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छत्तीसगढ़ की लोक कथा

3 सुन्दर Social Stories In Hindi || सामाजिक कहानियाँ

जितने वालो को मेरा सलाम । हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे इस ब्लॉग पोस्ट में दोस्तों आज की इस बूग पोस्ट के माधयम से हम आपको social stories in hindi के जुड़े हुए कुछ कहानी लेकर के आये हुए । इन सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां कहनियो को पढ़ने के बाद में आप भी अपने परिवार , अपने समाज , अपने अपने राष्ट्र के पार्टी जो नेगेटिव सोच है उन्हें बदल देगी ।

मै इतना दावा कर सकता हहु की ये जितने भी सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां आपको बढ़ाऊंगा वह आपके पूरी के पूरी तरीके से आपके सोच को बदल देगा । जो आप अपने समाज के बारे में सोचते है , अपने माँ बाप के बारे में सोचते है और यंहा तक की आपको अपने परिवार वालो के साथ में किसी भी मुसीबत में कैसे बाहर निकाल सकते यही इसके बारे में से आप आसानी के साथ में बाहर निकाल सकते है ।

social stories in hindi की सारी कहानिया 

यानि की यह social stories in hindi कोई कहानी ही नहीं बल्कि एक ज्ञान का एक पूरा संचय है जो अपने जीवन में आपको कठिन से कठिन परिस्थिति से बहार निकाल देगा । तो चलिए दोस्तों हम आपके ले चलते है उन कहानियो के ऊपर में :-

1 . इस कहानी को पढ़कर के माँ बाप पर ग़ुस्सा करना छोड़ दोगे (social stories in hindi)

किसी ने बड़ी कमाल की बात कही है माँ वह बैंक है जंहा दुखो को , भावनाओ को जमा किया जाता है , और पिता वो क्रेडिट कार्ड (credit card) है जिसके पास में बैलेंस न होते हुए भी बच्चो की हर ख्याइश को पूरी करने कोशिश करता है ।

एक बार मै जब गांव में सभा के लिए जा रहा था यानि की जब भी कोई गांव में काम होता था तो गावो के सभी पुरुष लोग मीटिंग में एकत्रित होते थे । उसमे जा रहा था । गर्मी की दोपहर थी , तेज धुप चल रहा था और मुझसे भी तेज एक बुजुर्ग आदमी आगे निकाल गया और वह तेजी के साथ चल रहा था ।

मैंने देखा की वह बुजुर्ग आदमी एक गंदे से पुराने से कपडे पहने हुए धोती और कुर्ता । मैंने जोर से आवाज देकर के कहा – अरे काकू सा  इतने जल्दी में कहाँ हो !

अरे तुम भी चलो भाई देरी हो रही है ।

हम चलने लगे तो मेरी नजर जमीन पर पड़ी । जमीन में गहरे निशान थे जैसे लग रहा था की खून के निशान है ।

मैंने कहा उन्हें काका साहब – आपने पैरो से खून निकल रहे है ।

तो मुझे डटकर के कहने लगे की – तेरे पिता से 2 दीवलै का बड़ा हु ? काका नहीं हु तेरा !

मैंने कहा – काका अपने पैसरो से खून निकल रहे है शायद कांटा चुभ गया है !

तो उन्होंने मुझे फिर से दन्त दिया – अरे जो आजकल के बच्चे है वो छोटे मोठे काँटों से , छोटे मोठे कंकड़ों से डर जाते है ! हमारे जैसे नहीं डरते । तेरे ये कपडे के जूते देख । मेरे ये देसी चमड़े की पग रखी है ।

मुझे समझ में नहीं आ रहा था हो क्या रहा है – कान्हा से खून बह रहा है । वे चलते चले जा रहे थे मै उनके पैरो की तरह बार बार देखने की कोशिश करता जा रहा था और वो मुझे बार बार अपनी बातो में उलझा रहे थे ।

हम सभा में पहुंचे मीटिंग शुरू हुई तब भी मेरी नजर उनकी पैरो में थी लेकिन उन्होंने बड़ी चतुराई से गमछा से अपने पैरो को छुपा लिया , पता नहीं चलने दिया ।

बाद में सभा खत्म होने के बाद में मै जूते पहनने लगा तो मेरी नजर उनके पगरखीयो पर गई । वह फटी हुई थी । एक में तो इतना बड़ा छेड़ हो रखा था की । उन्होंने अपने फटाफट से अपने चपल ( पगरखियाँ ) पहनी चल दिए ।

फिर से हम वापस आ रहा थे वापस मै उनसे फिर से पूछने की कोशिश कर रहा था – की अरे खून बहता चला जा रहा है ।

वो मुझे फिर से कहने जा रहे थे – घबरा क्या रहा है ? कुछ नहीं होने वाला ।

मैंने उनसे कह दिया की – आपके चपल में छेद है । जहां मैंने कहा – वो थोड़ा नरम पढ़ गए और कहने लगे की हा पुराने हो गए है ।

तो मैंने उनसे कहा की – फिर इन्हे पहने का मतलब क्या है ?

