Top 3 Best RJ Kartik Story | जो सोच बदलेगी

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हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी लोगो का हमारे इस ब्लॉग पोस्ट में आज की इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको फेमस रेडिओ जॉकी में नाम कमाने वाले , और लोगो के बिच में उसे अंदर से मोटीवेट करने वाले हमारे और आपके सभी के चाहते , rj KARTIK के कुछ कहानियो को जिसे सुनने और पढ़ने के बाद में हो सकता है आपकी सोच ही बदल कर के रख दे ,

आरजे कार्तिक स्टोरी || RJ Kartik Story

ये सभी कहानिया एक ऐसी पात्र और घटना पर आधारित है जिसने किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भी ताल्लुक नहीं रखता है लेकिन लोगो को अंदर से जरूर मोटीवेट करता है , ये कहनिया आपको उन लोगो के लिए प्रेणा के रूप में काम करता है जिसने जिंदगी में बहुत ही ज्यादा हताशा , निराशा और हर का सामना किया , साथ ही ये कहाणीआ भी उन लोगो के लिए भी जिन्हे पता नहीं है की उन्हें जिंदगी में क्या करना है , क्या वे आगे कर सकते है ।

तो चलिए दोस्तों बिना किसी देरी के कहानिया को शुरू करते है :-

1
. life is Beautiful – rj kartik story

एक बार की बात है एक व्यक्ति अपने बेटे के साथ में किसी किराया के मकान में रह रहा था । वह उस मकान में नया नया आया हुआ था । उसे नहीं पता था की उसके साथ कभी ऐसा होगा ।

एक दिन अचानक से उस मकान की मालकिन आई जोर से चिल्लाले और दरवाजे के बहार खड़े हो गई और कहने लगी जोर से आवाज में तुम कब अपने मकान का भुगतान करने जा रहे हो ? , बड़े गुस्से में आज एक महीना और पुरे पांच दिन हो गए ?

कब दे रहे मेरे घर का किराया ?

व्यक्ति महिला से कहती है – क्या आप कुछ समय और दे सकती है ?

महिला उसका ये सब्द सुनते ही गुस्से में कहा – जोर से चिल्लाते हुए पांच दिन तो हो गया और कितने दिन चाहिए । यदि तुम किराये का पैसे नहीं चूका सकते तो इसे घर को छोड़कर के तुम जा सकते हो ।

महिला बहुत ही ज्यादा गुस्से में थे इतना कहकर महिला वंहा से चले गई ।

उस समय उसका बेटा बैठकर पढ़ाई कर रहा है वो ये सब सुन रहा था । उसका पिता जी उसके पास जाता है और कहता दयँ मत दो पढ़ाई में ध्यान दो ।

लड़का जानता था की उसके था की उसके पिता जी कितना काम करते , दिन भर कितना गाली सुनता है वे सब जानता था ।

रोज शाम होती है तो उसके पिता जी उसे पढ़ाता है और हमेशा उन्हें एक ही बात कहता है – मन लगाकर पढ़ो, यही वह शब्द है जो मैं हमेशा अपने पिता से सुनता हूं ।

जब मैं सो जाता था तो मुझे वो चादर ढकता , जब शुबह होने वाली होती थी तब बिना किसी आवाज किये खाना बनाता ताकि मेरे नींद न टूटे , जब मैं शोकर के उठता था तो सभी चीज बन गया होता था । मैं शुबह उठता फ्रेश होकर के स्कूल आता ।

धीरे-धीरे समय बीतता गया लड़का छोटे से बड़ा होता गया । आगे की पढ़ाई करता गया और पढ़ते-पढ़ते नौकरी लो में जज का एग्जाम देता है ।

जज के एग्जाम में वह क्लियर करता है । उस दिन अपने पिता को बिना बताये नौकरी के जॉब लेटर को लेकर पिता जी के पास जाता है ।

पिता जी उस समय अपने सिक्योरिटी गार्ड की में तैनात था जंहा पर किसी गाड़ी के दरवाजे को खोल रहा था और उसे आगे जाने दे रहा था । गाड़ी जब आगे गई तो अचानक से उसे अपने बेटे दिखाई दे रहा था । उसके हाथ में लाल रंग का फाइल था ।

लड़का पिता जी के पास बड़े ख़ुशी के साथ पैदल चलते आ रा रहा था । जैसे ही उसने अपने पिता जी को गाड़ी के दरवाजे को खोलता देखता है उसे पुरानी बातें याद आ जाता है ।

वह आ जरूर रहा है लेकिन उसके मन में वह ख्याल था की दिन जब वह बहुत ही छोटा था तब वह स्कूल से उसके पास आ रहा था एक व्यक्ति उसे गाली दे रहा था , बहस कर रहे थे और उसके बाद बहस में ही उसके पिता जी को नीचे ढकेल दिया था .

