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BEST TOP 5 RJ Kartik Story Lyrics In Hindi

RJ Kartik Story Lyrics In Hindi

1 . मौत की दवा (RJ Kartik Story Lyrics In Hindi)

पहली कहानी श्रावस्ती नगरी में एक गौतमी नाम की एक कन्या रहती थी । गौतमी गरीब घर की लड़की थी जो घर का सारा काम करती थी । माता पिता को तनिक भी कष्ट नहीं देती थी । शुबह से शाम था घर का काम , खेत का काम और अन्य सभी कामो का भार संभालती थी और सभी को बड़े ख़ुशी के साथ में गुजर बसर करती थी ।

गौतमी ने कुछ साल बाद में उसकी शादी हो गई । गौतमी की जिस में शादी हुई थी उस घर में उसका आदर नहीं करते थे क्योंकि गौतमी एक गरीब परिवार की बेटी थी ।

शादी के कुछ समय बाद में गौतमी को एक पुत्र हुआ । शादी के कुछ समय बाद तक तो उसका आदर नहीं होता था लेकिन बच्चा होने के बाद में उसका आदर होने लगा ।

लेकिन होनी को कौन टाल सकता है ।

जब गौतमी का पुत्र कुछ बड़ा हुआ , इधर उधर खेलने लगा , तो विधाता ने उसका पुत्र को छीन लिया ।

फिर बच्चे के गुजर जाने के बाद में बहुत परेशान हो गई और सोचने लगी की पुत्र के जन्म के पहले इस घर में मेरा अनादर हुआ करता था और पुत्र जन्म के बाद लोग मेरा आदर करने लगे लेकिन

वो इस परेशान थी की अब उनके इस प्रिय शिशु को न जाने कंही छोड़ देंगे . पुत्र के चले जाने के गम में यह इतना खो गई की वह उसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गई थी । उनका मानसिक सन्तुल बिगड़ चूका था ।

वह अपने मृत पुत्र को गोद में उठाकर के घर घर जाने लगी और कहती थी की कोई उसे मौत की दवा दे दे ।

कभी इस घर के दरवाजे में तो कभी उस घर के दरवाजे में जाकर के रोने लगती थी और कहती थी – कोई मुझे मौत का दवा दे दे ।

न जाने कई दरवाजे में रोती बिलखती मौत की दवा मांगती हुई फिरती थी ।

वह पुत्र प्रेम में इतना खो गई थी की गौतमी अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी । भला उसे कौन समझे की इस दुनिया ने एक बार जाने के बाद में कभी भी कोई वापस नहीं आता ।

लोग यह देखकर के बड़े मज़े करते थे । देखने वाले लोग बड़े हंसी के साथ में ठहाके लगा कर के हंसा करते थे और कहते थे की पगली कंही मरे हुए की दवा होती है 

तब एक भले आदमी ने उसे बुद्ध के पास में जाने को कहा।

भला गौतमी पुत्र प्रेम में क्या करती वह अपने बेटे को गोद में उठाकर के बुध्द के पास में जाती है ।

बुद्ध को अभिवादन करके बोली – मेरे पुत्र को दवा दीजिये .

फिर तथागत ने कहा तूने अच्छा किया सो यंहा चली आई ।

बुद्ध कहा है देख इस नगर में से जिस में आज तक का किसी का मौत नहीं हुई हो कुछ सरसो के दाने ले मांग आ आना मै तुझे दवा दूंगा ।

भगवन की बात को सुनकर के गौतमी बहुत ही ज्यादा प्रसन्न हुई और सरसो के दाने के लिए चल दी ।

पहले घर में जाकर के उसने निवेदन किया – देखिये भगवन बुद्ध ने आप लोगो के घर से सरसो का दाना लेन को कहा है आप लोग सरसो देने  की कृपा करे   .

गौतमी के ये सब्द को सुनकर एक आदमी झट से घर में से सरसो के दाने ले आया और गौतमी को देने लगा । 

फिर गौतमी में पूछा पहले ये बताइये इस घर में किसी का आज तक मौत तो नहीं हुई ।

यह सुनकर के घर के लोग आश्चर्य से कहने लगे –

बड़े प्रेम से – गौतमी यह तू क्या कह रही है । यंहा कितने आदमी मर चुके है । इसका कोई हिसाब है ।

फिर गौतमी बोली – मै आपकी घर से सरसो नहीं ले सकती ?