तो वो कहने लगे की – इन्हे पहनना जरुरी है ! ये मै अपने बेटो की इज्जत के लिए पहनता हु !

तो मैंने उन्से पूछा – बेटो की इज्जत ले लिए पहनते हो ? जूते तो फटे हुए है ?

तो वो भाउक हो गए वो । रेत के टीले में बैठ गए और कहने लगे – की मेरी पत्नी के 2 साल पहले मृत्यु हो गई ! मेरे 2 बेटे है एक प्रदेश में रहता है एक शहर में रहता है मेरे पास में नहीं रहते और जब से मेरी पत्नी गई है । तब से बहुओ को लगता है की बुढ़िया के जाने के पगला गए है । बच्चो को लगता है की बच्चो की तरह ये कुछ न कुछ जिद करते रहता है ।

3 साल पाहे प्रदेश में रहने वाले बेटे ने चपल दिलाई थी । तब से पहन रहा हु ।

मैंने उसने पूछा की – बेटो के इज्जत से इनका क्या लेना देना है ? आपके बेटे तो आपके साथ में ऐसा बर्ताव कर रहे है ?

वो काका साहब थे उन्होंने कहा – की बेटा ये मेरे बच्चे है ! , वो तो अभी और जियेंगे ! मै तो अभी एक दो साल का मेहमान हु ! , मै तो चला जाऊंगा लेकिन मै जाकर के कंही अपना दुःख रोऊँगा , किसी को बताऊंगा और नंगे पैर चलूँगा तो लोग तो कहेंगे की इनकी बेटे बहु सही नहीं है ।

उन बेटो की इज्जत बचाये रखने के लिए फटी ही सही लेकिन चपल पहन लेता हु । ऐसा बोलकर के वो चलते चले गए ।

मैंने कहा – की मै आपको दिला दू ?

तो उन्होंने कहा की नै तुम अपनी माँ के लिए नै जुतिया लेकर के जाना इतना काफी है ।

यह social stories in hindi बहुत छोटी है लेकिन इस कहानी का सार बहुत बड़ा है । जिन माँ बाप ने हमारे लिए जीवन के सारे दुःख सहे क्या हम उनके लिए थोड़े से दुःख नहीं सह सकते । क्या हम उन्हें सुख में हिस्सेदार नहीं बना सकते ?

एक बार सोचियेगा जरूर !


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2 . माँ बाप से सच्चा प्या कोई कर नहीं सकता (सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां)

एक महिला की सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां है जिसकी अभी नई-नई शादी हुई थी । अरेंजड मरीज थी । वो अपने पति से ज्याद मिली नहीं थी ।

जो सुहागरात थी उसमे बढ़िया भोजन बना कर के उसके लिए एक थाली उसे सजा कर के आया बैडरूम में ।

और इस महिला ने कहा की पहले सासु माँ को तो भोजन करा दो ।

तो उस आदमी ने तो कहा की छोडो न मेरी माँ ऐसी है , बेकार है , बूढी है , छोडो तुम। हम खाना खाते है तुम्हारे  लिए लाया हु । ऐसी फालतू के बाते मत करो , ऐसे भी माँ बीमार रहती है । छोडो न तुम खाना खाओ ।

इस महिला ने फिर कहा की नई आप माँ को खिला दीजिये खाना । मै खा लुंगी बाद में ।

वो आदमी जिद में अड़ गया की तुम खाओ – वो तो ऐसी ही है ।

इस महिला को बहुत बुरा लगा । अचानक से इस महिला ने अपना बैग उठया और चल दिया पहुंच गया अपने घर और थोड़े ही दिनों में तलाक के पेपर भी भेज दिए ।

तलाक ले लिए इस आदमी से ।

और थोड़े दिन बाद उस महिला ने दूसरी शादी कर ली और लड़के ने भी अपनी दूसरी शादी कर ली । दोनों की अपनी अपनी फैमली थी । और इस प्रकार से उम्र बीतती चली जा रही थी ।

जब वह महिला जब 65 साल के आसपास के हो गई । उन्हें 2 बच्चे थे उन्होंने अपने बच्चे से कहा मै तीर्थ यात्रा के लिए जाना चाहती हु । आप मेरे लिए टीकिट विकिट करा दो ।

