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Takla Motivation || Harsvardhan Jain Motivation

Best 4 Takla Motivation || Harsvardhan Jain Motivation

Best 4 Takla Motivation || Harsvardhan Jain Motivation

1 . . दिल दुखी है -Takla Motivation

एक बार एक लड़की ने एंट्रेस एग्जाम को क्रैक करने की बहुत कोशिश , मेहनत , लगन के साथ में कोशिश करने के बाद भी उस लड़की उस एंट्रेस एग्जाम को क्रैक नहीं कर पाई । जब इतनी मेहनत करने रातो रात तक पूरी तैयारी के बाद भी वह रह गई और तो इस घटना के बाद से वह अंदर से पूरी तरीके से टूट गई ।

इस घटना से लड़की बहुत परेशान रहने लग गई , दुखी रहने लग गई । इतनी परेशान की कई दिनों तक कमरे में अकेली रोती थी . उनके चेहरे से पूरी तरीके से हंसी जा चुकी थी .

उसकी ये हालत उसकी पिता जी से देखि नहीं गई और एक दिन अपनी बेटी को अपने पास बुलाया और उन्होंने बेटी को बुला करके एक बात कही – मेरे साथ तुम किचन में चलो मुझे तुम्हे कुछ दिखाना है .

बेटी अपने पिता के साथ में किचन में चली गई और उसके पिता जी किचन ने गैस स्टोव के ऊपर में 3 गंजी रखे हुए थे .

किचन के पास जाने के बाद में उसके पिता जी लड़की के सामने ही उन तीनो गंजी में पानी भरा उसके बाद में उनके पिता जी एक के अंदर कुछ आलू डाले , एक गंजी के अंदर कुछ अंडे और एक गंजी के अंदर चाय की पत्ती डाली .

और उन तीनो को गैस चालू करके उबलने के लिए छोड़ दिया । उसके बाद में 5 मिनट हो गए , 10 मिनट हो गए , 20 मिनट हो गए । वो वंहा अपनी बेटी के साथ में 20 मिनट तक खड़े रहे और उसे देखते रहे ।

तो उसकी बेटी उदास थी तो थोड़ा गुस्सा करने लग गई कहने लग गई की क्या रहे हो आप ?

उसके पिता जी ने कहा बस एक मिनट और रुको तुमको सब समझ में आ जायेगा .

फिर उसके 20 मिनट रुकने के बाद में एक-एक करके सभी गैस को बंद करता है ।

थोड़ा देर उन सभी गंजी के पानी को ठंडा होने देते है उसके बाद में उनके पिता जी में पहले गंजी से आलू निकल करके प्लेट में रख दिया । दूसरे गंजी से उसने अंडा निकला और उसके दूसरे प्लेट में रख दिया और तीसरे गंजी से चाय निकली और उसे एक कप में रख दिया ।

उसके बाद में उसके पिता जी ने उन सभी को सामने ही रख दिए और उसने क्या दिखाई दे रहा ?

लड़की गुस्से हो गई और गुस्से में कहा एक में आलू है , एक में अंडा है और इस कप में चाय  है ।

तो उसके पिता जी ने कहा थोड़ा इसे छूकर के देखो शायद तुम्हे कुछ समझ आ जाये .

तो लड़की ने आलू को छुआ और उसे थोड़ा सा दबाया तो वो पूरी तरीके से सॉफ्ट हो चुके थे और थोड़े जोर से दबाई तो आलू तो टुकड़ो में टूटू चुकी थी ।

दूसरी प्लेट से उसने फिर अंडे को छुआ तो और उसे तोडा तो उसके अंदर से सॉफ्ट अंडे भीतर के पार्ट निकली . उसके बाद में उसके पिता जी ने उसे चाय के कप को उसके मुँह के पास ले गई तो लड़की मुँह से हल्का सा स्माइल निकल गई ।

फिर उसके पिता जी अपने बेटी को समझाते हुए कहा की इन सभी को ध्यान से देखा क्या हुआ है यंहा पर । आगे कहते है ये तीनो ही अलग-अलग परिस्थिति में गए लेकिन तीनो ही अलग-अलग अपना प्रभाव दिखाया .

