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Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi

TOP 10 Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi

यदि आपके भी जिंदगी में प्रॉब्लम चल रही हो कुछ समझ नहीं आ रहा । अगर सपनो के सफर में हारने का मन कर रहा है । सब कुछ छोड़कर के सामान्य यानि नार्मल जिंदगी जीने का मन कर रहा है तो ये कहानी आपको हिम्मत देगी । और इस छोटी सी Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi से आप काफी कुछ शिख सकते है और सीखने को मिलेगा ।

इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari को पढ़ने के बाद में आपके मन में , आपके दिमाग में एक तेज गति से , बिजली की गति से आपके अंदर motivation की आग उठेगी जिससे आप अपने जिंदगी के हार समस्या का समाधान , हार परशानी का सलूशन , और यंहा तक की इस Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi को पढ़ने के बाद में आप हार मान गए हो तो आप 100% उस हार से फिर से नए जोश के साथ , उस मकान को हासिल करने के लिए उठ खड़े होंगे जिसके कारण से आपने हार मान ली थी ।

ये Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi है जो जिंदगी के उस मोड़ की कहानी बो बतलाती है जो हमारे साथ में , हमारे जिंदगी में , कभी न कभी घटित होता है जिससे हम कुछ नहीं पाते है । लेकिन आप इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi से उन जिंदगी के सभी पहलुओं के साथ में सिख पाएंगे जिन्हे आपने सीखने की कभी कोशिश भी नहीं की होगी । 

तो चलिए आगे बढ़ते है हम आपने इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi के सीरीज़ में और मैं आप लोगो से एक बात और कहना चाहता हु की यदि आप इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari को पढ़ रहे है तो आप इक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इसे अपने दोस्तों के पास जरूर शेयर करे ।

1 . हार मत मानों (Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi)

ये Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi है एक आदमी और एक गधे की इस Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi को आप ध्यान से पड़ना और समझने की कोशिश करना क्योंकि ये Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari आपकी सोच बदलकर के रख देगी ।

एक आदमी जंगल से जा रहा होता है । उस आदमी के साथ में एक गधा भी होता है और वह दोनों जंगलो के बीचो बीचो दोनों जा रह होते है । दोनों जंगलो के बीच में थे और खुश दूर चलने के बाद में उस आदमी के साथ चल रहे गधे एक गड्डे में गिर जाता है ।

वो गधा काफी कोशिश करता है उस गड्डे से बाहर निकलने की , कई बाहर कोशिश करता , कभी आगे पैरो को जोर से कोशिश करता तो कभी पीछे पैर , तो कभी चोरो पैर से पुरे कोशिश करने के बाद भी वह उस गड्डे से नहीं निकल पाता है ।

उसके साथ में आ रहे व्यक्ति भी उस ने कई प्रयत्न किये उसे गड्डे से निकालने के लिए , कई तरह के पैतरे अपना लिया । उस गड्डे में फसे गड्डे को निकालने में 1 घंटा हो गया , 2 घंटा हो गया और 3 घंटा भी हो गया ।

उस व्यक्ति ने उसे निकल नहीं पाया और पुरे 3 घंटे तक कोशिश करने के बाद वह व्यक्ति थक जाता है और हार मान जाता है की अब उसका गधा उस गड्डे से कभी नहीं निकल पायेगा . ये सोचकर के वो निराश हो जाता है और एक छॉव वाली जगह में जाकर के सुस्ताने लगता है ।

वयक्ति जब पेड़ की छाव में बैठा ही था की उसके मन में विचार उठता है की मै गधे को नहीं निकल पाउँगा , अब मुझे इस गधे को इसी गड्डे में दफ़न कर देना चाहिए । ताकि इसे कोई भी जानवर मारकर के खा न ले ।

वह व्यक्ति छाव वाली जगह से उठता है तो उसे पास में ही मिट्टी का देर दिखाई देता है । वह आदमी उस मिटटी की ढेर से मिटटी लेकर के उस गड्डे में गधे के ऊपर डालता है ।

वो थोड़ी थोड़ी मिटटी उस गधे के ऊपर लेकर के ऊपर डालता है । जैसे जैसे वह व्यक्ति गधे के ऊपर मिटटी डालते रहा गढ़ मिटटी से ऊपर आता रहा ।

दोस्तों वह व्यक्ति जो एक समय में हार मानकर के पेड़ के छाव में बैठ गया था और वह व्यक्ति गधे को दफ़नाने लगता है की वह गधे नहीं को दफना देंगे का निश्चय किया की उस गड्डे को बचने का कोई तरीका नहीं है ।

लेकिन जिस तरीके से वो आदमी उस गधे को दफना रहा था उसी तरीके से उस गधे की जिंदगी बच गई ।

अब आप सोच रहे होंगे की दोस्तों वो गधे तो फस गया था तो वह कैसे बच गया तो मै बता देना चाहता हु दोस्तों जब वह व्यक्ति उस गधे के पीठ में मिटटी ले जाकर के डालता तो वह मिटटी गधे के पीठ से होकर के नीचे गिरता और पैरो के टेल में जा दबाता ।

और जैसे जैसे मिटटी की मात्रा बढ़ती गई उस गड्डे में भी मिटटी की मात्रा भी बढ़ते गया जिसके कुछ ही समय में उस गड्डे में इतनी मिटटी हो गया जिससे की गड्डे एक बार फिर जोर कोशिश कर के बाहर निकल गया ।

दोस्तों हमारे जिंदगी में , हमरे लाइफ में भी ऐसा वक्त बार बार आता है जब हमें लगता है की हमारी जिंदगी में ऐसा मुस्किले है जिसका कोई हल नहीं है लेकिन सच्चाई तो यह है ऐसा कोई मुश्किल ही नहीं है जिसका कोई हल न हो । यानि की हर मुश्किल का हल है ।

दोस्तों ये छोटी सी Sandeep Maheshwari Story In Hindi हमें जिंदगी की बहुत कुछ सीखा के जाती है यदि हम जिंदगी में कोई समस्या से , परेशानी , मुश्किल से हार मन जाते है तो हमारे साथ में हार ही प्राप्त होगा यदि हमने इन सही मुस्किलो , परेशानियों को डटकर के सामना किया तो वही हार जो हमने अभी सोचे थे वो हार हमारी जित में बदल जाती है इसलिए दोस्तों कभी भी जिंदगी में हार नहीं माननी चाहिए । बल्कि उस परेशानी का डटकर के सामना करना चाहिए ।

2 . एक चैम्पियन की कहानी (Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi)

जब वो इस दुनिया में आया था तो उसे बिल्कुल भी पता नहीं था । डर क्या होता है । उसे कुछ भी नहीं पता था एकदन फियरलेस । लेकिन वह जब बड़ा हुआ । मतलब की 10 साल का हुआ तब वह बिना किसी डर के कहता है मुझे इंजीनियर बनना है , नहीं मुझे डॉक्टर बनना है , मुझे पापा जैसे बिज़नेस मैन बनाना है ।

मुझे ये करना नै , मुझे वो करना है , उसे सब करना था , उनके कई सपने थे , जो वह पूरा करना चाहता है । पर किसी बार के । हो हार चीज को बेबाक के साथ में , बिना किसी के डर के , बिना किसी झिझक के , चाहे उनके सामने कोई भी व्यक्ति ही क्यों न हो , वह अपनी बात को उसके सामने ही रख देता था ।

लेकिन बेचारा अभी भी था वो सोसाइटी के नाम से अनजान था ? उसे नही पता था ये सोसाइटी क्या होती है ?

