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sonu sharma motivational story In hindi

top 7 Sonu Sharma Motivational Story In Hindi

Sonu Sharma Motivational Story In Hindi  की शुरुआत में उसने मुझे से बोला की मेरे पास में दिमाग नहीं है मैंने भी उनकी आँखों में आंखे डालकर के कह दिया चलो अब तो मान ही जाओगे । की मै हर रिस्ता दिल से दिल से निभाता हु । तुम्हारे लाख कोशिशों के बाद भी अगर कोई तुम्हारी सच्चाई पर विस्वाश न करे तो फ़िक्र मत करना ।

या तो वह अँधा है या अंधेरे में है । अगर कोई इंसान तुम्हे निचा दिखाने की कोशिश करता है तो फ़िक्र मत करना क्योंकि एक मच्छर डंक मार् सकती है  लेकिन तुम उस पर डंक नहीं मार सकते । यानि की सब में कोई न कोई खास बात जरूर होती है । क्योंकि कई बार बड़ी हैसियत वाले लोग वो काम नहीं कर पाते जो छोटी हैसियत वाले कर लेते है । इसीलिए किसी को अपने आप से छोटा मत समझना । इस तरीके की (Sonu Sharma Motivational Story) भी हम आगे पढ़ने वाले है ।

जरुरत बहुत बड़ी चीज होती है खाने की जरुरत इंसान हो तो इंसान को भीख मंगवा सकते है । उड़ने की जरुरत एयरोप्लेन का अविष्कार कराती है , ठीक इसी तरह से जब हम परेशानी में होते है तो Sonu sharma ki motivational story मदद करती है । और कोई स्वार्थ पूरा होने की जरुरत टूटे हुए रिश्ते को जोड़ देती है । अगर कोई खाली हाथ तुम्हारे पास में आता है तो ये मत समझना की की तुमसे कुछ मांगने के लिए आया है हो सकता है वो अपना सब कुछ बाँट दिया हो ।

चरित्र को कुर्बान करके कभी भी पैसो के पीछे मत भागना । अमीर होकर के कुत्तो से सावधान लिखने से अच्छा है गरीब होके अतिथि देवो भवः लिखना

ये तो बस कहानी का शुरुआत है दोस्तों आगे देखिये हमारे आने वाले कहानियो  में आपको भी ऐसे ही मोटिवटीनल कहानी , मोर्टल कहानी (Sonu Sharma Motivational Story In Hindi) देखने , पड़ने को मिलेगा जो आपकी जिंदगी में पूरी तरीके से बदलाव ला देगा । चलिए दोस्तों इस कहानी को सुरु करते है ।

1 . शेर और तीन बैल की ( Sonu Sharma Motivational Story In Hindi)

एक बार की बात है तीन बैल आपस में एक साथ में रहते थे । तीनो बैल आपस में किसी भी प्रकार के भेदभाव नहीं रखते थे । वे उनको कंही भी चारे मिलते थे उन्हें मिल बांटकर के खाते ।

यदि तनिक भी किसी को परेशानी हो जाती थी तो वे सभी तीनो दोस्त मिलकर के उस परेशानी का निपटारा करते थे । वे तीनो बैल शुबह घर से चरने के लिए निकलते और शाम को चारे चर के वापस आ जाते थे ।

एक दिन की बात है वे दिनों शेर घास चरते चरते जंगल में पहुंच जाते है । जंगल इतना घना था की उसमे कई जंगली जानवर भी थे । साथ ही उस जंगल में बहुत अच्छे चारे भी थे ।

दूसरे दिन भी वे तीनो बैल उसी जंगल की ओर चले गए जंहा अच्छा चारा था शुबह गए ओर शाम को चारे चर के वापस आ गया .

अब वे लगातार उसी जंगल में जाने लगे .

उसे अब जंगल में जाते हुए 5 दिन हो गए थे अब उन तीनो बैलो पर एक शेर की नजर पड़ता है ।

वह शेर उन तीनो बैलो को देखकर के बहुत ही ज्यादा खुश हो जाता है ओर मन ही मन सोचने लगता है – अब तो मुझे पेट भर का खाना मिलेगा , बहुत दिन हो गए है मुझे स्वादिस्ट भोजन चखने के लिए । अब मै इन तीनो बैलो को मारकर के अपने भूख को शांत करूँगा .