गौतमी दूसरे घर गई सब जगह उसे वही जवाब मिला ।

फिर गौतमी को लगा की शायद  सभी नगर में यही बात हो तब उसको लगी की शायद गौतम बुद्ध ने मुझे जानबूझकर के लेने के लिए भेजा है ।

ये सोचकर के गौतमी अपनी मृत पुत्र को समसान  में ले गई और उसे हाथ में लेकर के बोली – प्रिय पुत्र मैंने तुम्हे समझा था की शायद तुंही अकेले मरने के लिए पैदा हुए हो लेकिन अब मुझे मालूम हुआ मौत सबके लिए है 

जो पैदा हुआ है उसे एक न एक दिन जरूर मरना है इतना कहकर के उसने अपने पुत्र को समसान में रखकर के वंहा से लौटआई । 

लौटकर के वह बुद्ध के पास में पंहुचा तो बुद्ध ने कहा – आखिर मिल गई सरसो ।

गौतमी बोली मुझे  क्षमा करना प्रभु अब मुझे सरसो का दाना नहीं चाहिए ।

दोस्तों ये छोटी सी rj kartik story lyrics in hindi हमें सिखाती है जिंदगी में कोई भी जीव अजर नहीं , अमर नहीं , जो आया है वो लौटकर के जायेगा । ये प्रकृति का नियम है । यंहा कोई भी जीव अमर नहीं हो सकता है । इस दुनिया में एक हाथ में आये है तो दूसरे हाथ से जाना भी पड़ेगा । और दुनिया का सबसे बड़ा साधु कोई नहीं बल्कि मृत्यु है । 

दोस्तों इस आरजे कार्तिक की कहानियां से आप सभी ने क्या सीखा है और यह Rj Kartik Story in hindi आपको कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

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2 . साधु और शेर (RJ Kartik Story Lyrics In Hindi)

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दूसरी  कहानी दोस्तों एक बार की बात है एक गांव में एक साधु था जो गांव के बाहर में अपना कुटिया बनाकर के रहता था  . साधु अपनी धैर्यता , उदारता ,  दयावान और ज्ञानी था । आस पास के लोग उसके पास में अपने प्रश्नो का उत्तर ढूढ़ने के लिए आया करता था ।

साधु का आश्रम बहुत ही बड़ा  । इसने एक बढ़िया सा सुन्दर बगीचा बनाया हुआ था । बगीचे में तरह-zतरह के फूल – फल , रंग बिरंगे तितलिओं , चिड़िया की आवाज . मनो स्वर्ग सा प्रतीत होता था ।

आश्रम के बगीचे में विश्राम करने के लिए जो भी आता था तो इसकी मनोरम सुंदरता के आगे उनकी प्रसंसा करने लगते थे .

साथ में साधु ने बगीचे में कई कुत्ते भी पाले हुए थे लेकिन वह कुत्ते कोई काम के नहीं थे ।

साधु ने बड़ी उम्मीद के साथ में बगीचे की देखभाली करने के लिए कुत्तो को पाला लेकिन जब भी कोई चोर फलो की चोरी करने के लिए आते तो कुत्ते को कुछ खिलाकर के सारे फलो को चुराकर के ले जाते थे ।

साधु कुत्तो से और चोरो से काफी परेशान था ।

एक दिन साधु जंगल के रास्ते से कंही जा रहा था .

चलते-चलते रास्ते में देखा की एक इक शेर बहुत तेजी के साथ उसके तरफ आ रहा था .

साधु शेर को आते देख तो बहुत ही ज्यादा डर गया । उसके हाव भाव बदल गए थे ।

साधु ने हिम्मत न हारी और आगे बढ़ने लगा . जैसे-जैसे वह साधु आगे की तरफ बढ़ रहा था वैसे-वैसे वे शेर भी साधु के पास आता जा रहा था .

जब शेर उनके पास में आया तो साधु शेर को देखकर के बड़ा अचम्भित हो गया ।

साधु के मन में दया के भाव पैदा हो गए और वह मासूमियत सा चेहरा दिख रहा था ।

जब शेर दूर था तो कुछ साफ नजर नहीं आ रहा थे लेकिन जब शेर जब पास में आया तब नजारा कुछ और था ।

दोस्तों क्या बता सकते है साधु ने ऐसा क्या देख लिया की उनके आँखों से नम हो गई थी .

