TOP 3 RJ Kartik Ki Kahaniyan कर दिखाओ कुछ ऐसा

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आप सभी ने RJ कार्तिक के बारे में सुना तो होगा यदि आप ने नहीं जानते है तो मई अत देता हु Rj Kartik Story के बारे में वह एक youtuber के साथ जयपुर के रेडिओ FM में rj के रूप में काम करता है . ही आज हम उन्ही की मोटिवेशनल कहानियो को आज की इस पोस्ट में जानने वाले है –

RJ KARTIK के कहानियो के लिस्ट 

1 . बाप अपने बेटे को बनाता है और बिगड़ता भी है || RJ Kartik Ki Kahaniyan

ये कालेज की घटनाक्रम पर आधारित #कहानी है । जंहा पर दो लड़को के बारे में उसे आने वाले भविस्य और वर्तमान के भविष्य के बारे में बताया गया है । तो आइये इस कहानी को शुरुआत करते है – 

एक लड़का गरीब परिवार का है दूसरा लड़का बड़े घर जिसके घर में किसी भी प्रकार के कमी नहीं थे । गरीब घर के लड़के एक अपना 1-एकड़ का खेत था जंहा से साल भर का चावल ही निकल पाते थे बाकि के खर्चे रोजी मजदूरी करके करते थे । 

12 वी के रिजल्ट आने के बाद में सभी अपने सभी आगे की पढाई करने के लिए कंही न कंही जरूर जाते है ।  वैसे ही बहुत सारे लड़के-लड़किया ही एड्मिसन के लिए जाते है । गरीब घर के लड़के और बड़े घर के लड़के भी आगे पढ़ने के कालेज में एडमिशन के लिए जाते है । दोनों लड़को का एड्मिसन एक ही कालेज में हो जाता है ।

एड्मिसन के कुछ समय बाद में कालेज का रेगुलर क्लास शुरू होता है । वंहा उस कालेज में 200 से अधिक छात्र और छात्राये एक साथ बैठ कर के पढाई करते थे । वंहा भी दोनों लड़के रेगुलर क्लास अटेंड करते ।

RJ Kartik Ki Kahaniyan
RJ Kartik Ki Kahaniyan

गरीब घर का लड़का सायकिल से 5 किलोमीटर शुबह 9 बजे खाना खा के निकलता था । छोटे से टिफिन में दोपहर के चावल और सब्जी ले के जाता था । शाम को थका मांझा घर आता था । उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कोई अच्छा सा जूता खरीद ले अपने पुराने चप्पल को पहन कर और दो-तीन साल पुराने कपडे को पहन कर के कॉलेज जाता था । कपडे ऐसे था की उनके दो बटन के रंग अलग रहते थे । कंही-कंही पे सुईधागा से सिलाई किया हुआ ।

बड़े घर का लड़का शहर में ही रहता था । अपने बाइक में सवार हो अपने साथ में 2 दोस्तों के साथ में पैसे उड़ाते हुए कालेज आता । एक कपडे के 6 माह के बाद में फेंक देता । जुटे , चश्मे उनके लिए आम बात था । हालांकि पढ़ने में बहुत अच्छा था । रास्ते में कई रूपये होटलो में उड़ा देते ।

गरीब घर के लड़के के बहुत ही ज्यादा खुशी के बात था की उनके घर में कोई कॉलेज नहीं गया था और न ही घर में कोई पड़ा लिखा हुआ कोई आदमी था इसलिए उनके परिवार वाले बहुत ही ज्यादा खुश थे । भले उनके पास पहनने के लिए कपडे न हो ।

200 से अधिक छात्र-छात्राओं का बड़ा बड़ा क्लास था । सभी बच्चे अलग-अलग गांव से , शहरो से आये हुए थे । यंहा न किसी का अच्छे से पहचान था न ही किसी से दोस्ती था । ऐसे करते-करते दोनों फस्ट ईयर , सेकण्ड ईयर , और फाइनल को कैसे भी करके दोनों लड़के निकल लेते है ।