ये सोचकर के वे दूर ही बैठ कर के उसे ताकने लगे ।

अब वे शेर भी उन तीनो बैलो को ताकने के लिए उसी जंगल में रोज आने लगे । कुछ दिन हो गए शेर को उन बैलो को ताकते हुए फिर भी वह उन बैलो का शिकार नहीं कर पा रहा था ।

वो बैल इतने हस्त पुस्ट थे की यदि एक बार से शेर को जोर की लगाए तो उसकी हड्डी पसली एक हो जायेगा । इस कारण से शेर उन बैलो से डर रहा था ।

वो अभी बैठे बैठे ही सोच रहा था की कैसे मै इन बैलो पर हमला करुगा । ओर वो सोचने लगता था । वो सोच ही रहा था की उसके मन में ख्याल आया की क्यों न मै इन तीनो को भड़का दू , ताकि ये तीनो आपस में लड़ने लगे उसके बाद मै इनको अपना शिकार बना सकू ।

अब वे शेर जंगल में जाकर के खरसोश , लोमड़ी , कौवा , ओर अन्य जानवरो के पास जाकर के उन तीनो बैलो के बारे में अफवा उड़ाने लगे ।

वे रोज उन जानवरो के पास में जाते ओर उन बैलो के बारे में कुछ न कुछ अफवा सुना कर के वंहा से आ जाते थे ।

एक दिन खरगोश आ ही रहा था की उन बैलो को रास्ते में ही देख लिया ओर उन बैलो के पास में जाकर के उसे दो बैलो के अफवाह की प्रसंसा करने लगे , उनमे से एक बैल ये देख कर के बहुत ही ज्यादा चीड़ गया ।

उसके कुछ ही घंटो बाद में कौवा आता है वह भी शेर के अफवाह को सही समझते हुए उसने भी दो बैलो की प्रसंसा की , ये सुनकर के वह बैल ओर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गया , क्रोधित हो जाता है ।

जब दूसरा दिन भी जब तीनो बैल फिर से जंगल में चरने के लिए आये तो  फिर से दूसरे खरगोश आये ओर उन दोनों की प्रसंसा की ओर उस एक बैल की प्रसंसा नहीं की . उसके बाद कौवा आया उसने भी वही की , इसके बाद में कुछ कुछ जानवर आये उसने भी उन दोनों की ही प्रसंसा की ।

ये देखकर के अब वह अकेला बैल जिसका कोई प्रसनसा नहीं कर रहा था वह उन दोनों बैलो से इस्या करने लगा ओर वंहा से गुस्सा होकर के चला गया ।

उन दोनों बैलो ने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वह कुछ समझने को तैयार ही नहीं था ।

उसके दूसरे दिन उस जंगल में मात्र दो ही बैल आये लेकिन वो अकेला बैल जंगल के दूसरे तरफ जाकर के चरने लगे ।

आज तो शेर पुरे ताक में था । उसने जैसे ही अकेला बैल को देखा उसके मुँह में लार आने लगा ओर वह उसको अकेला देख कर के उस पर हमला कर दिया ।

इस प्रकार से दोस्तों वो दोनों बैलो को फिर से उनके ऊपर मतभेत पैदा कर के उन दोनों बैलो को भी अपना शिकार बना लिया ।

इस प्रकार से दोस्तों उन तीनो बैलो को अपना शिकार बना कर के खा लिया ।

दोस्तों ये छोटी सी कहानी हमें जिंदगी की कुछ पहलुओं पर प्रकाश डालती है ओर हमें कुछ बाटे सीखा के जाती है । ये छोटी सी  Sonu Sharma Motivational Story In Hindi) हमें बतलाती है की संगठन , एकता से हम किसी भी चीज से मिलकर के , किसी भी परेशानी से , किसी भी परिस्थिति में एकता बनाकर के हम उस परेशानी , परिस्थिति से लड़ सकते है । इसलिए दोस्तों अपने परिवार को , अपने दोस्तों में एकता बना कर के रखना चाहिए .

दोस्तों ये छोटी सी Sonu sharma ki motivational story आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस कहानी Sonu Sharma Story से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है । आपसे इस Sonu Sharma Motivational Story में प्रश्न भी है यदि एक बैल के चले के बाद में भी दोनों बैलो को सतर्क होना चाहिए था की नहीं । इस भी आप हमें कमेंट कर के अपनी राय दे सकते है ।

ओर मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर Sonu Sharma Story In Hindi में आपसे कहता आया हु । इस कहानी को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

और आपकी एक कमेंट हमको अच्छी अच्छी कहानी लिखने के लिए मोटीवेट करती है । प्लीज इस कहानी को शेयर करे ।

2 . कौवा चला मोर बनने (Sonu Sharma Motivational Story )

एक बार की बात है एक जंगल में बहुत सारे कौवा रहा कहता था । उनमे से एक कौवा बहुत सारे मयूर के पंख को एकत्रित कर करता था । वह जंगल में जंहा पर भी जाते उसे मयूर के पंख दिखाई देते थे तो उसे वह उसी जगह में जाकर के एकत्रित कर आता . वह रोज नए नए जगहों में जाकर के मयूर के टूटे हुए पंख को ले आता .

जब उसके पास में बहुत सारे मयूर के पंख हो गए तब वह एक शांत जगह में जाकर के बैठ गया जंहा उसे कोई देख न सके और वंहा बैठ कर के उस मयूर के पंख की अपने  पंख में लगाने लग गया  .