तो बच्चो ने कहा ऐसा नहीं हम भी आपके साथ में जायेंगे हम भी घूमेंगे । तो वो बच्चे अपने माँ को लेकर के तीर्थयात्रा के लिए चले गए ।

तो एक जगह रुके वो दिन में भोजन करने के लिए । भोजन कर रहे थे तभी उनकी नजर पड़ी एक फटे हाल में एक आदमी बैठा हुआ था । पागल सा देख रहा था । हाल उसके बेहाल थे । वह ऐसा लग रहा था की वह कई दिनों से नहाया नहीं है ।

तो इस महिला थी उस बच्चे से कहा की जाओ उसे जाकर के नहला दो और अच्छा भोजन करवा दो । बहुत परेशान लग रहा है ।

बच्चो ने कहा ठीक है ।

नहला कर के तैयार कर के लाये जब उस व्यक्ति को वापस भोजन करने के लिए तो यह महिला चौक गई । क्योंकि आदमी वही था जिसका पहला पति था जिसे ये पहली ही रात में , उसी ही दिन छोड़कर के आ गई थी ।

दौड़कर के पहुंची और कहने लगी की – तुम्हारा ये हल कैसा हो गया ?

उस आदमी ने कहा की – मेरे बच्चो ने मेरा यह हाल कर दिया । मुझे एक रुपया नहीं दिया मुझे घर से निकाल दिया , मुझे घर से भगा दिया , सड़क सड़क भटक रहा हु । मेरे पास में कुछ भी नहीं है । बस मिलता है कुछ तो खा लेता हु । बहुत ही बुरी हालत है ।

इस महिला ने बोलै की तुमने आज तक नहीं पूछा लेकिन आज तुम्हे बतलाती हु की मैंने तलाक क्यों लिया था ? उसी रात में वापस क्यों हो गई थी ।

क्योंकि उस रात में तुमने मुझे पहले भोजन कराना चाहते थे अपनी माँ को जो इतनी सालो से साथ में रह रही है । उसको तुम इज्जत नहीं दे रहे थे । जब तुमने अपनी माँ की इज्जत नहीं की की तुम्हारे बच्चे तुम्हारे क्या इज्जत करेंगे ।

ये मेरे बच्चे है मैंने इनसे कहा था की मुझे तीर्थ यात्रा पर जाना है की नहीं जिद कर ली की साथ में जाना है । आपको परेशानी नहीं आने देंगे ।

जो लोग अपनी माँ बाप की इज्जत करता है बच्चे भी उनकी इज्जत करता है और उसके साथ में दुनिया भी इज्जत करता है । यही तो मै तुम्हे समझाना चाहती थी लेकिन अब बहोत देर हो गई ।

ये छोटी सी सामाजिक ज्ञानवर्धक कहानियां लेकिन सार वही है जब हम बड़े हो रहे है लेकिन हम यह भूल जाते है हमारे माँ बाप बूढ़े हो रहे है । उनकी इज्जत कीजिये , उनकी कदर कीजिये , उनका आशीर्वाद दुनिया में आपको बहोत उचाई में लेकर के जायेगा ।

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3 . सैनिक की दिल छू ले वाली कहानी (Social Stories In Hindi)

छत्तीसगढ़ की लोक कथा
Social Stories In Hindi

yah एक सैनिक की छोटी सी Social Stories In Hindi है ।

एक सैनिक जिसे दूसरे देश जाना पढ़ा युद्ध के लिए । और जब वे दूसरे देश में था तो उसकी खबर घर तक पहुंच नहीं रही थी । उसके माँ बाप बहुत ही ज्यादा परेशान थे की क्यों हुआ होगा हमारे बच्चे के साथ में ।

अखबारों ने , न्यूज़ में लगातार खबरे तलासते रहते थे , पता करते रहते थे की कंही पता मिल जाए बच्चे का क्या हुआ ।

लेकिन उन्हें कोई खबर मिल ही नहीं थी ।

करीब एक दो महीने के बाद में अंत में अखबारो में आया , न्यूज़ चैनलों में आया की युद्ध समाप्त हो गया । और ये घर वाले बेसब्री से इंतजार करने लगे की वो युद्ध समाप्त हो गया की यदि जीवित होगा तो काल करेगा ।

एक दो दिन के बाद में इनके पास में फोन आया । घर में टेलीफोन की घंटी बजी और फोन लाइन में इसके दूसरे तरफ इनका बेटा था ।

बड़े खुश हुआ भगवान ने बचा लिया हमारे बेटे को । जो लड़का था वह दूसरे तरफ से कह रहा था की आप किसी भी प्रकार की चिंता मत करे मै सुरक्षित हु । आप लोग ठीक है घर का हाल चाल जान रहा था ।