पहला आलू जब हम आलू को पानी में डाले थे तो वह बहुत ही हार्ड थे और मजबूत (strong) थे लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद में वो अंदर से बिल्कुल से सॉफ्ट हो गया, नरम हो गया यानि की कमजोर पड़ गए .

और दूसरे थे अंडे जो पानी में जाने से पहले अंदर से बिल्कुल कमजोर थे लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद में वो अंदर से स्ट्रांग हो गए , मजबूत हो गए ।

और तीसरा थी चाय की पत्ती जो बिल्कुल ही आलू और अंडा से अलग था यानि इन दोनों से अलग किया । यानि की गर्म पानी में जाने के बाद में खुद को ही नहीं बदला लेकिन उस पानी के रंग को ही बदल दिया .

बिल्कुल इसी तरह से हमारी जिंदगी में भी होता है तुम्हारे ऊपर है तुम तीनो में से क्या बनाना है ।

एक आलू के जैसा यानि की तुम्हारी जिंदगी में आये तो तुम अंदर से पूरी तरह से टूट जाओ यानि की कमजोर पड़ जाओ ।

दूसरा अंडे के जैसा यानि की जैसी ही तुम्हारी जिंदगी मुस्किले आई वो मुश्किलें तुम्हे अंदर से तोड़े नहीं बल्कि तुम अंदर और स्ट्रांग हो जाओ .

या फिर तीसरा यानि की चाय की पत्ती के जैसा मतलब की तुम्हारी जिंदगी में कुछ मुश्किलें आये तो न सिर्फ उन मुश्किलों को सामना करो बल्कि अपनी जिंदगी को ही बदल दो ।


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2 . ज़ायदा डरना छोडो – Takla Motivation

Takla Motivation || Harsvardhan Jain Motivation
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ये कहानी ही दो दोस्तों की जो छोटे से गांव में रहते थे । एक बार दोनों दोस्तों किसी काम से दूर शहर गए और काम करने के बाद में घर शहर से घर लौट रहे थे । उनको अपने गांव तक पहुंचने के लिए एक घने जंगल से होकर के जाना था ।

जैसे ही उस जंगल के पास आये और उस जंगल के अंदर जाते ही उन दो सस्तो में एक दोस्त को प्यास लगी और पानी की तलाश में वह जंगल की और चल पड़े और पानी की खोज करते हुए दोनों दोस्त जंगल में रास्ता भटक गए ।

धीरे-धीरे रास्तो खोजते हुए शाम हो गई और रात होने ही वाली थी । जंगल में रास्ते की तलाश में जा ही रहे थे की अचानक उन दोनों दोस्त की नजर एक गुफा में पड़ी । गुफा चारो तरफ से पेड़ो से घिरी हुई थी ।

तो उन दोनों दोस्त ने सोचा की यही सही है रात बिताने के लिए । कुछ देर बात में दोनों गुफा को झांककर के देखा और वंही दोनों आस पास से लकड़ी इकट्ठा करने लगे और लकड़ी को ले जाकर के गुफा के अंदर आग जला करके बैठ गए ।

कुछ देर बाद में पूरी रात हो गई । गुफा के बाहर पूरी अँधेरा था , चारो तरफ सन्नाटा था । सिर्फ गुफा के अंदर आग दिखाई जल रहा और गुफा में ही रोशनी थी ।

घने जंगल और दो दोस्त अकेले गुफा के अंदर चारो तरफ से अंधकार कुछ समय बाद में बड़े बड़े जंगली-जानवरो की आवाज सुनाई देने लगा और जैसे ही उल्लू की आवाज आती थी तो जो बहुत ही डरावनी थी ।

उनमे से एक दोस्तों को जंगली जानवरो की आवाज और उल्लू की आवाज को सुनकर के डरने लगा क्योंकि उसने भूत-प्रेतों की  कहानी बहुत सुनी हुई थी कि रात के जंगल में आत्माय भटकती है और उनको कोई भटका हुआ आदमी मिल जाय तो उसे वह नहीं छोड़ती है ।

जब उसके दोस्तों ने भुत प्रेत कि बात को अपने दोस्तों को बताने शुरू कि तो उसके दोस्त ने मुस्कुराते हुए उसे कहा – क्या कभी तुमने किसी भुत को देखा है ।

तो उसने कहा कि मैंने तो नहीं देखा है लेकिन मेरे कुछ जान पहचान के लोगो ने देखा है और कई उदाहरण उनको बताने फिर शुरू कर दिए .