कुछ ही देर में वे मयूर के सभी पंख को अपने पंख में लगा लिया . अब उसे लगने लगा था की वह मयूर की तरह दिख रहा है . उसे अपने आप में फुले न समाया जा रहा था .

अब वह अपने पुरे दोस्तों को खूब तिरस्कार करने लगा , उसने मयूर के पंख लगाने के बाद में अपने पुरे दोस्तों को भी छोड़ दिया . 

एक दिन वह अपने पुराने दोस्तों को छोड़कर के मयूर के झुण्ड के पास में चला गया और वंहा जाकर के उनसे मिल गया । 

लेकिन वो कहते है न दोस्तों जो जिसका जन्म जिस कुल में हुआ है वही उस कुल के रहन सहन , खाने पिने को पहचान सकता है इस कौवा के साथ में ठीक वैसा है हुआ ।

जब कौवा मयूर के पास में आने लगे तब पास वाले मयूर ने उन्हें भाप लिया की ये हमारे जैसा नहीं है उसने उस कौवे के ऊपर दे मारी एक चोंच । जैसे ही चोंच मारी उसकी एक पंख निकल कर के गिर गया ।

इसके बाद में उन सभी मयूर में आकर के उसे चोंच मारने लगे इसके बाद में उसके सारे पंख निकल गए । कौवा इनके चोंच से बहुत ही ज़्यदा घायल हो गया । मयूर ने उन्हें घेर कर के खूब ज्यादा अपमानित किया , खूब ज्यादा मज़ाक उड़ाया ।

मयूर ने कहा अरे देखो दोस्तों – ये कौन आ गया है हमारे बीच में , ये कौवा है जो हमारा नक़ल रहा है ?

दूसरा मयूर कहता है – हां भाई मै भी देख रही हु इसकी चाल डाल को ऊपर से मयूर लेकिन बेचारा अंदर के काळा कलूटे है ।

ये सुन कर के तीसरा मयूर कहता है – हा भाई ये कालू चरण हमारा पंख लगा के लालू बन रहा है ।

ये सब सुनकर के एक एक मयूर उसे चोंच मारने लगे और अंत में कौवा उनके बातो को सुनकर के बहुत ही ज़्यदा गुस्सा हो गए , बहुत ही ज़्यदा दुखी हो गया , और उसके सभी पंख को मयूर ने निकाल लिए .

जैसे भी करके कौवा मयूर के झुण्ड से बचकर के दुखी होते हुए अपने दोस्तों के पास में आ जाते है । उनके दोस्तों के पास में जाकर के उन्होंने सारी बातें बताई .

तब उसके दोस्तों ने बहुत ही ज्यादा उनको सुनाया , उनका भी मज़ाक उड़ाया । और कहने लगे तुम बहुत ही ज्यादा नीच जीव हो अगर तुम अपने पंख से संतुस्ट नहीं हो तो तुम्हे क्या जरुरत थी दूसरे जीव की पंख लगाने की ।

यदि तुम हमारे तरह अपने अपने वास्तविक पंख में जिंदगी जीते हो तो तुम्हे आज ये अपमान नहीं सहना पड़ता और न ही तुम्हे कोई चोट सहने पड़ते । ये तुम्हारी करनी का ही फल है ।

इसके बाद में दोस्तों उस कौवे को अपने आप में बहुत सर्मिन्दा हो जाता है और अपने दोस्तों से माफ़ी मांग कर के फिर से कौवे के रूप में जिंदगी जीना सुरु कर देता है और अपने दोस्तों के साथ में घुल मिल जाता है ।

दोस्तों ये छोटी Sonu Sharma Motivational Story हमें जिंदगी की कड़वी सच्चाई को बतलाती है . जो वास्तविक जीवन में घटित होता है । ये कहानी हमें बतलाती है जब भी हमारे पास में सफलता या सक्सेस या फिर कहे ज्यादा मात्रा धन में आ जाता है तब हम अपने पुराने दोस्तों को भुला जाता है और नए दोस्त बनाने लग जाते है लेकिन

दोस्तों जब नए दोस्त बनाते है तब हम ये भूल जाते है की वही पुराने दोस्त के बदौलत ही हमने सफलता हासिल की है , उसी दोस्त के साथ में रहकर के आगे बड़े है , वे वही दोस्त है जिन्होंने हमारे हर सुख  दुःख में हमेशा आपके साथ में खड़े थे ।

ये छोटी Sonu sharma ki motivational story में ठीक इसी बात को बताया गया और जब हमारे पास में नए दोस्त जो हमारे सफलता के बाद में आते है या तो वो आपके सफलता के बदले में आये है या फिर आपके पास पैसे है तब आपके पास में आये है और जब आपके पास में पैसे खत्म हो जायेंगे तब आप को छोड़कर के चले जायेगे । 