तो मै ही आपको बता दू शेर जब उसके पास में आता है तो शेर अपना एक पैर आगे उठा कर के आ रहा था . उनके पैर में एक लम्बी कटा चुभ गया था । उनके पैरो से खून बह रहे थे ।

साधु देखकर तो बहुत ही ज्यादा डर गया लेकिन हिम्मत दिखा कर के उस शेर के पास में जाता है । वो मन में सोचने लगता है आज तो या तो मेरा अंतिम दिन होगा या मै बच जाऊंगा ।

यह हिम्मत कर के शेर के पास में जाता फिर वही सोच उनके मन में आता है और भगवन का नाम लेकर के शेर को बड़े प्यार से सहलाते हुए उसके काटे को निकलने की कोशिश करते है ।

कांटे इतना अंदर गया हुआ था की उनके पैरो में खून ही खून था । वह दर्द से बहुत ही ज्यादा कराहने लगता है ।

साधु बार-बार भगवन का नाम लेते हुए उसके कांटे को जोर से खींचता है ।

जैसे ही साधु कांटे को खींचता है वैसे ही शेर जोर से कहराते हुए दहाड़ता है मानो किसी ने उसकी पीड़ा को समझा हो , किसी ने उसकी दर्द को समझा हो । उनके आँखों से आँशु निकलने लगता है ।

शेर साधु को बड़े प्यार से उसके हाथो को चाटने लगता है और साधु भी शेर के सर को प्यार से सहलाने लगता है ।

दोनों को देखकर के ऐसा लग रहा था की उनकी दोस्ती अभी नहीं बल्कि कई सालो की हो .

साधु कांटे निकलने के बाद में अपने रास्ते में चला जाता है ।

कुछ दिन बीतने के बाद में साधु फिर उसी रास्ते से आता है तो बीच रास्ते में वह शेर फिर से उसे दिख जाता है .

शेर साधु को आता हुआ देख बड़े ही ख़ुशी के साथ गरजता है और दौड़ते हुए साधु के पास में आ जाता है और आकर के पैर को चाटने लगा ।

दोस्तों यदि आप देखेंगे की किसी भी जानवर को बचाने के बाद में वह मनुष्य से ज्यादा प्यार करने लगता है । उसके प्रति लगाव ज्यादा हो जाता है । यदि आप किसी आवारा कुत्ते को रोटी के छोटे से टुकड़े को खिला देंगे तो व आपके सामने पूंछ हिलता हुआ आप के पास में आ जाता है ।

ठीक इसी तरह से इस कहानी में भी वही हुआ ।

साधु और शेर ये दूसरे के साथ में मिलते है । दोनों एक दूसरे से मिले और साधु अपने रास्ते हो गए ।

साधु के साथ में पीछे-पीछे शेर भी आश्रम में पहुंच गया और सारे कुत्ते शेर को देखर के भाग गए ।

बाद से आश्रम में किसी भी प्रकार की चोरो होना बंद हो गया । 

दोस्तों ये छोटी सी कहानी हमें ये बात बतलाती है कि जिंदगी में हम हजार दोस्त बनाते है लेकिन जब हम बुरे वक्त में गुजर रहे होते है तब हमारा साथ छोड़कर के सभी चले जाते है और जो दोस्त हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ देता है वही हमारा सच्चा दोस्त होता है ।

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3 . मेढक से सीख (RJ Kartik Story Lyrics In Hindi)

तीसरी कहानी दोस्तों ये कहानी एक ऐसे बच्चे की है जो की एक मेढक को पत्थर मारता है तो उसके साथ में कोई अजीब सा हादसा हो जाता है अब उसके साथ में क्या होता है इसे जानने के लिए आपको इस कहानी को पढ़ना पड़ेगा .

बरसात के दिन थे . तालाब पानी से लबालब भरा हुआ था . मेढक तालाब के किनारे पर बैठे हुए थे और सभी मेढक एक ही आवाज में टर टर कर रहे थे .

कुछ लड़के वंहा नहाने के लिए आते है . और पानी में कूदकर के नहाने लगते है . उनमे से एक लड़के ने एक पत्थर उठाया और एक मेढक को दे मारा .

मेढक को जैसे ही पत्थर लगता है वो कूदकर के पानी के अंदर चला जाता है ।

मेढक को पत्थर लगना और उसका उछलकर के पानी में जाना ये देखकर के लड़के को बड़ा मज़ा आता है .

अब जब लड़के को इस काम में मज़ा आ रहा था तो वह बार-बार यही कर रहा था ।

पत्थर उठाया और दे मारा किसी मेढक को और उसको कूदते देखकर के वह बहुत ही ज्यादा खुश हो जाता था और उसके मुख में ख़ुशी के अलग ही भाव छलकने लगता था .