फिर उसके बाद में उसके दोस्त ने उसे समझाने कि बहुत कोशिश की कि भुतवूट कुछ नहीं होता है . सुनु सुनाई बातो पर विस्वाश नहीं करते । अब तू सो जा और मुझे भी सो जाने दे ।

और इतना कहके उसके दोस्त वही पर लेट गया और कुछ देर बाद में वंही पर सो गया ।

वो जो भूतो के बारे में सुना हुआ था , भूतो के ऊपर विस्वाश किया हुआ था , जो भूतो के बारे में बात कर रहा था , जो अंदर से भूतो के बारे में सोचकर के डरा हुआ था । वो सो गया था लेकिन वो बहुत डरा हुआ था लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी ।

उसे डर लग रहा था की उसको लगा कि गुफा के अंदर कोई है जो छुपकर के कंही से उसे देख रहा है ।

उस आग की वजह से कुछ परछाईया बन रही थी । जब उन गुफा के पत्थरो में आग की परछाई जाती थी तो और डरवानी लगती थी और डरता हुआ सो गया .

कुछ देर बात उसे नींद आ गई और वह गहरे नींद में चला गया . कुछ समय बाद उसे सपने आने शुरू हो गे सपने में उसे इक भयानक परछाई उसकी तरफ बढ़ती हुई नजर आई .

वो जैसे जैसे डरता चला जा रहा थो वो वैसे वैसे अंदर से डरता चला जा रहा था । जैसे जैसे परछाई आगे आ रहा था वैसे वैसे परछाई बढ़ता चला जा रहा था . उन्हें पलहे तो साफ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अचानक से उसे परछाई में हाथ दिखाई दे रहा था ।

वो हाथ उसकी तरफ बढ़ता चला जा रहा था , सन्नाटा और बढ़ता गया , हाथ और बढ़ता गया , हाथ बढ़ते बढ़ते उसके गले तक पहुंच गया । जैसे ही हाथ उसके गले तक पंहुचा वो झकनका के उठ गया , उसकी नींद खुल गई ।

जैसे ही सपने से उठता है उसके साँस फुले हुए , बहुत ही ज्यादा घबराये हुए , उनके होश उड़ गए थे । डरते हुए अपने दोस्त

फिर अपने दोस्त कि तरफ देखा जो वो रहा था । वो आने दोस्त को पकड करके जोर से उठाया . फिर उसके दोस्त को बताया कि उसके साथ में क्या हुआ ।

फिर उसके दोस्त उसके बातो को सुनकर के हसने लगा । फिर उसके दोस्त ने उसे समझाते हुए कहा कि अब यदि वो परछाई दिखे तो तुम वही कहना जो मैं तुम्हे जो बोल रहा हु उसे धयान से सुनो । तुन्हे अंदर ही अंदर कहना है मै तुझसे नहीं डरता , सामने आ ।

समझाने के बाद में दोनों दोस्त फिर सो गए .

सोने के कुछ देर उसके दोस्त को फिर सपना आया और फिर वही सपना फिर आया . सपना में फिर वही परछाई नजर आई और परछाई धीरे-धीरे उसके तरफ बढ़ने लगा लेकिन इस बार वो उस परछाई से डरा नहीं बल्कि अपनी पूरी हिम्मत जुटा करके उसने वही कहा – मै तुझे नहीं डरता , सामने आ ! , मै तुझसे नहीं डरता सामने आ ! मै तुझसे नहीं डरता सामने आ !