ये सोचकर उनके आँखों में आँशु निकल आते है वो आगे बढ़ता ही जा रहा , उनकी आँखों में खुसी के आँशु थे जो उनके पुराने दिन याद तरोताजा हो रहा था ।

वह दिन उसे अच्छी तरह से याद था जब महिला जब महिला उसे रूम किराये के लिए आई थी उस दिन पिता जी ने उसे नहीं बताया था लेकिन उसने अपने माँ की एकलौती निशान उसकी पायल को बेचकर के किराया पटाया था ।

उसे वह दिन भी याद था जब उसके पास बैग लेने के लिए पैसा नहीं था तब उसके पिता ने अपने हाथो की घडी को बेचकर के उसके लिए बैग लिया था ।

उसे वो दिन जब उनके परीक्षा के दिन जब उनके पिता जी ने अपने ब्लड को बेचकर के परीक्षा के लिए पैसा दिया था ।

और आज दोनों एक दूसरे से मिल रहे थे लड़के के आँख में आँशु था पहले तो दोनों एक दूसरे को गले मिला उसके बाद उस लड़के ने अपने जोइनिंग लेटर को अपने पिता जी के हाथो में दिया और भाउक होकर के उनके चरणों में दोनों हाथो को लेजाकर के माथा टेका रहा ।

उसके लिए वही माँ था , वही उनके लिए सब कुछ था , वही उसे संस्कार देने वाला था , वही उसका ख्याल रखने वाला था । उसका कहे हुए शब्द मन लगाकर पढ़ो, यही वह शब्द है जो मैं हमेशा अपने पिता से सुनता हूं ।


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2 . Garbage Man Super Hero – rj kartik story

 Rj Kartik Story
Rj Kartik Story

एक बार की बात है एक स्कूल में पेंटिंग प्रतियोगिता रहा गया (motivational story in hindi) । जंहा एक क्लास में महिला टीचर में बच्चो चित्र बनाने के लिए पेपर दिया और कुछ कलर पेंसिल दिया । उन सभी बच्चो को एक समय दिया गया और उस प्रतियोगिता में कहा गया की आप सभी को सुपर हीरो की पेंटिंग बनाना होगा जितने वालो को अच्छे नंबर और प्राइज दिया जायेगा ।

जैसे ही घंटी बजी वैसे ही सभी बच्चे पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया । टीचर सभी बच्चो को देख रही थी . सभी बच्चे अपने अपने पेंटिंग बनाने लगे। आधा घंटा बीतने के बाद में फिर दुबारा घंटी बजा तो सभी दुबारा घंटी बजे के बाद में पेंटिंग बनाना छोड़ दिया ।

टीचर सभी बच्चो से पेंटिंग लेकर जांचने शुरू किये । पहला 10 में 7 सात नंबर , दूसरा पेंटिंग 10 में 6 नंबर , तीसरा पेंटिंग 10 में 7 नंबर , ऐसे करते करते सभी पेंटिंग को नंबर दे दिया . अब बचता है उनके पास में एक पेंटिंग जो मैडम उस पेंटिंग को देखकर चकित हो गया ।

टीचर देखते ही रह गया , चारो तरफ नजर लगाए पेंटिंग में सभी को बड़े ध्यान से पड़ने लगी . नीचे उस बनाने वाले का नाम लिखा था ।

टीचर जंहा बैठी थी वहां से उठी और सीधा चले गई उस क्लास में और उस में सभी बच्चे खेल रहे थे . टीचर लड़के का नाम लेकर आवाज लगाई .

लड़का डर गया और वही सीधे खड़ा हो गया सिर को नीचा किये ।

टीचर ने सवाल किया – कौन है तुम्हारा Garbage man Super Hero ?

बच्चा ने जवाब दिया – मैम वह अभी काम पर है ।

टीचर ने कहा – आपका क्या मतलब है ? 

तब लड़के ने कहा – मैम !

