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Transgender success story || केंद्रीय राष्ट्रीय सलाहकार कहानी 

 विद्या राजपूत को बचपन में काफी संघर्षो के बाद , बड़ी कठिनाई से , कई बार टूटने के बाद , लोगो के ताने सुनने के बाद एक सफलता को हासिल किया है जिसे लोग बचपन से लेकर आज तक इतनी संघर्ष से ट्रांस्जेंडरो के उत्थान के लिए अपने माँ तक खो दिया । ऐसे विद्या राजपूत को सलाम है । तो आइये जानते है इसकी सक्सेस स्टोरी को .

परिचय विद्या राजपूत की –

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के फर्रस गांव के रहे वाली है । परिवार एक गरीब परिवार है जहा माता मजदूरी का काम करती थी पिता जब आप छोटी थी तब स्वर्गवास हो गयी थी । 3 बड़े भाई 2 बहन और घर में सबसे छोटी थी । प्रारंभिक स्कूल की परीक्षा को गांव में ही रहकर 12 वि तक की परीक्षा दी । आगे की पढ़ाई ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन रायपुर से की ।

जन्म एक लड़के के शरीर में ली थी । बचपन काफी कठनाई से बीती है । घर में पारिवारिक स्थिति आहूत ही कमजोर थी दुसरो के खेतो में कम करती , भट्टे में कम करना , निदाई गुरै सभी कामो को माँ अकेली परिवार का भरण पोषण करती थी ।

बचपन के शुरुआती दिन 

कई इंटरव्यू में बताती है बचपन के दिनों में जब गांव में वे सभी काम जो एक लड़की करती थी वे सभी काम चाहे गुड्डा-गुड्डी की , खो खो , रस्से दौड़ वे सभी काम जो बचपन के दिन में एक छोटी लड़की खेल खेलती है । जब उम्र बढ़ने लगी और स्कूल जाने लगी दूसरी और तीसरी में थे तब शरीर में बदलाव होने लगे थे तब स्कूल में सभी बच्चे आपसे दूर बैठा करती थी । क्योकि आप एक लड़के के शारीर में जन्म ली थी ।

उस समय तो छोटी थी तो कुछ समझ में नहीं आती थी और खुद उस समय लोग देखकर हसते भी थे । लड़के और लड़की की स्कूल होने के कारन लड़को के साथ बाथरूम जाने में भी हिचकिचने लगी और लड़को के साथ नहीं जा पाती है । लड़कियों की तरह सरमाना और लचकपन को देखकर दूसरे लड़के भी चिढ़ाने लगते थे ।

 Transgender success story
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चौथी और पांचवी तक लड़के बहुत ही ज्यादा परेशान करने लगे , लड़की करके चिढ़ाते थे  जिससे बहुत ही जयदा परेशानी का सामना की है । जब छठवीं में पढ़ाई करने पहुंची थी तब लोगो , स्कूल के लड़के ये कहकर चिढ़ाते की तू नपुंसक है , किसी ने छक्का कहा तो किसी में मामू कहकर चिढ़ाने लगे थे ये सब 8 वी तक चलता रहा । ये  सभी के लोगो के चिढ़ाने से बहुत ही ज्यादा परेशान हो जाती थी और स्कूल जाने से बहुत ज्यादा डरने भी लगी थी और बहाना किसी न किसी तरह से बहाना बनाया करती थी ।

आप कई इंटरव्यू  में बताते है की घर में आर्थिक तंगी थी तो बहुत ज्यादा परेशानी का भी सामना की है । जब आप 9 से 12 वी तक की पढ़ाई में स्कूल में लड़के लोग बहुत परेशान करते थे । एक समय ऐसा भी था की लोगो की बातो से तानो से बचने के लिए किसी से बात नहीं करती थी और बंद कमरे में रहती थी । जब आके भैया लड़की के साथ खेलती देखती थी तो बहुत ही ज्यादा पीटते थे , मारते थे ।

घर में स्कूल नहीं जाने पर माँ गली देती थी । आप बताती है की घर में रहो तो घर में परेशानी , स्कूल में रहो तो स्कूल में परेशानी कुल मिलाकर बहुत ही ज्यादा परेशान हो जाती थी । उस समय एक घुटन से महशुस की थी ।