जैसे-जैसे वो बोलने लगा वो परछाई छोटी होने लगी और परछाई पीछे चली जाती गई , उससे दूर चली जाती गई । वो बार बार बोलता रहा वो परछाई छोटी होती रही और धीरे-धीरे वो परछाई दिखने बंद हो गई ।

बिल्कुल ऐसा ही हमारे जिंदगी में भी होता है हमारे अंदर जितना भी डर है हम उस डर को बार-बार सोचकर डर जाते है और वो डर जो की हमारा भ्रम है उतनी ही बड़े होते चली जाती है

लेकिन यदि अपने अंदर के डर को ख़त्म करते उससे डरना छोड़ते है और उस डर का डटकर सामना करते है तो दुनिया का ऐसा कोई भी डर नहीं है जो हमें डरा पाए .


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3 .  बंदर की तरह काम मत करो – Takla Motivation

एक बार की बात है कुछ साईटिस्ट ने मिलकर के बहुत ही इंटरेस्टिंग एक्सपेरिमेंट किया . उस सभी साईटिस्ट ने एक बड़ा सा पिंजरा लिया । उस पिंजरे में एक पांच बंदरो को उस पिंजड़े के अंदर डाल दिया .

उन बंदरो को पिंजड़े के अंदर डालने के बाद में उस बड़े पिंजड़े में एक सीडी लगा दी । सीडी के सबसे ऊपर वाले पंक्ति में उन्होंने कुछ केले लटका दी ।

कुछ देर बाद में वे बंदर केले को खाने के लिए सीडी में चाहा और जैसे ही वो केले के पास पहुँचता तो साईटिस्ट ने उसके ऊपर ठन्डे पानी छिड़कता ।

जैसे ही वो ठंडा पानी बन्दर के ऊपर गिरता वो सीडी से निचे उतरता और जैसे ही बन्दर सीडी से निचे उतरता वो ठंडा पानी गिरना बंद हो जाता .

फिर दुबारा से कोई और बन्दर उस सीडी में चढ़ने लगता और जैसे ही वो सीडी के में चढ़कर के केले के पास पहुंचने वाला होता फिर साइंटिस्ट उसके ऊपर ठन्डे पानी छिड़कता और फिर बन्दर निचे उतरता और वो ठंडा पानी बंद हो जाता । 

ऐसे ही दूसरे बन्दर के उतरने के बाद में तीसरे बन्दर केले खाने के लिए सीडी में चढ़ता फिर उसके साथ में वही ठण्ड पानी उसके ऊपर गिरता और पानी बंद हो जाता ।

तो बंदरो ने इसका मतलब ये निकला की जैसे ही कोई बन्दर सीडी पर चढ़ता है तो ऊपर से ठंडा पानी गिरता है ।

फिर उसके बाद में कोई भी बन्दर सीडी में चढ़ने की कोशिश भी करता तो उस बन्दर को पकड़ता , उसे मारते , पीटते , और खींचकर के सीडी से निचे गिरा देते .

फिर दोबारा कोई चढ़ने की कोशिश करता दुबारा उसके साथ भी ऐसा ही होता बन्दर को पकड़ते मारते , पीटते और खींचकर के से सीडी से निचे गिरा देता .

फिर उस सभी साईटिस्ट ने क्या किया ?

तो साईटिस्ट ने उन सभी बंदरो से एक बन्दर को उस पिंजड़े से निकला और उस बन्दर के बदले एक नए बन्दर को पिंजड़े के अंदर डाल दिया ।

अब उस नया बन्दर जिसे अभी-अभी पिंजड़े के अंदर डाला गया था उसे नहीं पता था की इस पिंजड़े के अंदर क्या हो रहा है . जैसे ही उसको सीडी के ऊपर में केले नजर आई तो वो फटाफट सीडी के के ऊपर चढ़ गया . अब की बार साइंटिस्ट में कोई बारिश नहीं करि उन सभी बंदरो ने उस नए बन्दर को पकड़ा , खीचकरके निचे उतरा और मारने पीटने लग गए । 