जिसे उसका नाम भी पता नहीं था लेकिन रिजल्ट के दिन आया उसका भी काल फिर उसी दिन से एक नई कहानी की शुरुआत हुई ।
12 वी के बाद सब रिस्तेदार , परिजन , यंहा तक की मम्मी पापा भी उसे कहने लगे , बेटा डॉक्टर बन जाओ , बेटा इंजिनियर बन जाओ , बेटा CA बन जाओ , बेटा वकील बन जाओ । सभी लोगो ने अपनी अपनी बात रखी लेकिन वह अपना बात , अपनी मन की बात जो वह असल में बनना चाहता था ।

किसी के नहीं बता सका । जो भी बात था मन सपने नहीं हो पा रहे थे पुरे । किसी ने उसके सपने के बारे में नहीं पूछा , किसी ने उसे ये भी नहीं पूछा की उसे बनाना क्या है ।

कुछ समय बाद उसके किसी की न सुनी , न अपने माँ पिता और नई ही रिस्तेदार की और किया बिज़नेस स्टार्ट .

देखते ही ही देखते परिवार , रिस्तेदार सब हो गए उसके खिलाफ इधर किया था किसी से पूछ कर के बिज़नेस स्टार्ट ।

पर कुछ महीने बाद वो गया बिज़नेस में पूरी तरह से फ़ैल .

बेचारा नहीं जनता था , एक बार भी नहीं मिली सक्सेस , क्योंकि सब उसके खिलाफ थे । रिस्तेदार वालो ने तू खूब कोशा , देखने वालो ने नाक ने दम कर दिया , लोग उसे फेलियर कहने लगे ।

बेचारा अभी भी वह था सोसाइटी से अनजान , उसे नहीं पता था की ये सोसाइटी होता क्या है ।

उसके घर वालो की बात मणि और करने लगा 9 से 6 का जॉब ।

उसने अपना फैसला लिया जॉब के पैसे को सेव करे , बचा के करेगा वो खुद का बिज़नेस । पर उसका ये सपना भी नहीं होने दिया पूरा और उसका ये सपना भी रह गया अधूरा .

कुछ साल बाद उसकी शादी करा दी गई । उसे शादी नहीं कह सकते उसे जिम्मेदारी बड़ा दी कह सकते है ।

कुछ नया करने से पहले वो 100 बार था वो सोचता , आज ये करुगा , या आज वो करूँगा , या फिर कल करुगा ।

या फिर कहो की वो सोसाइटी के नाम से था वो डरता । सोसाइटी के नाम से वो कुछ भी नहीं करता । उसे डर लगता था की लोग उसके बार में क्या कहेंगे , यदि कोई छोटा काम करने लगूंगा तो लोग ताना मारेंगे , लोग मुझे कहेंगे फिर फेलियर , बिसनेस के पहले मुझे लोग कहने लगेंगे फेलियर ।

वो सोसाइटी के नाम से आज भी था डरता ।

वो रिस्क लेने से नहीं डरता था वो डरता था तो सोसाइटी के नाम से ।

फिर कुछ साल बाद हुआ जॉब से रिटायर और किया खुद को रूम में बंद और जिंदगी के बारे में सोचता रहा ।

उसे समझ नहीं उसने अपने जिंदगी में क्या किया और मन मन ही मन बड़बड़ाने लगता , की काश नहीं सुनता मै लोगो की बात ।

काश बिज़नेस में फ़ैल होने के बाद फिर से कोशिश करता एक बार ।

और फिर बस

जिंदगी में वो कुछ भी नहीं कर पाया ।

दोस्तों आप सोच रहे होंगे की एक चैम्पियन की Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi  इस तरह से अंत होगा । दोस्तों ये Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi थी एक चैम्पियन की और इक Sandeep Maheshwari Story In Hindi है चैंपियन की जो इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari को पड़ रहा है । और आज मुझे प्रॉमिस कर दो की एक चैम्पियन की इंडिंग इस तरह से नहीं होनी चाहिए यानि की ।

आप इस Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi वाला चैम्पियन नहीं बनना है बल्कि आपको वो चैम्पियन बनाना है जिसे सोसाइटी डरना नहीं है बल्कि सोसाइटी को अच्छा बनाना है , बिगड़े हुए सोसाइटी को ठीक करना ताकि हर कोई व्यक्ति , हर इंसान अच्छा बने ।

3 . शिक्षा का महत्व (Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari)

काफी समय पहले की बात है एक राजा जंगल में शिकार करने के लिए गया हुआ था । बरसात का मौसम था तो ये अंदाजा लगा पाना बहुत ही मुश्किल की कब अचनाक बारिश होने लग जाये ।

और हुआ भी यही अचानक आकाश में बादल छा गए ओर तेज बारिश होने लगी । सूरज डूबने लगा और धीरे धीरे अँधेरा छाने लगा । और कुछ ही ढेर में अंदर हो गया ।

अंदर में राजा शिकार के लिए गया था और घने जंगल था तो राजा महल का रास्ता भूल गया । सिपाईयों से अलग हो गया ।

राजा भूख , प्यास और थकान से परेशां हो गया और कुछ दूर जाने के बाद में राजा को पास में ही कुछ बच्चे खेलते दिखाई देने लगे ।

तीनो बच्चे काफी अच्छे दोस्त लग रहे थे ।

उन्हें देखकर के राजा ने उन्हें अपने पास में बुलाया ।

राजा ने कहा – सुनो बच्चो जरा यंहा आओ ।

राजा की आवाज को सुनकर के जब बच्चे वंहा पहुंचे तो राजा ने उनसे पूछा – क्या तुम कंही से थोड़ा जल और भोजन ला सकते हो , मै बहुत भूखा हु और प्यास भी लग रही है ।

इस पर बच्चो ने कहा – जी जरूर ! हम अभी घर जाकर के अभी हम आपके लिए कुछ लेकर के आते है ।

तीनो बच्चे गांव की और भागे और तुरंत जुछ भोजन और जल लेकर के आ गए ।

राजा बच्चो के उत्साह और प्रेम को देखकर के बहुत प्रसन्न हुआ ।

तो राजा ने बच्चो से कहा – मेरे प्यारे बच्चो तुम लोग जीवन में क्या करना चाहते हो ? मै तुम सब की , मदद करना चाहता हु !

राजा की ये बात सुनकर तो बच्चे कुछ ढेर तक तो सोचते रहे । फिर उसमे से एक बच्चे ने सोचते हुए कहा मुझे धन चाहिए , मैंने कभी दो समय की रोटी नहीं खाई , कभी अच्छे कपडे नहीं पहने , इसलिए मुझे केवल धन चाहिए ।

ताकि मै उस धन से अच्छे खाना और अच्छे कपडे खरीद सकू ।

इस पर राजा ने लड़के के बात को सुनकर के मुस्कुरा दिया और बच्चे से राजा मुस्कुराते हुए बोले – ठीक है मै तुझे इतना धन दूंगा की जीवन भर सुखी रहोगे .

राजा के मुँह से यह सब सुनते ही बच्चे की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा ।

अब दूसरे बच्चे की बारी थी – तो राजा ने उससे भी पूछा तुम्हे क्या चाहिए ?

तो बच्चे ने जवाब दिया क्या आप मुझे एक बड़ा सा बांग्ला और घोडा गाड़ी देंगे ?