कालेज में छात्र-छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा थे तो तीन साल में मात्रा उनका नाम और चेहरा को अच्छी तरीके से पहचान पाते थे लेकिन कभी भी दोनों लड़के आमने-सामने बात नहीं करे थे । उन्हें दोनों को सभी का चेहरा अच्छी तरह से याद था । हालांकि की इन दोनों बहुत सारे दोस्त थे लेकिन ये दोनों आमिर लड़के और गरीब लड़के की बात है ।

एक दिन की बात है बड़े घर के व्यक्ति अपने बाइक के कंही जा रहा था और अचानक से गांव के बीचो-बीच में उसके बाइक ख़राब हो गया । वह व्यक्ति अपने बाइक को ढकेलते हुए एक बड़े से रिपेयरिंग सेंटर में ले जाता है । जंहा पर 5-6 लोग बहुत सारे मोटर सायकिल , गाड़ियों को सुधार रहे थे ।

व्यक्ति बाइक को खड़ा करके उसके बनने का बैठकर इंतजार करने लगा । पास में पेपर थे उसे उठाकर देखने लगा ।

अंदर से कोई सजला-साँवला लड़का  ( जिसकी उम्र 25-26 की होगी ) निकलता है । आते ही पूछता है – क्या खराबी है ?

कोई जवाब है । 

दूसरी बार भी लड़का पूछता है – क्या खराबी है ?

बड़े घर का व्यक्ति – उसकी तरफ बिना देखे ही कहता है रस्ते में ही अपने आप बंद हो गया । व्यक्ति पेपर को हटाकर के देखता है और देखते ही उनकी कुछ पुरानी बात याद आने लगता है । वो अब अपने 22 साल पुरानी बातो को याद करने की कोशिश करता है । अचानक से उसकी चेहरे याद आता है और कुछ देर नाम याद करने की कोशिश करता है । अचानक से उसे नाम याद आता है ।

व्यक्ति वंहा से उठकर कर के उस बाइक सजला साँवला लड़का के पास जाता है । उनके मन में पूछने उतावल हो रहा था । व्यक्ति लड़का से कहता है ( एक नाम बताते हुए ) – क्या तुम इसे जानते हो ?

लड़का है – वह मेरे पिता जी का नाम है ।

लड़का अपने पिता जी को बुलाने के लिए अंदर चला जाता है ।

अपने पिता के साथ में लड़का आता है । उनके पिता तुरंत उसे पहचान जाता है उसे उसका नाम पूरा याद था ।

बड़े घर के व्यक्ति और सजले-सावले वाले लड़के के पिता जी एक साथ दोनों गले मिल जाते है । दोनों दूसरे को अच्छे से देखने लगते है ।

सजला साँवला लड़का चरण छूकर के आशीर्वाद लेता है । 

दोस्तों लड़के है जिनका जिक्र मैंने कालेज के दौरान पढाई में किया था । आज वे दोनों 22 साल बाद फिर एक बार मिल रहे है । आज वे दोनों लड़के से व्यक्ति में बदल गए है । चेहरे में थोड़े से परिवर्तन जरूर हुए है लेकिन दोनों एक दूसरे को आसानी से पहचान रहे थे ।

व्यक्ति को घर के अंदर ले जाता है । घर में उनकी बहु लोटे में पानी लेकर के आता है और चरण छूकर के आशीर्वाद लेता है । ( लोटे में पानी देना गांव की एक परम्परा है जब भी कोई मेहमान घर आता है तो उसकी मेहमान नवाजी के लिए सम्मान के लिए किया जाता है । ) उनका छोटे से बेटी भी आकर के उसके पैर छूकर के आशीर्वाद लेता है ।

बातो ही बातो में दोनों घुल मिल जाते है । नास्ता-चाय-पानी पिने के बाद में । सजला-साँवला लड़का के पिता जी तुम मेरे लड़के को पहचान कैसे पाए ?