इस नए बन्दर को समझ नहीं आया की उसे क्यों मारा जा रहा है । उसके फिर दोबारा कोशिश करि और जैसे ही वह सीडी में चढ़ने की कोशिश करि तो दोबारा उस सभी बंदरो ने उसे पकड़कर कर धुलाई करना फिर शुरू कर दिया । 

अब नए बन्दर के दिमाग में ये बैठ गया की सीडी में चढ़ना मन है सीडी पर चढ़ते है तो मार पड़ती है । उस सीडी पर चढ़ना क्यों मना ? और क्यों मार पड़ती है ? ये उसको नहीं पता था परन्तु उसके दिमाग में ये बैठ गया की सीडी पर नहीं चढ़ना है ? और न किसी को चढ़ने देना है ?

उसके बाद फिर साईटिस्ट ने उन पुराने चार बंदरो में से एक बंदर को फिर निकला और फिर उस पुराने बन्दर के स्थान पर नए बंदर को उस बड़े से पिंजड़े के अंदर डाल दिया ।

अब इस ने बन्दर जिसे अभी-अभी डाला गया था उस बदर ने वही किया जो इससे पहले वाले बन्दर ने किया यानि की भागता हुआ गया उस सीडी के ऊपर चढ़ने की कोशिश करि उन केलो तक पहुंचने की कोशिश करि तो उन सभी चारो बंदरो ने फिर पकड़ा , सीडी ने निचे गिराया और मारा पीटा .

उस नए बन्दर को कुछ समझ नहीं आया उसने फिर दुबारा कोशिश करि और फिर दुबारा उसके साथ में वही हुआ उनको सीडी से उतरा गया , पीटा गया , मारा गया अब इस बन्दर के दिमाग में भी यही बैठ गया की सीडी पर चढ़ना मना है और सीडी में चढ़ने पर चढ़ने पर चढ़ने पर मार पड़ती है ।

फिर साइंटिस्ट ने उन तीन बंदरो को एक-एक करके निकला जैसे की पहले दो बंदरो के साथ किया था वैसे ही . उन पुराने तीन बंदरो के बदले तीन नए बन्दर एक एक करके उस पिंजड़े में डाला गया ।

अब ये पांचो बन्दर नए थे और किसी को भी नहीं पता था की सीडी पर चढ़ना मना क्यों है ?

लेकिन उनके दिमाग में ये बैठा हुआ था सीडी पर चढ़ने से मार पड़ती है तो कोई भी बन्दर सीडी में चढ़ने की कोशिश नहीं कर रहा है जबकि अब तो कोई ठन्डे पानी की बारिश भी नहीं हो रही थी . वो सभी बन्दर चाहते थे तो आराम से उस सीडी पर चढ़ सकते थे केले तोड़ते और आपस में बाटकर के खा लेते .

बिलकुल ऐसा ही हम लोगो के साथ में होता है । हम इंसानो के साथ में होता है । हजारो साल पहले कोई प्रथा बानी होती है , कोई रीती रिवाज होता है उनके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होगी . वो वजह ख़त्म होने के बाद भी वो प्रथा चलती रहती है , वो रीती रिवाज चलते ही रहते है । किसी की इतनी हिम्मत नहीं होती है हम क्या कर रहे है ? , क्यों कर रहे है ?

पर सब को ये पता होता है की ऐसा ही होता है ।

तो वो एक्सपेरिमेंट जिसके बारे में आपको बताया गया है यानि की वो बंदरो का एक्सपेरिमेंट में . उसमे तो बेचारे बन्दर है , वो तो जानवर है । उनको नहीं पता है की प्रश्न कैसे पूछते है ।

अगर हम इंसान होने के बावजूद भी प्रश्न न करे तो हमारे में और जानवर में क्या फर्क है ? जरा गंभीरता से सोचिये ।


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4 . खुद को किसी से कम मत समझो – Takla Motivation

एक छोटा सा गांव था । उस गांव में पहाड़ था और उस पहाड़ पर एक व्यक्ति पत्थर तोड़ने का काम करता था । उसको अपनी जिंदगी से किसी भी प्रकार का कोई शिकायत नहीं था । दिन भर पहाड़ में पत्थर तोड़ने का काम करता , थोड़े बहुत समय मिलता तो आराम करता और जैसे ही शाम को काम ख़त्म होता तो 

काम के पैसा को साथ में पकड़कर के घर चले जाता और परिवार के साथ ने समय बिताता और खाना खा के सो जाता , आराम करने लगता ।

एक दिन वो अपने काम को ख़त्म करने के बाद में अपने घर की तरफ जा रहा था रास्ते में चलते-चलते उनके मन में ख्याल आया की ये भी कोई जिंदगी है ? 