इस पर राजा ने कहा जरूर ! – मै तुम्हे एक आलिशान बांग्ला और एक घड़ा गाड़ी दूंगा ।

अब तीसरे बच्चे की बारी आई थी तो उसने कहा – मुझे न धन चाहिए , न घोडा गाड़ी और न ही मुझे कोई बड़ा सा बांग्ला चाहिए मुझे तो आप ऐसा आशीर्वाद दीजिये की जिससे मै पड़ लिखकर के विद्वान बन सकू और शिक्षा समाप्त होने पर मै अपने देश की सेवा कर सकू ।

राजा तीसरे बच्चे की बात को बड़े ही धयान से सुन रहा था और राजा तीसरे बच्चे के बात को सुनकर के बहुत ही प्रभावित हुए ।

राजा ने उस बच्चे के लिए उत्तम शिक्षा का प्रबंध और दोस्तों वो बच्चा बहुत ही मेहनती था ।

राजा खाना खाना के बाद में उस उन सभी बच्चो की कही हुए बात को फिर से अमल करता है । और वंहा से चला जाता है ।

कुछ समय बाद राजा अपने कथन के अनुसान उन सभी बच्चो को सभी सुविधा प्रदान करता है जो वो बच्चे कहे थे ।

वो बच्चा जो पढ़ाई करना चाहता था उसे राजा ने अच्छे से पढ़ाया और वो बच्चा बहुत ही ज्यादा    मेहनती था . वह पड़ लिख    कर के एक बहुत बड़ा विद्वान    बनाया और समय आने पर राजा ने उसे अपने राजमहल   में मंत्री   के पद पर नियुक्त कर दिया .

एक बार राजा को उस बरसो पहले घटी घटना की यद् आ गई । 

उन्होंने अपने मंत्री को कहा , कई साल पहल तुम्हारे साथ वो बच्चे थे अब उनका क्या हाल चाल है । मै चाहता हु की मै इक बार तुम तीनो से मिलु । इसलिए तुम अपने दोनों मित्रो को भोजन पर महल में आमत्रित  कर लो  .

मंत्री ने अपने दोनों दोस्तों को अपना सन्देश भिजवा दिया और अगले दिन उनके सभी दोस्त यानि की तीनो दोस्त राजा के सामने उपस्थित हुए ।

राजा ने उन दिनों को साथ में देखकर के कहाँ आज मै फिर एक बार तुम तीनो को एक साथ देककर के बहुत खुश हु ।

राजा ने मंत्री के कंधे में हाथ रखते हुए कहा –मै इसके  बारे में तो जानता पर मै तुम दोनों के बार में कुछ भी नहीं जानता हु , अपने बारे में बताओ ?

राजा ने जिस बच्चे ने धन माँगा था उस बच्चे ने दुखी होकर के कहा – राजा साहब मैंने उस आपसे धन मांगकर , बड़ी गलती की , इतना सारा धन पाकर के मै आलसी बन गया और मैंने बहुत सारा धन बेकार के चीजों  में खर्चा कर दिया । मेरा बहुत सा धन चोरी  भी हो गया । और कुछ वर्षो में ही मै वापस  उसी स्थिति में पहुंच गया , जिसमे मुझे आपने देखा था ।

अब बांग्ला गाड़ी मांगने वाला बालक भी अपना रोना रोने लग गया और कहा – महराज मै बड़े ठाठ से मै अपने बंगले में रह रहा था पर वर्षो पहले आई बाढ़ में मेरा सबकुछ बर्बाद हो गया और मै भी अपने पहले जैसे इस्थिति में पहुंच गया ।

उन दोनों की बाटे सुनने के बाद में राजा बोले इस बात को अच्छी तरह से गाँठ बांध लो धन सम्पदा सदा हमरे पास में नहीं रहते पर ज्ञान जीवन भर मनुष्य के काम आता है और उसे कोई चुरा भी नहीं सकता और न ही कोई उसे उड़ा सकता है ।

शिक्षा ही मानव को विद्वान , और बड़ा आदमी बनाता है इसलिए सबसे बाद धन ज्ञान और विद्या है पहले इसे हासिल करो धन उसके बाद में अपने आप आ जाएगी ।

दोस्तों ये तो थे उस समय की बात लेकिन आज की बात देखे तो थोड़ी सी कंडीसन बदल चुकी है । आज के समय में एजुकेशन के साथ ही साथ में अपने स्किल पर भी देने की जरुरत है । जैसा की हम लोग आज देख रहे की कंपनी से अच्छे खासे इंजीनियर्स को जॉब से निकल दिया जा रहा है ।

इसका करना ये नहीं है की उनकी एजुकेशन कमजोर है इसका कारण ये है उन्होंने खुद को अपग्रेड नहीं किया मतलब यह की वह समय के साथ साथ नहीं बदले .

कम्पनिया आजकल ऐसे लोगो को रखना पसंद करती है जो आज के समय में जी रहे हो , जो आज के technology का ज्ञान हो .

दोस्तों ये Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi आपको कैसे लगी आप हमें कम्मेंट कर के बता सकते है और इसे अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के पास में शेयर जरूर कर दीजिये ।

4 . किसान की घडी और मन की शांति(Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi)

ये Sandeep Maheshwari Story In Hindi है एक छोटे से किसान की जो एक छोटे से गांव में रहता था । उनके कुछ एक दो एकड़ खुद के खेत था तो वंही जाकर के काम करता था । उसी खेत से उसकी रोजी रोटी चलता था । 

दोस्तों उस किसान के पास में एक घडी रहता था जो उस घडी को हमेशा अपने हाथो की कलाई से दूर नहीं रखता था . वो घडी उतना कीमती भी नहीं था लेकिन उसके पास में होने से उसके लिए बहुत ही कीमती था .

एक दिन की बात है जब खेत में काम कर रहा था और उसे काम करते करते शुबह से दोपहर को हो चले थे । जब दूप बड़ी तो उसने समय देखने के लिए अपने हाथ को पास में लाया तो देखता है की उसके हाथो में घडी नहीं था । 

उसके हाथ के कलाई में घडी न होने से वह बाद व्याकुल हो गया और घडी को इधर उधर ढूंढ़ने लगा . वह काम में इतना वस्त हो गया था की उसे घडी की सुध भी नहीं लगी .

वो इधर उधर ढूंढ़ता रहा , खेतो के कोने कोने में और जंहा वह काम कर रहा था वंहा उन्होंने 2-3 बार आकर कर , कचरो को उठा कर के देख लिया फिर भी उसकी वह घडी नहीं मिली . 

उसकी बेचैनी और बढ़ गई वह खेत से तुरंत काम को छोड़कर के घर आ या गया और घर में आकर के पुर घर की तलासी लेने धुरु कर दिए .

कुछ ही समय में उन्होंने पुरे घर की तलासी ले ली पर भी उसे घडी नहीं मिला . अब अब घडी को ढूढ़ते ढूंढ़ते थक गया ऊपर से काम में पहले और थका हुआ था और वह थक कर के हार मान गया और वह थक कर के बैठ गया .

उसने अपने घर के आँगन में कुछ बच्चो की खेलने की आवाज सुनाई दिया वह उस बच्चो को जोर से आवाज लगाई – ये बच्चो इधर आओ . 

जोर के आवाज को दुंकर के वे सभी बच्चे उनके पास आ गए । 

उस किसान उन सभी बच्चो को कहा – देखो बच्चो मेरा घडी गुम हो गया है , यदि मेरा घडी को कोई ढूंढ कर के कोई लता है तो मै उसे पुरे 20 दूंगा । 

किसान की बातो को सुनकर के सभी बच्चे घर के अंदर चले गए और पुरे रूम , किचन , बड़ी को सभी बच्चो ने अच्छी तरह से देख लिया लेकिन उन सभी बच्चो को घडी नहीं मिल पाई .

सभी बच्चे घडी न मिलने के बाद में वहां से चले गए लेकिन उनमे से एक बच्चा किसान के पास आता है और तुतलाते हुए कहता है – चाचा जी मुझे आप एक और मौका दीजिए न मै उस घडी को ढूंढ कर के लूंगा । और वो कहता  है  ये  सिर्फ  मै अकेला ही करुगा .

उस किसान का क्या जाता था उसने हां कह दी .