बड़े व्यक्ति – उनके चेहरे और तुम्हारे चेहरे सामान है कोई भी देखर ये बता देगा की ये तुम्हारा लड़का है ।

बातो में ही बड़े व्यक्ति पूछता है इतना बड़ा 2 मंजिल का घर , 5-6 काम करने वाले , बड़ा सा रिपेयरिंग का दुकान ये सब कैसे किया तुमने ।  पहले तो तुह्मरे पास पहनने के कपडे नहीं थे, सायकिल में कालेज जाते थे । आज ये सब , गाड़ी मोटर , बंगला नौकर चाकर कैसे हुआ कैसे किया तुम्हे ।

गरीब व्यक्ति ( वर्तमान में सजला साँवला लड़का के पिता जी ) कहता है – आज मेरे पास जो कुछ भी है ये मेरे पिता जी के संस्कार के कारण हो सका है । आज मै जो भी हु उनके दिए हुए संस्कार के कारण की संभव हो सका है ।

बड़े व्यक्ति – ये कैसे , संस्कार के कारण कैसे बड़े आदमी बने हो ?

गरीब व्यक्ति ( वर्तमान में सजला साँवला लड़का के पिता जी ) कहता है – मेरे पिता जी ने मुझे ये कभी नहीं सिखाया है कभी भी बेवजह पैसे को बर्बाद मत करना । जब मै कॉलेज जाता था तो मेरे पिता जी मुझे हर सफ्ताह 40 रूपये देते थे वो भी खाने के लिए नहीं सायकिल में कुछ खराबी न आ जाये और कॉपी ,पेन  लेने के लिए । दोपहर को जब कॉलेज ख़त्म होता था तो मै उस शहर के गाड़ी गरेग में काम करने के लिए जाता था । 

जंहा मुझे 10 रूपये प्रतिदिन देते थे । वंहा मै रोज 3 घंटे काम करता । शाम को थके-हारे घर आता । हर माह के 300 रुपया को अपने पास रखता । पुरे ईमानदारी के साथ में काम करता एक रुपया भी उनका नहीं खाया । हमेशा अपने पिता जी के सिखाये हुए बातो को याद करके काम करता ।

ऐसे 3 सालो तक मै उस गरेग में काम किया और उन्ही के दिए हुए पैसो से मैंने कॉलेज के तीन साल पूरा करने के बाद में अपने गांव में छोटा सा सायकिल स्टोर खोला , उसके बाद उसी पैसे से मोटर-सायकिल रिपेयरिंग का भी दुकान खोला । मोटर सायकिल का रिपेरिंग का दुकान बहुत अच्छा चला तो उन्ही आमदनी के पैसो से मै 5 एकड़ खेत लिया । जब 3-4 साल बाद खेत पैसो से बड़े गांव में दुकान डाला ।                                                                                                                                                                                              पाई-पाई को जोड़कर , खून-पसीना एक करके , 18-20 घंटे काम करके , न गर्मी देखि , न बरषाद हर दिन , शुबह शाम मेहनत करके , अपने मुँह में लातमारकर , भगवान और आपकी दुआ से आज मेरे पास है । ये सभी मेरे पिता जी के संस्कार के कारण हो सका है । कभी भी मैंने अपने पिता जी के बात को नहीं कांटा और न ही किसी भी चीज के लिए कभी जिद किया । मेरे पिता जी जो भी लाते थे उन्ही से मै खुश रहता था । वे ही मेरे लिए बहुत बड़ा था ।

और मेरी पत्नी है , बेटा है , बेटी के सामान के बहु है । मै नाती पोते वाला हो गया हु । और इसी संस्कार को मै अपने बेटे , बहु , पत्नी , अपने पोती को दे रहा हु । मै अपने परिवार से बहुत खुश हु ।

गरीब व्यक्ति ( वर्तमान में सजला साँवला लड़का के पिता जी ) अपने बातो को सुनाने के बाद में कहता है तुम क्या करते हो ?

बड़े व्यक्ति ( जो पहले कॉलेज बाइक से जाता था ) कहता है – मै बैंक के लिए लोन रिकवर करने का काम करता हूँ । लेकिन मै इस नौकरी को काफी मसकत के बाद में पाया है ।

गरीब व्यक्ति ( वर्तमान में सजला साँवला लड़का के पिता जी ) – कैसे ?