जब वह पत्थर उस मेढक को मारता था तो उस मेढक को चोट लगती थी ।

अगर उसे मनुस्यो की भाषा आती तो उस लड़के को जरूर प्रार्थना करता लेकिन बेचारा तो मूकबधिर है न . किसी को उनकी आवाज , उनकी दर्द भरी टर टर टरने की आवाज समझ में नहीं आ रहा था ।

की हमें पत्थर मत मारो या फिर उस लड़के को गालिया सुनाते लेकिन बेचारे करे तो करे क्या ।

चोट लगती थी और अपनी जान बचाने के लिए पानी में कूद जाते थे । अपने दर्द को सह लेने के सिवाय उनके पास में कोई और रास्ता ही नहीं था ।

अब दोस्तों कहानी में अब यंहा से ट्विस्ट आता है ।

लड़का नहीं जनता था की इस प्रकार के हंसी मज़ाक , खेल-खेल में मेढ़को को पत्थर मरना या कीड़े-मकोड़े या जो भी जिव जंतु है उनको तंग करना । उनकी जान ले लेना बहोत बड़ा पाप होता है ।

और जो पाप करता है उसे बहोत दुःख भोगना पड़ता है और मरने के बाद यमराज के दूत उसे पकड़कर के नर्क में ले जाते है । वंहा उसे बड़े-बड़े कस्ट भोगने पड़ते है । 

लड़के को तो मेढक को पत्थर मारना खेल के जैसे लग रहा था । वह उन्हें बार पत्थर मारते ही जा रहा था की तभी पीछे से आवाज आती है – पकड़ लो इसे और ले चलो यंहा से । 

लड़के ने आवाज को सुनकर तो पहले डर गया और भौचक होकर के पीछे मूड के देखा की उसने देखा की तीन यमदूत खड़े है । काले-काले यमदूत , उनकी लाल-लाल आँखे , उनके वो बड़े-बड़े दन्त , टेडी नाक , हाथो में मोठे-मोठे डंडे और रस्सी ।

लड़के उन्हें डर गया उसकी हाका मुकि बंद हो गई । ये देखकर के लड़के ने अपने दोस्तों को डरते हुए आवाज लगाई और उसके मुख से कोई भी आवाज नहीं निकल रहा था इतना डरा हुआ सहमा हुआ ।

लेकिन तालाब में कोई भी नहीं था । उनके सभी दोस्ती नहा कर के जा चुके थे ।

वह लड़का खेलने में इतना मघन था की उनके बांकी दोस्तों पर ध्यान गए ही नहीं ।

पकड़ लो इसे एक यमदूत ने दूसरे यमदूत से कहा !

दूसरे यमदूत ने कहा – ये लड़का तो मुझे गन्दा और घिनौना लगता है ।

दूसरे यमदूत ने मुँह बनाते हुए कहा – मै इसे नहीं छू सकता , ये बड़ा नीच है , मै इसे छुंगा तो मेरे हाथ गंदे हो जायेंगे . 

तीसरे यमदूत ने कहा – तो ठीक है इसे रस्सी से बांध लो और इसे घसीटते हुए ले चलते है ।

पहले यमदूत ने सलाह दी –

लड़का डरा हुआ ये सब सुन रहा था । इस बात को सुनकर के उसके हृदय की गति और तेज हो गई , और उसके सांसे फूलने लगी थी और जान निकले ही जा रही थी । उसने डरा हुआ लेकिन हिम्मत करते हुए यमदुतो से पूछा

उसने पूछा – मुझे कान्हा लेकर के जाओगे ?

यमराज ने जोर से कहा – नर्क में जंहा सारे पापी जाते ही तेल में पकाये जाते है , पकोड़े की तरह ।

फिर यमदूत ने गरजकर के बोलै – क्या पकोड़े की तरह ।

लड़के के दिमाग में पकोड़े बनाते हुए उसकी माँ की याद गई ।

बाप रे पकोड़े के जैसे पकाया जाऊंगा ।

लड़के ने जोर से कहा – मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है ? मुझे छोड़ दो लड़के ने गिड़गिड़ा कर के प्राथना की । 

तू पापी है , तू बहुत बड़ा पापी है , अब अगर तू पाप नहीं करेगा तो तुझे छोड़ दूंगा – सबसे बड़े वाले यमदूत ने कहा ।

