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samay ka sadupyog kahani

Top 5+समय की कीमत कहानी Samay Ka Sadupyog Kahani

समय हमारे जीवन का अभिन्न अंग माना जाता है और समय के कई सारे महत्व भी है . जो लोगो को समय से और समय के पहले समय सही उपयोग करने से कान्हा से कहाँ तक पहुंच जाते है । समय के कारण ही लोग आज गरीब इंसान बड़ा आदमी , अमीर आदमी बना है और वंही जो अमीर आदमी है वह इसी समय के दुरूपयोग के कारण से गरीब आदमी बन गया है तो आज हम देखने वाले समय की कुछ samay ka sadupyog kahani को जो लोगो को समय के साथ कहा बदल दिया है ।

Samay Ka Sadupyog Kahani  का उद्देश्य 

समय को पैसे से ज्यादा महत्व दिया जाता है क्योंकि समय के रहते हम लाखो कमा सकते है लेकिन सही समय चले जाने के बाद में उस बिताये समय का कोई महत्व नहीं होता है । इसलिए समय को पैसो की तरह एक एक मिनट को पैसे की मोल की तरह खर्च करना चाहिए ।  समय को सभी लोगो को एक एक पल का सही दादूपयोग करना चाहिए यही इस कहानी का मुख्य उद्देश्य है । 

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तो आइये जानते है इस samay ka sadupyog kahani को

1 . समय का महत्व  Samay Ka Sadupyog Kahani

पहला कहानी samay ka sadupyog kahani एक छोटे से सहर में एक अमीर व्यक्ति रहता था । वह व्यक्ति अपनी साड़ी जिंदगी पैसे कमाने में लगा दिया । उसके पास में जिंदगी भर के कमाई से इतना पैसा हो गया था की वह जिस शहर में रहता था उस शहर को पुरे खरीद सकता था । उनके पास में 2 बड़े बड़े बंगले , आलिशान बिल्डिंग , नौकर चाकर , बड़े से बागान , खेत खलिहान , गाड़ी मोटर सभी सुख सुविधाओं था उन्हें तनिक भी किसी भी प्रकार के कमी नहीं था ।

लेकिन उसके पास में इतना पैसा होने के बाद भी वह अभी तक जिंदगी भर मे किसी को भी सहायता नहीं की । वह अपनी कमाई के पैसो से कभी भी फुला नहीं समाता था और खुद की कमाई की गई धन पर हमेशा गर्व महशुश होता था ।

उनके पास इतना धन हो गया था की वह बेफिजूल के खर्चो से बच के रहता था यानि के अपने लिए भी ठीक तरीके से कपडे भी नहीं पहनते थे । वह पैसे कमाने मे इतना आतुर था की जिंदगी भर पैसे ही कमाता रहा । वह कभी भी अपने परिवार , को समय नहीं दिया और पैसे कमाने के बाद मे वह कब बड़ा हो गया तो पता नहीं चला और कुछ साल मे ही

उनके नजदीक समय आ गया और एक रात उसका जीवन का अंतिम रात आ गया । और उसी रात को यमराज उसके प्राण लेने के लिए आ गए । याम राज को देखकर के वह व्यक्ति डर गया ।

तो व्यक्ति को यमराज ने कहा – अरे वो भाई तुम्हारे जीवन का समय हो गया है और अब मै तुम्हे लेने के लिए आ गया हु और अब तुम्हे मेरेसाथ मे चलना ही होगा ।

वह व्यक्ति यमराज की बात को सुनकर के कहता है – प्रभु अभी तो मैंने ठीक तरीके से अपना जीवन भी नहीं jiya है मै तो सिर्फ काम मे ही व्यस्त था , प्रभु मुझे अपने धन दौलत का उपयोग करने लिए मुझे समय चाहिए क्योंकि इस सम्पति को मैंने काफी वर्षो के बाद मे कमाया गई । 

फिर यमराज ने व्यक्ति को कहा – जीवन को समय निश्चित है क्योंकि जीवन के समय को और आगे बढ़ाया नहीं जा सकता है ।

तो फिर व्यक्ति ने विनती करते हुए कहा – मेरे पास मे जितना धन है चाहे तो उस धन मे से आधा धन ले लेकर के मुझे जान को बक्स दो ।
व्यक्ति से यमराज को पटाने की कोशिश करता है ।

वह उसे कहता है आप मेरे 90 प्रतिसत लेकिन मुरे जान को बक्स दो , मुझे एक साल जीने का मौका दो ।