बड़े व्यक्ति ( जो पहले कॉलेज बाइक से जाता था ) कहता है – जब मै पहले कॉलेज में पड़ता था किसी भी चीज का वैल्यू नहीं करता था पैसो को पानी की तरह बहाता था । मेरे पिता जी में मुझे बचपन से कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दिया । पिता जी सरकारी जॉब में थे कभी पुराने कपडे पहनने नहीं देते थे । 

घर में जब भी कोई मेहमान आता था तो उसके हिसाब से हमेशा नए कपडे , नए-नए जूते और कई सारे सामान नए-नए ला देते थे । पिता जी के स्वर्गवास के बाद मेरा सबकुछ बदल गया । आज मै तुम्हारे बराबर भी नहीं हूँ ।

कॉलेज के दौरान मै पोस्ट ग्रैजुएशन करने के समय मेरे बहुत सारे दोस्त बने उन्होंने मुझे बहुत ज्यादा बिगाड़ दिया जिसका खामियाजा आज मै देख रखा हूँ । अपने पत्नी के जेवरात को बेचकर के मैंने ये छोटे से नौकरी कर रहा हूँ । मुझे शर्म आता है जब मै उनके सामने जाता हूँ तो । एक ग्लानि महसूस होता है ।

मुझे पछतावा होता है काश मुझे अपने पिता जी ने पहले मुझे नए-नए कपडे , जूते, और सामान , खाली लोगो को दिखावा करने के लिए ये सब नहीं किया होता तो आज मेरी ये स्थिति नहीं हुई होती । आज मै शुकुन के रोटी तो ले पता ।

 inspirational Of The Story –  

दोस्तों ये छोटी सी Rj Kartik Motivational Story हमें कुछ बातें बताती है

पहला सिख – कभी भी अपने बच्चे को जरुरत से ज्यादा लाढ-प्यार नहीं देना चाहिए क्योकि ज्यादा लाढ और प्यार मात्रा 2-3 साल के उम्र  तक ठीक रहता है । जैसे-जैसे बच्चे के उम्र बढ़ते जाते है वैसे-वैसे दिमाग भी बढ़ता जाता है ।

वही आपके लाढ-प्यार उसके आपका कमजोरी बन जाता है । वो जैसे कहता है वैसे ही आप उसके हिसाब से करते है । ये सिर्फ आपके अलद प्यार के कारण ही हो सकता है ।

दूसरा शिख – हमें अपने बच्चो को बचपन से शिक्षा के रूप में संस्कार देने चाहिए । जो आगे हमारे बुढ़ापे में उसी संस्कार से हमें पाल् सके जो की इस कहानी में गरीब घर के लड़के ने उनके माता पिता ने उन्हें बचपन से संस्कार देना शुरू कर दिए थे ।

2 . दान कैसे करना चाहिए ।। Rj Kartik ki kahani

आपको #दान की महिमा , #दान कैसे करना चाहिए , #दान किसे करना चाहिए , #दान किस दिशा में करना चाहिए , #दान किसे करना चाहिए इस सभी बातो को बारे में एक Rj Kartik ki kahani के मध्यान से बताने वाले है जिसे पढ़कर के आप #दान के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित कर लेंगे तो आइये पड़ते है #दान की महिमा की Rj Kartik ki kahani को –

ये Rj Kartik Motivational Story एक राजा और उसकी पत्नी के बीच की कहानी है । राजा एक बड़े राज्य में राज करता था । उन्होंने अपने राज में कभी किसी भी किसी को झूठ नहीं बोला , कभी भी किसी सज्जन व्यक्ति से दुर्व्यवहार से बात नहीं की । उनके महल में आने वाले सदा सम्मान करते ।

आज तक उन्होंने कभी उन्होंने किसी को अपमानित नहीं किया था । राजा बड़ा दयालु , कृपालु और बड़ा ही चक्रवर्ती राजा था जो कभी भी किसी देसी और विदेशी राजा से पराजित नहीं हुआ था । राजा दयालु और कृपालु होने के कारण राज्य में हर तीन महीने में गरीब परिवार को सोने , चाँदी , धन दौलत , अन्न , वस्त्र आदि का #दान दिया करते थे ।

सभी राज्य के गरीब परिवार के रहने वाले राजा के बहुत-खुश रहते थे । कभी भी उनके किसी ने उन्ही निंदा नहीं की थी सदा उन्हें आशीर्वाद ही देते थे ।