जब मैं स्कूल से घर जाता हु तब दौड़ते हुए रास्ते से जाता हु जिधर मेरी माँ रहती है । रास्ते में यदि कोई कागज का टुकड़ा मिल जाये , बोतल मिल जाये , पालीथीन मिल जाये , या किसी प्रकार से कचरा मिल जाये मैं उसे उठाकर के कचरा डिब्बे में डालता हु ताकि मेरी माँ को फिर झाड़ू लगाना ना पड़े ।

फिर मैं अपने माँ के पास जाता हु और देखता हु की मेरा माँ उस समय झाड़ू लगा रही होती है । मैं अपने माँ आ गया । माँ कहती है क्या क्या पढ़ाया । कुछ नहीं पढ़ाया । अपनी सारी बातें को बताने लग जाता ।

माँ मुझे देखकर बैठ जाती है तो पैर को मालिश करने लग जाता हु । माँ के थोड़े देर बैठने तक मैं झाड़ू पकड़कर के रास्ते में झाड़ू लगता हु ।

टीचर लड़के के बात को बड़े ही भाउक होकर सूनने लग जाती है ।

माँ जब अपने कपडे जिसे पहन कर काम करती उसे उतारती है तो मैं उसे पहनता हु और टोपी लगाकर के , हाथो में ग्लब्स लगा के झाड़ू लगता हु । तब तब मेरे माँ आराम करती है .

टीचर लड़के के बात को सुनकर के चली जाती है और खुर्सी में बैठकर के उस पेंटिंग को और देखने लगती है ।

उस पेंटिंग में सबसे ऊपर में लिखा रहता है SUPER HERO . उसके जस्ट साइड में लिखा रहता है THE GARBAGE MAN SUPER HERO.

पेंटिंग में एक कपडा जो सड़को में झाड़ू लगाने वाला पहने रहता है वैसे ही रंग में रंगा पेंटिंग , हाथो में ग्लव्स , सर में टोपी , एक झाड़ू और कचरा उठाने वाला । उस पेंटिंग में एक कचरे उठाने वाले महिला का था । जो रास्ते में कचरा उठा रहा था ।

टीचर उस पेंटिंग को बड़े गौर से देखती है , उनके एक एक शब्द को बड़े गौर से पड़ती है पड़ते पड़ते महिला के चेहरे में हल्का सा मुस्कान / स्माइल आ जाता है ।

और उस पेंटिंग को पुरे 10 में से 10 नंबर देती है ।


Rj Kartik Story In English (Story No 1)

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3 . LAST DAY OF SCHOOL  – rj kartik story

ये RJ kartik story एक लड़की है । शहर के स्कूल में पढ़ाई करती थी . हर साल की तरह इस साल भी लड़की अपने रिजल्ट लेने के लिए स्कूल गई हुई थी . सभी बच्चे स्कूल में बैठे थे । चारो तरफ सन्नाटा था सभी अपने अपने रिजल्ट लेकर के जा रहे थे .

सभी के मन में डर था की वो पास होगी की नहीं, कोई अपने नाख़ून कुतर रहा था , तो कोई भगवान का नाम लेकर प्राथना कर था तो कोई बहुत ही शांत अपने रिजल्ट लेने देखने उत्सुक था, तो कोई एक दूसरे की मुँह ताक रहा था । 

jaise ही किसी का नाम पुकारता सभी बेचैनी, डर साथ उत्सुकता और बड़ जाता . क्लास में बैठी टीचर एक एक का नाम लेकर पुकार रही थी . जिस-जिस का नाम ले रहा था वो जाकर के अपने रिजल्ट को ला रहे थे ।

कुछः देर बड़ में उस लड़की की नाम आता है . लड़की का दो-तीन बार नाम पुकारती है । लड़की कंही ख्याल में डूबी हुई थी ।

टीचर के पास जाती और अपना रिजल्ट लेकर के वापस आ जाता है । रिजल्ट लेते समय थोड़ा सा टीचर के सामने स्माइल करती है । रिजल्ट को लेकर के घर जाती है ।

उस दिन अपने पिता अपने छोटे भाई , बहन के साथ बड़े ख़ुशी के साथ खाना खाने के लिए बैठती । सभी बड़े हंशी ख़ुशी के साथ में खाना खा रहे थे ।

लड़की के पिता जी खाना की तारीफ करते हुए कहता है – आज तुम्हारा रिजल्ट था न क्या हुआ ?

लड़की थोड़े डरे हुए , सहमी हुई कहती – वो अच्छा नहीं गया ।

फिर उसका पापा कहता है – मैंने सोचा था कि तुम हर रात पढ़ाई करती हो ?

फिर पापा उसे पूछती है – तुमने अच्छा क्यों नहीं किया ?