वह बच्चा दौड़कर के उसके घर के अंदर चला जाता है । लड़का पहले तो सभी घर को ढूंढता है लेकिन उसे कंही नहीं मिलता है उसके बाद वह लड़का उसके कमरे में जंहा वह सोता है वंहा जाता । 

कुछ देर बाद लड़का तुतलाते हुए चाचा , चाचा कहते हुए आता है – अब की बार उसके हाथ में घडी था ।

लड़का उस घडी को अपने चाचा को दे देता है । उसके बाद उस लड़के को चाचा पूछता है बीटा ये तुम्हे कहा मिला लड़का कहता – चाचा जी जब मै आपके कमरे में गया तो वह कमरा पुरे तरीके से शांत था ।

तो मैंने शांत कमरे में बड़े ही ध्यान से मैंने घडी के कांटे की आवाज को सुना । उसके बाद में शांत कमरे से घडी के कांटे की आवाज सुनाई देने लगी उसके बाद में मैंने ये घडी उठाई और आपके पास लेकर के आ गया ।

उसके चाचा घडी को पाकर के बहुत जी ज्यादा खुश हो ज्यादा है और उसकी मन की विचलन , बेचैनी शांत हो जाती है । वह लड़का को 20 रुपया देता है और हस्ते हुए वंहा से चला जाता है ।

दोस्तों ये छोटे सी Sandeep Maheshwari Story In Hindi हमें बहुत कुछ सीखा के जाती है . जैसे की उस कमरे की शांति से घडी ढूढ़ने में मदद की ठीक वैसे है  हमें मन की शांति जीवन की कुछ जरुरत की को समझने में मदद करती है ।

हर दिन हमें अपने लिए थोड़ा वक्त निकलना चाहिए , जिसमे हम बिलकुल ही अकेले हो , जिसमे हम शांति से बैठकर खुद से बात कर सके । अपने भीतर की आवाज को सुन सके तभी हम अपनी लाइफ को अच्छी ढंग को जी पाएंगे ।

ये रही Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi की सार , मुख्य उद्देश्य जो आपको हमारी द्वारा लिखी गई Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है और यदि आपको यह Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari पसंद आता है तो आप इसे अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के पास में जरूर शेयर करियेगा .

5 . गुरुकुल की शिक्षा (Sandeep Maheshwari Story In Hindi)

एक समय था जब गांव गांव में स्कूल , कालेज नहीं हुआ करता था । उस समय गुरुकुल ही एक ऐसा माद्यम था जंहा से विद्यार्थी पड़ना लिखना सीखता था . गुरुकुल में होने वाली परीक्षाओ में और आज कल की परीक्षाओ में जमीन आसमान का फर्क है ।

आज कल की परीक्षाओ में रट्टा मार कर के पास हुआ जाता है या यु कहे की हमारी पढ़ाई ही रट्टा मारने वाली ही है क्योंकि हमें बचपन से ही रत्न शिख्या जाता है लेकिन दोस्तों उस समय की पढ़ाई में बिलकुल भी ऐसा नहीं था ।

गुरुकुल में हमें पढ़ना लिखना तो सिखाया ही जाता था साथ में हमें अच्छा व्यव्हार करना , parsnality को डेवलोपमेन्ट करना और अलग अलग परिस्थिति में खुद को कैसे ढालना होता है , खुद को कैसे संभालना होता है ये भी सिखाया जाता था ।

गुरुकुल में जो ऋषि मुनि या गुरु होते थे . वंहा पर हर गुरु अपने अपने तरीके से परीक्षा लेता था ऐसे ही गुरुकुल का किस्सा , कहानी मै आपको सुनाने जा रहा हु ।

कई वर्षो पहले की बात है । एक गुरुकुल में कई सरे राजा महराजा के बच्चे , साथ में उस गुरुकुल में कई साधारण परिवार के बच्चे , लड़के भी पढ़ा करता था ।

गुरुकुल में आज का दिन खाश था क्योंकि आज का दिन गुरुकुल में आज के दिन कई सारे विद्यार्थी अपने शिक्षा पूरी करके अपने अपने घर को जा रहे थे ।

घर जाने से पहले गुरु ने सारे शिस्यो को अपने पास में बुलाया । कुछ ही देर में घर जाने वाले सभी बच्चे एक जहाज एकत्रित हो गए । सभी बच्चे के आ जाने के बाद में एक गुरु ने कहा मेरे प्यारे बच्चो गुरुकुल में आप सभी बच्चो का आज अंतिम दिन है । मै चाहता हु की यंहा से जाने से पहले आप सभी एक दौड़ में हिस्सा ले ,

गुरु आगे कहते है – ये एक तरह से बड़ा बढ़ा दौड़ होगी । जिसमे आपको बीच बीच में आपको कुछ कठिनाइयों का सामना भी करना पढ़ सकता है जैसे आपको कंही पर कूदना होगा , तो कंही आपको पानी में से गुजरना होगा और इसके आखरी हिस्से में आपको एक अंधेरी सुरंग से भी गुजरना पड़ेगा .

तो क्या आप सब इसके लिए तैयार हो ?

सारे विद्यार्थी एक साथ बोले जी गुरूजी हम तैयार है !

कुछ ही देर में सभी विद्यार्थी अपने आपने पोजीसन में खड़े होते है और कुछ ही देर में दौड़ शुरू होती है ।

जैसे ही दौड़ के लिए घंटी बजती है सभी बच्चे तेजी से भागने लगे .

वो सभी बच्चे दौड़ते -दौड़ते , कंही बीच से कूद कर तो , हफते हुए पानी से गुजर कर के अंत में वे सभी हफ्ते हुए उस सुंरग के पास में पहुंच गए जो जिससे इस खेल का अंत होने वाला था ।

सुरंग अँधेरा था और सुरंग के अंदर कई नुकीले पत्थर पड़े थे । जिनके चुबने पर बहुत ज्यादा दर्द होता था । खैर जैसे तैसे सभी ने दौड़ पूरी ही कर ली ।

और दौड़ते हुए फिर से गुरूजी के सामने पहुंचे ।

जैसे ही सभी बच्चे गुरूजी के पास में पहुंचे तो गुरूजी ने कहा – मैंने देखा की कुछ बच्चे बहुत ही जल्दी इस दौड़ को पूरी कर ली और कुछ ने बहुत ज्यादा समय लिया भला ऐसा क्यों ?

गुरु जी उन सभी बच्चो से प्रश्न करते है ।

गुरु जी के इस बात को सुनकर के एक बच्चे ने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा – गुरूजी हम सभी लगभग साथ साथ ही दौड़ रहे थे पर सुंरग में पहुंचते ही हालत बदल गए । कोई दूसरे को धक्का देकर के आगे निकलने में लगा हुआ था , तो कोई संभ्हल सभ्हल कर के आगे बढ़ रहा था और कुछ तो ऐसे भी थे जो पैरो में चुभ रहे पत्थर थे उन्हें जेब में उठा उठा कर के रख रहे थे ,

ताकि बाद में आने वाले लोगो को दर्द न सहना पढ़े इसीलिए सभी ने अलग अलग समय में दौड़ पूरी की ।

गुरु जी कहते है – जिन लोगो ने पत्थर उठाये है वे आगे आये और मुझे वो पत्थर दिखाए ?