एक रात की बात है रानी और राजा खाना खाकर के सोने के लिए चले गए । देर रात को महरानी की अचानक से नींद खुल गयी । रानी उठकर के रानी बिस्तर से उठकर के सामने की और बरामदे की और गयी और उन्हें अपने ओछल आँखों से कुछ लोगो को देखी । फिर अच्छे से देखने की कोशिश करती है ।

रानी देखती है की वंहा कुछ मछुआरे ठण्ड से कपकपा रहे थे । ( ठण्ड का मौसम था सर्द हवाएं चल रही थी ) . रानी इसे देखकर के राजा को जगाता है और राजा से सारे बातें बतलाता है और रही कहती है – मै इन मछुआरों को कम्बल #दान करना चाहता हु ।

राजा-रानी के बातो से सहमत नहीं थे तो राजा ने कहा मछुआरे #दान के सुपात्र नहीं है ।

रानी राजा के बातो को टाल न सकी और रात भर चिंता , फ़िक्र करते हुए सो गई ।

दूसरे रात को फिर राजा-रानी को नींद अचानक से खुल गयी उसने फिर उठकर के बरामदे से देखा तो उस दिन भी मछुआरे ठण्ड से कपकपा रहे थे । रानी ने #दान करने के उद्देश्य से राजा को बिना बातये मछुआरों को बिना जगाये उन्हें नींद में ही कम्बल उड़ा कर आ गयी किसी को पता तक चलने न दिया । 

कुछ दिन बीतने के बाद में ठण्ड के चले जाने के बाद में उन मछुआरों में #दान में दिए हुए कम्बल का ये सोचकर की अब ये कम्बल उनके काम का नहीं है उन सभी मछुआरों ने अपने कम्बल के धागो को निकाल करके , एक बड़ा सा , लम्बा जाल बनाया ।

उसी कम्बल के जाल से वे हर दिन हजारो की संख्या में मछलियों को पकड़ते थे । मछुआरों को उस कम्बल के जाल से मछली पकड़ते हुए 2-3 माह से अधिक हो गया वे उससे बहुत ही ज्यादा मछली पकड़ते और उन्हें मारकर उन्हें बेच देते  ।

अचानक एक दिन राजा के राज्य में किसी दूसरे राज्य के राजा आक्रमण कर देता है । राजा इस आक्रमण से पराजित होकर के अपने राजमहल से अपने पत्नी के साथ जान बचाकर के भाग जाते है और भागकर के एक घने जंगल में जाकर के चुप जाता है । राजा को उस जंगल में एक ऋषि मिलता है ।

राजा ऋषि के पास जाकर के उनके चरण छूकर , आशीर्वाद लेकर वंहा बैठा जाता है । अपनी परेशानी को पूछता है – मान्यवर ऋषि आज तक मैंने किसी राजा के बारे में बुरा नहीं सोचा है ,

मैंने बहुत सारे #दान पुन्न किया , कभी मैंने झूठ नहीं बोला। आज तक मैंने किसी राजा से नहीं पराजित नहीं हुआ था तो आज कैसे मैं एक छोटे से राजा से पराजित होकर अपनी जान को बचाते हुए आया हु ।

ऋषि कहते है – राजा जी आपने तो कभी झूठ नहीं बोला लेकिन आपके पत्नी आपसे झूठ बोला है ।

उसकी पत्नी कहती है – मैंने क्या किया है ?

ऋषि कहता है – सारा वृतांत सुनाते हुए कहता है आपने एक मछुआरे को छुपकर कर कम्बल #दान किया था जब ठण्ड चले गई तो उन्होंने उस कम्बल से जाल बनाया और रोज हजारो की संख्या में मछलियों को मारते ,उनकी हत्या करते ,इनका पाप राजा को लगता था ।

ये #दान तुमने चोरी करके दिया है भले ही वह आप रानी ही क्यों न हो बिना राजा के परमिसन से दिया है तो इसके पाप के कारण से तुम्हे आज पराजय मिला है । हार का सामना हुआ है ।

ऋषि महराज राजा को बतलाते हुए कहता है यदि #दान करना है तो किसी सुपात्र ( जो #दान के पात्र हो ) ये व्यक्ति को #दान करो । ऋषि कहते है यदि चोरी के पैसो से #दान करोगे तो ऐसा ही होगा । ऋषि महराज ने उन्हें अपने मेहनत की कमाई का अपने जेब से 1 रूपये निकाल कर के देता है ।