मै कसम खाता हु मै कभी कोई पाप नहीं करूँगा ये कहकर के लड़के ने तुरंत कान पकड़कर यमराज से माफ़ी मांगी ।

यमदूत भी लड़के के मुँह से ये बात सुनते ही वंहा से गायब हो गए ।

लड़का डरते हुए , भागते हुए , आधा कपड़ो को छोड़कर के अपने घर गया । उसने माँ को सारी बात बताई और पूछा मैंने कौन सा पाप किया । 

उसकी माँ ने उसे समझाते हुए कहा – बेटा तू तालाब के किनारे सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए मेंढ़को को पत्थर मारकर के बहोत बड़ा पाप कर रहा था । तथा किसी भी प्राणी को कस्ट देना दुःख देना । जिसने कोई अपराध ही न किया हो ये बहोत बड़ा पाप होता है ।

माँ की इस बात को सुनते ही बच्चे को समझ में आ गया कि वह क्या गलती कर रहा था ।

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4 . बच्चे खाने वाली औरत और बुद्ध (RJ Kartik Story Lyrics In Hindi)

चौथी कहानी एक बार की बात ही एक बार बुद्ध किसी जगह में भाषण देने के लिए गए हुए थे और उस भाषण को दे कर के अपने नगर की और वापस हो लौठते है ।

वापस आते है तो उस नगर में बिलकुल ही सन्नाटा था , कोई शोर गुर , कोई आवाज नहीं और न ही कोई व्यक्ति दिखाई दे रहा था ।

उनके शिष्य ने उन्हें बताया – भगवान एक राक्षसी को बच्चो की मांस खाने की लत लग गई है , एक एक करके नगर के अनेक बच्चे गायब हो गए है । इसी डर की वजह से नगर की निवासी घर छोड़ दिया या फिर व फिर वो अपने घर में छुपकर बैठे है ।

बुद्ध यह भी पता चला की उस राक्षशी के कई बच्चे है ।

एक दिन बुद्ध राक्षशी के अनुपस्तिथि में खेल के  बहाने उसके छोटे बच्चे को साथ में ले आये ।

राक्षशी जब घर लौटी तो अपने एक बच्चे को गायब पाकर बैचैन हो उठी । सबसे छोटा होने के कारण उसका उस बालक से अधिक लगाव था ।

राक्षशी की पूरी रात ये सोचते हुए और बेचैनी में ही कटी की उसकी बच्चा कान्हा है ।

सुबह होते ही वह उसका नाम पुकार कर उसे ढूंढ़ने लगी .

बच्चे के खो जाने के दर्द से वह तड़प रही थी । अचानक उनके सामने से बुद्ध गुजरते हुए दिखाई देते है , उसने सोचा की बुद्ध तो सच्चे संत है जरूर अन्तर्यामी होंगे क्यों न इनसे ही अपने बच्चे की बारे में पता किया जाये ।

वह बुद्ध के पास में आकर के उसके पैरो में गिरकर के रोते हुए बोली – मेरा बच्चा कान्हा है ? बताइये उसे कोई जंगली जानवर न खा जाये । ऐसा आशीर्वाद दीजिये ।

बुड्ढा ने राक्षशी के बात को सुनकर के कहा – इस नगर के अनेक बच्चो को तूने खा लिया । कितनी ही इकलोती सन्तानो कोई भी तुमने नहीं बक्सा । क्या तुमने कभी सोचा कि उनके माता पिता कैसे जिन्दा रहे होंगे ।

बुद्ध कि यह बात को सुनकर के राक्षशी को महशुश हुआ कि उसने भी तो किसी और के बच्चे को खाया है । अब राक्षशी को अपनी गलती के लिए पछतावा हो रहा था और वह पस्चताप कि अग्नि में जल रही थी ।

ठीक उसी समय राक्षशी ने बुद्ध के सामने यह संकल्प लिया कि अब वह कभी भी कभी किसी बच्चे का मांस नहीं खायेगी । इंसानो का तो क्या वह किसी जानवर कि मांस नहीं खायेगी ।

यह कहते हुए राक्षशी ने बुद्ध से क्षमा मांगी ।

बुद्ध ने उसे समझाया – कि वास्तविक सुख दुसरो को दुःख देने , या दुसरो का रक्त बहाने में नहीं है बल्कि उनके साथ अच्छा व्यवहार करने में है इतना कहने के बाद में उन्होंने उसका बच्चा भी वापस कर दिया ।