मै आपको एक बात और बता देना चाहता हु जब हमारे पास में सफलता के बाद जितने भी नए दोस्त बनते है उनमे से 90 % दोस्त हमें बिगाड़ने की कोशिश करते है और आपके बिगड़ने में भी उन्ही लोगो का हाथ होता है इसका कई उदहारण है हमारे पास में जिसे हम इस छोटे से कहानी में तो नहीं बता सकते है लेकिन आने वाले समय में , आने वाले कहानी में हम आपको जरूर बताने की कोशिश करेंगे ।

और हर Sonu Sharma Story में मै आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी कहानी आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस कहानी से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

ओर मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर कहानी में आपसे कहता आया हु । इस Sonu Sharma Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

और आपकी एक कमेंट हमको अच्छी अच्छी MOTIVATIONAL STORY लिखने के लिए मोटीवेट करती है । प्लीज इस कहानी को शेयर करे

3 .  जैसे करनी वैसे भरनी (Sonu Sharma Ki Motivational Story )

एक बार की बात है एक छोटा सा गांव था । उस गांव के पास में ही एक घाना जंगल था । उस जंगल में कई सारे जंगली जानवर  , शेर  , लोमड़ी  , बन्दर , चीता , भालू , हाथी , और न जाने कई सारे जीव उस जंगल में रहते थे . उस जंगल के किनारे में एक तालाब था जंहा पर सभी जीव जंतु , पशु पक्षी पानी पिने के लिए आते थे । 

उस तालाब के कुछ ही दूर में एक बड़ा सा पेड़ था । उस पेड़ के ऊपर में एक बाज ने अपना घोसला बनाया हुआ था । उस घोसले में बाज के छोटे छोटे बच्चे थे ।

उसी पेड़ में बहुत बड़ा खोल था उस खोल में लोड़मी रहता था . और लोमड़ी के बच्चे भी उसी खोल में थे ।

दोनों  ही अपने बच्चो से बहुत ही ज्यादा स्नेह करती थी । वे समय समय में अपने बच्चो के लिए खाना लाने के लिए जाती थी ।

लोमड़ी को एक दिन उस बाज पर नजर पड़ी । उसने देखा की उसके मुख में मांस है वह जब अपने सिर को ऊपर उठा कर के देखा तो उसे बाज नजर में आया । इसे देखर के लोमड़ी बहुत ही ज्यादा डर गई  ।

उसे डर था की कंही वह बाज मेरे बच्चे को खा तो नहीं जाएगी तब वह बहुत ही कम खोल से बाहर जाने लगी ।

एक दिन की बात है जब लोमड़ी के बच्चे बहुत ही ज्यादा भूखे थे । वे भूख से तिलमिला रहे थे । तब लोमड़ी अपने बच्चो के भूख मिटाने के लिए बाहर की और जाकर के देखता है की कंही बाज तो नहीं है ।

क्योंकि उसे डर था । उसे पेड़ के ऊपर एक नजर मारी , आस पास के पेड़ में  नजर मारी उसे कंही भी बाज दिखाई नहीं दिया । वह तुरंत खोल से निखळी और भोजन की तलाश ने चली गई .

बाज ये सब एक दूर के पेड़ में बैठ कर के देख रही थी ।

लोमड़ी के जाते ही बाज उस उसके खोल में पहुंच गई और उसके एक बच्चे को उठाकर के अपने घोसले में ले जाने लगी ।

जब वह लोमड़ी के बच्चे को ले जा रहा था तब लोमड़ी के बच्चे जोर जोर से चिल्लाने लगी ।

लोमड़ी पास में ही गया हुआ था । उसने अपने बच्चे के आवाज को सुन ली और दौड़ता हुआ अपने गुफा के पास में तेजी के साथ आया । और देखती है की उसके एक बच्चे गायब है । और ऊपर से उसकी आवाज आ रही है ।

लोमड़ी को ये देखकर के बहुत ही ज्यादा गुस्सा आया । उसे कुछ सूझ नहीं रहा , आखिर करे तो क्या करे । पेड़ के ऊपर में चढ़ना उसके लिए बहुत ही मुश्किल था ।

कुछ देर तक उसे कुछ समझ में नहीं आया , इधर उधर देखती रही लेकिन उसके मन में ख्याल आया ।

वह तुरंत ही गांव के मंदिर के पास में दौड़ती हुई चली गई । उसने वंहा से एक आग की जलती हुई लकड़ी को उठाकर के लाई ।

और अपने बच्चो को खोल से निकालने के बाद में उस खोल में आग लगा दी ।

आग लगने के कुछ ही देर बाद जब आग की गर्माहट बज के पास पंहुचा तो बाज बहुत ही ज्यादा डर गई और उसने अपनी बच्चो को बचने के लिए लोमड़ी के बच्चे को वापस निचे ला दिया ।