जैसा गुरु जी ने कहा ठीक वैसे ही वे सभी बच्चे जो पत्थर उठाये थे वे आगे आ गए और वह सभी अपने जेब से पत्थर निकलने लग गए । और वे सभी जेब से नुकीले पत्थर निकाल कर के गुरूजी के पास में ले गए ।

जैसे ही गुरूजी ने उस पत्थर को देखकर के कहा ये तो हिरे के पत्थर है ।

गुरु जी के बात को सुनकर के सभी बच्चे आश्चर्य में पढ़ गए और गुरु की तरफ देखने लग गए ।

तब गुरु ने कहा मै ये जानता हु की आप इन सभी हीरो को आश्चर्य में पढ़ गए है ।

हा इन्हे मैंने ही सुरंग में डाला था ये हिरे उन बच्चो के लिए इनाम है जो अपने से ज्यादा दुसरो का ख्याल रखते है ।

देखा दोस्तों परीक्षा में कितना अंतर था इनाम भी मिल गए और शिक्षा भी मिल गया और भी बिना किसी टेंसन के , बिना किसी परेशानी के ।

जैसे की आपको पहले ही बता दिया गया है की गुरुकुल की शिक्षा कही अलग ही होता है जिसमे से इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi का सार , उद्देश्य आप सभी को समझ में आ ही गया होगा , लगता है मुझे आप सभी को इस कहानी का सार बताने की जरुरत ही नहीं है । यदि आपको इस Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi का सार समझ में आ गया है तो आप मुझे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बता सकते है ।

और यह कहानी कैसे लगी ये बताना न भूलिए गा और इसी प्रकार के Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari पाने के लिए इस कहानी को अपने दोस्तों , परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में शेयर जरूर कर दीजिये गा ।

और आपकी शेयर और कमेंट ही motivate करता है ऐसे Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi लिखने के लिए तब तक के लिए कहते है हम आपको अलविदा .

6 . ख़ुशी ( Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi )

दोस्तों ये Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi है एक बड़े से बिल्डिंग में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति की और और एक नौजवान की । जिसे आप इस कहानी में पढ़ने वाले है –

Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi कुछ इस तरह से शुरू होती है एक बिल्डिंग है । उस बिल्डिंग में कई सारे लोग रहते है । सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर एक ऐसा व्यक्ति रहता है जो देखने में थोड़ा सा बुजुर्ग फिर भी वो उतना बुजुर्ग व्यक्ति रहता है और काफी शांति से रहता है । उस बुजुर्ग व्यक्ति को ही शांति ही पसंद है ।

लेकिन आज वो कुछ परेशान सा है दरअसल वो रोज ही इस बात से परेशान होता है कारण यह है की जिस बिल्डिंग में वह व्यक्ति रहता था उसी बिल्डिंग के 3 फ्लोर के निचे में एक एक भाई साहब रहते है ।

भाई साहब ड्रमर है और बहुत ही ज्यादा शोरे मचाते है हलाकि इसे शोर नहीं कर सकते क्योंकि वह एक ड्रमर है तो और ड्रमर का शौक ही होता हाइड्रम को जोर जोर से बजाना यानि की यह उसका शौक था ।

इस बही साहब के ड्रम के बजने से किसी को दिक्कत होती ही नहीं है जो ऊपर में 3 फ्लोर ऊपर में जो बुजुर्ग व्यक्ति रहता है उसे बहुत परेशानी होती है ।

वो रोज ही ऐसा करता था ।

जैसा की आपको पहले ही बताया है मैंने की वह व्यक्ति को शोर बिलकुल ही पसंद नहीं था और बिलकुल अकेला रहना पसंद था ।

वो बुजुर्ग व्यक्ति आज भी मेज में बैठता है और ध्यान लगाने की कोशिश करता है । स्वं को शांत रखने की कोशिश करता है और धीरे धीरे वो उसी शांति में मग्न होते चला जाता है और धीरे से अपने आप को पूरी तरीके से शांत कर लेता है । ऐसा लगने लगता है की उसके घर में कोई भी नहीं है । इतना शांत हो गया था ।

वो कुछ ही मिनट ध्यान से शांति से बैठे थे नीचे से जोर जोर से ड्रम की आवाज बजनी फिर से शुरू हो गई और ये ड्रम की आवाज को सुनकर के व्यक्ति के शांति भंग हो जाती है । और कुछ देर सोचने के बाद में वो फिर से अपने ध्यान में जुड़ने की कोशिश करता है ,

धीरे धीरे फिर से शांति की और बढ़ने लगता है , पूरा वातावरण फिर से शांत हो जाता है और जैसा की पहले बताया वही ड्रम जी आवाज उसे फिर से परेशान करती है ।

जोर जोर से ड्रम की आवाज , बीट्स की आवाज वो बजाये जा रहा था , बजाये जा रहा था ।

इस बुजुर्ग व्यक्ति जो उसके ऊपर बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा , अब की बार तो वह गुस्से से आग बबूला ही गया और उस ड्रम वाले से मिलने का फैसला लेता है ।

वह अपने कमरे से बहार निकलता है लिफ्ट से होते हुए 3 फ्लोर निचे पहुंच जाता है । वो जैसे जैसे पास आ रहा था ड्रम की आवाज उसे तेज सुनाई देने लगा और ड्रम की आवाज उसके गुस्से को और बड़ा रहा था ।

जब वह बुजुर्ग व्यक्ति उसके कमरे के पास में गया तो देखा की उस व्यक्ति के कमरे के दरवाजे खुले हुए है ।

बुजुर्ग व्यक्ति पहले से ही बहुत ही ज्यादा गुस्से में था उसने कुछ न सूझी और चला गया सीधा रूम के अंदर में ।

जैसे ही रूम के अंदर में पहुँचता है तो सज्जन व्यक्ति कृषि के साथ में ड्रम को बजाये ही जा रहा था ।

बुर्जुर्ग व्यक्ति ड्रम वाले को देककर के खुश कहने लगा लेकिन ड्रम की वजह इतनी तेज थी की उस ड्रम बजाने वाले को कुछ भी चीज सुनाई नै दे रहा था उसे लग रहा था की उसे जोर से बजाने के लिए कहा रहा हो ।

जैसे उसके कहने जी आवाज सुनी तो ख़ुशी से उसने फिर से ड्रम को पीटना शुरू कर दिया , उसे लग रहा था की उसे और बजाने के लिए कहा रहा हो ।

और ड्रम की आवाज और तेज होती बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा और बढ़ जाता  जैसे की उसे गुस्सा दिला रहा हो ।

बुजुर्ग व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे लेकिन यंहा का नजारा ही कुछ अलग था ।

वो बुजुर्ग व्यक्ति गुस्से में उसके पास में जाता है और वही कहता है की तुम अपने ड्रम्स बंद करो , बीट्स बंद करो लेकिन ड्रमर कुछ सुनने को तैयार नहीं था वो अपनी ही धुन में मस्त था और यंहा ये बुजुर्ग व्यक्ति परेशान होते चला जा रहा था ।

उसने गुस्से में आकर के उसने उकसे हाथो से ड्रम स्टिक्स छीन ली जिससे वो ड्रम बजा रहा था और गुस्से में बुजुर्ग व्यक्ति उसके ड्रम स्टिक को उसके सामने ही तोड़ भी दिया ।

जैसे ही स्टिक्स टूटता है वह ड्रमर घुटनो के बल वंही गिर जाता है और उसकी सांसे रुकने लगी ।

अब तो नजारा ही पूरा बदल गया , उस बुजुर्ग व्यक्ति ने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था की ऐसा कुछ हो जायेगा ।

वह पहले से तो परेशान था ही और अब इस घटना के बाद में और भी ज्यादा परेशान हो गया । उसे समाज में नहीं आ रहा था की क्या करे ।

बुजुर्ग व्यक्ति ये देखकर के दर गया और वह ड्रमर देखते ही देखते बेहोश होकर के निचे गिर गया ।

बुजुर्ग घबराते हुए उसके पास में जाता है , उसे उठता है , उसे हिलाने की कोशिश करता है लेकिन वो नहीं उठता है .