मै शुबह से शाम तक पत्थर तोड़ने का काम करता हु और काम ख़त्म करने के बाद में मुझे अंत में thode से , बहुत ही कम पैसे मिलता है जिसमे मुश्किल से मेरा और मेरे परिवार का गुजरा हो पाता है ।

वो मन ही मन सोच रहा था की काश ! कोई ऐसा हो जाये , कंही से कोई ऐसी शक्ति मिल जाये , जो भी मै चाहता हु वो सच में बदल , सच हो जाये ।

सोचते-सोचते वो घर तक पहुंच गया रास्ते का पाता नहीं चल सका .  शाम को जब खाना खाने बैठा तो उसका ध्यान नहीं था खाने में वो उसी सोच में डूबा हुआ था । खाना खाने के बाद में खाट में उसी ख्याल में डूबे रहे ।

सोचते-सोचते ही उसकी नींद लग गई और कुछ देर बाद वो पुरे तरह गहरी नींद में चला गया । गहरी नींद में एक सपना आता है । सपने में उन्होंने देखा की रोज की तरह वो अपने काम ख़त्म करके अपने घर लौट रहा था रास्ते में उसने एक बहुत ही बड़ा घर देखा । घर देखकर उसने सोचा काश ये घर मेरा होता और मै इसका मालिक होता और उसके सोचते ही वह उस घर का मालिक बन गया ।

लेकिन उसे यकीन नहीं हो रहा था की जैसे उसने ही सोचा वैसा ही हो गया वह घर का मालिक बन गया है लेकिन उसकी खुसी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई । उसे एक बहुत शोर सुनाई दे रहा था ।

उसने उस शोर को सुनकर के अपने घर से बहार निकला तो देखा की एक बहुत बड़ी रैली , एक लम्बी लाइन , कतार में लोग आ रहे थे  निकली हुई थी उसके बीचो बिच एक बड़े नेता है जो दोनों हाथो को हिला रहा है । और वंहा जितने भी लोग थे उनके नाम के नारा लगा रहे थे । उसके आगे आके उसके चरण छू रहे थे । सब उसको देखने के लिए तड़फ रहे थे ।

ये सब देख कर उसे लगने लगा था की कितना छोटा हु मै उसके आगे कुछ भी नहीं हु । तब उसके मन में ख्याल उठा की काश मै नेता होता , मेरे पास में ऐसी ही पावर होती तो लोग भी मेरे बातें सुनते , मुझे देखने के लिए तड़पते , लोग मुझे पीछे-पीछे आते ।

बस उसके इतना सोचने की ही देरी थी की वह बन गया नेता । ये देखकर की वह नेता बन गया है उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसके आस-पास में हजारो लोगो की भीड़ थी सब उसको देखने के लिए तरस रहे थे , तड़फ रहे थे उसे देखने के लिए ।

लेकिन उसकी ये खुसी भी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी क्योंकि उस समय गर्मी बहुत ज्यादा थी और उसे आदत नहीं थी गर्मी में रहने की और उस गर्मी धुप की वजह से उसे चक्कर आ गया और वही गिर गया चक्कर खा के ।

कुछ देर बाद होश आया तो लगा की ये पॉलिटिशियन/ नेता सबसे बड़ा ताकतवर नहीं ये उसे लगा की सबसे बड़ा ताकतवर ये सूरज है और उसके मन में आया की काश मै ये सूरज बन जाऊ . ऐसे लगने लगा की मेरे आगे कोई नहीं टिक पायेगा .

