauraiya Chidiya Ki Kahani ) पसंद आती है तो इस कहानियों (गौरैया चिड़िया की कहानी) को अपने दोस्तों के पास में अपने फेसबुक ग्रुप में व्हाट्सएप ग्रुप में आदि में शेयर जरूर करें और एक प्यारा सा कमेंट जरूर करें ताकि हम और अच्छी अच्छी कहानियां लिख सकें

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