और कहता यदि यदि तुम परीक्षा लेना चाहो तो इस एक रुपया के परीक्षा ले लेना । ये मेरा मेहनत का कमाई का धन है ये ये हमेश पुण्य के ही काम में लगेगा ।

ऐसे कहते हुए ऋषि महराज उसे 1 रुपया देता है ।

राजा और रानी उसका आशीर्वाद लेकर के वंहा से निकाल पड़े । रास्ते में आते-आते उन्होंने एक पंडित को देखा की उनके हाथ में दो मरे हुए कबूतर थे । वे उस मरे हुए कबूतर को उठाकर ले जा रहे थे । राजा को ऋषि की बात याद( यदि परीक्षा लेकर के देखना है तो इस एक रुपया से ले सकते हो )  आ जाती है ।

राजा महराज पहले तो पंडित को देखकर घृणा करने लगे । राजा पंडित को बुलाकर उस एक रुपया के सिक्के को देता है । राजा उसका पीछा करने की सोचते है और पीछा करने लगता है । 

पंडित उस कबूतर को फेकर स्नान करता है और दिए हुए एक रुपया के सिक्के से दुकान से गेहू के दाने खरीद के लाते है । गेंहू के दाने को लेकर के घर में लेजाकर के रख देता है ।

राजा देखता है की जैसे ही उन्होंने गेहू के दाने को घर में ले जाकर के रखता है उसके पत्नी और उसके बेटे उस गेहू के दाने को उठाकर के कच्चे खा रहे थे ।

राजा देखकर बड़ा अचम्भित हो गया । राजा उनके पास गया और पूछा की तुम ये कच्चे के गेहू के दानो को क्यों खा रहे हो ?

इसे तुम पका कर के भी खा सकते थे और पका कर खा भी सकते थे ?

ब्राम्हण से राजा से कहा मैं तो धन्य हु आपके वजह से आज मैं गलत काम करने जा रहा था आपने दान देकर मुझे गलत काम करते हुए बचा लिया । आपके एक रूपये की #दान से मैं उस काम करने से बच गया । आगे कहते है मेरे पत्नी और मेरे बेटे 10 दिनों से कुछ नहीं खाये है इसलिए अपने पेट की , भूख की ज्वाला को काम करने के लिए बिना पकाये ही इस कच्चे गेहू को खा रहे है ।

Mortal Of the Rj Kartik Motivational Story –

दोस्तों ये छोटी सी आरजे कार्तिक की कहानी हमें बहुत बड़ी बातें सिखाती है की #दान कैसे करना चाहिए , जिन लोगो को #दान करना चाहिए , किन पैसो , कैसे पैसो से #दान करना चाहिए । #दान करने के फायदे और #दान करने के नुकसान भी बताया है । यदि हमें किसी को भी #दान करना है तो हमें अपने ईमानदारी से कमाए हुए पैसो को ही #दान करना चाहिए । 

कहा भी जाता है यदि जिंदगी में #दान करना ही है तो अपने ईमानदारी के साथ कमाए हुए धन का 10 प्रतिशत सुपात्र लोगो ( ऐसे लोग जो #दान लेने के योग्य हो ) ऐसे लोगो को #दान देना चाहिए चाहिए । हालांकि #दान देने के पीछे कैसे तर्कों और नियमो को देखकर भी #दान दिया जाता है । जिसका वर्णन शास्त्रों में दिया गया है । लेकिन कुछ #दान देने के बातें ये भी – 

  1. यदि किसी को #दान देना है तो बेटे के जन्म के बाद #दान देना चाहिए इसे पुण्य माना जाता है । 
  2. यदि किसी को #दान देना है तो अक्षय तृतीया के दिन के #दान को शुभ माना  जाता है । 
  3. उत्तरायण और दक्षिणायन को देखकर को भी #दान दिया जाता है ।

इन सभी को आप अच्छे से किसी ज्ञानी ऋषि या ज्ञानी साधु संत से या ज्ञानी पंडित से अच्छे से पूछकर , विचार विमर्श करके आप अपने इच्छानुसार #दान दे सकते है । 