इस Sonu Sharma Ki Motivational Story से सीख मिलती है की यदि किसी को समझाने के बाद में न समझे तो उसे उसी के हिसाब से जवाब देना चाहिए . उसी के हिसाब से उसको सबक सिखाना चाहिए ।

और हर Sonu Sharma Motivational Story में मै आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी Sonu Sharma Motivational Story In Hindi आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस कहानी से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

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4 . अच्छाई और बुराई (Sonu Sharma Story In Hindi)

ये कहानी है एक साधु महात्मा की । जो पास के गांव में रहता था । साधु बड़ा ही ज्ञानी व्यक्ति था । आये दिन लोग उसके पास में अपने समस्याओ को सुलझाने के लिए , अपने प्रश्नो के उत्तर लेने के लिए उसके पास में आते थे ।

वे रोज सुबह उठते , भगवान की पूजा करते , ध्यान लगाते और अपने शिस्यो को शिक्षा देते थे । ये उनका डेली का रूटीन था । ठीक ऐसा ही काम रोज करता था । ये काम उसका नित्य दिनचर्य बन गया था ।

एक दिन की बात है हर दिन की तरह अपने शिस्यो के साथ में बैठे हुए थे । तो बातो ही बातो में उसने एक कागज निकला और एक पेन निकाला ।

जैसे ही उसने पेन और कागज निकाली सभी उनकी तरफ देखने लग गए ।

साधु ने उस कागज में एक छोटी डॉट ( बिंदी बनाया ) और कागज को दिखाते कहाँ की ये क्या है ?

तो उनमे से एक शिष्य ने जवाब दिया – गुरूजी ये डॉट है ?

तब  गुरूजी ने कहा – मैंने सिर्फ ये पूछा की ये क्या है ?

तो आपने जवाब दिया – बिंदी है , छोटा सा डाट है , मैंने तुम्हे ये नहीं पूछा की कागज में क्या है मैंने सिर्फ ये पूछा की ये क्या है ?

तो आपने कागज की बजाय डाट , बिंदी के निशान को देख लिया ।

ठीक इसी तरह से हमारे जिंदगी में भी होता है । हम अपने जिंदगी में कितने भी उसे आसमान में पहुंच जाये । सफलता के कितने भी सीढ़ी चढ़ जाये । चाहे हमारे पास में सब खुश हो लेकिन यदि हमरे जिंदगी में किसी भी प्रकार से भूल हो जाती , हमसे अनजाने में गलती हो जाती है तो लोग उस गलती का बड़ा चढ़ा कर के बातें करते है , हमें निचा दिखाते है , वाहवाही करते है ।

ठीक इस Sonu Sharma Story In Hindi की तरह ही होता है  इसलिए दोस्तों किसी भी काम को करने से पहले 100 बार जरूर सोच लेना चाहिए क्योंकि आपकी एक गलती आपके हजारो सच्चाइयो , आपको लाखो अच्छाइयों को बुरा बना देता है , उसे छुपा देता है ।

और हर कहानी में आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी Sonu Sharma Ki Motivational Story आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस Sonu Sharma Story In Hindi से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

और मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर कहानी में आपसे कहता आया हु । इस Sonu Sharma Motivational Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

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5 . फैसला (Sonu Sharma Story In Hindi )

एक बार की बात है एक छोटे से गांव में एक व्यक्ति रहता था । उस व्यक्ति का सपना था की एक दिन वह अपने खेत में एक बड़ा सा बगीचा बनाएगा जो उसकी आखरी निशानी होगी । वह व्यक्ति बगीचा बनाने के लिए उत्साही था । बेचारा बहुत कम पड़ा लिखा भी रहता था । लेकिन वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती भी था ।

एक दिन उसने बगीचे बनाने के काम शुरू किये और उन्होंने धीरे धीरे करके उस खेत को 2 – 3 माह में बगीचा बना लिया । उस बगीचे में तरह तरह के फूलो के पौधे , तरह तरह के पेड़ लगा लिए । और कुछ ही दिनों में वह बगीचा हरे भरे हो गए ।

उस बगीचा के बीचो-बीच एक बड़ा सा पेड़ था । जंहा पर शांति के साथ सुकून के पल बिताया जा सकता था ।

एक दिन उसका पडोसी आया और उसने देखते ही कहा – वाह ! कितना सुन्दर बगीचा बनाया है । बगीचा तो तुम्हे सुन्दर बनाया है ।

उसने बगीचे के सभी तरफ को देखा और अंत में पहुंच गया उस पेड़ के पास में . इस पेड़ को देखकर के कहा बगीचे तो तुमने बहुत अच्छा बनाया है लेकिन इस बगीचे में इस मनहूस पेड़ क्यों लगा रखा है ।

किसान ने कहा – आपका क्या मतलब ?