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आपने एक इंटरव्यू में बताया है की एक समय एक सर्मिदगी घटना सेक्सुल हैरेसमेंट की भी हुई थी उसे के बाद से 3 से चार महीनो तक स्कूल जाने से डरने लग गयी थी । इस घटना से बहुत ही ज्यादा परेशान होकर के दो बार आत्महत्या करने की कोशिश भी करती है और दोनों बार भगवान की कृपा से बच जाती है । इस घटना होने से पढ़ाई को ठीक तरीके नहीं कर पाती थी ।

लोग तरह से परेशान करते गए और परेशानी इतनी बड जाती है की पहले काजल लगाना , नेल पालिश लगाना , लोगो से मिलना , लड़कियों से बाते करना सही चीजों को बंद कर देती है और बहुत ही परेशानी से  घर में लड़को की तरह बनके रहती थी ।

(11 वी में एग्रीकल्चर )11 वी से 12 वी तक आते आपको पूरी बाते समझ में आने लग गयी थी और लड़की की तरह व्यहार करना , बाते करना , उठाना , बैठना , चलना , काम करने के तरीके ये सभी समझ में आ रही थी लेकिन किसी को ये बताने  , समझाने में बहुत ही ज्यादा कठिन महसूस होती  और बहुत ही कम लोग थे जो सांत्वना देते थे की चलो ठीक है , लेकिन बहुत ज्यादा लोग मजाक , चिढ़ाते और अपसब्दो का ज्यादा प्रयोग करते थे ।

कई इंटरव्यू में बताती थी जब अपने बड़े भाई के साथ दर्जी के पास कपडे सिलाने के लिए भी जाते थे तब भी दर्जी भी अपसब्दो को प्रयोग करते थे और आप इक घुटन सी महसूस करती थी और कही जाके मरने की सोचते थे लेकिन अपनी माँ की स्थिति को देखकर नहीं कर पति थी ।

आप अपनी माँ को मजदूरी करते देखती थी और मजदूरी को कैसे बंद करना है इसके लिए एक नयी साहस जुटाती थी और मन को सांत्वना देखकर के चुप घर में रह लेती है । इसके बाद 1 सालो तक ( धनोरा ) शिक्षा कर्मी की नौकरी भी लेकिन वंहा भी परेशानी हुई और दुबारा नियुक्ति नहीं होने के कारण जॉब छोड़ देती है ।

जॉब की शुरुआत/ स्ट्रगल की शुरुआत 

सन 2000 में बाद अपने गांव से रायपुर आ जाती है और यहाँ होटल में फ्रंट ऑफिस मैनेजर काम की 1000 रुपया में जॉब शुरू कर दी । और इस जब को 7 सालो तक की । इसके साथ ही प्राइवेट से कॉलेज स्नातक कला (art ), स्नातकोत्तर ( हिंदी साहित्य ) भी करने लगी थी । यहाँ भी लड़को की तरह एक्टिंग करके जॉब करती ।

रूम से जॉब और जॉब से रूम तक सिमित थी । इसके बाद आपको होटल के एक वेटर से अपने तरह से होने का महसूस करती और उसे बात करके अपने बातो को बताती है । वह आपको एक गार्डन में अपने तरह के सभी लोगो के होने की और आकर मिलने को कहते है । उसके बाद से आप भी उस गार्डन में जाती है और इतनी हिम्मत नहीं थी की उन लोगो के साथ बात संकु । अपने परिवार वालो के बारे सोचकर दरवाजे के बाहर ही देखकर चली जाती थी  । रोज वंहा आती देखती और चली जाती ।


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एक दिन मन बनाकर वहाँ चली गयी और पहली बार अपने जैसे लोग से बात की और इस दुनिया में अपने जैसे भी इस दुनिया में होने का अहसान मानती है ।  अपने जैसे लोगो के साथ ढूढ़ने में उस समय आपकी उम्र सायद 22-24 साल लग गयी थी ।

एक दिन वही एनजीओ वाले आये थे उनको देखकर काफी प्रेरित हुई और उसके बाद एक नए एनजीओ में ( समंता महिला मंडल में ) साथी  शिक्षक के रूप जॉब करने लगी । जहा पेमेंट 1700 प्रति माह से जो स्टॉर्ट की । पहले होटल के जॉब को छोड़ देती है । यही वह समय था जहा आप अपनी बात को लोगो तक पहुंच सकती थी  ।