फिर वह उसे एक महीने का समय देने के लिए कहता है ।
लेकिन यमराज उनके बात को मानने वाला नहीं था ।
व्यक्ति ने फिर से कहा – आप मेरा सारा धन ले लीजिये लेकिन मुझे एक महीने का समय दीजिये ।

फिर भी यमराज ने उसे न कहा
यमराज के इस बात को सुनकर के व्यक्ति ने फिर कहा – बड़ी दया के साथ मे कहा आप मुझे एक घंटे का समय दे दीजिये ।
फिर भी यमराज ने न कहा
यमराज ने उसे समझते हुए कहा – आप अपने कीमती समय को धन से नहीं खरीद सकते है एक बार जो वक्त चला जाता है उसे किसी भी धन से दुबारा नहीं लाया जा सकता है ।

इस प्रकार से उस व्यक्ति को जो अपने धन पर , अपने पैसो पर , अपने नौकर चाकर पर , अपने बड़े बड़े महलो पर से बड़ा ही घामड़ करता था आज उसे यमराज के साथ मे बाते करते समय और यमराज के बात को अपने आखरी समय मे उसे याद आ रहा था । वह इस प्रकार से अपने जीवन के अमूल्य समय को धन कमाने मे बिता दिया । और यही धन उसे आज उसे इस दुनिया  से जाने के लिए उसे रोक नहीं पा रहा था ।

फिर वह व्यक्ति अपने अप्प को कोशने लगता है और दुखी मन  के साथ मे पसताते  हुए बोला – ठीक है प्रभु आपकी जो मर्जी   मेरी आखरी इच्छा को पूरी कर दीजिये ।

फिर उस व्यक्ति ने अपने मरते हुए सैया मे एक लेटर लिखा जिसमे अपने शहर के था वह लिखता है – जिस धन को कमाने के लिए पूरी जिंदगी और आज वही धन मेरे जिंदगी के एक मिनट को खरीद नहीं सकता है इसलिए आप सही अपने जीवन के इस बहुमूल्य समय को अच्छी जिंदगी जीने मे लगाए और आप चाहे कितना भी धन कमा ले लेकिन आप अपने जीवन के कीमती समय को खरीद नहीं सकते ।

और अंत मे ये लिखकर के वह इस दुनिया से चला जाता है ।

कंही से सिख दो दोस्तों ये जिंदगी हमारा भगवन का दिया हुआ अमूल्य उपहार है जिसे कभी भी पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता है इस लिए ऐसे नई नार्मल जिंदगी को बिताने के साथ मे जिंदगी जीना भी चाहिए । और कल क्या होगा किसी को भो पता नहीं है और जो आज महारे साथ मे हो रहा है उसे हम अच्छी तरह से जी सकते है ।


दोस्तों ये छोटी सी Samay Ka Sadupyog Kahani से कैसे लगी ? और छोटी सी Hindi Samay Kahani से आपने क्या सीखा ?

इस Samay Ka Mahatva Story In Hindi यदि अच्छी लगी हो तो इस Samay Ka Sadupyog Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा मात्रा में शेयर करे , व्हाट्सअप , हो , पिंटरेस्ट हो , ट्विटर हो , फेसबुक हो , जो भी आपके पास में इस समय की कीमत समय का महत्व कहानी को शेयर जरूर करे ।

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2 . चींटी और चिड़िया की कहानी -Samay Ka Sadupyog Kahani

हमारी दूसरी Samay Ka Sadupyog Kahani एक बार की बात है एक चीटी और एक चिड़िया दोनों जंगल में रहा करते थे । चींटी जमीन के अंदर रहती थी और चिड़िया पेड़ के ऊपर में घोषला बना के रहती थी ।
दोनों की खूब गहरी मित्रता थी । दोनों एक दूसरे से हसी मज़ाक , अपने आहार चीज़ो को बाटकर कर के खाते थे लेकिन चिड़िया बहुत ही आलसी किस्म की थी ।

वह किसी न किसी बहाने कर के पेड़ के इस डाल से उस डाल में जाकर के सो जाती थी और वंही छोटा सा चींटी बेचारा अपने पेट पालने के लिए जगह जगह में मारा फिरता था कभी इस जगह से तो कभी उस जगह में जाता था और जब भी उसे को दाने मिलता था उसे बड़े मेहनत के साथ में मुँह में दबा कर के लाता था ।