उसके बाद में लड़के ने अपने पापा जी मै अपने साथ में जब वापस आ रहा हु तो अपने दोस्त को ला रहा हु ।

तो घर वालो ने सोचा की बच्चा सुरक्षित है तो हा हा ले आओ अपने दोस्त को । मम्मी की अलग आवाज आ रही थी बेटा ले के आ जा कोई दिक्कत नहीं है ।

लड़का कहने लगा मेरी पूरी बात तो सुनिए – वो दोस्त है जो मेरा हमारे साथ ही रहेगा हमेशा ।

तो उनके माता पिता ने सोचा फिर कहे – अरे ले आ , ले आ कोई टेंसन की बात नहीं , ले के आ जाओ ।

फिर लड़का बोला पूरी बात तो सुनिए – दरअसल एक बारूदी सुरंग में मेरा एक दोस्त था और अचानक धमाका हो गया । उसने उस धमके में अपने एक हाथ और एक पैर खो दिया । इस दुनिया में उन्हें एक हाथ एक पैर नहीं है , वो बिना इक हाथ और एक पाई के जी रहा है तो उसको मै अपने घर लेकर के आ जाऊ । वो हमेशा मेरे साथ में रहेगा ।

जो माता पिता थे अचानक उनकी आवाज बदल गई । चिंता उनकी आवाज में आ गई । कहने लगे बेटा क्यों लेके आ रहे हो उसको वो कान्हा हमारे साथ में रहेगा । उसको अपने हाल में छोड़ दो न , भगवान सब सम्हाल लेगा न , तुम चिंता क्यों कर रहे हो ?

उसको छोड़ दो । कभी कुछ लगेगा मदद भेज देंगे , उसको छोड़ दो और छोड़कर के आ जाओ ।

तो वो जो लड़का था वो कहने लगा – क्या हुआ ऐसे आप क्यों कहने लगे ?

उसके माँ पिता इधर से कहने लगे – वो बोझ बन के रहेगा । कहा उनका ध्यान रखेंगे , इतना सब नहीं हो पायेगा ।

लड़के ने उधर से कहा ठीक है । और काल को डिस्कनेक्ट कर दिया ।

40 से 50 दिन तक देखने लगे की बच्चा आएगा घर पर लें 50 से 50 दिन तक वह आया नहीं । 40 से 50 दिन बाद इनके घर में काल आया और इन्हे बुलावा आया की आ जाइये उस दूसरे देश में जायेंगे ।

आ जाइये आपके बच्चे की लाश मिली है । रोते बिलखते वह वंहा पहुंचे ।

उन्हें बताया गया की आपके बच्चे ने छत से कूदकर के जान दे दी । सुसाइड कर लिया ।

जब मुर्दाघर में पहुंचे तो लाश देखकर के सन्न रह गए । इनके बेटे के एक पैर और एक हाथ नहीं था ।

रोने लग गए और कहने लग गए की काश हम ये कह पाते की उस दोस्त को लेकर के आ जा । ले आ उसको साथ में रहेंगे लेकिन ऐसा बोला नहीं ।

लेकिन ऐसा बोल दिया होता तो सायद वह बच्चा जीवित होता । वह बच्चा दरअसल जानना चाह रहा था की उसके माता पिता कैसे व्यव्हार करते है , लेकिन उन्होंने कहा की बोझ बन के रहेगा ।

ये Social Stories In Hindi उन माँ बाप की ही नहीं बल्कि सा के लिए है आज के ज़माने में । बहोत सारे लोग ऐसे है जो फायदा देखकर के रिस्ता बनाते है , बड़ी प्रैक्टिकल सोच रखते है उन्हें लगता है की बोझ होगा की क्या करेंगे ? , रिस्तो में फायदा ढूंढ़ते है ? अपने हिसाब से रिस्ता बनाना चाहते है ? जंहा कोई भी प्रकार की कमी होती है उन्हें दूर कर देते है ?

कमी हर इंसान में है , कमिया ढूंढने लगेंगे तो शायद प्यार नहीं कर पाएंगे , प्यार उनसे भी कीजिये जिनमे कमिया है । दिव्यांगों की बात करे तो उनसे भी प्यार की बात करे , उनसे भी बात करे जो आपसे पैसो में कम है ।

प्यार कभी भी उच्च नीच , भेदभाव नहीं देखता है प्यार तो प्यार होता है । और महोबत हमेशा दिल से की जाती है । यही इस कहानी का massage है । यही गहरी बात है जो हमें सिखाती है ।


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