एनजीओ में जॉब करती हुई लोगो को , दूसरे एनजीओ वोलो को , हॉस्पिटल में और अन्य जगहों में जाकर अपनी बातो को , विचारो को रखती थी जिससे अंदर से बहुत ही ज्यादा खुशी होने लगी जिससे लगती थी जो अंदर से दबी हुई बात है उसे बाहर निकल तो रही हु  और मन को हल्का महसूस होने लगी ।

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शिक्षा 

11 वी में एग्रीकल्चर ), कॉलेज स्नातक कला (art ), स्नातकोत्तर ( हिंदी साहित्य ) आईटीआई इलेक्ट्रिकल, pgdca , MSW , hotel manegament   एजुकेशन की

सफलता की शुरुआत 

इसके बाद एनजीओ में ही आउट रिच वर्कर  के रूप में काम करने लगी । इसके बाद 2009 में  एक ‘ मितवा ‘  ( ट्रांसडेंडर उत्थान ) नाम के समिति तैयार किया। । 2009 के बाद लड़कियों की तरह रहने लगी और 30 साल की उम्र तक ट्रांसफर्मेशन कैसे करना है  और इसकी प्रकिया क्या है ये सभी बाटे नहीं जानती थी  । इसके बाद से जिंन्दगी जीने की चाह और बढ़ने लगी थी लेकिन उस समय भी परिवार और आर्थिक परेशानी रूकावट बनने लगी उसे दूर थोड़े जॉब से काम करके होने लगी ।  और काम करने के बाद एक कांफिडेंस काम करते हुए बढ़ने  लगे थे जो मनोबल को बड़ा देती थी ।

इसके बाद छोटे छोटे काम करती थी पेड़ पौधे लगाने लगी और उस घर परिवार की दर से पेण्ट और सर्ट पहन कर काम करने लगी । इसके बाद से कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखि और सफलता हासिल करती गयी ।


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एक समय ऐसी बड़ी दुर्घटना हुई जब रायपुर में आते जाती थी तब लोग चिढ़ाते थे , तू मामू है , छक्का है  थे तो उस दिन पलटकर जवाब देने  से लोगो गेट को तोड़कर के घर में चढाई करते है इस घटना में आपकी माँ के बीच बचाव में आने से चोट लगने के बाद उस दिन से मानसिक बीमारी का शिकार हो गयी और बचे की तरह व्यव्हार करने लगी जो ये घटना आपके लिए सबसे दुखद रहा और 2 सालो तक इलाज करने कराने के बाद इस दुनिया से सिधार गयी । उस समय आप एनजीओ में जॉब ज्वाइन कर ली थी ।

एनजीओ बनाने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार को अवगत, मोर्चा कराने शुरू किये । 2014 से पहले 2011 में “जनजागृति” एनजीओ में एक रेसिडेंसियल थर्ड जेंडर ट्रेनिंग  की शुरुआत किया जिसमे छत्तीसगढ़ के 30 ट्रांसजेंडर उसमे ट्रेनिंग ली जिससे एक साहस और मोटिवेशन मिला । इसके बाद आम्बेडर जयंती के दिन ट्रैफिक पोलिश का बेल्ट बांधने की शुरुआत की । नवरात्री में नर्सो का भी सम्मान, सफाई कर्मियों का सम्मान किये । इस प्रकार से हर समारोह में भाग लेना शुरू की । इसके बाद से और मोटिवेशन खुलकर जीने, बाते करने की , अंदर से साहस उत्त्पन होने लगी थी ।

शुरुआत Transgender success story

इस सम्मान के बाद लोगो को और ज्यादा लोगो का साथ , सपोर्ट मिलने लगे । सरकार से बात करके-करते 2014 में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से इसके पहले आर्टिकल 39 , नालसा, UNDP इन लोगो के साथ मिलकर ” हिजड़ा जनसुनवाई “ की इस प्रकार से नेसनल प्लेट फॉर्म ( राष्ट्रीय मंच ) में पहुंचे । सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट  15 अप्रेल 2014 को आयी और ट्रांस्जेंडरो को हक़ की बात कही गयी ।