चींटी अपना हर काम को समय पर पूरा कर लेती थी चाहे वह अपने लिए भोजन ढूंढ़ना हो चाहे वह अपने लिए पानी ढूढ़ना हो वह हर काम को अपने निश्चय समय में पूरा कर लेता था ।

एक दिन की बात है जब चींटी अपने मुँह में उससे अधिक बड़ा दाने को उठाकर के ला रहा था तो चिड़िया ने यह देखकर के हसी मज़ाक करने लगा था लेकिन चींटी चिड़िया के बातो को ध्यान नहीं देता था ।

चींटी रोज कुछ न कुछ दाना अपने पेड़ के बिल में ले जाकर के रख लेता और उसके पास में इतना दाना हो गया था की वह पुरे बरसात में आसानी के साथ में अपना जिंदगी को काट सकता था वंही चिड़िया थी आलसी किस्म की वह न तो दाना एकत्रित करता था और ना ही कंही जाता था बस उसे किसी भी जगह चारे दिख जाती थी वंहा जाकर के दाने चुप के आ जाता था ।

और ये सिलसिला ऐसा ही चलता रहा । एक दिन चींटी ने चिड़िया को कहा – देख बहना मै तुम्हे रोज की तरह आज भी कह रही हु मेरी बात कुछ ही दिनों में बरसात होने वाली तो अपने लिए कुछ दाना पानी इकट्ठा करो जिससे बरसात में तुम्हे ज्यादा परेशानी न

तो इस पर चिड़िया ने उनके बात को अनसुना करके वह से उड़ गया ,

ये उसका रोजाना काम था वह ऐसा ही उसके बातो अनसुना कर के उड़ जाति थी ।

कुछ ही दिन बाद बरसात आ गई और उस समय चिड़िआ अड्डा था अब चिड़िया के छोटे छोटे चूजे भी थे । और कुछ दिन बाद झमाझम बारिश होने लगी जिससे चिड़िया अपने बच्चो के लिए दाना पानी नहीं ला सकी और भूख के कारण के जोर जोर से चिल्लाने लगी ।

ये देखकर के चिड़िया को उस चींटी की बाते याद आने लगी , उन्हें अहसास हो गया की काश मैंने उनके बात को मान ली होती , काश मै भी उनके तरह दाना एकत्रित कर ली होती तो आज ये दिन देखने को नहीं मिलता । उन्हें अपने समय को नस्ट करने का खेद था । उसे अब लग रहा था की समय क्या चीज होता है ।

इसके बाद में लगातार 2 दिन तक बारिश होती रही और इस ठण्ड और बरसात के पानी , भूख के कारण चिड़िया के एक बच्चे नहीं रही । वह देखकर के बहुत रोने लगी । अपने आप को कोशने लगी ।

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और कुछ घंटो के बाद में बारिश काम हुई तो चिड़िया उस चींटी के पास में रोते हुए गुहार लगाते हुए जाती है और अपना दुखड़ा सुनती है और अंत में सारा कहानी को सुनने के बाद में चींटी का दिल पसीज जाता है और वह अपने दाने को चिड़िया को दे देती है ।

दोस्तों ये छोटी सी कहानी हमें जिंदगी की कुछ बड़ी बाते को सीखा के जाती है । समय किसी का मोहताज नहीं होता है आज आपका समय है तो कल किसी और का समय होगा ये तो सार निश्चित है इसलिए जिंदगी में चींटी की तरह बनो ना की चिड़िया की तरह । और अपना समय को सही से सदुपयोग कर के उपयोग में लाओ ।


दोस्तों ये छोटी सी Samay Ka Sadupyog Kahani से कैसे लगी ? और छोटी सी Hindi Samay Kahani से आपने क्या सीखा ?

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3 . समय की पहचान – Samay Ka Sadupyog Kahani

हमारी तीसरी कहानी Samay Ka Sadupyog Kahani एक किसान बैल के गाड़ी में खाद लेकर के आ रहा था रस्ते में उसे एक चमकदार पत्थर दिखाई दिया और बैल गाड़ी से उतरा और उस पत्थर को उठकर के बैल के गाड़ी में बांध दिया ।

दूसरी तरफ से एक जोहरी एक घोड़े पर आ रहा था । जोहरी का मतलब होता है कीमती पत्थर को देखने वाला , कित्ती पत्थर का बहुत बाद जानकर होता है की कौन सा पत्थर हिरा है , कौन सा मूंगा है , कौन सा कांच है और कौन सा कीमती है और कौन सा बेशकीमती है ये सब का जानकर होता है .