वो उसकी आँख को खोलकर के देखता है की शायद ये उठ जाये लेकिन नहीं लेकिन वो नहीं उठता है और इस बात से वो बुजुर्ग और ज्यादा परेशान हो जाता है । 

वो गुस्से में आकर के ड्रम स्टिक्स पर दे मारता है और जब वो ड्रम स्टिक्स दिवार से टकराता है और ड्रम में जा लगता है और लगने के बाद में आवाज आती है .

जैसे ही ड्रम से आवाज निकलता है वैसे ही उस सज्जन व्यक्ति के हिलने लगता है ।

बुजुर्ग व्यक्ति ये देखर के पास में पड़ी ड्रम के स्टिक्स को उठता है और उसे ड्रम में दे मारता है और इसके बाद में सज्जन व्यक्ति के शरीर में कुछ हलचल दिखाई देता है ।

उसके बाद में फिर ड्रम में स्टिक मारता है तो व्यक्ति हिलता है ।

तो बुजुर्ग व्यक्ति बार बार ड्रम में ड्रम स्टिक दे मारता है बुजुर्ग व्यक्ति को लगा की ऐसा करने से शायद उसकी जान बच जाये वो पास में पड़ी हुई दूसरी स्टिक भी ले लेता है और दोनों स्टिक्स से अब वो ड्रम बजाने लगता है ।

ड्रम की बिट्स की आवाज को सुनकर के ड्रमर को होश आने लगता है और वो फिर से उठकर के खड़ा हो जाता है और बुजुर्ग व्यक्ति की और मुस्कुराते हुए देखता है ।

बुजुर्ग व्यक्ति उसे अपना सामने खड़ा देख बहुत खुश होता है और वो जेक उससे गले मिलता है और दोस्तों गले मिलते वक्त ड्रम की बिट्स रुक चुकी थी और ड्रमर व्यक्ति के साँस फिर से अटकने लगता है ।

बुजुर्ग व्यक्ति फिर से घबराता है और फिर से ड्रम बजाने लगता है और दुबारा ड्रम की आवाज को सुनकर के ड्रमर फिर से ठीक हो जाता है ,

अब दोस्तों अब यहाँ का नजारा पूरी तरफ से बिल्कुल बदल चूका है वो बुजुर्ग व्यक्ति और वो ड्रमर दोनों साथ में मिलकर के ड्रम बजा रहे है और एकक दूसरे के बिट से बीर मिला रहे है ।

दोस्तों ये रही हमारी और एक मज़ेदार , जोरदार जोश से भरपूर Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi जो हमारे दिल को खुश कर दिया । दोस्तों इस कहानी में जो बिल्डिंग थी वो हमारी शरीर है और जो बुर्ज व्यक्ति है वो आपकी आत्मा है और जो ड्रमर है वो जो आपका दिल है ।

दोस्तों पूरी तरीके से कोई भी निर्णय लेने से पहले आपको ये सोचना जरुरी है क्या आपका दिल , आत्मा , और बुध्दि या फिर सोच सभी एक साथ उसके लिए तैयार है । इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari में इतना ही इसका उद्देश्य है ।

दोस्तों ये जोरदार जोश से भरी Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi आपको कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के जरूर बताना ।  और इस कहानी से आप क्या शिखे इसे ही बताना और इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में , परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्र में शेयर जरूर करे ।

7 . इंसान चाहे तो पहाड़ भी खोद दे (Sandeep Maheshwari Story In Hindi)_

दोस्तों आज की इस Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi में हम बात कर रहे है ऐसे सख्स के बारे में जिसने पहाड़ को भी चिर के दिखाया है । जी हा दोस्तों हम बात कर रहे है थे माउंटेन मन की , दसरथ मांझी की ।

दशरत मांझी एक बेहद ही पिछड़े इलाके से थे और दलित जाति से थे । शुरूआती दिनों में अपना छोटा से छोड़ा हक़ मांगने के लिए संघर्ष करना पड़ा । वे जिस गांव में रहते थे और वो पास के कसबे में जाने के लिए पूरा पहाड़ । जिस पहाड़ का नामा गहलोत पर्वत है ।

गजलोत पर्वत को पार कर के जाना पड़ता था . उनके गांव में उन दिनों न बिजली थी और न पानी . ऐसे में अपने छोटी से छोटी पर्वत को पूरा करने के लिए उस पर्वत को या तो पार करना पड़ता था । या फिर उसका चक्कर लगा कर जाना पड़ता था ।

पहाड़ पार रास्ता बनाने का जूनून इस पार तब सवार हुआ जब ये पहाड़ के दूसरे छोर पर लड़की काट रहे थे और इनकी पत्नी इनके लिए खाना लेकर के आई थी ।

और वंही पहाड़ पर चढ़ते हुए इसकी पत्नी का पैर पिछल गया और पैर पिछल जाने के बाद में उसकी पत्नी की मौत दवाइयों की आभाव में हो गई .

अस्पताल काफी दूर भी था और समय पर दवा नहीं मिल सकी । यही बात उसके मन में घर कर गई ।

इसके बाद में दसरत मांझी ने संकल्प लिया की वह अकेले कूद के ही दम पर पहाड़ के बीचो बिच रास्ता निकलेंगे .

और अत्रिगंज वजीरगंज की दुरी को कम करेंगे और दोस्तों उसका परिणाम आज हम देख ही रहे है ।

दोस्तों दसरथ मांझी ने 360 फुट लम्बा , 25 फुट गहरा , और 30 फुट चौड़ा रास्ता हथौड और छीनी से बनाया .

दसरथ मांझी ने बताया की जब उन्होंने पहाड़ को तोडना शुरू किया तो लोगो ने उन्हें पागल कहा लेकिन इससे उसके निश्चय  में कोई कमी नहीं आई , वो कहते है की इससे मेरा निश्चय और नहीं ज्यादा मजबूत हो गया दसरथ मांझी ने दोस्तों पहाड़ तोड़ने का कार्य 1960 में शुरू किया था 

और इस कार्य को पूरा करने में पुरे 22 साल लग गए सं 1982 में ये कार्य को पूरा किया ।

इस पहाड़ी के सड़क ने गया के अत्रि गंज और वजीर गंज की सेक्टर की दुरी को 55 किलो मीटर से 15 किलो मीटर कर दिया ।

दसरत माझी के प्रयासों का दोस्तों मज़ाक उड़ाया गया पर उनके इस प्रयास ने गहलोर के लोगो के जीवन को सरल बना दिया गया हाला की इन्होने एक सुरक्षित पहाड़ को कांटा । जो भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम दंडनीय है ।

लेकिन इसका प्रयास सराहनीय है । दसरथ मांझी ने बताया दोस्तों की पहले पहले गांव वालो ने उन पर ताने कसे , उनका मज़ाक उड़ाते थे लेकिन उन्ही में से कुछ गांव वाले ऐसे थे जो उन्हें खाना भी देते थे और औजार खरीदने में उनकी मदद भी कर देते थे ।

दसरथ मांझी पर दोस्तों एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई गई है । यह फिल्म 21 अगस्त 2015 को रिलीज़ की गई थी ।

इस फिल्म में दसरत मांझी का रोल नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अदा किया है । इस फिल्म का नाम मांझी द माउंटेनमैन है । और यह फिल्म बहुत ही ज्यादा मोटिवेट करने वाली है । बहुत ही ज्यादा इंस्पिरेशनल मूवीज है ।

इसके अलावा दसरथ मांझी पहले ऐसे व्यक्ति है जो बिहार से दिल्ली तक का सफर पैदल तय किया है वो भी रेल मार्ग के द्वारा । दरसरत मांझी का देहांत 17 अगस्त 2007 को हुआ ।