वह व्यक्ति कहता है – अरे क्या तुम नहीं जानते इस प्रजाति के पेड़ को जो बहुत मनहूस माने जाते है । ये जहाँ होते है अपने साथ में दुर्भाग्य लाते है । इस पेड़ को जल्दी दे जल्दी यंहा से हटाओ ।

यह बोलकर के पडोसी तो अपने घर चले गया ।

व्यक्ति के मुँह से ये बात सुनकर के किसान बहुत डर गया की उसके साथ में कोई अशुभ न हो जाये ।

उसने किसी से ये बात नहीं कही । कुछ ही चांटे बाद रात हो गई और वह घर में जाकर के ये सोचते हुए सो गया की कल न जाने क्या होगा ।

जैसे ही शुबह हुई उसने कुल्हाड़ी निकाली और चल दिए बगीचे की तरह अभी भी उसके मन में संका था की कंही कुछ न हो जाये । उसने पेड़ काटनी शुरू की और देखते ही देखते उसने उस पेड़ को काट कर के गिरा दिया ।

पेट काटते काटते थक गए और शाम होने वाला भी था ।

पेड़ का लड़की बगीचे में जगह जगह बिखरा हुआ था ।

दूसरा दिन फिर किसान का वह दोस्त फिर बगीचे में देखने के लिए आया । और उसने लकड़ी को बिखरे देख कर के कहा – ओहो ! इतने सुन्दर बगीचे में ये बेकार बिखरे हुए लकड़ी । ऐसा करो तुम इन्हे मेरा छोपडी में रखवा दो । यंहा पर ये लकडिया इस बगीचे की सुंदरता को बिगाड़ रहा है ।

और किसान ने उसकी बात मन ली और सभी लकड़ियों को उसके छोपडे में ले जाकर के रखवा दी ।

किसान ने अपने पडोसी के बातो में आकर के पेड़ तो कटवा दिया । अब उन्हें अहसास  होने लगा था की पडोसी लकड़ियों की लालच  में आकर के उससे ऐसा करवा दिया है । 

दुखी मन से वह अपनी गुरु के पास में पहुँचता है और पूरी घटना के बात को बतलाता है ।

गुरूजी ने उनकी बातो को सुनने के बाद मुस्कुराने लगा और कहा तुम्हारे पडोसी ने तो सच ही तो कहा था । वो वास्तव में मनहूस था तभी तो वो तुम्हारे जैसे मुर्ख के बगीचे में लगा था ।

गुरूजी के मुख से ये बात सुनकर के किसान का मन और भी भर गया । 

गुरूजी में उसको उदास देखकर के कहा – उदास मत हो अब तुम पहली जैसे मुर्ख नहीं रहे । तुमने पेड़ तो गवा दिया लेकिन उसके बदले में एक सबक तो सिख लिया जिसे तुम्हे पहले से ही शिख लेना चाहिए था ।

गुरीजी उसे समझाते हुए कहते है जब तक की कोई भी बात तुम्हे अपनी समझ में नहीं आ जाता , तुम्हे पता नहीं है इसका क्या परिणाम होगा , इस काम के क्या नतीजे होंगे जब तक तुम्हे ये सब पता न हो तब तुम किसी के सलाह में काम नहीं करोगो ।

दोस्तों ये छोटी कहानी की सच्ची घटना हमारे साथ में कई बार होता है की हम किसी की देखा देखि , किसी की सलाह पर अपना निर्णय ले लेते है । जैसे किसी दोस्त की वजह से स्कूल में कोई और सब्जेक्ट ले लेते है या किसी और कॉलेज में एड्मिसन ले लेता है

या फिर पड़ोसियों या रिस्तेदारो ले दबाओ में आकर के कोई अपनी नौकरी छोड़ देता है , कोई पढ़ाई को छोड़ देता है ।, कंही कोई और शादी कर लेता है । तो कई किसी भी जगह पर पैसे लगा देता है ।

हो सकता है किसी व्यक्ति के लिए सब फायदेमंद रहा हो लेकिन अधिकतर में ये सब घाटे में ही रहा है । 

दोस्तों लाइफ आपका है , करीयर आपका है तो डिसीजन भी आपही को लेना है जो भी करे अपने समझ में आ रहा है तभी वार्ना नहीं तो आप इस Sonu Sharma Story In Hindi के सामान किसान की तरह मुर्ख बनकर के रह जायेगे ।

और हर कहानी में मै आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी Sonu Sharma Ki Motivational Story आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस Sonu Sharma Motivational Story In Hindi से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

ओर मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर कहानी में आपसे कहता आया हु । इस Sonu Sharma Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

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6 . नेकी की कमाई (Sonu Sharma Motivational Story In Hindi)

एक महात्मा जी थे वह टोपी सिलकर के जीवन यापन करते थे । वह टोपियों की सिलाई से आया हुआ आधा का हिस्सा किसी भी जरुरत मंद को दे देते थे .