वह उस किसान के बिलगाडी के पास में आकर के देखता है की जो किसान है वह उस कीमती पत्थर को बैल के गले में बढ़ रखा है ।

उसे देखकर के मन ही मन सोचने लगता है की पागल है जो इतना सुनार कीमती पत्थर को बैल के गले में बांध रखा है । ये सोचकर  के अपने घोड़े से चढ़े चढ़े कहा – भाई ये कीमती चमकदार पत्थर जो तुमने बैल के गले में बंधे है वह बैल के गले में सोभा नहीं देता यह हमें दे दो इसे मै अपने घोड़े के गले में बांधूंगा .

bolo कितने में दोगे ?

किसान तो पहले सोचते रहा उसके बाद में उस भोले किसान ने कहा – एक रूपये दे दो ।

जोहरी बहुत ही ज्यादा कंजूश था और तेज दिमाग का भी था उसे लगा की वह किसान पत्थर के बारे में कुछ जानता नहीं है इस लिए उसे बेवकूफ बनाते हुए कहता है ।
वह कहता है की एक रूपये तो बहुत ही ज्यादा है आठने ले लो ?

किसान में अपना पत्थर को आठने में देने से मना कर दिया और जोहरी वंहा से ये सोचकर के चला गया की मेरे जाने के बाद में किसान बुला कर के दे देगा ।

किसान कुछ ही दूर में गया ही था की एक दूसरा जोहरी उनके पास में आ गया । उसने भी बैल के गले में पत्थर देखा – पत्थर को देखकर के उसने भी कहा – भाई क्या तुम इस पत्थर को बेचोगे ।

किसान ने सोचा की डेड रुपया कहूंगा तो एक बार में यह सौदा हो जायेगा । ये सोचकर के किसान ने कहा डेड रुपया लूंगा ।

किसान की कहने की बस देरी थी की जोहरी ने अपने जेब में डेड रुपया निकाला और किसान को दे दिया और अपने पास में पत्थर को रख लिया .

कुछ दूर जाने के बाद में फिर पहले वाले जोहरी के मन में विचार आया वह पत्थर तो है बहुत ही जयदा कीमती क्यों न मै उस पत्थर को एक रुपया ही देकर के खरीद लेता हु । यह सोचकर के किसान के रस्ते में वापस लौट गया ।

और देखा की दूसरे जोहरी ने उसे खरीद लिया है ।

दूसरे जोहरी के जाने के बाद में उसने किसान से कहा तुम बड़े ही मुर्ख किसम के हो तुम्हे हजारो की कीमती हिरे को कौड़ियों के भाव में बेच दिया ।

वह जौरी अंदर से बहुत ही ज्यादा पास्ता रहा था और किसान को अपनी बार बार उसे मुर्ख कह रहा था ।

पीछे से कुछ ही दुरी पर एक संत आ रहे थे उसने जोहरी और किसान के बातो को बड़े ध्यान से खड़े होकर के सुन रहा था । संत किसान के पास में आया  ।

किसान और जोहरी के बातो को सुनकर के संत ने जोहरी को कहा – किसान तो बाला सीधा साधा आदमी है भला तुम तो हिरे के परख रखने वाले जोहरी हो तुम्हे तो पता था उस पत्थर के बारे में । जो व्यक्ति सही समय में सही निर्णय नहीं लेता उसकी यही दसा होती है और पश्चाताप करने से क्या फायदा ।

दोस्तों ये छोटी सी samay ka mahatva in hindi हमें बतलाती है की यदि हम सही समय पर , सही निर्णय लेते है , सही फैसले लेते है तो सही निर्णय लेने से वह व्यक्ति अपने जिंदगी में बहुत आगे जाता है वह अपने जिंदगी में कही पीछे नहीं आता है ।


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4 . गिलहरी की कहानी – Samay Ka Sadupyog Kahani 

हमारी चौथी कहानी Samay Ka Sadupyog Kahani एक गिलहरी यह छोटे से जंगल में रहती थी और अपने काम में रोज समय में आती थी और अपना काम को पूरी ईमानदारी के साथ में पूरी मेनहत , लगन के साथ में करता था । रह अपने समय से ज्यादा मेहनत के बाद भी अपने आप को बहुत ही ज्यादा खुश रख  पाती थी उसे अपने काम को लेकर के किसी अन्य जंगल के जानवर से कोई शिकायत नहीं था ।