दसरथ मांझी का अंतिम संस्कार बिहार सरकार द्वारा पूरा राजकीय सम्मान के द्वारा किया गया भले ही वो आज हमारे बीच में न हो उनका यह अद्भुत कार्य आने वाले कई पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा ।

सफलता पाने के लिए जरुरी है की आप अपने प्रयासों में निरंतर जुटे रहे । बहोत से लोग इस बात को नहीं जान पाते है की जब उन्होंने अपना प्रयास करना छोड़ा तो वह सफलता के कितने करीब थे ।

अगर इंसान चाहे तो वह सचमुच में पहाड़ को हिला सकता है वह कोई भी असंभव दिखने वाला कार्य को कर सकता है । कौन कहता है की अकेला चना भाड़ नहीं सकता , बल्कि अकेला चना भाड़ फोड़ सकता है दरसरात मांझी ने इसे मुमकिन करके दिखाया है ।

ये कहानी रही दोस्तों हमारी 7 वी स्टोरी को जी आपको मोटीवेट जरूर किया होगा । हो सकता है की आपके साथ में कुछ ऐसे ही घटना घटी आप उस सफलता के कुछ ही कदम में रहते है और किसी कारण  से आप उसे छोड़ देता है ये Sandeep Maheshwari Story In Hindi हमें यही सीख देती है की कभी भी भी परिस्थि में हमें अपने लक्ष्य को नहीं भुला चाहिए ।

दोस्तों ये Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi आपको कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है और इस Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi को अपने दोस्तों के पास में इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे .

8 . सोच का असर(Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi )_

क्या  दुसरो के सोच का  असर हमरे लाइफ स्टाइल पर होता है , क्यों दुसरो के थॉट हमारे लाइफ में भी बदलाव लाते है या असर करते है ? ये पॉजिटिव सोच और नेगेटिव सोच क्या है ये ? क्यों हमें कहा जाता है की हमेशा हम पॉजिटिव ही सोचे जरूर इसका कोई कारण होगा ? ये कुछ तो हमारे लाइफ स्टाइल में चेंग लाते होंगे होंगे न ..

दोस्तों मै आपको एक ऐसा Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi बताने जा रहा हु जिसे आप इस कहानी  को पढ़कर के समझ जाओगे की क्यों हमें पॉजिटिव सोचना चाहिए हो चलिए इस कहानी की शुरुआत करते है………………..

तो दोस्तों एक बार बादशाह अकबर अपने प्रधान मंत्री बीरबल के साथ घूमने के लिए शहर से बाहर जा रहे थे । जो रस्ते में कई किलो मीटर चल रहे थे की उसके कई किलो मीटर चलने के बाद में उसे एक सामने में एक लकड़हड़ा आता हुआ दिखाई देता है .

लकड़हड़ा को यदि आप नहीं जानते है तो लकड़हड़ा हो होता है जो जंगल में लकड़ी काटता है । तो बादशाह ने उस लकड़हाड़ को देखर के बीरबर से पूछता है की ये लकड़हाड़ मेरा प्रति कैसा विचार रखता है ? ये मेरे बारे में क्या सोचता है ?

तो बीरबल ने उत्तर दिया – जैसा विचार आप उसके प्रति रखेंगे वैसा विचार वो आपके प्रति में रखेगा . जो आप उसके बारे में सोचते होंगे , उसके बारे में समझते होंगे उसी तरह का विचार वह भी रखता होगा आपके बारे में क्योंकि दिल का दिल से रास्ता होता है और बिना कहे दिल की बात दिल से हो जाती है .

तो इस पर बच्चा ने कहा अच्छा इसे भी पता कर लेते है ? की ऐसा होता ही है नहीं ? 

बसा अपने घोड़े से उतर के एक पेड़ के पीछे छुपकर के खड़े हो गए . और छुपकर के कहने लगे – बदमाश लकड़हड़ा मेरे जंगल की लकडिया बिना इजाजत के चुराकर के काट कर के लता है और अपना खर्च चलता है . कल इसे फांसी दे दूंगा ! 

बादशाह इस तरह के विचार चला ही रहे थे की तभी बीरबल उस लकड़हड़ा के पास में पहुंचते है और  लकड़हाड़े से कहते है तुमने सुना है की नहीं आज बादशाह मर गया . 

लकड़हाड़े ने लकड़ी का गढ्ठा वंही फेक दिया और और हस्ते हुए नाचते हुए बोला बड़ा अच्छा हुआ , बड़ा अच्छा हुआ बाद ही बदमाश बादशाह था . लूट पैट और धोके से राज्य को हासिल किया था । मै तो खुसी के प्रशाद बाटूंगा उसके मरने के नाम से । और कहता है बढ़िया हुआ जो मर गया . 

पर बादशाह अकबर ने पेड़ के पीछे कड़े होकर के बड़े ही ध्यान लगा कर के उसकी बाटी को सुन रहा था और लकड़हाड़े की आवाज उसे साफ साफ सुनाई दे रहा था । 

इतना कहकर बड़े ही खुशी के साथ में अपने लकड़ी के लट्ठे को उठाकर के वंहा से निकल पड़ता है , आगे बाद जाता है । 

लकड़हाड़े के जाने के बाद में उस पेड़ के पास से बाहर आये और बीरबल के पास में बादशाह आकर के कहे – मन गएe , मतलब बुरा सोचने पर बुरे का परिणाम बुरा ही होता है । लेकिन अभी अच्छा सोचने का बांकी है . अभी सुबह चिंतन का प्रभाव देखना बांकी है .

चलो इसे भी देख लेते है ये कितना असरदार है । 

तभी सामने से उसे एक बुढ़िया आती हुई नजर आती है । बादशाह फिर उसी पेड़ के पीछे में छुप जाता है अब बरी थी उसके सुभचिन्तन की , अच्छा सोचने के बारे में क्योंकि इसका भी परिणाम देखना बांकी था । इसे सुबह चिंतन का प्रभाव देखने के लिए राजा बड़े ही उत्सुक थे । 

जैसे जैसे वह बुढ़िया पास आती जाती है , वैसे वैसे बादशाह के मन में अच्छे अच्छे विचार आने शुरू चल रहे थे । बादशाह सोच रहे थे बेचारी वृध्दा बड़ी औरत , इसकी कमर छुक गई है , मुँह में दांत  भी नहीं होंगे  । लाठी के सहारे चक रही है । 10 रूपये महीने की इसकी पेंसन आज से बंद देता हु । इस उम्र में भी बेचारी कितनी मेहनत कर रही है । 

जब वह बुढ़िया पास आई तब बीरबल कहने लगे बड़ी माई तुमने सुना आज आधी रात के समय बादशाह बीरबल ने प्राण त्याग दिए ।

यह सुनकर के बुढ़िया रो रोकर के कहने लगी गजब हो गया , राम राम बड़ा बुरा हुआ ऐसा दयालु बादशाह अब कान्हा मिलेगा । हिन्दू मुस्लमान उनकी दो आँखे थी जिसके दरबार में बीरबल प्रधानमत्री , मानसिंग सेना पति और टोडरमल खजाना मंत्री थे ।

गांव हत्या भी बंद कराइ थी भगवन तुम मेरे प्राण ले लेते बादशं को न मारते ।

बादशाह अकबर  पेड़ के पीछे में खड़े होकर के इस बात को बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे । और जीवन के इस सत्य को समझ गए थे शुभ या अशुभ तो उनके विवहारो पर ही निरभर करते है ।

जैसा वह दुसरो के बारे में सोचेंगे वैसा ही लोग उसके बारे में सोचेंगे तो दोस्तों थी न Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi मज़ेदार . जैसा संकल्पो के बीज आप बोओगे वैसा ही संकल्पो के बीज आप को मिलेगा

दो दोस्तों क्यों न हम पोस्टिव थिंकिंग ही रखे , क्यों न हम दुसरो के प्रति अच्छा ही सोचे ताकि हमें भी भविष्य  में अच्छा ही मिले ।

ये रही Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari का सार दोस्तों जैसा हम दुसरो के बारे में सोचेंगे ठीक वैसे ही लोग हमारे बारे में अपने विचार रखेंगे । तो दोस्तो ये कहानी आपको कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते  है और आप इस कहानी से क्या सीखे ये मत बुलिये गए और इस कहानी को अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा  शेयर जरूर करिये .