लड़की अटकती वो पापा वो …. असल में मैंने काम करना शुरू किया है !

जैसे उसने उसे कही कि वह काम करने जाती है । उसके पिता जी का दिमाग गर्म हो गया , जोर जोर से चिल्लाने लगा , उसके चेहरे पर पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था ।

गुस्से में जोर से चिल्लाते हुए कहता है – तुम क्या कर सकती हो ? , कौन तुमको काम पर रखेगा ?

क्या तुम मेरी तरह बेकार होना चाहते हो?

लड़की अपने पापा कि बात सुनकर रोने लगी और रोते हुए कहती है लेकिन…. मैं परिवार का मदद करने के लिए कर रही हु ।

fir उसके पापा जोर गुस्से होकर कहता है – हमें इसकी आवश्यकता नहीं है? और गुस्से-गुस्से में उसके मुख से निकालता है – अगर आप काम करना चाहते हैं तो घर मत आना!

अपने दोनों बच्चो को देखकर कहता है – तुम दोनों भी सुनो ? अपनी बहन की तरह मत बनो।

और वो गुस्से होकर के लड़की को फेलिअर कहके चले गए .

उस दिन उसके पिता जी पहली बार खाना को आधा छोड़कर गुस्से में चले गया .

उनके दोनों छोटे भाई और बहन अपने पापा के गुस्से से बहुत डर गए थे और बहन कि तरफ देख रहा था ।

लड़की उन बातों को सोचकर रो रही थी उन्हें आँखों के सामने वो सारी बाटे ताजा हो रही थी –

कि जब स्कूल से छुट्टी के बाद एक होटल में कुछ छोटे काम करने के लिए जाती थी जंहा पर उन्हें हर सफ्ताह पैसे मिलते थे । कुछ कुछ दिन तो यदि खाना बच जाती थी वो वंहा से खाना या कोई मिठाई घर ले आती थी . 

काम ख़त्म करने के बाद में अपने छोटे-भाई बहन हो स्कूल से लेन जाती थी । घर में आने के बाद घर का सारा काम करती थी । खाना बनाना , बर्तन धोना , किचन का काम , कपङे धोना , अपने भाई बहन का ध्यान रखना . 

अपने पिता जी का देखभाल करना । उनको उठाना , घूमने के लिए ले जाना , उनकी दवाई नास्ता पानी . उनके सभी चीज को संभालती थी .

उनके पिता जी उन्हें हमेशा सबसे अलग मानती थी उसकी माँ के स्वर्गवास हो जाने के बाद घर कि सारे जिम्मेदारी को सम्हाल रही थी । पिता जी चल नहीं सकते थे लेकिन व्हीलचेयर में अपने आप को घर के सभी कोने तक ले जा सकता था । 

बड़े बेटी होने के नाती और परिवार कि जिम्मेदारी और घर में कोई कमाने वाला न होने कि वजह से उसने काम शुरू किया था । 

उसके दिन तो उसके पिता जी उनसे नाराज थे । बहुत ही ज्यादा गुस्सा में थे लेकिन उनका मन नहीं मान रहा था कि वह फ़ैल हो गई है । उसे रहा नहीं गया . वो बेचैन था उसके रिजल्ट को देखने के लिए .

दूसरे दिन वो उठा और फ्रेश हुआ और अपने बेटी के कमरे में उसने सामने रही बुक को उठाया । उसमे देखा कि उसकी आँखों से आँशु निकलने लगे । वो बहुत ही पछता रहा था । उसे बहुत दुःख हो रहा था कि उसने अपनी बेटी को घर से निकल जाने के लिए कह रहा था । 

उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था । उसे अपने आप पर हार्ट फील हो रहा था ।

थोड़ी देर बार उसकी बेटी आती है अपने पापा को रोते हुए देख उसकी पास जाती है और उसे गले से लगा लेती है और रोने लगता है ।

वो लड़की के मार्कशीट में मेरिट में नंबर था । जो उसने अपने पापा को नहीं बताया था ।

दोस्तों ये RJ kartik story हमें से हमें सिख मिलती है कि हमें जिंदगी में बिना सोचे , बिना परखे किसी काम को नहीं करना चाहिए और नहीं बोलना चाहिए क्योंकि धनुष बाण से निकला हुआ तीर और मुँह से निकली बोली और बन्दुक कि गोली कभी वापस नहीं आता ।

जैसे कि इस RJ kartik story में हुआ जो लड़की के पिता जी बिना सोचे ही लड़की को घर से निकलजाने के लिए कह रहा था ।

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