वह अपने आप में बहुत ही सुन्दर , अपने काम से बहुत ही ज्यादा बहुत ही ज्यादा संतुस्ट था क्योंकि उसे जंगल के शेयर ने उसके मेहनत के बदले में 5 बोरी अखरोट और 1 बोरी बेर देने का वादा किया था ।

गिलहरी कभी काम करती करती थक जाती थी वह सोचती थी की कंही आराम कर लू और जब भी वह आराम करने के लिए बैठा था तो उसे याद आता था की उसे अखरोठ और बेर की याद आ जाता था और गिलहरी फिर से काम में लग जाती थी ।

गिलहरी जब भी अपने दोस्तों , अपने साथ वाले गिलहरी को खेलते हुए , गप्पे लड़ाते हुए , हंसी मज़ाक करते हुए देखती थी तो उसे भी खेलने का मन करता लेकिन फिर उसे शेर के वादा याद आ जाता और फिर से वह काम में लग जाता ।

ऐसा नहीं है शेर उसे अखरोठ और बेर नहीं देना चाह्ता था बल्कि ऐसा भी नहीं है जंगल के राजा बहुत ही ईमानदार था वह किसी को बिना काम के कुछ भी नहीं देता था और काम के बदले में वह मन मुताबिक , वादा के अनुसार समय में दे देती थी ।

और ऐसा सिलसिला रोजाना होने लगा गिलहरी आता और काम ख़त्म कर के चला जाता ऐसा करते करते उसे पुरे साल भर से अधिक हो गया ।

वो अब काम से इतना थक गया था और उसका सरीर भी अब जवाब देने लगे थे । वह समय से अधिक काम , अधिक मेहनत से थक चूका था और कुछ ही दिन बाद शेर अपने काम के मुताबिक उसे 5 बरो अखरोट और 1 बोरी बेर देती है ।

गिलहरी उस बोरी के पास में बैठकर के सोचने लगता था और अपने सर से पसीने को पोछते हुए मन ही मन थके हालत में कहती है – अब तो मै इतना थक गई हु इस काम को करते करते । अब इस अखरोट और बेर का क्या काम अब तो मेरे दांत भी घिस गए है जिससे मै इनको चबाकर के खा सकू .

ये सोचकर के मन ही मन उदास होकर के बैठा रहा ।

दोस्तों ठीक इस Samay Ka Sadupyog Kahani की तरह ही हमारी जिंदगी भी हो गई है । हर मनुष्य पैसो के लिए , नौकरी के लिए , जब उसे 60 साल के उम्र में उसे पैसे मिलता है तो वह पैसा कुछ काम का नहीं होता है इसलिए दोस्तों गहरी की तरह काम न करके अपने समय को सही तरीके से उपयोग करो ।


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5 . समय और समझ – Samay Ka Sadupyog Kahani

हमारी पांचवी कहानी Samay Ka Sadupyog Kahani दोस्तों किसी ने क्या खूब कहा है समय और समझ दोनों एक साथ में किसी खुशनशीब को ही मिलता है क्योंकि अक्सर हमारे साथ में होता है की समय में समझ नहीं आती और सही समय आने पर समय निकल जाता है । 

कहानी samay ka mahatva in hindi  ये है की की लन्दन के मिनिट्री में उस समय सर एडवर्ड टॉमस उस समय के निर्माण और यातायात के मंत्री थे । लन्दन में एक बहुत बड़े काम को कराने के लिए टेंडर निकाले।

डेंडर में कई लोगो ने आवेदन किया हुआ था , छोटे बड़े सभी निर्माण करने वाले करने वालो ने आवेदन दिया हुआ था इस टेंडर में एडवर्ड टॉमस के दोस्त भी थे । वह एडवर्ड टॉमस से मिला और एडवर्ड टॉमस ने कहा की तुम टेंडर के पूरी कागजात को पूरा करो मै तुम्हे टेंडर दिलाने की पूरी कोशिश करूँगा ।

एडवर्ड टॉमस कड़ाई से समय का विशेष महत्व रखते थे । ये सुनकर के उसके दोस्तों बहुत ही ज्यादा खुश हो गए । और उसका टेंडर भी मंज़ूर हो ही गया ।

उसने उसे फोन में बताया की उसे निर्माण के लिए अवदान पात्र को ले जाये और काम शुरू करे और मिलने के लिए दोपहर के 12 बजे का समय लिया गया ।