3 . पडोसी दोस्त की मदद ।। RJ Kartik Ki Kahaniyan

ये Rj Kartik Motivational Story एक छोटे से कालोनी की है जिसमे बहुत सारे परिवार अलग-अलग समुदाय के लोगो  कई सारे परिवार एक बड़े मातृ भाव से रहते निवास करते है ।

इस कालोनी में एक परिवार मै जिसका अपना स्वं का बड़ा सा इलेक्टॉनिक्स का दुकान है । दिखने में थोड़ा सा कठोर है लेकिन मन से बड़े दयालु है ।

उसमे एक परिवार था जिसका अपना छोटा सा कोचिंग सेण्टर था जंहा छोटे-छोटे बच्चो को घर में कोचिंग पढ़ाया करता था । ये इस कालोनी का सबसे अनुसान प्रिय व्यक्ति था जो किसी को बुरा भला नहीं सोच सकते थे । लेकिन ये थोड़े से स्वाभिमानी व्यक्ति थी वे कभी किसी से प्रकार की पैसो की उधारी लेना उन्हें अपने आप में स्वाभिमान कम करने के सामान था ।

तीसरा परिवार था जो दूसरे के यंहा प्राइवेट जॉब करता था । जो सभी के साथ बड़े प्यार दुलार और किसी भी व्यक्ति की परेशानी से उसे रह जरूर दिखाता था ।

तीनो की पत्निया घर की काम करती थी और लेकिन कोचिंग चलाने वाले के पत्नी घर में आचार , पापड़ बना के लोगो को बेचने का काम करती थी । तीनो पत्नीया जब पति घर में थके मांझे आते थे तो उनकी से करने में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं करते थे । एक पत्नी के नाते सभी प्रकार की देखभाल करती थी ।

तीनो परिवार बहुत ही ज्यादा घुला मिला , सभी परिवार अलग समुदाय के जरूर थे लेकिन किसी भी परिवार के त्यौहार , फेस्टिवल और किसी भी महोत्सव को बिना किसी भेदभाव के एक साथ सभी के घरो में जाके मानते थे । यदि किसी परिवार में किसी भी चीज की कमी महशुश होती थी तो उन्हें तीनो परिवार मिलकर उसे मदद जरूर करते थे । तीनो परिवार एक एक जॉइंट फैमली के तरह रहते थे ।

ये बात है एक साल के दिवाली के समय के आपको तो पता होता है की दिवाली के समय सभी के घर में रौनक , उत्साह और उमंग रहता है । उसी प्रकार इस परिवार में व्यापारी परिवार और जॉब करने वाले परिवार के रौनक दिखाई दे रहे ,

किसी भी प्रकार के पैसे की कमी नहीं थे । सभी अपने अपने घर के लिए दिवाली सामान घर , के लिए नए नए सामान खरीद रहे थे लेकिन उस में कोचिंग पढ़ाने वाले के घर में किसी भी प्रकार के रौनक , उमंग दिखाई नहीं दे रहे थे । उनके घर में पूरी उदासी था

टीचर जिसके घर में इस दीपावली में बहुत ही ज्यादा पैसो की तंगी था । उस दीपावली में उसके पास अपने पत्नी और परिवार के में अपने बेटी के लिए कपडे खरीदने के पैसे नहीं थे । पत्नी के उस समय आचार पापड़ भी नहीं बिक रहे थे ।

उसके स्टूडेंट भी उन्हें उस माह का ट्युसन फीस नहीं दिए थे । बहुत जी ज्यादा परेशान रहते थे वो अपनी बात अपने दोनों पडोसी मित्र को कभी भी नहीं बताये । उनके सामने जाने के बाद भी वह किसी भी प्रकार के परेशानी नहीं होने का बहाना बना देते थे ।

जब भी घर से बहार लोगो को उनके बचे हुए पैसे मांगने के लिए जाते थे  वे लोग कंही न कंही बहाना बना देते थे और जब घर में वापस आपस आते थे तो उनकी पत्नी और बेटी  घर में आते ही उन्हें पैसा मिला या नहीं यही पूछा करते थे ।

जब दिवाली तीन-दिन बचे थे तब थके हारे , बहुत परेशान होकर के बैंक में बचे हुए पैसे के लिए जाते है ।