इसके पहले थर्ड जेंडर स्पोर्ट मीट 8 राज्य के लोग इसमें भाग लिया था और यह विश्व की पहली ट्रैंसजेंडर खेल था जो छत्तीसगढ़ में हुई । इस खेल के बाद छत्तीसगढ़ को इक नहीं पहचान मिली लोग छत्तीसगढ़ को ट्रांसजेंडर उत्थान के लिए जानने लगे  । इसके बाद और मोटीवेट और कॉन्फिडेंस बढ़ने के लगती है । इसके बाद बार्ड का गठन अक्टूबर 2014 में जिसमे ट्रांस्जेंडरो की पाठ्यक्रम को लागु करने हेतु हुआ ।


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इसके बाद स्कूल एजुकेशन में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 10 वी तक उसके कितबो में सब्जेक्ट को शामिल किये । कक्षा 8 वी और कक्षा 10 वी के सामाजिक विज्ञानं में ट्रांस्जेंडर का पाठ है । जो आज बच्चे पढ़ाई कर रही । जितने भी ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट है उस इंस्टिट्यूट में थर्ड जेंडर सब्जेक्ट को शामिल कराये । सिलेबस और ट्रेनिंग भी दिए जाने की भी शुरुआत आपके प्रयासों से संभव हुआ । जैसे की प्रशासन अकादमी , बीएड , कालेज , पुलिस अकादमी , पुलिस ट्रेनिंग स्कूल इन सारे जगहों पे ।

इसके सब कामो को कराने तक आप एक लड़के के रूप में काम करती रही और इसके बाद से छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से पांडुचेरी में लिंग ट्रांसफॉर्मेशन कराई और इसके बाद से इक लड़की के रूप में जिन्दी की शुरुआत की ।

इसके बाद से  छत्तीसगढ़ सरकार की हर डिपार्ट मेन्ट में आपकी मोर्चो और प्रयास से ट्रांसजेडर सीट देने का श्रेय आपको जाता है । ( ट्रांसजेंडर एजुकेशन पालिसी ) एजुकेशन विभाग में , ( ट्रांसजेंडर उद्योग पालिसी ) उद्योग विभाग में ,  (ट्रांसजेंडर स्पोर्ट पालिसी) स्पोर्ट विभाग में , चक्रधर समारोह में भी मंच में ट्रांसजेंडर सीट बैठने की सुविधा , कलेक्टर के निराश्रित निधि में ट्रांसजेंडर जो निराश्रित देने की भी सुविधा आल छत्तीसगढ़ में लागु करने में, ट्रांस्जेंडर उत्थान में बड़ी भूमिका रही है ।

और आप थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड( छत्तीसगढ़ सरकार) की सदस्य भी है । इसके बाद पहली बार छत्तीसगढ़ में मिस ट्रांसजेण्डर प्रतियोगिता भी छतीसगढ़ में किया आपके सफल प्रयासों से किया गया । इसके बाद से आप से आप केंद्रीय राष्ट्रीय सलाहकार भी बनी है और स्पोर्ट मिनिस्ट्री के काम करने के बाद से ट्रांसजेंडर को खेलो इंडिया में शामिल किया । कल्चर मिनिस्ट्री में काम की तो ( थर्डजेंडर के कलाकारों ) को प्रोमोट किया । इसके बाद मानव संसाधन में केंद्रीय विद्यालय ,CBSE में भी ट्रांसजेंडर( Transgender success story ) की भागीदारी में योगदान दिलाने में आपकी सबसे बड़ी सहयोग रही है ।

आवासीय पर्यावरण विभाग , नगरीय विभाग , गृह प्रशासन विभाग और रायपुर विकास प्राधिकरण इन तीनो विभागों में  मकानों और दुकान में ट्रांसजेंडर के लिए 2%-2% तक का आरक्षण दिलाई है ।

सेक्स रिसायमेंट सर्जरी भी आपके योगदाम से बना है जो विदेश में इस 15 लाख से 20 लाख में करते है , अन्य राज्य में 4 लाख से 5 लाख में करते उसे छत्तीसगढ़ में मात्र 10 रुपया में सर्जरी करने का भी श्रेय आपको ही जाता है ।  छतीशगढ एक ऐसा स्टेट है जो जहा ट्रांसजेंडर के उत्थान के लिए “रोल मॉडल” है ।

 मैं उन लोगो को जो इस पोस्ट को पढ़े है से भी निवेदन करना चाहूंगा की हमें भी ट्रांस्जेंडरो{ Transgender success story } का सम्मान करना चाहिए उसे समाज में जीने , घुलने , मिलने , उठने , बैठने , और समाज के साथ रहने का मौका जरूर देना चाहिए ।


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