9 . हर समस्या का समाधान(Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari)

Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi
Sandeep Maheshwari Motivational Story In Hindi

दोस्तों ये Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari भगवान गौतम बुद्धा की बारे में है । और आप सभी तो गौतम बुद्धा के बारे में भली भांति परिचित है । गौतम बुद्धा रोज सुबह उठते , नहाते और अपने शिस्यो के साथ में सभा करते . ये उनका डेली का रूटीन था . उनके शिष्य भी उनके प्रवचन सुनने के लिए उनके आने के पहले वंहा पर पहुंच जाते थे .

आज ठीक वैसा हुआ , आज भी उनके शिष्य प्रवचन सुनने के लिए सभा में सबसे पहले आ गए और बुद्धा भी समय पर सभा में पहुंचे हुए है । आज शिष्य उन्हें सभा में दखकर के बड़े हैरान थे क्योंकि आज पहली बार वो हाथ में कुछ लेकर के आये थे ।

पास आने पर शिस्यो ने देखा  की उनके साथ में रस्सी है और बुद्ध वंहा आकर के चुप चाप आसान में बैठ जाते है । बैठने के बाद में बिना कुछ कहे उस रस्सी में गांठे लगने शुरू कर दिए .

वंहा मौजूद सभी लोग ये सोच रहे थे की अब बुध्द आगे क्या करेंगे .

तभी बुध्द ने सभी से एक प्रश्न किया मैंने इस रस्सी में तीन गांठे लगाई है तो आप सभी को ये बताना है की क्या ये रस्सी वही है जो मैं अभी लेकर के आया था ? , क्या वो वही रस्सी है जो गांठे लगाने के पहले हुआ करती थी ।

पर एक शिष्य ने उत्तर दिया गुरूजी इसका उत्तर देना थोड़ा सा कठिन है वास्तव में ये हमारा देखने के तरीके पर निर्भर करता है एक दृस्टि कोण से देखे तो ये वही रस्सी है , इसमें कोई बदलाव नहीं आया है । यदि दूसरी तरह देखे अब इसमें तीन गांठे लगी हुई है जो पहले नहीं थी । इसे हम बदला हुआ कह सकते है पर यर बात भी ध्यान में की बाहर से देखने में भले ही बदली हुई है लेकिन अंदर से देखने पर से ये वही है जो पहले थी ।

इस रस्सी का बुनियादी स्वरुप बदल नहीं सकता है मतलब जो ये रस्सी पहले थी , और अभी भी वैसी के वैसे ही है सिर्फ बाहर से देखने में में सीमे तीन गांठे लगी हुई है ।

तो इस पर भगवान बुड्ढा कहते है – बिलकुल सही  कहा तुमने अब मैं इन गाँठो को खोल देता हु ।

यह करकर के बुद्ध रस्सी के दोनों सिरे से एक दूसरे को खींचने लगे .

उन्होंने फिर से पूछा तुम्हे क्या लगता है इस प्रकार से खींचने से क्या मैं इन गाठो को खोल सकता हु ?

तो इक शिष्य ने जवाब दिया – गुरु जी ऐसा करने से तो गाठ और भी ज्यादा कस जाएगी और इसे खोलना और भी ज्यादा मुश्किल हो जायेगा .

बुध्द ने कहा – ठीक है अब मैं आप सभी आखरी प्रसन्न करता हु बताओ इन गाँठो को खोलने के लिए हमें क्या करना होगा ?

तो इस पर इस शिष्य ने जवाब दिया – गुरूजी इसके लिए इन गाठो को बड़े ही गौर से देखना होगा ताकि हम ये जान सके की इन्हे कैसे अलग किया जा सके फिर उसके बाद हम इन्हे खोलने का प्रयास कर सकते है ।

बस इतना सुनते ही बुध्द तुरंत बोले – मैं तो यही तो सुनना चाहता था . मूल प्रसन्न यही है की जिस समस्या में तुम फसे हो वास्तव में उसका कारण क्या है । बिना कारण के समस्या का समाधान हम नहीं कर सकते । 

मैं देखता हु की अधिकार लोग बिना कारण जाने ही समस्या का निवारण करना  चाहता है कोई मुझे ये नहीं पूछता की मुझे गुस्सा आता क्यों है ?, लोग पूछते है की मैं अपने क्रोध का अंत कैसे करू ? 

कोई ये नहीं पूछता की मेरे अंदर कहकर का बीज क्या है ? ये आया कान्हा मुझ में ? लोग पूछते है की मैं अहंकार को ख़त्म कैसे करू ? 

तब भगवान बुध्द करते है अरे उसे जब तक उसे समझो गे नहीं उसका कारण क्या है तब तक उसका समाधान कैसे निकल सकते हो ।

तो दोस्तों जिस तरह से रस्सी में गांठे लग जाने पर भी उसका बुनियादी नहीं बदलता ठीक उसी प्रकार से मनुष्य के अंदर भी थोड़े से बुराई आ जाने के बाद भी उसके अंदर का अच्छाई नहीं खत्म होता । जैसे हम रस्सी के गांठे खोल सकते है । ठीक वैसे ही हम सभी मनुस्यो की समस्याओ को भी हल कर सकते है और दोस्तों ढूंढने से तो सब कुछ मिल जाता है । ढूंढने से तो हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है बस जरुरत होती है उस पर थोड़ा सा ध्यान देने की ।

दो दोस्तों ये रही इस Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari का मुख्य उद्देश्य यदि ये कहानी आपको पसंद में आया तो आप इसे अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में शेयर जरूर करे . और आप इस Sandeep Maheshwari Inspirational stories in Hindi से क्या शिखे ये हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताना मत भूलिए गए .

ये रही दोस्तों हमारी Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari जिसे आप पढ़ कर के खुद को अच्छे से मोटीवेट कर पाए होंगे . दोस्तों मैं आपको जब भी Motivational Stories पड़ते है तो उस Motivational Stories को पढ़ते समय आप उस कहानी में पात्र बन जाइये उसके बाद में Sandeep Maheshwari Story In Hindi को पड़े और imagin करे के इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi में मेरे ही भरे में कहा गया तब ही जाकर के आप इस कहानी को अच्छे से समझ पाएंगे और इस कहानी के सही उद्देश्य को जान पाएंगे .

दोस्तों ये रही हमारी Top 10 Motivational Stories By Sandeep Maheshwari जिसे पड़ने के बाद में आपके हर समस्या का समाधान भी मिल गया होगा । और आप सभी पढ़ने वालो से मैं निवेदन करूँगा की इस Sandeep Maheshwari Motivational Stories In Hindi को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के पास में शेयर जरूर करे । आपके पास में जो भी सोशल मीडिया हो चाहे वाहट्स ऍप हो , फेसबुक हो , या फिर इंस्टा ग्राम हो , या ट्विटर हो आप इसे जरूर शायर कर करे .

ताकि वे सभी इस Sandeep Maheshwari Story In Hindi को पढ़ने के बाद में वे भी अपने जीवन के किसी भी समस्या का समाधान पा सके । आज के लिए बस इतना ही और मिलते है एक नै कहानी के साथ में तब तक के लिए हम आपको कहते है जय हिन्द दोस्तों ।

 

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