बस क्या उसका इतना सा सोचने की बस देरी ही थी की वह सूरज बन गया और ये देखकर की वो खुसी से पागल हो गया , झूम उठा , चिल्लाने लगा मै सूरज बन गया हु । उसे लग रहा था की वो पूरी दुनिया को रौशनी कर रहा था और उसके सामान कोई नहीं है इस दुनिया में जो मेरे रौशनी को रोक सके .

लेकिन उसकी सूरज बनने की खुसी भी ज्यादा देर तक नहीं रह सकी , ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई क्योंकि कुछ समय बाद उस आसमान में काले बादल आये जो उस सूरज की रौशनी को फैलने से रोक दिया था फिर उसको लगा की ऐसा कोई ऐसा भी है जिसमे दम है इस रौशनी को रोकने का ।

उसके बाद उसके मन में ख्याल आया की काश मै ये बादल बन जाऊ । बस क्या उसके कहने की ही देरी थी और वो बादल बन गया और बादल बनकर के उड़ने लगा आसमान में । उसको लगने लगा की वह आसमान में उड़ रहा है और जंहा चाहे वंहा जा सकता है लेकिन कुछ देर बाद बहुत ही ज्यादा हवा का छोका आया जो की इन बादल को उड़ा करके ले गया ।

फिर उसे समझ आया वो सूरज की रौशनी को तो रोक सकता है लेकिन हवा के छोका को नहीं रोक सकता , ये हवा ही उनको बहा करके ले जा सकती है । इसके बाद उसके मन में ये ख्याल आया की काश मै ये हवा बन जाऊ ।

और क्या देरी थी उसके कहने के तुरंत बाद वो हवा बन गया । हवा बनने के बाद में उसको एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव हुआ , उसको लगाने लगा की वो चाहे तो आराम से बहता या आंधी बनकर , तूफान बनकर , जिसको भी चाहे उड़ा सकता है । उसे पूरा विस्वाश होने लगा था की दुनिया सा सबसे शक्ति साली मै हु मुझे कोई नहीं रुख सकता । मै सबसे महान और सर्वत्र हु ।

ये सब सोचने के बाद में उसके सामने आया एक पहाड़  .

उसने पूरी ताकत लगा दी उस पहाड़ को गिराने में , हटाने में फिर भी उसे इत्ता सा नहीं हिला पाए , उनका बाल भी बांका नहीं कर पाए तब उसकी सारि ख़ुशी वंही धरासाई हो गई और उसको ये अहसास हो गया की हवा से शक्तिशाली भी है कोई इस दुनिया में ।

जिसमे दम है हवा को रोकने का । उसके बाद उसके मन में ख्याल आया की काश मै ये पहाड़ होता । बस क्या था उसके कहते ही वो पहाड़ बन गया । लेकिन हर बार की तरह उसकी ख़ुशी ज्यादा देर तक नहीं रह सकी और उसको एक जनि पहचानी सी आवाज सुनाई दी । साथ ही साथ उसको दर्द होने लगा जैसे की कोई है जो उसे तोड़ रहा है , उसको मार रहा है , उस पर सिनी , घन चला रहा है ।

तो दर्द से वो चीखने लगा , चिल्लाने लगा और उसके मन में आया की काश मै वो बन जाऊ जो की इस पहाड़ को तोड़ने का दम रखता है ।

लेकिन इस बार उसकी ये ख्वाइश पूरी नहीं हुई वो रोने लगा , जोर-जोर से चिल्लाने लगा , उसने पूरी कोशिश की , पूरी जान लगा दी लेकिन इस बार वो नहीं बन पाया .

उसका दर्द बढ़ता ही चला जा रहा था और दर्द की वजह से उसकी नींद खुली और सामने ही दर्पण था उनसे उठाकर के दर्पण में देखा और उसे पहले तो कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन उसके कुछ देर बात उन्हें समझ आ गया की वह सपने में वो क्यों नहीं बन पा रहा था ।  जो वो बनना चाहता था क्योंकि असलियत में मै वो ही हु । इसके कारण से वो सपने में दोबारा नहीं बन पा रहा था ।


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