पत्नी और बच्ची बैंक में जाने के कारण से अपने लिए बहुत ख़ुशी के साथ में लम्बी लिस्ट बना रहे थे ।

लेकिन शाम तक बैंक से पैसा न ला सका जैसे ही पति घर में आ जाता है पति और उसकी बेटी उसके सामने हँसते हुए लम्बी लिस्ट को ला कर रह देते है । लेकिन चेहरा निचे होने से उसके हंसी रुक जाते और निराशा में बदल जाते है । उसे लगने लगा था की इस बार की दिवाली में वह अपने पत्नी और अपने बेटी के लिए कपडे , सामान नहीं खरीद पायेगा ।

दूसरे दिन वह कंही बाहर जा रहे थे सोसाइटी में एक भगवान का मंदिर था । मंदिर में बड़े उदासी के साथ भगवान प्राथना कर रहे थे – हे भगवान इस दिवाली मै अपने परिवार के साथ में कैसे मनाऊंगा , मै अपने बेटी के कपडे नहीं खरीद पाउँगा , मै अपनी पत्नी के लिए गहने , एक साड़ी नहीं खरीद पाउँगा । हे भगवान क्यों आप मेरी परीक्षा ले रहे हो । कुछ तो मदद करो भगवान ।

ये कहके वंहा से चला जाता है ।

दोपहर में जब घर में वापस आते है तब उनके यंहा 20 हजार रूपये की अचार पापड़ की एडवांस मिल गया था । पत्नी और बेटी बहुत ही ज्यादा खुश थे । पति ये सब देखकर बहुत ही ज्यादा खुश हो जाते है और भाउक हो जाते उनके आँखों में आंसू निकलने लगते है और ऊपर वाले का बहुत-बहुत शुक्रिया , धन्यवाद करता है ।

उसके बाद अपने बेटी , पत्नी और अपने लिए 20 हजार रूपये में सामान , साड़ी , कपडे , मिठाईया खरीद के इस दिवाली को भगवन की कृपा मानकर हंसी खुसी के साथ , हर्ष उल्लास के साथ में तीनो परिवार व्यापारी , जॉब और स्वं एक साथ में मानते है ।

अब आप सोच रहे होंगे की अचानक से कैसे उनके पास पैसे आ गए इसके पहले तक तो पैसो के लिए दर-दर भटकते थे लेकिन अचानक से कान्हा से पैसा आ गया ।

जब वह मंदिर में भगवान से बातें कर रहा था तब उसी समय व्यापारी अपने इलेक्ट्रानिक दुकान जा रहे थे तब उनकी बातो को छुपकर सुन रहे थे वे उनके बातो को सुनकर मदद करने की भी सोचते है लेकिन वह अपने इस दोस्त के बारे अच्छी तरह से जानते थे की वह किसी भी प्रकार के पैसो की मदद नहीं लेते थे । वह एक स्वाभिमानी आदमी था ।

तब वह व्यापारी सीधे दुकान ना जाकर के 20 हजार रूपये को एक NGO में दान कर देते है और उसे ये कहते है की वह उसे उसके पते , नाम जानकारी देखर अचार-पापड़ खरीदने के लिए कहते है । तब वंहा के कोई आदमी व्यापारी के दिए हुए पैसो को लेकर के दोपहर को उस टीचर के घर में जाते और 20 हजार रूपये की की अचार पापड़ के एडवांस देते है ।

इस प्रकार से दोस्तों व्यापरी सीधे मदद ना करके अपने दोस्त की मदद करता है । और तीनो परिवार एक साथ हर्ष , उल्लास के साथ में , मंगलमय तरीके से दिवाली के त्यौहार को मानते है ।

दोस्तो ये छोटी सी Rj Kartik ki kahani जिंदगी की कुछ बातो को सीखा के जाते है । ये हमें सिखाती है की यदि किसी की मदद करनी हो तो बिना किसी को अपने नाम पते बताकर के मदद कर देनी चाहिए । दूसरी सिख  Rj Kartik Motivational Story हमें मिलती है की हमें अपने पडोसी के साथ अच्छे व्यहार बनके रखना चाहिए ताकि किसी भी मुसीबत के समय हमारी मदद कर सके ।


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