और आधी  रुपयों  से ही  स्वं गुजर बसर करते थे . वो बहुत जयदा परोपकारी संत थे  , वे दिन दुखियो की हमेशा मदद करते और बांकी समय में अपना काम करते हुए भगवान का नाम लिया करते थे । 

उनका इक शिष्य भी थो जो गुरु की तरह ही परोपकारी बनना चाहता था और गुरु की तरह वो भी चाहता था की मै दीं दुखियो की दुखियो की सेवा करू ।

पर उसके पास में कोई आये का साधन नहीं था । जिस वजह से उसके पास में रूपये पैसे नहीं थे । जिससे वह किसी का सहायता या सेवा कर सके लेकिन उसके मन में लोगो की सेवा करना का भावना था ।

एक दिन उसने जैसे तैसे कर के उसने अपने घर से ही मात्र 1rupye की चोरी की और अपने गुरु के आश्रम की और चल पड़ा .

कुछ ही देर में वह आश्रम में पहुंच गया और वह पहुंचने के बाद में गुरु जी का आशीर्वाद लेकर के वंही बैठ गया ।

उसने गुरु जी से कहा – महात्मा मै कुछ दान करना चाहता हु , मुझे समझ में नहीं आ रहा है किसे दान करू ?

तो गुरु जी ने कहा – जिसे तुम इस दान के पात्र समझो तुम उसी को ये दान कर दो .

फिर शिष्य ने एक अंधे भिखारी को एक रुपया दान में दे दिया ।

फिर दूसरे दिन शिष्य उसे रास्ते से गुजर रहा था फिर उसने देखा की अँधा भिखारी दूसरे भिखारी से कह रहा था कल किसी ने मुझे किसी ने एक रुपया दिया था और मैंने उसे बहुत मौज मस्ती की और खूब सारा शराब पी ।

ये सुनकर के शिष्य को बहुत बुरा लगा .

फिर वो महात्मा के पास में पंहुचा और उनको पूरी बात को सुनाई ।

फिर महात्मा ने फिर उसे एक कमाई का सिक्का दिया । इसे किसी याचक को दे देना ।

फिर ठीक शिष्य ने याचक को दे दी ।

और पैसे देने के बाद में उसके पीछे पीछे चल दिया । कुछ दूर चलने के बाद एक ऐसी जगह में रुक गया जंहा कोई नहीं था और अपने कपडे में से पंछी को निकल कर के आसमान में उड़ा दिया ।

फिर शिष्य ने याचक से पूछा की तुम्हे इस पंछी को क्यों उड़ा दिया ?

फिर याचक बोला – मै तीन दिन से भूखा था आज मै इस पंछी को मारकर मै इनको खाने वाला था । तो आपने मुझे एक सिक्का दे दिया तो इस मासूम जीव की हत्या करने की कोई जरुरत नहीं है .

फिर शिष्य महात्मा के पास में पंहुचा – और उसने सारे बात को बताने लगा ।

फिर महात्मा ने कहा – की तुम्हारा धन गलत विधि से कमाया गया था इसलिए इसका गलत उपयोग हुआ और मेरा धन , मेरा पैसा परिश्रम करके कमाया गया था तो उस पैसे ने एक गलत काम करने से बचा लिया ।

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है की दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य का सबसे बड़ा भाग निःस्वार्थ भाव से किसी का सेवा करना होता है था म्हणत करके कमाई गई धन भी लफदायक होते है , फलते फूलते है , अच्छे काम के लिए उपयोगी होते है .

अथवा स्वार्थ से की गई सेवा , गलत तरीके से कमाया गया धन दान करने से कोई लाभ नहीं होता ।

और हर कहानी में मै आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी Sonu Sharma Motivational Story In Hindi आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस Sonu Sharma Story In Hindi से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

ओर मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर कहानी में आपसे कहता आया हु । इस Sonu Sharma Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

और आपकी एक कमेंट हमको अच्छी अच्छी Motivational Story लिखने के लिए मोटीवेट करती है । प्लीज इस Sonu Sharma Story को शेयर करे

7 . इंसान की कीमत (Sonu Sharma Story )

sonu sharma motivational story In hindi
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एक बार की बात एक व्यक्ति अकेला बैठा हुआ था । बहुत ही ज्यादा  उदास , बहुत ही ज्यादा परेशानी में , बहुत ही ज्यादा चिंता में , गंभीर  मुद्रा में । उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे , उसे आगे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । बड़ा ही उदास मन ही मन सोच रहा था करू तो करू मै क्या । 

। वह बैठे बैठे गहरी सोच में चला जाता है और वह सोचने लगता है की खाश उसके पास में भगवान आ जाये । जिससे मै उसने बहु सारे धन मांग लेता  , बहुत सारे पैसे मांग लेता । 

उसके मात्र सोचने की ही देरी थी वो जैसे ही भगवान मिलने की बात सोची उसके पास में भगवान जी तुरंत प्रकट हो गए ।