जैसे ही राक्षशी ने अपने बच्चो को देखा उनके आँखों से आने अश्रुधारा और बढ़ गई और अपने बच्चे को गले लगाकर के खूब रोने लगी , उसे लाढ प्यार करने लगी । 

फिर उस राक्षशी ने बुद्ध के चरणों को फिर से छूकर के वंहा से चली गई । इस घटना के बाद में उस राक्षशी ने कभी भी किसी बच्ची , कभी किसी को दुःख नहीं पहुंचाया ।

दोस्तों ये कहानी हमें बतलाती है कि अक्सर लोग ख़राब संगति , ख़राब माहौल में रहकर के उसी के आदि हो जाते है और उसी कि तरह व्यव्हार करने लगते है । और उसे बुरी लत लग जाती है वो लम्बे समय बढ़ उस आदत को छोड़ी नहीं जाती है । और उसके दिमाग में के ही बात गूंजने लगती है कि अब तो उस ख़राबचीजों कि लत हो गई है , आदत हो गई है ।

ये बदलना मश्किल सा लगता है अगर आप भी ऐसा सोचते है तो आपका ये सोचना गलता है । बदलाव जिंदगी में कभी , किसी भी , कंही भी किया जा सकता है बस उस बदलाव के लिए अपने मन , आपके विचार और आपके कर्म आपके साथ में और सही से होना चाहिए इसके बाद में आप खुद को पहले से कंही ज्यादा बदल पाएंगे .

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5 .सकारात्मक सोच (RJ Kartik Story Lyrics In Hindi)

पांचवी कहानी एक दिन एक प्रोफेशर कक्षा में आते है वो छात्रों से कहते है की आज उनकी परीक्षा है ।

ये सुनकर के सभी छात्र हैरान थे क्योंकि प्रोफ़ेसर ने बताया नहीं था ।

प्रोफ़ेसर छात्रों को प्रश्न पत्र देते है ।

छात्र प्रश्न पत्र देखकर के और भी ज्यादा हैरान हो जाता है । क्योकि उसमे प्रश्न थे ही नहीं ।

प्रश्नो के जगह था एक जंगल का चित्र जिसमे एक राक्षस था ।

प्रोफ़ेसर ने छात्रो से कहा इसे ध्यान से देखो और जो विचार देखकर के तुम्हारे मन में आ रहे है उन्हें पर्चे पर लिख दो ।

बच्चो से चित्र देखकर अपने अपने विचार लिखने शुरू किये ।

परीक्षा का समय ख़त्म होते है पर्चे जमा कर लिए गए ।

सभी छात्रों ने उस पर्चे में राक्षस के बारे में लिखा – जिसकी आँखे बड़ी-बड़ी और लाल थी । शकल डरावनी थी और उसकी मुँह से आग निकल रही थी ।

प्रोफ़ेसर ने छात्रों से कहा – आज मै आप सभी को जीवन का सबसे बड़ी पाठ पढ़ाने वाला हु . आप सबने इस चित्र में इस राक्षस को ही देखा उसी के बारे में भी लिखा , एक भी बच्चे ने खूबसूरत सा जंगल देखा ही नहीं । नीले आकाश में उड़ते हुए पंछी किसी को भी नजर नहीं आई . मन मोह लेने वाली रंग बिरंगी तितलियाँ किसी भी ने नहीं देखि ,

सबने इस चित्र में केवल बुरा देखा अच्छी तो किसी को नजर आई ही नहीं , यही तो होता है हमारे जीवन में भी । हमें सिर्फ और सिर्फ नकारात्मकता ही दिखती है । अच्छाई हम देख ही नहीं पाते . दुनिया बहुत बुरी है सब तरफ धोका है इस सोच से कभी हम ऊपर उठ नहीं पाते ।

ये सच है जीवन में बहुत कुछ है जो बिलकुल उस राक्षस के जैसा है । पर ये भी सच है उससे कंही ज्यादा जंगल के जैसा खूबसूरती भी है उसे देखने की कोशिश करो . जीवन बहुत खुबशुरत लगेगा , दुनिया प्यारी लगने लगेगी .

क्यों कुछ लोग हमेशा खुश और सकारात्मकता रहते है , क्या उनके जीवन में कोई ही समस्याय नहीं है ,  तकलीफे नहीं है । सब के जीवन में है फर्क सिर्फ इतना है वो हमेशा अपने दुखो को पर रोया नहीं करते वो फोकस करते है अपनी खुसियो पर

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