ठीक बताये गए समय के अनुसार वह ऑफिस पहुंचने के लिए घर से निकला और ठीक समय में एडवर्ड टॉमस के ऑफिस में पहुंच गया और ठीक उस समय घडी में 12 बजकर के 3 मिनट हो रहे थे ।

किसी ने उन्हें आने की खबर देखि । एडवर्ड टॉमस ने अपने हाथ की घडी को देखा तो उसने अपने पिय को बुलया और कहा की उसे कहिये गए की अब उसका डेंडर कैंसिल कर दिया गया है ।

एडवर्ड टॉमस के आला अधिकारी ने ठीक वैसा ही किया वह उसके दोस्त के पास में गया और एडवर्ड टॉमस के कही बात को बतला दिया ।

यह सुनते ही वह हड़बड़ा गया और वह जंहा था वही से एडवर्ड टॉमस को फोन किया और पूछा की – की भाई आखिर बात क्या हो गई ( बड़े प्रेम के साथ में )

एडवर्ड टॉमस ने बहाना बनाते हुए कहा की टेंडर नामंज़ूर हो गया है ।
उस व्यक्ति ने कहा – मगर क्यों आपने तो कहा था की टेंसर मुझे मिला है ?

एडवर्ड टॉमस ने कहा – हां कहा था तुम समय पर कार्य पूरा नहीं करोगे ।
सर – मै हर हाल में फुरा करूँगा ? एक मौका तो दीजिये ( हड़बड़ाते हुए कहा )

एडवर्ड टॉमस ने फिर कहा – अरे मुझे विस्वास है तुम नहीं करोगे । तुमने मुझे मिलने के लिए 12 बजे का समय दिया था और अब 3 मिनट के let में तुम यंहा पहुंचे हो तो इससे जाहिर होता है की इससे  समय पर पूरा नहीं करोगे । ये कहकर के उसके एडवर्ड टॉमस ने फोन रख दिया । 

तो इस samay ka sadupyog kahani की तरह ही ठीक जिस व्यक्ति को अपने समय का कदर नहीं होता है उस व्यक्ति की बात की , उस व्यक्ति की समय के हिसाब से कोई कीमत नहीं होता है और यदि आप ही डिसाइड करे की आपको एडवर्ड टॉमस बनना है या फिर उसके दोस्त की तरह ।


दोस्तों ये छोटी सी Samay Ka Sadupyog Kahani से कैसे लगी ? और छोटी सी Hindi Samay Kahani से आपने क्या सीखा ?

इस Samay Ka Mahatva Story In Hindi यदि अच्छी लगी हो तो इस Samay Ka Sadupyog Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा मात्रा में शेयर करे , व्हाट्सअप , हो , पिंटरेस्ट हो , ट्विटर हो , फेसबुक हो , जो भी आपके पास में इस समय की कीमत समय का महत्व कहानी को शेयर जरूर करे ।

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दोस्तों ये रही हमारी टॉप फाइव कहानी जो समय के महत्व को बतलाता है । इस हर कहानी में कुछ न कुछ बताया गया है जो आपको जिंदगी के उस समस्या और समय के महत्व के बारे में समझ में आ गया होगा । क्योंकि जिंदगी में समय के हिसाब से जो व्यक्ति अपने आप को नहीं ढाल सकता तो वह व्यक्ति कान्हा से कहा पहुंच जाता है ।

यदि आप देखेंगे तो कल तक कई लोग जिनके पास में खाने के लिए , दाने दाने के मोहताज थे और उन सभी लोगो अपने समय के सही सदुपयोग से अपने समय के सही उपयोग से किया है उसने अपने मेहनत से अपने परिश्रम से आज आराम के साथ में बैठकर के दो लोगो और खाना खिला सकता है और समय सब का बदलता है ।

वंही आप देखेंगे की जिनके पास में बहुत ही ज्यादा पहले पैसे थे वो आज एक पैसे के मोहताज हो गए है क्योंकि उसने अपने आप को समय के हिसाब से नहीं ढाला , उसने समय की इज्जत नहीं की , वह अपने पैसे से गलत उपयोग किया , समय का दुरूपयोग किया तो आज उनका ये हालत हो गया ।

तो दोस्तों इस कहानी को आप सभी पढ़ने के बाद में समय में सदुपयोग के बारे में आ गया होगा तो इस कहानी को अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे ।

 

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