वह व्यक्ति यह देखकर तो बहुत चकरा गया उसे समझ में नहीं आ रहा था की ये भगवान है की नहीं की कोई उससे मज़ाक तो नहीं कर रहा है ।

तब भगवान ने उसे कहा बोलो पुत्र तुमने मुझे कैसे याद किया – तो व्यक्ति ने कहा प्रभु मुझे जिंदगी में बहुत असफलताएं मिली , अब मै निराश हो चूका हु , मै थक चूका हु इस असफलता से अब मुझे डर  लगने लगा है मुझे जिंदगी से ! हे भगवान मुझे बताओ मेरी जीवन का क्या कीमत है । 

भगवान ने उस व्यक्ति को एक लाल रंग का चमकदार पत्थर दिया और कहा जाओ इस पत्थर की कीमत का पता लगाओ लेकिन एक बात याद रखना इस पत्थर को तुम्हे बेचना नहीं है ।

तुम्हे अपने जिंदगी की कीमत का पता चल जायेगा ।

वह व्यक्ति लाल चमकदार पत्थर को सबसे पहले एक फल वाले के पास में गया – और कहा भाई ये पत्थर कितने का खरीदोगे ।

फलवाले ने पत्थर को बड़े ध्यान से देखा और कहा मुझ से 20 संतरे ले जाओ और मुझे ये पत्थर दे दो  उस व्यक्ति ने कहा नहीं मै ये पत्थर बेच नहीं सकता ।

उसके बाद में वह आदमी एक सब्जी वाले के पास में गया और उससे कहा भाई ये लाल पत्थर कितने की खरीदोगे ?

सब्जी वाले ने कहा – मेरे से 2 बोरो प्याज ले जाओ और ये पत्थर मुझे बेच दो ।

फिर उस व्यक्ति उस पत्थर को सुनार के पास में गया – जंहा कई तरह के आभूसन बने हुए थे । उस व्यक्ति ने सुनार को पत्थर दिखाया तो सुनार ने गौर से उस पत्थर को देखा फिर कहा मै तुम्हे पुरे 2 करोड़ रुपया दूंगा ये पत्थर मुझे बेच दो ।

फिर उस व्यक्ति ने सुनार से माफ़ी मांगी और वंहा से पत्थर ले कर के वापस आ गया ।

और फिर वंहा से हिरे बेचने वाले के दुकान में गया । हिरे के व्यापारी ने उस लाल चमकते हुए पत्थर को पुरे 15 मिनट तक के देखा फिर कहा की तुम्हे ये कहाँ मिला ये दुनिया में सबसे अनमोल रत्न है ।

ये सुनकर के वो व्यक्ति बहुत चकित हो गया और वह  वंहा से सीधे वंही पहुंच गया गया जंहा पर उसे भगवान ने उसे पत्थर दिया था । वंहा जाकर के फिर से जोर जोर से भगवान का नाम लेने लगा ।

उसके नाम लेते ही भगवान वंहा प्रकट हो गया और उसने सारी आप बीती बताई । फिर उसने भगवान से पूछा ये अब उसे लालसा जग गई थी जानने की – हे भगवान अब बताइये मेरी जीवन का क्या कीमत है ?

भगवान ने कहा – जब तुमने फल वाले , सब्जी वाले , सुनार ने और हिरे के व्यापारी ने तुम्हे अपने जीवन कीमत बता दी थी लेकिन तुम अभी भी समझ नहीं पाए हो , तुम्हे अभी ज्ञात नहीं हो पाया है इस पत्थर की कीमत तो सुनो

दोस्तों भगवान की बातो को आपको भी ध्यान से सुनना चाहिए – जैसे की इस पत्थर की कीमत अलग अलग जगहों में अलग अलग है ठीक वैसे ही ठीक वैसे ही जिंदगी में तुम्हारे कीमत भी अलग अलग जगह में लोग तुम्हारे कीमत को नहीं पहचान पा रहे है तो जिंदगी में निराश मत हो ।

इस दुनिया में हर व्यक्ति के पास में एक ऐसा हुनर होता है जो सही वक्त में निखर कर के आता है । लेकिन उसके लिए परिश्रम और धैर्य की जरुरत होती है । जिस दिन तुम्हारी सही कीमत का पता चले उस दी तुम्हे खुद पर गर्व होगा ।

और हर कहानी में मै आपसे यही कहता हु दोस्तों ये छोटी सी Sonu Sharma Motivational Story In Hindi आप को कैसे लगी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ओर आपने इस कहानी से क्या सीखा है ये भी आप हमें कमेंट कर के बता सकते है ।

ओर मेरे आप सभी से एक ही बात है जो मै अपनी हर Sonu Sharma Motivational Story In Hindi में आपसे कहता आया हु । इस Sonu Sharma Story In Hindi को आप अपने दोस्तों के पास में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपने दोस्तों के , रिस्तेदारो . परिजनों के पास में ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे . यही हमारा प्रतिफल होता है ।

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